<?xml version='1.0' encoding='UTF-8'?><?xml-stylesheet href="http://www.blogger.com/styles/atom.css" type="text/css"?><feed xmlns='http://www.w3.org/2005/Atom' xmlns:openSearch='http://a9.com/-/spec/opensearchrss/1.0/' xmlns:georss='http://www.georss.org/georss' xmlns:gd='http://schemas.google.com/g/2005' xmlns:thr='http://purl.org/syndication/thread/1.0'><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491</id><updated>2012-01-17T05:35:51.690-08:00</updated><category term='कविता'/><title type='text'>कतरन...</title><subtitle type='html'>वो खबरें..जो पास से होकर गुजर जाती है..वो खबरें जो शोर नहीं मचाती..वो खबरें जो खामोशी से आक्रोश की इबादत लिखती रहती हैं..ऐसी खबरों को समर्पित ब्लॉग..</subtitle><link rel='http://schemas.google.com/g/2005#feed' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/posts/default'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default?max-results=100'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/'/><link rel='hub' href='http://pubsubhubbub.appspot.com/'/><author><name>सुबोध</name><uri>http://www.blogger.com/profile/10810549312103326878</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='26' height='32' src='http://4.bp.blogspot.com/_QfFu6EsvNYQ/S2eCP5vzviI/AAAAAAAAAv0/zwc-53EXJKs/S220/subodh+blog.jpg'/></author><generator version='7.00' uri='http://www.blogger.com'>Blogger</generator><openSearch:totalResults>85</openSearch:totalResults><openSearch:startIndex>1</openSearch:startIndex><openSearch:itemsPerPage>100</openSearch:itemsPerPage><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-139227002397164179</id><published>2011-09-09T20:39:00.000-07:00</published><updated>2011-09-09T20:40:25.021-07:00</updated><title type='text'>रिश्तों की कहानी..</title><content type='html'>&lt;span class="Apple-style-span" style="font-family: 'lucida grande', tahoma, verdana, arial, sans-serif; font-size: 11px; line-height: 14px; background-color: rgb(255, 255, 255); "&gt;रिश्तों की प्यारी सी कहानी..&lt;br /&gt;कही अनकही..छुई अनछुई...&lt;br /&gt;बेहद खुबसुरत भगवान का तोहफा...&lt;br /&gt;हर रिश्ते की अपनी खुबसूरती लिए...&lt;br /&gt;एक दम आसमान में फैले एक इन्द्रधनुष की छठा लिए...&lt;br /&gt;प्यार, सम्मान, मजाक, सुख से सजे ये रिश्ते..&lt;br /&gt;और रिश्तों की प्यारी सी कहानी...&lt;/span&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-139227002397164179?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/139227002397164179/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=139227002397164179' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/139227002397164179'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/139227002397164179'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2011/09/blog-post.html' title='रिश्तों की कहानी..'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-1339810118845100482</id><published>2010-02-24T23:59:00.000-08:00</published><updated>2010-02-25T00:11:37.787-08:00</updated><title type='text'>होली के दौरान...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/S4YwoTXv3VI/AAAAAAAAARg/DZO_l7dDWQw/s1600-h/hin_holi_c-16.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5442090668676603218" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 267px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/S4YwoTXv3VI/AAAAAAAAARg/DZO_l7dDWQw/s400/hin_holi_c-16.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;होली के रंगों में केमिकल बहुत ज्यादा मिला होता है। यही नहीं, इनमें कपड़ों को रंगने वाले केमिकल यूज किए जाते हैं। ऐसे में आपकी स्किन को नुकसान पहुंच सकता है। स्किन होली के रंगों से डिस्कलरेशन यानी बद-रंग, कॉन्टैक्ट डर्मेटाइटिस, अब्रेशन यानी छिलन या खरोंच, खुजली, रूखापन जैसी प्रॉब्लम्स हो सकती हैं।&lt;/span&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;दरअसल होली के रंगों में केमिकल यूज किए जाते हैं। इससे खुजली या फुंसी हो सकती है। स्किन पर कलर लगने इसे उसमें रूखापन आ जाता है। होली के रंगों या गुलाल में कई तरह के कार्बनिक पदार्थ होते हैं, जैसे ऑक्साइड ग्लास पार्टिकल्स, अभ्रक चूर्ण वगैरह, यहां तक की एनीलिन भी मौजूद होते हैं, जो कपड़ों को रंगने में यूज किए जाते हैं। कॉपर सल्फेट जैसे हरे रंग में क्रोमियम और ब्रोसाइड होते हैं, जबकि काले रंग में ऑक्साइड होता है। चूंकि ये पदार्थ होली के रंगों से कच्चे रूप में मौजूद होते हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल स्किन के लिए ठीक नहीं है। टेट्राथिलीन, लीड, बेंजीन जैसे खुशबू बिखरने वाले पदार्थ के कारण स्किन ड्राई हो जाती है। हालांकि ये सभी प्रारंभिक स्तर के इरिटैंट हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;स्किन केयर&lt;/strong&gt; आप जब होली खेलने निकले तो अपनी पूरी बॉडी पर मॉइश्चराइजर या क्लींजिंग मिल्क लगा लें। इससे आपकी आपकी स्किन पर रंग नहीं चढ़ेगा या फिर वह धोने पर उतर जाएगा। कोशिश करें कि होली पर हर्बल कलर यूज करें। आप मोटे कपड़े पहने, जिससे स्किन पर कलर न लगे। नाखूनों पर नेल पेंट लगा लें। इससे नाखूनों पर रंग नहीं चढ़ेगा। हरे, पीले व नारंगी रंगों से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें मौजूद केमिकल्स से त्वचा को नुकसान पहुंचता है। अगर आने आने लगे तो कैलामाइन लोशन का प्रयोग करें। बालों व त्वचा को साबुन आदि से रगड़ना नहीं चाहिए। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;हेयर होली के रंगों में मिले केमिकल से बालों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। अगर होली के रंगों को देर तक बालों में लगा छोड़ दिया जाए, तो इससे बाल रूखे हो जाते हैं। हालांकि बालों की जड़ या सिर की स्किन को इससे कोई खास नुकसान नहीं पहुंचता है, मगर बालों का टूटना शुरू हो जाता है। रंगों में मौजूद रासायनिक पदार्थों व धूल वगैरह के कारण भी बालों में एलर्जी हो सकती है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;हेयर केयर&lt;/strong&gt; होली खेलने से एक दिन पहले आप अपने बालों की अच्छे से मसाज कर लें और बालों में तेल को लगा रहने दें। इससे आपको बालों पर कलर नहीं चढ़ेगा। आप जब होली खेलकर आए, तो तुरंत गुनगुने पानी से बाल धो लें और फिर बालों में तेल लगा लें। इससे आपके बालों को नुकसान नहीं होगा। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;आंख होली के दौरान आई एलर्जी, अस्थायी या स्थायी अंधापन, दृष्टि दोष, आंखों की रोशनी कम होना, कंजक्टिवाइटिस, कॉर्निया में जामुनी रंग और आंख में सूजन वगैरह हो सकती है। चूंकि आंखें बेहद ही नाजुक होती हैं, इसलिए होली पर इन पर चोट लगने की ज्यादा संभावना होती है। होली पर इस्तेमाल किए जाने वाले रंग आंखों को निम्न तरह से नुकसान पहुंचा सकते हैं। - गुलाल में मिला कांच का चूरा, अभ्रक चूर्ण, पत्थर का चूरा वगैरह से रेटिना, कॉर्निया और आंखों के अन्य संवेदनशील हिस्सों को नुकसान पहुंच सकता है। - होली के समय बलून से लगने वाली आम चोटें हैं, जो कभी गंभीर भी हो सकती हैं। आंखों की देखभाल केमिकल कलर का इस्तेमाल अपने चेहरे पर न करें। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;आंखों के आसपास आईज क्रीम लगा लें। इससे आपकी आंखों आसपास की स्किन व पलकों को नुकसान नहीं पहुंचेगा। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-1339810118845100482?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/1339810118845100482/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=1339810118845100482' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1339810118845100482'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1339810118845100482'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2010/02/blog-post.html' title='होली के दौरान...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/S4YwoTXv3VI/AAAAAAAAARg/DZO_l7dDWQw/s72-c/hin_holi_c-16.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7445411013755033125</id><published>2010-01-06T23:05:00.000-08:00</published><updated>2010-01-07T08:20:38.499-08:00</updated><title type='text'>मीडिया के यमराज ....</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_QfFu6EsvNYQ/S0Wduut1VqI/AAAAAAAAAu8/x6CvIi3PI90/s1600-h/YAMRAJ11[1].jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5423914752377444002" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 240px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_QfFu6EsvNYQ/S0Wduut1VqI/AAAAAAAAAu8/x6CvIi3PI90/s320/YAMRAJ11%5B1%5D.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;पत्रकारिता से जुड़ा हर दूसरा आदमी दबाव से परेशान है... ऊपर बैठा हर आदमी अपने नीचे वालों पर चढ़कर..उसे मसल कर आगे आना चाहता है...या फिर किसी को आगे बढ़ते हुए नहीं देख सकता है... पत्रकार जो कभी सबकी आवाज उठाने का दम रखते थे... आज खुद अपनी तबाही पर खामोश हैं... पत्रकारिता कर रहा लगभग हर आदमी किसी न किसी बीमारी का शिकार हो रहा है...कोई दिक्कत को समझना नहीं चाहता...आखिर ऐसा हो क्यों हो रहा है... पत्रकारिता प्रेशन कुकर क्यों बनती जा रही है...आखिर क्यों आप हम ये नहीं समझ रहे कि इस दौड़ का अंत कितना दर्दनाक है...कोई खुश नहीं है...खुद सोचिए बतौर पत्रकार आप कहां खड़े हैं... आखिर हम सब कर क्या कर रहे हैं... हम खुद टेंशन की उंगली पकड़कर खुद को दर्दनाक मौत की तरफ ढ़केल रहे हैं... अशोक उपाध्याय जी को याद करिए... उनकी मौत सामान्य मौत नहीं थी....उनकी मौत मर्डर थी... और उनको मौत के मुंह में ढकेलने वाले वही थे...जो रहनुमाओं का दंभ पाले मीडिया को मारने पर उतारु हैं...रोज रोज झूठ की कब्र खोदकर...पत्रकारिता को जिंदा दफन करने में जुटे हैं... अशोक जी मरे नहीं मारे गए... वो खामोशी से सबकुछ सही होने का इंतजार करते रहे... लेकिन उनकी खामोशी को कमजोरी समझकर पत्रकारिता के दलाल अपना उल्लू सीधा करते रहे... सवाल ये है कि जिस पत्रकारिता ने देश की आज़ादी के लिए आवाज़ उठाई... तो अपने लिए बोलने की ताकत क्यो नहीं है... हम सब चुप क्यों है...क्यों हमसब मैनजमेंट के हाथ की कठपुतली बन कर रह गए है... क्यों हम आपने लिए आवाज नहीं उठा रहे है...आज अशोक जी गए है..कल हम आप में से कोई भी जा सकता है...इससे पहले कि जिंदगी मौत से बदतर बन जाए...क्यों ना जिंदगी को गले लगा लिया जाए...और अपने दिल से बोला जाए आल इज वेल...क्योकि टेंशन हमें सिर्फ जिंदगी से बदतर जिदंगी देगी... लेकिन जिन्दगी आपको वो सब देगी..जो आप चाहते है...जो आपका सपना है...तो अब देर मत करिए...आगे बढ़िए और जिंदगी के एक भी दिन को जाया न होने दीजिए...ये मेरी हर मीडिया से जुड़े ... मेरे जैसों से विनती है...फिलहाल कहने को बहुत कुछ है&lt;/em&gt;....&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;(शालिनी राय) ....&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;एक कहानी और है गौर से पढ़िएगा...ये गुस्सा अशोक जी की मौत पर था... मेल काफी दिन से मेरे पास पड़ी थी... पब्लिश कर रही हूं...इस घटना के पात्र ना तो काल्पनिक हैं...और ना ही घटना... गौर से पढ़िएगा तो पात्रों के चेहरे आपके सामने होंगे&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;...&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;एक चिरौंजी लाल गुप्ता जी हैं... साम दाम दंड भेद के साथ साथ ईमेल से भी मीडिया में रहने के गुर जानते हैं... खुद को मशहूर मानते हैं और उनके अलावा सभी उन्हें कुख्यात... ह्यूमन बम मानते हैं... लेकिन ये ह्यूमन बम राजनीति की आदत में अशोक जी को न शामिल करे तो ये उनके स्वास्थ्य के लिए बेहतर होगा... कमीनपने की हद तक गिरने वाला ये शख्स (ये खुद इन्होंने हस्ताक्षर करके माना है) अशोक जी के नाम पर खुद को बड़ा साबित करने के लिए इतना बेचैन है कि इसने एक फिक्शन लिख दिया औऱ अपने शब्द अशोक जी के नाम से प्रकाशित करवा दिए हैं... सुनो मिस्टर चिरौंजी लाल... अशोक जी ऐसा कह ही नहीं सकते कि काम करने का मन होता है... ये मैं नहीं अपने अलावा दुनिया में किसी से भी पूछ लीजिए... और जो तथाकथित उनकी भाषा आपने लिखी है न उससे बाज़ आइए वरना पिटेंगे... आप अशोक जी को नहीं जानते थे... सिर्फ एक दफ्तर में काम करने से किसी को जानने का दावा मत कीजिए... मैं तुम्हारे दफ्तर में काम नहीं करता हूं लेकिन तुम्हें जानता हूं... तो अशोक जी के लिए ऐसी बात लिखना पाप नहीं गुनाह है... क्योंकि चिरौंजी लाल तुम पाप पुण्य से आगे निकल चुके हो... सुनो चिरौंजी लाल... अशोक जी नाइट शिफ्ट से खुश नहीं परेशान थे... अगर उन्होंने तुमसे ये बात नहीं कही तो सिर्फ इस लिए क्योंकि तुम इसमें भी कोई राजनैतिक एंगल ढूंढ कर उन्हें परेशान करते... औऱ सुनलो चिरौंजी वो कभी किसी से (और खास कर तुम जैसे कमीने आदमी से) ये नहीं कह सकते कि आप एंकरिंग करदो मज़ा आ जाएगा क्योंकि तुम्हारी एंकरिंग से कभी किसी को कहीं भी मज़ा नहीं आता... चाहे अपने डेस्क में पूछ लो... पीसीआर में... एमसीआर में... या एक-आधे दर्शक से... और वो तुम्हें फोन करके ये कहेंगे कि सारे ग्राफिक्स लोड करा दिए हैं... दुनिया का कोई आदमी ये कहदे की ये अशोक जी की भाषा है तो सवा रुपय हार जाउंगा...(क्योंकि तुम्हारी औकात इससे ज़्यादा नहीं है)... तुमने बहुत कुछ ऐसा लिखा है जिसके बाद तुम्हें मारने औऱ सिर्फ मारते रहने का मन हो रहा है... लेकिन बात अशोक जी की है तो उनके शब्दों में कह रहा हूं... " जाने दे न यार... अपन को काम से मतलब है...टेंशन मत ले यार..." उनसे उम्र... पद और गुणों में बहुत छोटा हूं... तो उनके इस शब्द यार में छोटे भाई का प्यार झलका... औऱ यही प्यार है जिसकी वजह से सिर्फ तुम्हें मारते रहने का मन कर रहा है....(ईमेल)&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7445411013755033125?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7445411013755033125/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7445411013755033125' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7445411013755033125'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7445411013755033125'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2010/01/blog-post_06.html' title='मीडिया के यमराज ....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_QfFu6EsvNYQ/S0Wduut1VqI/AAAAAAAAAu8/x6CvIi3PI90/s72-c/YAMRAJ11%5B1%5D.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8419008819170601772</id><published>2010-01-04T01:11:00.000-08:00</published><updated>2010-01-04T01:15:18.507-08:00</updated><title type='text'>कोई पत्थर आसमान की तरफ जाते हुए देखा...</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/S0Gxiiq1BCI/AAAAAAAAAPc/mXNaOuYVbZw/s1600-h/girl-sky.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5422810633310897186" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 385px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/S0Gxiiq1BCI/AAAAAAAAAPc/mXNaOuYVbZw/s400/girl-sky.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कहते तो आपने बहुत लोगो को सुना होगा..एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो...लेकिन क्या आपने वाकई ऐसा कोई पत्थर आसमांन की तरफ जाते हुए देखा...जी हां सुनने में आपको थोड़ा अजीब लग रहा होगा... लेकिन ऐसा वाकई हुआ है...अपने काम से देश ही नहीं विदेश में भी अपनी कार्यकुशलता का परचम लहरा चुकां ये ग्रुप तो कुछ ऐसा ही आज चमक रहा है... र्ब्रिटेन के प्रिंस चार्ल्स तक को प्रभावित करने वाले मुंबई के डब्बेवाले इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड में महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करने वाले हैं।&lt;/span&gt; लंदन के प्रिंस चार्ल्स ने मुंबई यात्रा के दौरान उनसे भेंट की थी। प्रिंस ने बाद में उन्हें अपनी शादी में भी बुलाया था। इतना ही नहीं इन डब्बेवालों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रबंधन स्कूलों ने अपने छात्रों को व्याख्यान देने के लिए भी आमंत्रित किया था।&lt;br /&gt;'गणतंत्र दिवस की परेड में ये मुंबई की संस्कृति का प्रतिनिधित्व करेंगे। परेड के लिए लगभग 15 डब्बेवालों का चयन किया गया है, जिन्हें संगीत और नृत्य का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसका वे परेड के दौरान प्रदर्शन करेंगे।'&lt;br /&gt;अपने सफल व्यवसाय के दौरान कोडिंग सिस्टम का उपयोग करने वाले डब्बेवाले मुंबई के लगभग दो लाख कामकाजी लोगों और स्कूली बच्चों को प्रति दिन टिफिन पहुंचाते हैं। नूतन मुंबई टिफिनबॉक्स सप्लायर्स के अध्यक्ष रघुनाथ मेडगे ने कहा, 'यह किसी सपने के सच होने जैसा है&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8419008819170601772?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8419008819170601772/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8419008819170601772' title='7 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8419008819170601772'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8419008819170601772'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2010/01/blog-post.html' title='कोई पत्थर आसमान की तरफ जाते हुए देखा...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/S0Gxiiq1BCI/AAAAAAAAAPc/mXNaOuYVbZw/s72-c/girl-sky.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>7</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7345666335515981125</id><published>2009-12-28T21:05:00.000-08:00</published><updated>2009-12-28T21:46:18.164-08:00</updated><title type='text'>नए साल में...ऐ जिंदगी गले लगा ले..</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzmW3uvatWI/AAAAAAAAAPU/B14G03N7VE8/s1600-h/Family+Pics-collage.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5420529510700987746" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 250px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzmW3uvatWI/AAAAAAAAAPU/B14G03N7VE8/s400/Family+Pics-collage.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;ऑफिस का कॉम्पिटिशन, सुबह की जॉगिंग, थिएटर में पॉपकॉर्न टटोलती उंगलियां या फिर सोने के पहले सोचने जैसा कुछ, यही सब मिलकर बनाता है जिंदगी को। हमें इस जिंदगी से तमाम शिकायतें हैं, मगर उन शिकायतों की पूंछ में लिपटी आती हैं तमाम उम्मीदें और उन्हें पूरा करने के लिए जोश।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;हमारे मकसद में एक तपिश है, जो मुश्किलों के पहाड़ को धीरे-धीरे ही सही, पिघलाने का माद्दा रखती है, बशर्ते हम ठंडे न पड़ जाएं। इसलिए जिस कोने में कभी आपकी सेहत, तो कभी आपकी जेब को बचाए रखने और बेहतर करने के नुस्खे सुझाए जाते हैं, उस पर हमने इस बार जिंदगी की हरारत से जुडे़ कुछ ख्यालों को जगह दी है। वजह सिर्फ इतनी कि जिंदगी को बांहों में भींचने के लिए हमें भी तो कुछ करना होगा। तो नए साल से पहले जिंदगी को नई नजर से निहारने की कोशिश कर रहे हैं सौरभ द्विवेदी :&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;खिल-खिल-खिल कर हंस दें&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;एक ही स्कूल, कॉलेज और दफ्तर में तमाम ऐसी शक्लें हैं, तमाम ऐसी आवाजें हैं, जो कभी हमें पसंद थीं। फिर एक दोपहर या शाम किसी बहस ने जंबो साइज हासिल कर लिया और हमारी मुस्कानों के बीच में इगो का सोख्ता आ गया, जिसने रिश्तों की सारी नमी को सोख लिया। कोई दोस्त, कोई कलीग या फिर कोई रिश्तेदार, जिसके साथ आपने कभी न कभी कुछ अच्छा वक्त जरूर बिताया है, अब उससे बात करने का, उसे देखने का दिल भी नहीं करता। तो कोशिश करें कि अच्छी यादों को बुरी यादों के ऊपर जीत हासिल हो। हम यह नहीं कहते कि ऐसी हर गलतफहमी या मनमुटाव को खत्म कर धर्मात्मा बन जाएं, मगर हां चुप्पी के कुछ सन्नाटों को एक हंसी के कहकहे के साथ खत्म किया जा सकता है। क्या पता आपकी हंसी फिर से नमी पैदा कर दे? और हां इन सबसे दूर हंसी की डेली डोज भी जरूरी है। आपसे किसी ने कभी तो कहा होगा, वेन यू स्माइल, यू डू वेल। सो डू वेल इन लाइफ।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;हरी-भरी दुनिया पर टिकती हैं आंखें&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;ऑफिस है, काम है, घर की जिम्मेदारियां हैं, बीवी है, बच्चे हैं, एक फिक्स्ड रुटीन है। दोस्त हैं, दुश्मन हैं, सब कुछ है, मगर फिर भी कुछ है जो अधूरा-सा लगता है। शायद हमारे आसपास बदलती दुनिया के साथ हमारा रिश्ता बड़ा कामकाजी-सा हो गया है। तो फिर हम एक नए कुछ-कुछ बचपने-से-भरे एक्सपेरिमेंट पर हाथ आजमा सकते हैं। एक नन्हा-सा गमला, जिसमें हम खुद से इंतजाम कर भरेंगे, मिट्टी। मिट्टी भरते समय एक लंबी सांस ताकि नाक जो गीली मिट्टी की खुशबू भूल चुकी है, ताजादम हो जाए। इस सबके बाद अपनी पसंद का कोई एक पौधा। ये तुलसी भी हो सकता है और गुलाब भी। उस पौधे या कलम को गमले में रोप दें। थोड़ा-सा पानी, थोड़ी-सी धूप, इसका रखें ध्यान। और हां कुछ ही दिनों बाद वह पौधा, जो आपकी स्टडी टेबल वाली खिड़की या रोशनदान के नीचे वाली जगह पर सुस्ता रहा है, आपका ध्यान खींचने लगेगा। उसका बढ़ना, उसके जिस्म पर नई-नवेली पत्तियों का आना, उसकी तली यानी मिट्टी में भुरभुरापन पैदा होना, सब कुछ आपको अलहदा लगेगा। दरअसल, मन किसी को हमारे प्यार की हरारत पा बढ़ते देख खुश हो जाता है। तो जनाब देर किस बात की, एक गमला तलाशना शुरू करिए और हां याद रखिए, हमारे अपने भी ऐसी ही हरारत की उम्मीद रखते हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कह दूं तुम्हें&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;ऑफिस में बॉस की नई टाई नोटिस करते हैं, मगर बीवी ने कान के बुंदे कब बदले, यह याद नहीं। स्टेशनरी खत्म हो गई, यह याद है, मगर बेटी के कलर ब्रश लाना रोज भूल जाते हैं। आपकी डेस्क कुछ ज्यादा साफ है, होटेल में वेटर ने वाकई अच्छी-सी मुस्कान के साथ सर्व किया या फिर उम्मीद के उलट ब्लूलाइन के कंडक्टर ने या फिर ऑटो वाले ने मुस्कराकर आपको चौंका दिया, हर बार जरूरत होती है झिझक या सुस्ती को कंधों से झटकर थैंक्यू बोलने की, कॉम्प्लिमेंट की खुराक देने की। हममें से हर कोई बदलाव को नोटिस करता है, अच्छी चीजों को अपने-अपने तईं याद रखता है, मगर फिर हम उन्हें बोलने से मुकर जाते हैं। लगता है क्या सोचेगा सामने वाला इस तरह से खुद को, खुद की चीजों को नोटिस किया जाते देखकर। सोचेगा, जरूर सोचेगा, मगर यकीन मानिए, सच्चे दिल से की गई सच्ची तारीफ उसे कुछ अच्छा ही सोचने पर मजबूर करेगी। तो फिर कह दीजिए दिल की बात, अपनों से। कुछ अपने ही अंदाज में। यह अंदाज मिसिंग यू का एसएमएस भी हो सकता है या फिर किसी पुराने दोस्त को फोन कॉल या ईमेल। प्यार भरी थपकी या फिर आंखों में ढेर सारी मीठी शरारत घोलकर बोला गया थैंक्यू भी जादू कर सकता है। तो नए साल को एक्सप्रेशन का साल बनाइए और कह ही दीजिए।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बोल के लब आजाद हैं तेरे&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;सड़क में गड्ढे क्यों हैं, ऑफिस में लोग दूसरों की सुविधा का ध्यान रखे बिना घंटों गॉसिप क्यों करते हैं, एक सुबह अगर हम खुद को आईने में देखें और बूढ़ा पाएं, तो ऐसे तमाम सवाल या ख्याल हमें घेरे रहते हैं और उनके बारे में सोचकर हम कसमसाते भी खूब हैं, मगर ऐसी कसमसाहट का क्या फायदा। वो कहते हैं न कि जिस गुस्से से कोई गुल न खिले, उसके होने का क्या फायदा। तो अपने आसपास की बातों के लिए, अपनी यादों के लिए या किसी और की कहानी को दुनिया को सुनाने के लिए ही सही बोलिए और अपने अंदर की आवाज को बाहर आने दीजिए। इंटरनेट की दुनिया है, चंद मिनटों की मेहनत से अपना ब्लॉग तैयार किया जा सकता है। किसी वेब पोर्टल के लिए कंटेंट तैयार किया जा सकता है। चंद हजार में आपकी अपनी वेबसाइट। हर मीडिया एजेंसी को तलाश है ऐसे ही लोगों की जो कुछ बोलना चाहते हैं, क्योंकि जमाना सिटिजन जर्नलिस्ट का है। मोबाइल पर बोलते हैं, दिन में आधा घंटे एसएमएस टाइप करते हैं।&lt;br /&gt;तो ऐसा नहीं है कि इंडिया बोलता नहीं है, मगर इस साल ये बोल औरों तक मुकम्मल ढंग से पहुंचें, इसका इंतजाम करें। आप रेजिडेंट वेलफेयर असोसिएशन में बोलें, किटी पार्टी के बीच में बोलें, पैरंट्स मीटिंग में बोलें, मगर जब भी बोलें, दिल से बोलें। जिन चीजों को आपने महसूस किया है, उन्हें बोलें। और हां, अगर सबके साथ अपने ख्याल साझा करने से परहेज है, तो एक दिन स्टेशनरी की दुकान के सामने रुक जाएं और अपने लिए चमड़े के जिल्द या चिड़िया के कवर वाली डायरी या कॉपी खरीद लें और इसी पर लिखें। पहला हर्फ लिखने से पहले 15 मिनट से कम नहीं लगेंगे, मगर एक बार सिलसिला निकल पड़ा तो फिर थमाए नहीं थमेगा। तो फिर बोल क्योंकि जबां अब तक तेरी है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;वॉक पर चलें क्या&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;सर्दियों की शाम और गर्मियों की सुबह नेचर ने उन लोगों के लिए बुनी है, जो सपनों को चुनना जानते हैं। अच्छा गोल-गोल बात नहीं, पर बताइए आखिरी बार अपनों के साथ या खुद अपने साथ वॉक पर कब गए थे? यूं ही शरीर को कुछ सुस्त-सा छोड़कर, कदमों को खुद अपनी थाप पर डोलते देखने का मन नहीं करता? एक जर्मन थिंकर था नीत्शे। कहता था कि दुनिया के सारे महान ख्याल टहलते हुए ही आते हैं। तो फिर टहलिए। कोई वक्त तय नहीं, कोई रूट तय नहीं। बस यूं ही खाना खाने के बाद या शाम की चाय से पहले टहला जाए। आसपास की चीजों को कुछ ठहरकर देखा जाए।&lt;br /&gt;हो सकता है कि एक दुनिया समानांतर बसी हो, जिसे टाइम से ऑफिस पहुंचने या फिर जल्दी घर पहुंचने के फेर में कभी देखा ही न हो। खैर दुनिया की छोड़िए और अपने भीतर की दुनिया का ही हाल जान लीजिए। पार्क में या फिर कम ट्रैफिक वाली सड़क के फुटपाथ पर या फिर दिन के शोर से दूर किसी चुप से मैदान में टहलिए और दिमाग को डोलने दीजिए, जहां दिल करे। यकीन मानिए कुछ बेहतर महसूस करेंगे। तो फिर सोचना कैसा, वॉक पर चलते हैं। धुंध के बीच अपने ख्यालों के साथ पार्टनरशिप करते हैं और फिर घर में घुसने से पहले सिर्फ अपने कानों को सुनाते हुए कहते हैं - हेलो जिंदगी।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;छोटी चीजों का सुख&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;कार कब ले पाऊंगा, अपने घर का क्या होगा, मशीन है मगर पूरी तरह से ऑटोमैटिक नहीं। बीवी से बनती नहीं, बॉस समझता नहीं और बच्चे, अजी कुछ पूछिए मत, कम्बख्त पढ़ते ही नहीं। तो बड़ी शिकायतें हैं हमें जिंदगी से, अपने आसपास से और उनसे पार पाने के लिए हम किसी बड़े सुख का इंतजार करते हैं। कुछ भारी-भरकम सा, बहुत अच्छा-सा होगा। सुबहों का रंग और शामों की खुशबू बदल जाएगी। मगर इस बड़ी खुशी के इंतजार में हम छोटी खुशियों को फुटपाथ किनारे ठिठुरता छोड़ देते हैं, घर लाने के बजाय। संडे सुबह की खूब अदरक वाली कड़क चाय पीते हुए बतियाना या फिर रात गए रजाई के ऊपर ही मूंगफली से मुठभेड़ करना। सब भूल गए, वक्त की आपाधापी में। सच बताएं, भूले नहीं, मगर अब महसूस नहीं करते। दाल अब भी खाते हैं, मगर उसमें ताजा धनिया पत्ती पड़ी है या फिर लहसुन, पता ही नहीं चलता। मां या पत्नी या बेटी ने नई ड्रेस पहनी और बहुत प्यारी लग रही है, मगर ठहरकर उनको देखने का सुख नहीं लपकते। पसंदीदा गाने के बोल खोजने की कौन कहे, अब तो गाने भी पूरा वक्त देकर नहीं सुने जाते। ड्राइव करते या काम करते हुए बैकग्राउंड के शोर की तरह गाने सुने जाते हैं। किताबें सिर्फ बीते बरसों या अधूरे सिलेबस की याद दिलाती हैं। मगर इन्हीं में छोटे-छोटे सुख छिपे हैं। इन्हीं से जुड़ी चीजों को करने में कभी बहुत लुत्फ आता था। हिम्मत न हारिए, बिसारिए न राम, सो अपने राम को आज से ही काम पर लगा दीजिए। कभी स्टोररूम से पुरानी मैगजीन निकालकर पलटिए या फिर एक दिन कॉपी का पिछला पन्ना फाड़कर किसी दूर के रिश्ते की बुआ या मास्टर बन चुके यार को खत लिख डालिए। हो सकता है कि दसियों बरस पहले बनाई गई अड्रेस बुक ढूंढने में वक्त लगे, मगर इस तरह से वक्त खर्चने का अलग मजा है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;इन छोटी चीजों के सुख में आदतों को सहलाना शामिल है तो सभ्यता को ठेंगा दिखाते हुए हाथ से चावल खाना भी। बस ऐसा कुछ जो अच्छा लगे, जिंदगी के पूरेपन का एहसास कराए।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;खुद की मुहब्बत में पड़ गए&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;और अब इस बार की आखिरी बात। हमें सब प्यार करें, इससे पहले जरूरी है कि खुद हम खुद से प्यार करें। और खुद से प्यार करना उतना ही मुश्किल है, जितना बीवी को रिझाना या गर्लफ्रेंड से पहली बार दिल की बात कहना। खुद से प्यार तभी कर पाएंगे, जब खुद के सपनों के साथ ईमानदारी से पेश आएंगे। अपनी क्षमताओं के साथ इंसाफ करेंगे और अपने लिए सबसे ज्यादा सख्त बनेंगे। मगर जनाब सवाल सिर्फ सख्ती का नहीं है। खुद से प्यार करने के लिए खुद को छूना, महसूस करना और देखना भी जरूरी है। कभी सुबह ब्रश करते या शाम को कंघी करते हुए अचानक शीशे पर नजर ठहर जाती है और हम खुद की शक्ल को एक अलग ही ढंग से देखने लगते हैं। यह मैं हूं, ऐसा दिखता हूं, मेरी आवाज ऐसी है और दुनिया मुझे और मेरे काम को इस नाम के साथ जोड़ती है। या फिर ऐसा ही कोई पहली नजर में अजीब-सा लगता ख्याल। तो फिर जल्दी से शीशे के सामने से हटने के बजाय खुद को नजर भरकर देख लें। अपनी जरूरतों का, अपनी हेल्थ का और अपने स्वादों का ख्याल रखें, मगर ऐसे कि खुद से &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;प्यार हो जाए, खुद पर दुलार बढ़ जाए।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;नए साल में क्या कर सकते हैं, यह तो आप ही बेहतर जानते हैं। चलते-चलते सिर्फ इतना ही कि जेनरेशन एक्स, वाई, जेड के लोग अपनों से छोटों और बड़ों की बातों को हमेशा खारिज करने के बजाय समझने की कोशिश जरूर करें। और हां, नए दौर के लोग खासतौर पर अपने विचारों को कुछ वक्त के लिए ही सही, साइड पॉकेट में रखकर बुजुर्गों की सुन लें, क्योंकि जो उनके पास है वह कहीं नहीं। किसी कवि की इन पंक्तियों के साथ आप सबको हैपी जिंदगी का नया साल मुबारक हो।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;संभावनाओं से लबालब भरा हुआ ये साल यदि बस में होता मेरे तो बांध देता इसे मां के पल्लू से और फिर रोज मांगते उससे एक खनकता हुआ दिन&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7345666335515981125?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7345666335515981125/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7345666335515981125' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7345666335515981125'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7345666335515981125'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_28.html' title='नए साल में...ऐ जिंदगी गले लगा ले..'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzmW3uvatWI/AAAAAAAAAPU/B14G03N7VE8/s72-c/Family+Pics-collage.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7122297063135581848</id><published>2009-12-24T18:36:00.000-08:00</published><updated>2009-12-24T18:54:13.256-08:00</updated><title type='text'>टायर की एबीसी...</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzQmWqqDJ5I/AAAAAAAAAPM/bZ9f8k7iv_s/s1600-h/thumb.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5418998422483183506" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 200px; CURSOR: hand; HEIGHT: 169px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzQmWqqDJ5I/AAAAAAAAAPM/bZ9f8k7iv_s/s400/thumb.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;आप अपनी गाड़ी की सही वक्त पर सर्विसिंग कराते हैं। हर संडे उसकी धुलाई करते, चमकाते हैं। लेकिन क्या आप अ पनी कार के टायरों का भी उतना ही ध्यान रखते हैं? इस हफ्ते ऑटो गाइड में टायर की एबीसी समझा रहे हैं &lt;span style="color:#000000;"&gt;शिवेंद्र सिंह चौहान&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;इंजन के बाद टायरों को कार का सबसे अहम हिस्सा माना जाए तो गलत नहीं होगा क्योंकि सड़क और गाड़ी के बीच का रिश्ता टायरों पर ही निर्भर होता है। कार का माइलेज, हैंडलिंग, बैलेंस और कंट्रोल जैसी कई चीजें काफी हद तक टायरों पर निर्भर होती हैं। इसलिए यह जरूरी है कि आप अपनी कार के लिए सही टायरों का ही चुनाव करें।&lt;br /&gt;टायर की कुंडली टायर की साइडवॉल पर एक कोड लिखा होता है। टायर के बारे में सारी जानकारी इसी कोड में होती है। &lt;span style="color:#330000;"&gt;&lt;strong&gt;मसलन, टायर पर लिखा है P205/65 R 16 95 S तो इसमें P का मतलब है पैसेंजर कार टायर। 205 टायर की चौड़ाई (मिमी में), 65 इसका आस्पेक्ट रेश्यो यानी टायर की चौड़ाई और ऊंचाई का अनुपात। R यानी रेडियल और 16 रिम का डायमीटर यानी व्यास बताता है। यहां 95 लोड इंडेक्स है, जो बताता है कि टायर अधिकतम कितना वजन उठा सकता है। लोड इंडेक्स की स्केल देखने से पता चलता है कि 96 रेटिंग का टायर 690 किलो वजन के लिए बना है। अंत में S यानी टायर की स्पीड रेटिंग। हर टायर के लिए स्पीड की मैक्सिमम लिमिट होती है। इसके लिए A1 से लेकर Y तक रेटिंग दी जाती है। A1 रेटिंग वाले टायर 5 किमी प्रति घंटा और Y रेटिंग वाले टायर 300 किमी प्रति घंटा की अधिकतम रफ्तार पर चल सकते हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; इस रफ्तार से ज्यादा तेज चलाने पर टायर खराब हो सकता है।&lt;br /&gt;किस्म-किस्म के टायर आमतौर पर टायर दो तरह के होते हैं - ट्यूब टायर और ट्यूबलेस टायर। ज्यादातर छोटी गाडि़यों में कार कंपनियां ट्यूब टायर लगाकर देती हैं। प्रीमियम कारों और छोटी कारों के टॉप-एंड मॉडल्स में ट्यूबलेस टायर ज्यादा दिखते हैं। ट्यूब टायर आमतौर पर ट्यूबलेस टायरों से कम कीमत के होते हैं लेकिन ट्यूब और टायर के बीच होने वाले फ्रिक्शन की वजह से ये टायर जल्दी गर्म होते हैं और इसीलिए पंक्चर भी जल्दी होते हैं। इनके मुकाबले ट्यूबलेस टायर के कई फायदे होते हैं। मसलन, ट्यूबलेस टायर से सड़क पर बेहतर ग्रिप और कंट्रोल मिलता है और खुदा-न-खास्ता टायर पंक्चर हो जाए तो इसमें से हवा धीरे-धीरे निकलती है। आम धारणा है कि ट्यूबलेस टायर्स अलॉय वील्स पर ही लगाने चाहिए लेकिन यह सही नहीं है। स्टील रिम पर भी ट्यूबलेस टायर्स अच्छी परफॉमेंर्स देते हैं। कीमत के लिहाज से ट््यूबलेस टायर ट्यूब टायर से 300-400 रुपये ही महंगा है।&lt;br /&gt;टायर कब बदलें ज्यादातर टायर बनाने वाली कंपनियां 40 हजार किलोमीटर चलने के बाद टायर बदलने की सलाह देती हैं। लेकिन टायर अच्छी हालत में हैं तो आप इन्हें 50 हजार किलोमीटर तक आराम से चला सकते हैं। इससे ज्यादा दूरी पर पुराने टायर से काम चलाना सेफ्टी के लिहाज से सही नहीं है। नियमों के मुताबिक, ट्रेड (टायर पर बने खांचे) की गहराई 1/6 मिमी रह जाए तो टायर बदल दिया जाना चाहिए। जिन लोगों की गाडि़यां काफी कम चलती हैं, उन्हें भी पांच साल के बाद हर साल टायरों का चेकअप कराना चाहिए। 10 साल से पुराने टायर इस्तेमाल नहीं करने चाहिए, चाहे वे जितना भी कम चले हों।&lt;br /&gt;- हर टायर की अपनी उम्र होती है और सेफ्टी के लिहाज से यह जरूरी है कि उसे सही समय पर बदल दिया जाए। टायर कट या फट जाए, किसी एक जगह पर ज्यादा घिस जाए, रिपेयर न हो सकने लायक पंक्चर हो जाए या फिर जल्दी-जल्दी पंक्चर होने लगे, तो उसे बदल देना चाहिए।&lt;br /&gt;टायर की देखरेख महीने में एक बार टायर प्रेशर जरूर चेक कराएं। टायरों में हवा उतनी ही रखें जितनी कार कंपनी ने रेकमेंड की हो। ज्यादा या कम हवा भराने से टायर जल्दी घिसेंगे। कंपनियां यह भी बताती हैं कि कम लोड और फुल लोड पर टायर प्रेशर कितना होना चाहिए। यह भी ध्यान रखें कि स्पेयर टायर में भी एयर प्रेशर हमेशा सही हो। हर 5000 किलोमीटर पर वील रोटेशन और अलाइनमेंट करा लने से टायर की लाइफ बढ़ जाएगी। टायरों के ट्रेड में फंसे कंकड़-पत्थर, कील-कांटे भी समय-समय पर निकालें। पेट्रोलियम बेस्ड डिटरजेंट या केमिकल क्लीनर से टायरों की सफाई न करें।&lt;br /&gt;अपसाइजिंग कई बार सड़कों पर ऐसी गाड़ियां नजर आती हैं, जिनमें काफी चौड़े टायर लगे होते हैं। चौड़े और मोटे टायर लगाने से गाड़ी का लुक काफी स्पोटीर् हो जाता है और सड़क पर ग्रिप बेहतर हो जाती है, लेकिन इससे गाड़ी के माइलेज पर असर पड़ता है। ज्यादातर कार कंपनियां अपसाइजिंग की सलाह नहीं देतीं। उनका तर्क यह होता है कि गाड़ी में ऑरिजिनली उसी साइज के टायर लगाए जाते हैं जो उसके लिए परफेक्ट हों। इसलिए अपसाइजिंग से पहले एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें। ज्यादातर टायर कंपनियों की वेबसाइट पर आपको अपसाइजिंग गाइड मिल जाएगी।&lt;br /&gt;टायर कैसे खरीदें भारत में ज्यादातर कारों के टायर (लग्जरी और एसयूवी कैटिगरी को छोड़कर) की कीमत 1500 रुपये से 4000 रुपये के बीच है। टायरों के दाम सीजन के हिसाब से घटते-बढ़ते रहते हैं। टायरों की कीमत में मोलभाव की काफी गुंजाइश होती है, इसलिए माकेर्ट का सवेर् करें और अलग-अलग कंपनियों के टायर देखें, फिर अपनी जरूरत के हिसाब से टायर चुनें। टायर हमेशा ऑथराइज्ड डीलर से ही खरीदें और पक्का बिल जरूर लें। इससे टायर में दिक्कत आने पर उसे बदलने में सहूलियत रहेगी। टायर खरीदते समय ध्यान रखें कि उनकी मैन्युफैक्चरिंग डेट ज्यादा पहले की न हो। एक साल से पहले बने टायर हरगिज न खरीदें। इधर बाजार में चीन के बने टायर भी काफी दिख रहे हैं। उनके लुक्स पर न जाएं और वॉरंटी वाले टायर ही खरीदें। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7122297063135581848?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7122297063135581848/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7122297063135581848' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7122297063135581848'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7122297063135581848'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_24.html' title='टायर की एबीसी...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzQmWqqDJ5I/AAAAAAAAAPM/bZ9f8k7iv_s/s72-c/thumb.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8888115736231789094</id><published>2009-12-23T22:19:00.000-08:00</published><updated>2009-12-23T22:26:29.202-08:00</updated><title type='text'>जब हों एक प्रॉपर्टी के कई साझेदार...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzMJeG0fvII/AAAAAAAAAPE/XmzR5yd-X4E/s1600-h/property-management.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5418685189488360578" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 248px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzMJeG0fvII/AAAAAAAAAPE/XmzR5yd-X4E/s320/property-management.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;प्रॉपर्टी की खरीदारी आज इतना महंगा सौदा हो चुका है कि इसे अकेले दम पर खरीदना आसान काम नहीं रहा। ऐसे में कई लोग मिलकर भी प्रॉपर्टी खरीद सकते हैं। हालांकि इस दौर में आपको इसके तमाम कानूनी पहलुओं के बारे में भी जानकारी जरूर रखनी चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;अगर किसी प्रॉपर्टी का मालिकाना हक एक से ज्यादा व्यक्तियों के नाम हो, तो इसे 'जॉइंट ओनरशिप' या साझा मालिकाना हक कहते हैं। पैतृक संपत्ति में बेटे व बेटियों का साझा व समान हिस्सा होता है। किसी भी प्रॉपर्टी का कोई को-ओनर प्रॉपर्टी में अपनी हिस्सेदारी किसी अजनबी या दूसरे को-ओनर के नाम हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण पाने वाला व्यक्ति प्रॉपर्टी का को-ओनर हो जाता है। बंटवारे के जरिए को-ओनरशिप को इकलौते मालिकाना हक में भी तब्दील किया जा सकता है। अगर किसी प्रॉपर्टी में किसी का शेयर है, तो इसका मतलब हुआ कि उस प्रॉपर्टी की जॉइंट ओनरशिप है। को-ओनर के पास प्रॉपर्टी पर कब्जे का अधिकार, उसका इस्तेमाल करने का अधिकार और यहां तक कि उसे बेचने तक का अधिकार होता है।&lt;br /&gt;टेनेंट्स-इन-कॉमन 'टेनेंट्स-इन-कॉमन' को-ओनरशिप का एक प्रकार है, लेकिन इस तरह की को-ओनरशिप के बारे में कानूनी दस्तावेजों में स्पष्ट तौर पर कुछ नहीं बताया गया है। पूरी प्रॉपर्टी में प्रत्येक टेनेंट-इन-कॉमन का अलग-अलग हित होता है। अलग-अलग हित होने के बावजूद प्रत्येक टेनेंट-इन-कॉमन के पास यह अधिकार होता है कि वह पूरी प्रॉपर्टी का पजेशन रख सकता है या उसे इस्तेमाल कर सकता है। यह जरूरी नहीं है कि पूरी प्रॉपर्टी में प्रत्येक टेनेंट-इन-कॉमन का अलग-अलग, लेकिन बराबर हित हो। पूरी प्रॉपर्टी में उनके हित एक-दूसरे से कम या ज्यादा भी हो सकते हैं। उन सभी के पास अपने-अपने हित किसी दूसरे के नाम हस्तांतरण करने का भी अधिकार होता है, लेकिन उनके पास सर्वाइवरशिप का अधिकार नहीं होता। ऐसे में किसी टेनेंट-इन-कॉमन की मौत के बाद उनका हित या तो वसीयत या फिर कानून के मुताबिक हस्तांतरित होता है। जिस व्यक्ति के नाम यह हस्तांतरण होता है, वह को-ओनर्स के साथ टेनेंट-इन-कॉमन बन जाता है।&lt;br /&gt;जॉइट टेनेंसी 'जॉइंट टेनेंसी' में सर्वाइवरशिप का अधिकार होता है। किसी जॉइट टेनेंट की मौत के बाद, प्रॉपर्टी में उनका हित तत्काल बाकी जीवित बचे जॉयंट टेनेंट्स के नाम हस्तांतरित हो जाता है। जॉयंट टेनेंट्स पूरी प्रॉपर्टी में एक एकीकृत हित के अधिकारी होते हैं। प्रत्येक जॉइंट टेनेंट का प्रॉपर्टी में बराबर का हिस्सा होना चाहिए। प्रत्येक जॉइंट टेनेंट पूरी प्रॉपर्टी का कब्जा रख सकता है, बशर्ते इससे दूसरे जॉइंट टेनेंट के अधिकारों का हनन नहीं होता हो। जॉइंट टेनेंसी हासिल करने के लिए कई शर्तें पूरी करनी होती हैं। जॉइंट टेनेंट्स के हित अलग-अलग नहीं हो सकते और वे अपने-अपने हित एक ही तरीके से भुना सकते हैं। जॉइंट टेनेंसी वसीयत या डीड के जरिए बहाल कराई जा सकती है।&lt;br /&gt;को-ओनरशिप इस तरह की को-ओनरशिप खासकर पति-पत्नी के लिए है, क्योंकि इसमें सर्वाइवरशिप का अधिकार हासिल है। यानी किसी एक की मौत के बाद प्रॉपर्टी का हित अपने आप दूसरे जीवित बचे ओनर के पास हस्तांतरित हो जाता है। इस तरह की ओनरशिप के तहत पति या पत्नी में से किसी को भी अपने हित किसी तीसरे पक्ष को हस्तांतरित करने का अधिकार नहीं है। हालांकि पति या पत्नी आपस में यह हस्तांतरण कर सकते हैं। इस तरह की टेनेंसी तलाक, पति-पत्नी में से किसी की मौत या फिर पति-पत्नी के बीच आपसी करार के जरिए ही खत्म की जा सकती है।&lt;br /&gt;ट्रांसफर ऑफ प्रॉपटीर् एक्ट, 1882 की धारा 44 में किसी को-ओनर द्वारा अपने अधिकार हस्तांतरित किए जाने से संबंधित नियमों का उल्लेख किया गया है। इसके मुताबिक, किसी अचल संपत्ति का को-ओनर कानूनी तौर पर संपत्ति में अपनी हिस्सेदारी हस्तांतरित कर सकता है। यह हस्तांतरण पाने वाले व्यक्ति के पास हस्तांतरण करने वाले के सारे अधिकार आ जाते हैं और वह प्रॉपर्टी के बंटवारे की मांग भी कर सकता है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8888115736231789094?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8888115736231789094/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8888115736231789094' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8888115736231789094'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8888115736231789094'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_23.html' title='जब हों एक प्रॉपर्टी के कई साझेदार...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SzMJeG0fvII/AAAAAAAAAPE/XmzR5yd-X4E/s72-c/property-management.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-1285941684535120575</id><published>2009-12-18T23:40:00.000-08:00</published><updated>2009-12-18T23:51:31.841-08:00</updated><title type='text'>आनंद विहार टर्मिनल...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SyyF7xeA_AI/AAAAAAAAAO8/Ycbd_ybIVOk/s1600-h/indiantrain.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5416851713757871106" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SyyF7xeA_AI/AAAAAAAAAO8/Ycbd_ybIVOk/s320/indiantrain.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार रेल टर्मिनल का उद्घाटन सोमवार के बजाय शनिवार को ही हो जाएगा। 24 घंटे से भी कम वक्त में रेलवे ने अपने फैसले को बदल दिया। तर्क दिया गया कि रेल टर्मिनल तैयार है इसलिए उद्घाटन का इंतजार क्यों किया जाए? लिहाजा रेल टर्मिनल के उद्घाटन के वक्त अब फरक्का जाने वाली ट्रेन के बजाय रेल मंत्री लखनऊ जाने वाली विंटर स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;गुरुवार शाम को ही उत्तर रेलवे ने ऐलान किया था कि आनंद विहार रेल टर्मिनल का उद्घाटन सोमवार को किया जाएगा। लेकिन शुक्रवार को तय किया गया कि अब उद्घाटन शनिवार को शाम 5 बजे होगा। यह शायद पहला मौका है जब रेलवे ने अपने कार्यक्रम को तय वक्त से पहले ही करने का फैसला किया है। तीन प्लैटफॉर्म वाले इस टर्मिनल का फिलहाल एक ही प्लैटफॉर्म चालू होगा लेकिन जल्द ही बाकी दोनों प्लैटफॉर्म भी चालू कर दिए जाएंगे।&lt;br /&gt;रेल टर्मिनल का शिलान्यास जनवरी 2004 में तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार ने किया था। हालांकि कायदे से यह रेल टर्मिनल तीन साल में ही बनकर तैयार होना चाहिए था लेकिन टर्मिनल लगभग 6 साल के बाद अब तैयार हुआ है। लगभग 110 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस टर्मिनल को तैयार करने के साथ यह भी फैसला हुआ है कि इस टर्मिनल पर ट्रेन में पार्सलों को चढ़ाने और उतारने का काम प्लैटफॉर्म पर ट्रेन आने से पहले ही कर दिया जाएगा यानी नॉन पैसेंजर एरिया में ही पार्सल आदि सामान चढ़ा दिया जाएगा। ट्रेन के कोच के चार्ट भी लगा दिए जाएंगे यानी जब प्लैटफॉर्म पर ट्रेन पहुंचेगी, तो वहां सिर्फ पैसेंजर ही ट्रेन में चढ़ेंगे और उतरेंगे। अन्य स्टेशनों पर ऐसी व्यवस्था नहीं है, जिसकी वजह से पैसेंजरों को भारी दिक्कत होती है और कई बार तो पार्सलों की वजह से दुर्घटनाएं भी होती हैं।&lt;br /&gt;उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अनंत स्वरूप ने बताया कि टर्मिनल का डिजाइन इस तरह से तैयार किया गया है कि पैसेंजरों को दिक्कत न हो। सीढ़ियां, एस्केलेटर और लिफ्ट के अलावा रैंप भी बनाए गए हैं ताकि पैसेंजरों को चढ़ने-उतरने में दिक्कत न हो। यही नहीं, जब इस टर्मिनल के तीनों प्लैटफॉर्म चालू हो जाएंगे, तब पैसेंजरों को एक से दूसरे प्लैटफॉर्म जाने के लिए फुटओवर ब्रिज पर चढ़ने की जरूरत नहीं होगी बल्कि वे सबवे के जरिए आ-जा सकेंगे। इसी स्टेशन पर रेल रिजर्वेशन सिस्टम भी लगाया जा रहा है ताकि ट्रेनों के एडवांस टिकट यहां से भी खरीदे जा सकें। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-1285941684535120575?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/1285941684535120575/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=1285941684535120575' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1285941684535120575'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1285941684535120575'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_7344.html' title='आनंद विहार टर्मिनल...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SyyF7xeA_AI/AAAAAAAAAO8/Ycbd_ybIVOk/s72-c/indiantrain.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8720727653833232119</id><published>2009-12-18T00:42:00.000-08:00</published><updated>2009-12-18T00:44:36.478-08:00</updated><title type='text'>पृथ्वी जैसा एक वॉटर वर्ल्ड....</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SytAy6tOfXI/AAAAAAAAAO0/H0ZtXOCu04I/s1600-h/wetearth.gif"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5416494220339740018" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 317px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SytAy6tOfXI/AAAAAAAAAO0/H0ZtXOCu04I/s320/wetearth.gif" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;धरती के जैसे किसी और ग्रह की खोज अभी थमी नहीं है। एस्ट्रोनॉमर्स ने एक ऐसा नया ग्रह खोजा है जो धरती से महज छह गुना बड़ा है और जिस पर 75 फीसदी पानी है। वैज्ञानिक हबल टेलीस्कोप का सहारा लेकर इसकी और नजदीकी जांच पड़ताल करने की फिराक में हैं।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;हालांकि, इस ग्रह का टेंपरेचर धरती पर मिलने वाले जीवन के अनुकूल नहीं है। अमेरिका के हार्वर्ड-स्मिथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स के वैज्ञानिकों के मुताबिक यह नया ग्रह धरती से सिर्फ 40 प्रकाश वर्ष की दूरी पर है। प्रकाश द्वारा एक साल में तय की गई दूरी एक प्रकाश वर्ष कहलाती है। पानी से लबालब भरा यह ग्रह या वॉटर वर्ल्ड एक कम चमकदार सितारे के आसपास चक्कर काटता है। इसका एक चक्कर महज 13 लाख मील का है जिसे यह सिर्फ 38 घंटों में पूरा कर लेता है। वैज्ञानिक इसमें इसलिए दिलचस्पी ले रहे हैं क्यांेकि यह हमारे सोलरसिस्टम से बाहर पाए जाने वाले ग्रहों में सबसे ज्यादा धरती जैसा है। सेंटर के रिसर्चर जैकोरी बर्टा का कहना था, अपने काफी गर्म तापमान के बावजूद यह एक वॉटर र्वल्ड जैसा ज्यादा लगता है। जैकोरी ने ही इस ग्रह को खोजा है। उनका कहना है कि अब तक की जानकारी मंे आए तमाम एक्सोप्लेनेट से यह काफी छोटा, ठंडा और धरती जैसा है। यह ग्रह जिस तारे के आसपास चक्कर लगा रहा है उसका नाम जीजे1214 है। इसे एमअर्थ प्रोजेक्ट के तहत धरती पर स्थित दूरबीनों की एक सीरीज की मदद से खोजा गया है। वैसे ये दूरबीन या टेलीस्कोप शौकिया लोगों के इस्तेमाल वाले टेलीस्कोप से ज्यादा उन्नत नहीं हैं।&lt;br /&gt;इस ग्रह को सुपरअर्थ का नाम भी दिया गया है क्योंकि इसका आकार धरती से तो बड़ा है लेकिन यूरेनस और नेपच्यून जैसे विशाल ग्रहों से छोटा है। लेकिन इसकी समस्या है इसकी सतह का बहुत हाई टेंपरेचर जोकि लगभग 200 डिग्री सेल्सियस है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस ग्रह की सतह के अलावा भी कुछ है जो इसके पैरंट स्टार से आने वाली रोशनी को रोक रहा है। मुमकिन है यह इस ग्रह का वातावरण हो जोकि मुख्यत: हाईड्रोजन और हीलियम से बना हो। अब वैज्ञानिक सोच रहे हैं कि हबल टेलीस्कोप को इसकी ओर मोड़ दिया जाए ताकि पता चल सके कि अगर इस पर वातावरण है तो किस तरह का है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8720727653833232119?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8720727653833232119/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8720727653833232119' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8720727653833232119'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8720727653833232119'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_18.html' title='पृथ्वी जैसा एक वॉटर वर्ल्ड....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SytAy6tOfXI/AAAAAAAAAO0/H0ZtXOCu04I/s72-c/wetearth.gif' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-9093413042481180852</id><published>2009-12-07T02:59:00.000-08:00</published><updated>2009-12-07T03:06:20.553-08:00</updated><title type='text'>गाड़ी करें पार्क, पर सावधानी से....</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sxzhhkr9jGI/AAAAAAAAAOg/44K3gBjtdNs/s1600-h/10510-a-man-stands-beside-a-car-inside-a-parking-space-in-new-delhi-august-10-2009-automobile-shares-hav.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5412448819092491362" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 221px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sxzhhkr9jGI/AAAAAAAAAOg/44K3gBjtdNs/s320/10510-a-man-stands-beside-a-car-inside-a-parking-space-in-new-delhi-august-10-2009-automobile-shares-hav.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जी हां, दिल्ली के हालात देखकर लगता है कि ऑथराइज्ड पार्किंग में भी गाड़ी अपने रिस्क पर ही खड़ी करें। दिल्ली की तमाम लाइसेंसिंग अथॉरिटी ठेकेदार से अग्रीमेंट साइन करके मोटी कमाई तो कर रही हैं, मगर जनता के प्रति उनकी कोई जवाबदेही नहीं है। एमसीडी की स्थिति तो और भी दयनीय है। बार-बार शिकायत करने पर भी यहां से कोई जवाब नहीं मिलता। न कोई सेंट्रलाइज्ड शिकायत व्यवस्था है, न कोई जवाबदेही।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;लेकिन निराश होने की जरूरत नहीं है। आपको अगर ऑथराइज्ड पार्किंग में कोई परेशानी हो, आपकी गाड़ी डैमेज हो जाए, सामान चोरी हो जाए, तय रकम से ज्यादा पैसे वसूले जाएं या आपसे बदसलूकी हो तो आप सही जगह पर शिकायत कर इंसाफ पा सकते हैं।&lt;br /&gt;एनडीएमसी की पार्किंग के लिए शिकायत करें&lt;br /&gt;कंट्रोल रूम : 011-23348300, 23348301&lt;br /&gt;डायरेक्टर एनडीएमसी को भी लिख सकते हैं। पता है : डायरेक्टर (एन्फोर्समेंट), एनडीएमसी, चौथी मंजिल, प्रगति भवन, जय सिंह रोड, नई दिल्ली-110001&lt;br /&gt;आमतौर पर शिकायत दर्ज कराने के 10 दिन में कार्रवाई हो जाती है और उसकी सूचना भी भेज दी जाती है। यदि आप इनकी कार्रवाई से संतुष्ट न हों तो सेक्रेटरी एनडीएमसी को इस पते पर लिख सकते हैं:&lt;br /&gt;सेक्रटरी, एनडीएमसी, पालिका केंद्र, संसद मार्ग, नई दिल्ली-110001&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;एमसीडी की पार्किंग से जुड़ी शिकायतों के लिए उसी जोन के डीसी (डिप्टी कमिश्नर) से शिकायत कर सकते हैं। पता है डिप्टी कमिश्नर, आरपी सेल, कमरा नं. 108, दिल्ली नगर निगम, निगम भवन, कश्मीरी गेट, दिल्ली-110006, फोन: 011-23964763 आप कमिश्नर एमसीडी को भी लिख सकते हैं: कमिश्नर, दिल्ली नगर निगम, टाउन हाल, दिल्ली-110006 डीडीए के पास कुल 67 पार्किंग हैं। डीडीए की पार्किंग में आने वाली परेशानियों के लिए आप संपर्क कर सकते हैं: डायरेक्टर (एलपीसी एंड कमर्शल एस्टेट), ब्लॉक-ए, दूसरी मंजिल, विकास सदन, नई दिल्ली। फोन: 011-24649717, फैक्स: 011-24692328&lt;br /&gt;आप कमिश्नर को भी लिख सकते हैं: कमिश्नर (लैंड), ब्लॉक-ए, पहली मंजिल, विकास सदन, नई दिल्ली फोन: 011-24698350 यदि आप कार्रवाई से संतुष्ट न हों तो उपाध्यक्ष, डीडीए को भी लिख सकते हैं: उपाध्यक्ष, डीडीए, विकास सदन, नई दिल्ली।&lt;br /&gt;जानें अपने अधिकार पार्किंग स्थल पर डिस्प्ले बोर्ड होना अनिवार्य है, जिस पर बड़े व स्पष्ट अक्षरों में पार्किंग का रेट, ठेकेदार का नाम व पता, रजिस्ट्रेशन नं. के अलावा शिकायत अधिकारी का नाम, पता व फोन नं. लिखा होना चाहिए। ऐसा न होने पर आप शिकायत दर्ज करा सकते हैं।&lt;br /&gt;पार्किंग स्लिप छपी हुई होनी चाहिए, जिस पर आपका आने का समय, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नं., तय किराये के अलावा पार्किंग साइट की जानकारी होनी चाहिए। पार्किंग स्टाफ जानकारी छिपाने के लिए आधी-अधूरी स्लिप देता है। कटी-फटी स्लिप न लें। इसका विरोध करें। पार्किंग स्थल साफ-सुथरा होना चाहिए। वहां किसी भी प्रकार की गंदगी नहीं होनी चाहिए। यदि आपकी गाड़ी पार्किंग से चोरी या डैमेज हो जाती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी ठेकेदार की है। सभी पार्किंग स्टाफ का यूनिफॉर्म में होना और उस पर नेम बैज होना अनिवार्य है। ठेकेदार द्वारा नियुक्त सभी स्टाफ का साफ-सुथरा ट्रैक रेकॉर्ड व पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी है।&lt;br /&gt;यदि आपकी पार्किंग में खड़ी हुई गाड़ी को ट्रैफिक पुलिस या संबंधित लाइसेंसिंग विभाग की गाड़ी उठा ले जाती है तो इसकी जिम्मेदारी ठेकेदार की है। सभी पार्किंग के लिए रेट तय हैं। तय रेट से ज्यादा चार्ज किए जाने पर शिकायत जरूर करें। दोषी पाए जाने पर जुर्माने के अलावा ठेकेदार का लाइसेंस कैंसल हो सकता है। विभिन्न विभागों द्वारा जारी किए गए 'फ्री' पार्किंग पास को मानने के लिए ठेकेदार बाध्य हैं। सभी पार्किंग में शिकायत पुस्तिका होनी जरूरी है। वाहन मालिक अगर मांगता है तो ठेकेदार को शिकायत पुस्तिका मुहैया करानी होगी। ऐसा नहीं होने पर शिकायत कर सकते हैं। पार्किंग वाला बदसलूकी करे तो शिकायत जरूर करें। पार्किंग स्टाफ को ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी ठेकेदार की है। पार्किंग स्थल के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की है और वहां की बदइंतजामी से आपको चोट लग जाए तो इसके लिए ठेकेदार जिम्मेदार होगा।&lt;br /&gt;क्या होगी कार्रवाई पार्किंग स्टाफ की मनमानी पर एनडीएमसी के डायरेक्टर एन्फोर्समेंट पी.पी. चतुवेर्दी का कहना है कि जनता के जागरूक होने पर ही इसे रोका जा सकता है। यदि आपको पार्किंग स्थल पर किसी भी परेशानी का सामना करना पड़े तो हमें सूचित करें, हम फौरन एक्शन लेंगे। एमसीडी में आरपी सेल के प्रमुख अमिया चंदा कहते हैं कि अगर वक्त पर आपकी समस्या का हल न हो तो आरटीआई के तहत अपनी शिकायत पर हुई कार्रवाई के बारे में मालूम कर सकते हैं।&lt;br /&gt;एनडीएमसी ठेकेदार पर कम-से-कम पांच हजार रुपये जुर्माना कर सकती है, जबकि एमसीडी केवल 500 रुपये जुर्माना करती है। तय सीमा से ज्यादा रकम वसूलने की स्थिति में ठेकेदार का लाइसेंस कैंसल हो सकता है।&lt;br /&gt;पार्किंग रेट एमसीडी टाइमिंग: एमसीडी की सभी पार्किंग 24 घंटे उपलब्ध होती है। कार : पहले 10 घंटों में 10 रुपये और अगले 10 से 24 घंटों के लिए 20 रुपये। स्कूटर : पहले 10 घंटों के लिए सात रुपये और अगले 10 से 24 घंटों के लिए 15 रुपये। अरुणा आसफ अली रोड पर पार्किंग के लिए 25 रुपये चार्ज किए जाते हैं।&lt;br /&gt;एनडीएमसी टाइमिंग : 8 बजे सुबह से 10 बजे रात तक। क्षेत्र के हिसाब से ए, बी व सी तीन कैटिगरी की पार्किंग हैं। कार : पहले 12 घंटों के लिए 10 रु और 24 घंटे के लिए 15 रुपए चार्ज किए जाते हैं। स्कूटर के लिए पांच और दस रुपये चार्ज किए जाते हैं&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-9093413042481180852?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/9093413042481180852/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=9093413042481180852' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/9093413042481180852'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/9093413042481180852'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_07.html' title='गाड़ी करें पार्क, पर सावधानी से....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sxzhhkr9jGI/AAAAAAAAAOg/44K3gBjtdNs/s72-c/10510-a-man-stands-beside-a-car-inside-a-parking-space-in-new-delhi-august-10-2009-automobile-shares-hav.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-1840546532478164091</id><published>2009-12-04T23:26:00.000-08:00</published><updated>2009-12-04T23:39:27.271-08:00</updated><title type='text'>कह ले....</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SxoN9RnAz_I/AAAAAAAAAOY/7wGgkRh9RDQ/s1600-h/Maan_tussen_wolken.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5411653248589287410" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SxoN9RnAz_I/AAAAAAAAAOY/7wGgkRh9RDQ/s320/Maan_tussen_wolken.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;मन में कुछ मत रख यार..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;चार दिन की जिंदगी है...कल का क्या भरोसा..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कह ले ...जो कहना है...बात कर दोस्त बना..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जो है साथ जी ले..हमेशा सब साथ नहीं होगे..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;चार दिन की जिंदगी है...कल का क्या भरोसा...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;खुल कर जिदंगी जी लो..कब दम गुट जाए..क्या भरोसा..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;खुद पर भरोसा कर ..आगे चल जिंदगी चार दिन है...जी ले..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-1840546532478164091?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/1840546532478164091/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=1840546532478164091' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1840546532478164091'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1840546532478164091'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post_04.html' title='कह ले....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' 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/&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;टिश्यू या शरीर के किसी अंग में सेल्स के अनियंत्रित मल्टीप्लीकेशन से कैंसर होता है। कभी- कभी शरीर के कि सी किसी भाग में इससे गांठ हो जाती है। जब तक कोई अंग इससे पूरी तरह प्रभावित नहीं होता तब तक इसका पता भी नहीं चलता। कु छ मामलों में दर्द होता है और कुछ में भूख न लगना या वजन में गिरावट आती है। कैंसर तब होता है जब हमारे शरीर के जैनेटिक मेटिरियल कासिर्नोजेनिक सब्सटेंस से डेमेज हो जाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;कैंसर के तीन कॉमन कारण हैं&lt;br /&gt;1. सिगरेट, शराब और कई तरह की प्लास्टिक के संपर्क में आना।&lt;br /&gt;2. हाय फैट डायट। यह कई तरह के कैंसर का कारण बनता है।&lt;br /&gt;3. बॉडी में फैट का पर्सेंटेज ज्यादा होना।&lt;br /&gt;इन्हें भी पढ़ें और स्टोरीज़ पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें बचाव ए. शराब और सिगरेट स्मोकिंग से बचें। प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम करें। अगर प्लास्टिक के बर्तन का इस्तेमाल माइक्रोवेव या खाना रखने के लिए कर रहे हैं तो अच्छी क्वालिटी का प्लास्टिक इस्तेमाल करें।&lt;br /&gt;बी. अपने और परिवार के खाने पीने पर नियंत्रण रखें। यदि आपका नॉर्मल बॉडी वेट या परॉसेंटेज फेट ज्यादा है तो हाइ फेट खाना जैसे बटर, चीज, क्रीम कुकीज, केक, पेस्ट्रीज, पफ, पिज्जा, बर्गर, डीप फ्राइड फू ड, चिप्स, चाट, मिक्सचर, फ्राइड चिकन, रेड मीट, मटन, कीमा, सूअर का गोश्त आदि हफ्ते में एक बार से ज्यादा न खाएं। इनमें से कोई भी चीज रोजाना नहीं खानी चाहिए।&lt;br /&gt;सी. यदि आप ओवरवेट हैं तो बताई गई चीजें तीन महीने तक अपनी डायट में से हटा दें ताकि आपका वजन सही हो जाए। रेगुलर कार्डियोवस्कुलर एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग या जॉगिंग सभी के लिए जरूरी है।&lt;br /&gt;डी. फल, सब्जियां, दाल, साबुत अनाज (आटा, रोटी, होल वीट ब्रेड), मलाई रहित दूध, दही आदि चीजें कैंसर जैसी बीमारी का खतरा कम कर सकते हैं। साथ ही एक दिन में कम से कम पांच फल खाएं। जैसे एक फल सुबह के नाश्ते में ले और दूसरा शाम को छ: बजे या डिनर के बाद ले सकते हैं। आप फ्रेश सलाद लंच और डिनर में ले सकते हैं। इन सब में विटामिन ए, ई या सी होता है जो एंटिऑक्डडेंट के रूप में काम करते हैं। ये कैंसर से लड़ते हैं और उसे बढ़ने से रोकते हैं।&lt;br /&gt;इन सब के अलावा ढाई से तीन लीटर तक पानी रोज पिएं। यह आपके शरीर से टॉक्सिक वेस्ट और दूषित पदार्थ हटा देता है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-3692626263761665532?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/3692626263761665532/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=3692626263761665532' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/3692626263761665532'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/3692626263761665532'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/12/blog-post.html' title='कैसे बचें कैंसर से...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SxYhudy2z4I/AAAAAAAAAOQ/lA5yISd7UfQ/s72-c/can%2520300.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-5537278199383658278</id><published>2009-11-24T04:50:00.000-08:00</published><updated>2009-11-24T05:16:40.166-08:00</updated><title type='text'>चाय के बारे में वह सब जो आप नहीं जानते...</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SwvbbWMgzKI/AAAAAAAAAOI/-ac-vNmicek/s1600/1367black_tea.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5407657040449424546" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 213px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SwvbbWMgzKI/AAAAAAAAAOI/-ac-vNmicek/s320/1367black_tea.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SwvbA2jE0JI/AAAAAAAAAOA/9LAeZL_iEAk/s1600/Tea+Revives+you.jpg"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;नए दिन का स्वागत हो या नए रिश्तों की शुरुआत या फिर आलस दूर भगाना हो या गपशप का बहाना तो बस दरकार होती है, सुबह-शाम की चाय के अलावा दिन भर में ऑफिस में काम के बीच न जाने कितने ही कप चाय गले से उतर जाती है। लेकिन कम ही लोग जानते होंगे कि चाय बनाने का सही तरीका क्या है या कौन-सी चाय बेहतर है? एक्सपर्ट्स की मदद से चाय के पूरे जायके का जायजा ले रही हैं प्रियंका सिंह :&lt;br /&gt;चाय कितनी तरह की होती है ?&lt;br /&gt;मोटे तौर पर चाय दो तरह की होती है : प्रोसेस्ड या सीटीसी (कट, टीयर ऐंड कर्ल) और ग्रीन टी (नैचरल टी)।&lt;br /&gt;सीटीसी टी (आम चाय) : यह विभिन्न ब्रैंड्स के तहत बिकने वाली दानेदार चाय होती है, जो आमतौर पर घर, रेस्तरां और होटेल आदि में इस्तेमाल की जाती है। इसमें पत्तों को तोड़कर कर्ल किया जाता है। फिर सुखाकर दानों का रूप दिया जाता है। इस प्रक्रिया में कुछ बदलाव आते हैं। इससे चाय में टेस्ट और महक बढ़ जाती है। लेकिन यह ग्रीन टी जितनी नैचरल नहीं बचती और न ही उतनी फायदेमंद।&lt;br /&gt;ग्रीन टी: इसे प्रोसेस्ड नहीं किया जाता। यह चाय के पौधे के ऊपर के कच्चे पत्ते से बनती है। सीधे पत्तों को तोड़कर भी चाय बना सकते हैं। इसमें एंटी-ऑक्सिडेंट सबसे ज्यादा होते हैं। ग्रीन टी काफी फायदेमंद होती है, खासकर अगर बिना दूध और चीनी पी जाए। इसमें कैलरी भी नहीं होतीं। इसी ग्रीन टी से हर्बल व ऑर्गेनिक आदि चाय तैयार की जाती है। ऑर्गेनिक इंडिया, ट्विनिंग्स इंडिया, लिप्टन कुछ जाने-माने नाम हैं, जो ग्रीन टी मुहैया कराते हैं।&lt;br /&gt;हर्बल टी: ग्रीन टी में कुछ जड़ी-बूटियां मसलन तुलसी, अश्वगंधा, इलायची, दालचीनी आदि मिला देते हैं तो हर्बल टी तैयार होती है। इसमें कोई एक या तीन-चार हर्ब मिलाकर भी डाल सकते हैं। यह मार्किट में तैयार पैकेट्स में भी मिलती है। यह सर्दी-खांसी में काफी फायदेमंद होती है, इसलिए लोग दवा की तरह भी इसका यूज करते हैं।&lt;br /&gt;ऑर्गेनिक टी: जिस चाय के पौधों में पेस्टिसाइड और केमिकल फर्टिलाइजर आदि नहीं डाले जाते, उसे ऑर्गेनिक टी कहा जाता है। यह सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है।&lt;br /&gt;वाइट टी: यह सबसे कम प्रोसेस्ड टी है। कुछ दिनों की कोमल पत्तियों से इसे तैयार किया जाता है। इसका हल्का मीठा स्वाद काफी अच्छा होता है। इसमें कैफीन सबसे कम और एंटी-ऑक्सिडेंट सबसे ज्यादा होते हैं। इसके एक कप में सिर्फ 15 मिग्रा कैफीन होता है, जबकि ब्लैक टी के एक कप में 40 और ग्रीन टी में 20 मिग्रा कैफीन होता है।&lt;br /&gt;ब्लैक टी: कोई भी चाय दूध व चीनी मिलाए बिना पी जाए तो उसे ब्लैक टी कहते हैं। ग्रीन टी या हर्बल टी को तो आमतौर पर दूध मिलाए बिना ही पिया जाता है। लेकिन किसी भी तरह की चाय को ब्लैक टी के रूप में पीना ही सबसे सेहतमंद है। तभी चाय का असली फायदा मिलता है।&lt;br /&gt;इंस्टेंट टी: इस कैटिगरी में टी बैग्स आदि आते हैं, यानी पानी में डालो और तुरंत चाय तैयार। टी बैग्स में टैनिक एसिड होता है, जो नैचरल एस्ट्रिंजेंट होता है। इसमें एंटी-वायरल और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। इन्हीं गुणों की वजह से टी-बैग्स को कॉस्मेटिक्स आदि में भी यूज किया जाता है।&lt;br /&gt;लेमन टी: नीबू की चाय सेहत के लिए अच्छी होती है, क्योंकि चाय के जिन एंटी-ऑक्सिडेंट्स को बॉडी एब्जॉर्ब नहीं कर पाती, नीबू डालने से वे भी एब्जॉर्ब हो जाते हैं।&lt;br /&gt;मशीन वाली चाय: रेस्तरां, दफ्तरों, रेलवे स्टेशनों, एयरपोर्ट आदि पर आमतौर पर मशीन वाली चाय मिलती है। इस चाय का कोई फायदा नहीं होता क्योंकि इसमें कुछ भी नैचरल फॉर्म में नहीं होता।&lt;br /&gt;अन्य चाय: आजकल स्ट्रेस रीलिविंग, रिजूविनेटिंग, स्लिमिंग टी व आइस टी भी खूब चलन में हैं। इनमें कई तरह की जड़ी-बूटी आदि मिलाई जाती हैं। मसलन, भ्रमी रिलेक्स करता है तो दालचीनी ताजगी प्रदान करती है और तुलसी इमून सिस्टम को मजबूत करती है। इसी तरह स्लिमिंग टी में भी ऐसे तत्व होते हैं, जो वजन कम करने में मदद करते हैं। इनसे मेटाबॉलिक रेट थोड़ा बढ़ जाता है, लेकिन यह सपोर्टिव भर है। सिर्फ इसके सहारे वजन कम नहीं हो सकता। आइस टी में चीनी काफी होती है, इसलिए इसे पीने का कोई फायदा नहीं है।&lt;br /&gt;चाय के फायदे&lt;br /&gt;- चाय में कैफीन और टैनिन होते हैं, जो स्टीमुलेटर होते हैं। इनसे शरीर में फुर्ती का अहसास होता है।&lt;br /&gt;- चाय में मौजूद एल-थियेनाइन नामक अमीनो-एसिड दिमाग को ज्यादा अलर्ट लेकिन शांत रखता है।&lt;br /&gt;- चाय में एंटीजन होते हैं, जो इसे एंटी-बैक्टीरियल क्षमता प्रदान करते हैं।&lt;br /&gt;- इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सिडेंट तत्व शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और कई बीमारियों से बचाव करते हैं।&lt;br /&gt;- एंटी-एजिंग गुणों की वजह से चाय बुढ़ापे की रफ्तार को कम करती है और शरीर को उम्र के साथ होनेवाले नुकसान को कम करती है।&lt;br /&gt;- चाय में फ्लोराइड होता है, जो हड्डियों को मजबूत करता है और दांतों में कीड़ा लगने से रोकता है।&lt;br /&gt;चाय की मेडिसनल वैल्यू&lt;br /&gt;चाय को कैंसर, हाई कॉलेस्ट्रॉल, एलर्जी, लिवर और दिल की बीमारियों में फायदेमंद माना जाता है। कई रिसर्च कहती हैं कि चाय कैंसर व ऑर्थराइटस की रोकथाम में भूमिका निभाती है और बैड कॉलेस्ट्रॉल (एलडीएल) को कंट्रोल करती है। साथ ही, हार्ट और लिवर संबंधी समस्याओं को भी कम करती है।&lt;br /&gt;चाय के नुकसान&lt;br /&gt;- दिन भर में तीन कप से ज्यादा पीने से एसिडिटी हो सकती है।&lt;br /&gt;- आयरन एब्जॉर्ब करने की शरीर की क्षमता को कम कर देती है।&lt;br /&gt;- कैफीन होने के कारण चाय पीने की लत लग सकती है।&lt;br /&gt;- ज्यादा पीने से खुश्की आ सकती है।&lt;br /&gt;- पाचन में दिक्कत हो सकती है।&lt;br /&gt;- दांतों पर दाग आ सकते हैं लेकिन कॉफी से ज्यादा दाग आते हैं।&lt;br /&gt;- देर रात पीने से नींद न आने की समस्या हो सकती है।&lt;br /&gt;दूध से खत्म होते हैं चाय के गुण&lt;br /&gt;दूध और चीनी मिलाने से चाय के गुण कम हो जाते हैं। दूध मिलाने से एंटी-ऑक्सिडेंट तत्वों की ऐक्टिविटी भी कम हो जाती है। चीनी डालने से कैल्शियम घट जाता है और वजन बढ़ता है। इससे एसिडिटी (जलन) की आशंका बढ़ जाती है। दरअसल, चाय में फाइब्रीन व एल्ब्यूमिन होते हैं, जबकि चाय में टैनिन। ये आपस में मिलकर ड्रिंक को गंदला कर देते हैं। दूध में मौजूद प्रोटीन चाय के फायदों को खत्म करता है।&lt;br /&gt;चाय बनाने का सही तरीका&lt;br /&gt;ताजा पानी लें। उसे एक उबाल आने तक उबालें। पानी को आधे मिनट से ज्यादा नहीं उबालें। एक सूखे बर्तन में चाय पत्ती डालें। इसके बाद बर्तन में पानी उड़ेल दें। पांच-सात मिनट के लिए बर्तन को ढक दें। इसके बाद कप में छान लें। स्वाद के मुताबिक दूध और चीनी मिलाएं। एक कप चाय बनाने के लिए आधा चम्मच चाय पत्ती काफी होती है। चाय पत्ती, दूध और चीनी को एक साथ उबालकर चाय बनाने का तरीका सही नहीं है। इससे चाय के सारे फायदे खत्म हो जाते हैं। इससे चाय काफी स्ट्रॉन्ग भी हो जाती है और उसमें कड़वापन आ जाता है।&lt;br /&gt;कब पिएं&lt;br /&gt;यूं तो चाय कभी भी पी सकते हैं लेकिन बेड-टी और सोने से ठीक पहले चाय पीने से बचना चाहिए। दरअसल, रात को सोने और आराम करने से इंटेस्टाइन (आंत) फ्रेश होती है। ऐसे में सुबह उठकर सबसे पहले चाय पीना सही नहीं है। देर रात में चाय पीने से नींद आने में दिक्कत हो सकती है।&lt;br /&gt;साथ में क्या खाएं&lt;br /&gt;- जिन लोगों को एसिडिटी की दिक्कत है, उन्हें खाली चाय नहीं पीनी चाहिए। साथ में एक-दो बिस्कुट ले लें।&lt;br /&gt;- ग्रीन टी हर्बल ड्रिंक है, इसलिए इसे खाली ही पीना बेहतर है। साथ में कुछ न खाएं तो इसका गुणकारी असर ज्यादा होता है।&lt;br /&gt;कितने कप पिएं&lt;br /&gt;बिना दूध और चीनी की हर्बल चाय तो कितनी बार भी पी सकते हैं। लेकिन दूध-चीनी डालकर और सभी चीजें एक साथ उबालकर बनाई गई चाय तीन कप से ज्यादा नहीं पीनी चाहिए।&lt;br /&gt;कितनी गर्म पिएं&lt;br /&gt;चाय को कप में डालने के 2-3 मिनट बाद पीना ठीक रहता है। वैसे जीभ खुद एक सेंस ऑर्गन है। चाय के ज्यादा गर्म होने पर उसमें जलन हो जाती है और हमें पता चल जाता है कि चाय ज्यादा गर्म है।&lt;br /&gt;रखी हुई चाय न पिएं&lt;br /&gt;चाय ताजा बनाकर ही पीनी चाहिए। आधे घंटे से ज्यादा रखी हुई चाय को ठंडा या दोबारा गर्म करके नहीं पीना चाहिए। इसी तरह एक ही पत्ती को बार-बार उबालकर पीना और भी नुकसानदेह है। अक्सर ढाबों और गली-मुहल्ले की चाय की दुकानों पर चाय बनानेवाले बर्तन में पुरानी ही पत्ती में और पत्ती डालकर चाय बनाई जाती है। इससे चाय में नुकसानदायक तत्व बनने लगते हैं।&lt;br /&gt;यह भी जानें&lt;br /&gt;- चाय पीने का पहला आधिकारिक उल्लेख चीन में चौथी शताब्दी ई.पू. मिलता है, लेकिन किसी लिखित दस्तावेज में जिक्र 350 ई. में मिलता है।&lt;br /&gt;- भारत में चाय की पैदाइश और बिक्री ईस्ट इंडिया कंपनी के आने के बाद ही शुरू हुई। आज भारत दुनियाभर में सबसे ज्यादा चाय का उत्पादन करता है। इसमें से 70 फीसदी की खपत देश में ही हो जाती है।&lt;br /&gt;- 5-6 कप चाय पीने से मैग्नीजियम की रोजाना की जरूरत 45 फीसदी जरूरत पूरी हो जाती है। शरीर को रोजाना 2-5 मिग्रा मैग्नीजियम की जरूरत होती है।&lt;br /&gt;- किसी भी गर्भवती महिला को एक दिन में 200 मिली ग्राम कैफीन यानी पांच कप से ज्यादा चाय नहीं पीनी चाहिए।&lt;br /&gt;- चाय को लकड़ी के डिब्बे में स्टोर करना चाहिए। इससे उसकी महक बनी रहती है।&lt;br /&gt;- नॉन-वेज खाने के बाद दो-तीन कप चाय पीना फायदेमंद होता है। इससे नॉन-वेज में जो कैंसर पैदा करने करनेवाले केमिकल होते हैं, उनका असर कम करने में मदद मिलती है।&lt;br /&gt;- चाय को बिना चीनी या शहद के पिएं।&lt;br /&gt;- चाय में नीबू मिला लेना अच्छा होता है।&lt;br /&gt;गुण और भी हैं&lt;br /&gt;- चाय की पत्तियों के पानी को गुलाब के पौधे की जड़ों में डालना चाहिए।&lt;br /&gt;- चाय की पत्तियों को पानी में उबाल कर बाल धोने से चमक आ जाती है।&lt;br /&gt;- एक लीटर उबले पानी में पांच टी बैग्स डालें और पांच मिनट के लिए छोड़ दें। इसमें थोड़ी देर के लिए पैर डालकर बैठे रहें। पैरों को काफी राहत मिलती है।&lt;br /&gt;- दो टी बैग्स को ठंडे पानी में डुबोकर निचोड़ लें। फिर दोनों आंखों को बंद कर लें और उनके ऊपर टी बैग्स रखकर कुछ देर के लिए शांति से लेट जाएं। इससे आंखों की सूजन और थकान उतर जाएगी।&lt;br /&gt;- शरीर के किसी भाग में सूजन हो जाए तो उस पर गर्म पानी में भिगोकर टी बैग रखें। इससे दर्द कम होगा और ब्लड सर्कुलेशन सामान्य हो जाएगा।&lt;br /&gt;- गर्म पानी में भीगे हुए टी बैग को रखने से दांत के दर्द में फौरी आराम मिलता है।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-5537278199383658278?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/5537278199383658278/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=5537278199383658278' title='8 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5537278199383658278'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5537278199383658278'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/11/blog-post_24.html' title='चाय के बारे में वह सब जो आप नहीं जानते...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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सारी जादूगरी आपकी हर इच्छा को पूरा करने के लिए आसमान पर बिखेर रही है। उल्काओं की बरसात से आतिशबाजी का सा नजारा होगा। इसे लियोनिड्स कहा जाता है, क्योंकि यह लियो (सिंह) तारामंडल की दिशा से होती है। आसमान की हर हलचल पर नजर रखने वालों से लेकर ताकझांक करने के शौकीन लोगों के लिए ये समां बेहद एक्साइटिंग होगा।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;किसे दिखेगा नजारा&lt;/span&gt; खगोलविदों को मंगलवार और बुधवार को हर घंटे में 100 से 300 शूटिंग स्टार दिखाई देंगे। दिल्ली के आसमान पर आधी रात को 2 बजे से लेकर तड़के 4 बजे के बीच यह खूबसूरत नजारा देखा जा सकेगा। हालांकि अमावस्या के बाद का न्यू मून होने से आसमान काला तो होगा, लेकिन नजारा तभी दिखेगा बशर्ते धुंध न हो।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;कैसे देखे&lt;/span&gt; दिल्ली उल्का पिंड की बरसात सामान्य टेलिस्कोप के जरिए देखी जा सकती है। कोहरे की वजह से अगर आसमान साफ नहीं रहता है तो दिल्ली के लोग शहर के बाहरी इलाकों में जाकर इस आतिशबाजी का मजा ले सकते हैं।&lt;br /&gt;कैसे होती है ये आतिशबाजी लियोनिड उल्का की बरसात इससे पहले 1998 से 2002 के बीच जमकर जलवा दिखा चुकी है। इस साल ये उल्काएं सबसे चमकदार आतिशबाजी करने वाली हैं। उल्काओं को गिरते हुए यूं तो किसी भी रात को देखा जा सकता है, लेकिन जब इनकी तादाद ज्यादा हो तो इसे उल्का की बरसात कहा जाता है, क्योंकि सब एक साथ मिलकर आतिशबाजी जैसा नजारा देती हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;कब होती है&lt;/span&gt; यह बरसात धरती जब किसी उल्का के ऑर्बिट से गुजरती है तो उल्का की बरसात दिखाई देती है। जैसे-जैसे उल्का अपनी कक्षा में घूमती है बर्फ भाप बनने लगती है और मिट्टी और पथरीले कणों के टुकड़े छूटने लगते हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-6647286030862223695?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/6647286030862223695/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=6647286030862223695' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6647286030862223695'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6647286030862223695'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/11/blog-post_17.html' title='आसमान में आज रात मनेगी &apos;दिवाली&apos;....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' 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Whatever you send out of your mind, comes back to you. Every thought you think, is a boomerang. If you hate another, hate will come back to you. If you love others, love will come back to you. An evil thought is thrice cursed. First, it harms the thinker by doing injustice to his mental body. Secondly, it harms the person who is its object. Lastly, it harms all mankind by vitiating the whole mental atmosphere. Every evil thought is as a sword drawn on the person to whom it is directed. If you entertain thoughts of hatred, you are really a murderer of that man against whom you foster thoughts of hatred. You are your own suicide, because these thoughts rebound upon you only. A mind tenanted by evil thoughts acts as a magnet to attract like thoughts from others and thus intensifies the original evil. Evil thoughts thrown into the mental atmosphere poison receptive minds. To dwell on an evil thought gradually deprives it of its repulsiveness and impels the thinker to perform an action which embodies it.Very carefully watch all your thoughts. Suppose you are assailed by gloomy thoughts. You experience depression. Take a small cup of milk or tea. Sit calmly. Close your eyes. Find out the cause for the depression and try to remove the cause. The best method to overcome the gloomy thoughts and the consequent depression, is to think of inspiring thoughts and inspiring things. Remember again, positive overcomes negative. This is a grand effective law of nature. &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;by Swami Sivananda &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-6465856514167109417?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/6465856514167109417/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=6465856514167109417' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6465856514167109417'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6465856514167109417'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/11/power.html' title='Power'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvVhOrMsEaI/AAAAAAAAANY/z2YlI4VFR8A/s72-c/water_crown.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-5757825476030500872</id><published>2009-11-07T01:09:00.000-08:00</published><updated>2009-11-07T01:25:40.264-08:00</updated><title type='text'>अब धरती पर पैदा होगी सूर्य की ऊर्जा...</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvU8uxMeLuI/AAAAAAAAANQ/XjS0MfvNLKw/s1600-h/sunflare_skylab4_big.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5401290102278074082" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvU8uxMeLuI/AAAAAAAAANQ/XjS0MfvNLKw/s320/sunflare_skylab4_big.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;सूर्य से प्रकाश और गर्मी पैदा होने की प्रक्रिया को धरती पर दोहराने की तैयारी चल रही है। इसके लिए फ्रांस के कडाराश में एक फ्यूजन एनर्जी रिएक्टर बनाने का काम शुरू हो चुका है। भारत भी इसमें योगदान कर रहा है। इसे दुनिया का अब तक का सबसे साझा अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम माना जा रहा है। इसमें योगदान करने के लिए इटर इंडिया एजंसी की स्थापना की गई है। फ्यूजन एनर्जी रिसर्च पर सहयोग के लिए भारत और यूरोपीय संघ की शिखर बैठक में समझौता हुआ था।&lt;br /&gt;इटर प्रॉजेक्ट फ्यूजन एनर्जी रिसर्च को अंतरराष्ट्रीय थर्मो न्यूक्लियर एक्सपेरिमंटल रिएक्टर (इटर) प्रॉजेक्ट नाम से जाना जाता है। इटर इंडिया द्वरा फ्यूजन एनर्जी रिएक्टर के कई अहम उपकरणों का भारत में विकास और निर्माण किया जाएगा। इन्हें कडाराश में लगाने की जिम्मेदारी भी इटर इंडिया की होगी। इस प्रॉजेक्ट के तहत वैक्यूम वेसल, हाई वोल्टेज पावर सप्लाई, कूलिंग वॉटर सिस्टम और कुछ अन्य प्रणालियों की सप्लाई की जाएगी। गुजरात के गांधीनगर स्थित प्लाज्मा शोध संस्थान की अगुवाई में भारत का इटर में योगदान होगा। गांधीनगर में स्टडी स्टेट टोकामाक-1 की स्थापना की जा रही है। गांधीनगर में इस प्रयोग को कडाराश में होने वाली रिसर्च का पूर्वाभ्यास माना जा रहा है।&lt;br /&gt;भारत की भागीदारी यूरोपीय संघ, जापान, चीन, दक्षिण कोरिया, रूस और अमेरिका के साथ अब भारत भी इस अंतरराष्ट्रीय रिसर्च प्रॉजेक्ट में शामिल हो गया है। भारत की वैज्ञानिक क्षमताओं और उपलब्धियों के मद्देनजर साझेदार बनाया गया है। इस प्रॉजेक्ट पर 16 अरब डॉलर का खर्च आने का अनुमान है। इसका दस फीसदी भारत को देना होगा। प्रॉजेक्ट पूरा होने में दो से तीन दशक तक लग सकते हैं। इस प्रॉजेक्ट में यूरोपीय संघ की भागीदारी 34 प्रतिशत, जापान 13 प्रतिशत, अमेरिका 13 प्रतिशत और चीन, दक्षिण कोरिया, रूस और भारत की हिस्सेदारी 10-10 फीसदी की होगी।&lt;br /&gt;आईएईए की निगरानी यूरोपीय परिषद के प्रेजिडंट स्वीडन के प्रधानमंत्री फ्रेडरिक रनेफेल्ट और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में परमाणु ऊर्जा विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल काकोडकर और यूरोपीय आयोग की विदेशी मामलों की आयुक्त बेनिता फेरेरो वाल्डनर ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इटर समझौता 21 नवंबर 2006 को पैरिस में किया गया। 24 अक्टूबर 2007 को सभी भागीदार देशों ने इसे अनुमोदित किया। इटर के संचालन की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजंसी (आईएईए) की है।&lt;br /&gt;टोकामाक अवधारणा इटर प्रॉजेक्ट चुंबकीय खिंचाव की टोकामाक अवधारणा पर आधारित है। इसमें गैसीय स्वरूप वाले प्लाज्मा को एक वैक्यूम वेसल में भरा जाता है। ईंधन के रूप में हाइड्रोजन के आइसोटोप ड्यूटीरियम और ट्रिटियम का मिश्रण इस्तेमाल होता है। 15 करोड़ डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर प्लाज्मा को गर्म किया जाता है। इससे हॉट प्लाज्मा पैदा होती है। वैक्यूम वेसल की दीवारों से हॉट प्लाज्मा को दूर रखने के लिए बहुत तेज चुंबकीय क्षेत्र पैदा किया जाता है। यह चुंबकीय क्षेत्र वेसल के चारों ओर सुपरकंडक्टिंग कॉइल से पैदा होता है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-5757825476030500872?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/5757825476030500872/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=5757825476030500872' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5757825476030500872'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5757825476030500872'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/11/blog-post_07.html' title='अब धरती पर पैदा होगी सूर्य की ऊर्जा...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvU8uxMeLuI/AAAAAAAAANQ/XjS0MfvNLKw/s72-c/sunflare_skylab4_big.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-382706379501080250</id><published>2009-11-04T01:00:00.000-08:00</published><updated>2009-11-04T01:09:55.878-08:00</updated><title type='text'>सर्दियों में रखें सेहत का ख्याल</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvFEwSBVJcI/AAAAAAAAANI/nqrVQP1x_ZU/s1600-h/FEMALE_BODY_FITNESS.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5400173024455763394" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 218px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvFEwSBVJcI/AAAAAAAAANI/nqrVQP1x_ZU/s320/FEMALE_BODY_FITNESS.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;सर्दियों का गुलाबी मौसम अपने साथ सेहत से जुड़ी कई समस्याएं भी साथ लेकर आता है। इस दौरान नाक बहना, लगातार छींके आना, गले में खराश, सीने में जकड़न जैसी स्वास्थ्य समस्याएं आम हैं। इसलिए इस मौसम में आपको अपनी सेहत को लेकर थोड़ा सा सावधान रहने की जरूरत है। अगर आप डायबीटीज या हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हैं, तो इस मौसम में आपको अपने दिल का खास ध्यान रखना होगा। सर्दियों के दौरान मधुमेह के मरीजों में दिल और मस्तिष्क आघात का खतरा बढ़ जाता है। यह भी ध्यान रखें कि सर्दियों में रक्तवाहिनी सिकुड़ जाती हैं और रक्तचाप भी बढ़ जाता है।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;डॉ. अश्विनी शास्त्री के मुताबिक, इस मौसम में बुखार और संक्रमण काफी तेजी से फैलता है, इसलिए बेहतर है कि अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आप पहले से ही एहतियात बरतें। अपने खाने में पपीता, कद्दू, गाजर, टमाटर, पालक, अमरूद जैसी मौसमी सब्जियों और फलों को जरूर शामिल करें। इनसे आपके शरीर का तापमान भी मौसम के मुताबिक गर्म रहेगा। &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;खुद को संक्रमण से बचाने के लिए एक और बेहतर उपाय यह है कि आप रोज सुबह एक लौंग खा लें।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;कभी-कभी कुछ लोग अत्यधिक ठंड के कारण शीतदंश का शिकार हो जाते हैं, जिससे त्वचा सख्त या सुन्न हो जाती है। इसलिए अपने को ठंड के प्रकोप से बचाने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े जरूर पहनें। &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;अगर शरीर का कोई हिस्सा सुन्न पड़ जाए, तो उसे कुछ देर तक गुनगुने पानी में रखने से आराम हो सकता है। एक बात का खास तौर पर ध्यान रखें कि शराब का सेवन करने के बाद ठंड में बाहर न निकलें। इससे आपकी रक्तवाहिनी सिकुड़ सकती हैं, जिससे फेफड़ों की समस्या हो सकती है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;डॉ. शास्त्री बताते हैं कि सर्दी-खांसी और बुखार के 100 से ज्यादा वायरस होते हैं। अगर एक बार आपकी नाक या गले से यह संक्रमण शरीर में प्रवेश कर जाए, तो यह लगातार बढ़ता ही रहता है। इसके लक्षणों में गले में खराश, छींक, नाक और आंखों से पानी बहना, शरीर में दर्द, हल्का बुखार, बंद नाक, खांसी आदि इसके लक्षण हैं। शरीर में सर्दी का यह सिलसिला एक या दो हफ्ते तक चलता है। इसके मुकाबले का बेहतर तरीका यही है कि आप ज्यादा से ज्यादा आराम करें और जितना हो सके जूस या अन्य दव भरपूर मात्रा में लें।&lt;br /&gt;संक्रमण से लड़ने का सबसे अच्छा तरीका यही है कि आप पौष्टिक खाना खाकर अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाएं। साथ ही भरपूर नींद लें और व्यायाम करें। यह भी जरूरी है कि इस संक्रमण के रोगियों के प्रत्यक्ष संक्रमण में आने से जहां तक हो सके, खुद को बचाएं। सर्दियों में यह संक्रमण काफी तेजी से फैलता है, इसलिए जरूरी है कि ऐसे किसी भी रोगी के प्रत्यक्ष संपर्क में न आएं। अगर आप इस संक्रमण से पीड़ित हैं, तो भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और हमेशा खांसते या छींकते वक्त मुंह पर रूमाल जरूर रख लें।&lt;br /&gt;मौसम के लिए खास सलाह डॉ. एन.के. त्रिपाठी बताते हैं कि सर्दी के मौसम में बीमारियों से बचाव के लिए हर उम्र के लोगों को खास एहतियात बरतने की जरूरत होती है। इस मौसम में छोटे बच्चों को बाहर की ठंडी हवा के बचाकर रखना चाहिए। बच्चों को नहलाने के बाद उन्हें तुरंत गर्म कपड़े पहना दें, क्योंकि अगर एक बार उनके शरीर में ठंड बैठ गई, तो उन्हें ठीक होने में वक्त लग सकता है। वहीं, अस्थमा के मरीजों को भी घर और बाहर मौसम के अचानक बदलावों से सावधान रहना चाहिए। खास तौर पर सुबह के वक्त गर्म बिस्तर से उठकर एकदम खुली हवा में न जाएं, बल्कि थोड़ा इंतजार करें। डॉक्टर की सलाह के मुताबिक अपने इनहेलर और नैजल स्पे आदि का इस्तेमाल भी करते रहें।&lt;br /&gt;डॉक्टरों के मुताबिक, सर्दी सबसे ज्यादा सिर, कान और पैरों के जरिए शरीर में प्रवेश करती है। इसलिए अपने शरीर के इन हिस्सों को ठंडी हवाओं से बचाकर रखें। शरीर के रक्त संचार को सही स्तर पर रखने के लिए हर रोज व्यायाम करना न भूलें। आप बिना पैसा खर्च किए घर में रहकर ही 15-20 तक कुछ ऐसी एक्सरसाइज कर सकते हैं, जिन्हें करने पर शरीर से थोड़ा-बहुत पसीना जरूर निकले। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-382706379501080250?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/382706379501080250/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=382706379501080250' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/382706379501080250'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/382706379501080250'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/11/blog-post.html' title='सर्दियों में रखें सेहत का ख्याल'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SvFEwSBVJcI/AAAAAAAAANI/nqrVQP1x_ZU/s72-c/FEMALE_BODY_FITNESS.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-6509891064489636520</id><published>2009-10-27T09:45:00.000-07:00</published><updated>2009-10-27T10:02:10.755-07:00</updated><title type='text'>केले के हैं फायदे अनेक</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SucnNuchFlI/AAAAAAAAAL4/Z6lAEwvefic/s1600-h/banana-bed-humor-01.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5397325795186251346" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 243px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SucnNuchFlI/AAAAAAAAAL4/Z6lAEwvefic/s320/banana-bed-humor-01.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;हालांकि ज्यादातर लोग केले को देखकर नाक चिढ़ाते हैं, लेकिन इस फल के फायदे बहुत हैं। एनर्जी का अच्छा सोर्स होने के साथ इसमें विटामिंस व मिनरल्स की भी अच्छी मात्रा होती है। ऐसे बहुत कम लोग ही होंगे, जो केले को अपने फेवरिट फ्रूट की लिस्ट में रखते हैं। लेकिन इस फल के फायदे बहुत होते हैं। खाने में आसान होने के साथ इसमें काफी न्यूट्रिशंस भी होते हैं। बच्चों की ग्रोथ के लिए ज्यादातर पैरंट्स अपने बच्चों को केला देते हैं, ताकि उनकी अच्छी ग्रोथ हो सके। कई कॉन्वेट स्कूलों में सुबह के नाश्ते में केला दिया जाता है। यह नेचरल फूड है। इसमें सोलन एनर्जी बहुत ज्यादा होती है, इसलिए आप अपनी डाइट में केला जरूर शामिल करें। अगर आपको लगता है कि आपके ब्रेकफास्ट में पौष्टिक चीजें शामिल नहीं हैं, तो आप ब्रेकफास्ट में केला लें। इससे विटामिन व मिनरल्स की कमी पूरी करेगा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;वैसे क्या आप जानते हैं कि दो छोटे केलों में फाइबर की मात्रा एक ब्रेड के बराबर होती है? यही नहीं, यह ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है? दरअसल केला लो ब्लड कॉलेस्ट्रोल में फायदेमंद है। दरअसल केले में विटामिन सी, विटामिन ए, पौटेशियम और विटामिन बी6 होता है। हाल में हुई एक रिसर्च से यह प्रूफ हो चुका है कि पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और यह किडनी से अवांछनीय पदार्थ भी बाहर निकालता है। चूंकि केला मैग्नेशियम का अच्छा स्त्रोत है, इसलिए यह बहुत जल्दी पच जाता है और आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।&lt;br /&gt;यूनिवर्सिटी ऑफ माइनसोटा में हुई रिसर्च से यह प्रूफ हो चुका है कि दो छोटे केलों में एक बेड की तुलना में ज्यादा फाइबर होता है। चूंकि फाइबर लोअर ब्लड कॉलेस्ट्रोल को कंट्रोल करने में कारगर है। इससे आप समझ सकते हैं कि केला कितना गुणकारी है।&lt;br /&gt;केला है स्वादिष्ट अगर केले के स्वाद की बात जाए, तो इसका टेस्ट हर किसी का फेवरिट है। आप केले को कई तरीके से ले सकते हैं जैसे आप इसे खाने के वक्त सलाद के तौर पर लिया जा सकता है। वहीं कुछ लोग केले को मूंगफली के साथ क्रंची स्टाइल में लेना पसंद करते हैं। इसके अलावा केला एक हेल्दी ड्रिंक भी है। आप केले को शेक के तौर पर ले सकते हैं। आप ऑरैंज जूस में केले के स्लाइस डालकर ले सकते हैं। आप ऑरैंज जूस में थोड़ा-सा जायफल व दालचीनी डाल दें। इससे इसका टेस्ट डिफरेंट लगेगा। वहीं आप केले को नाश्ते में बेक करके भी ले सकते हैं।&lt;br /&gt;खिलाड़ियों के लिए बेस्ट अगर आप खेल के फील्ड से जुड़े हुए हैं, तो ऐसे आप केला अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। अकसर वर्कआउट करने के बाद आपकी बॉडी में एनर्जी की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में केला ही ऐसा फल है, जो आपकी बॉडी एनर्जी देता रहता है। आपको एनर्जी के स्टेमिना भी बढ़ता है।&lt;br /&gt;प्रेग्नेंसी में है जरूरी प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा विटामिन व मिनरल्स की आवश्यकता होती है। ऐसे में आप अपनी डाइट में केला अवश्य शामिल करें। चूंकि यह बॉडी को धीरे-धीरे एनजीर् देता है और आसानी से डाइजेस्ट भी हो जाता है। आप केले को स्नैक्स के तौर पर ले सकते हैं। अगर आपको ऊबकाई आती है, तो आप रोजाना केला खाएं।&lt;br /&gt;बुढ़ापे का फूड आपको बता दें कि केला बुजुर्ग लोगों के लिए भी सबसे बेस्ट फल है। इसे आसानी से छिलकर खाया जा सकता है। यही नहीं, इसमें विटामिन सी, बी6 और फाइबर होता है, जो बुढ़ापे में जरूरी है। चूंकि बुढ़ापे में कब्ज की शिकायत ज्यादा होती है। ऐसे में आप रोजाना केला खाएं।&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-6509891064489636520?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/6509891064489636520/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=6509891064489636520' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6509891064489636520'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6509891064489636520'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post_27.html' title='केले के हैं फायदे अनेक'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SucnNuchFlI/AAAAAAAAAL4/Z6lAEwvefic/s72-c/banana-bed-humor-01.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-581056354949965682</id><published>2009-10-12T03:07:00.000-07:00</published><updated>2009-10-12T03:18:15.549-07:00</updated><title type='text'>सफर</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/StMCTWNZ7tI/AAAAAAAAALw/g5KaPywQKOw/s1600-h/Hero%27s%20Journey3.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5391655710295191250" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 213px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/StMCTWNZ7tI/AAAAAAAAALw/g5KaPywQKOw/s320/Hero%2527s%2520Journey3.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;कुछ सोच... कुछ इरादे... लिए निकल पड़े.. &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;पड़ाव आते गये ... हम बढ़ते गये..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;सफर में रोज़ कुछ नया सीखते गये... &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;पड़ाव पड़ते गये हम बड़ते गये...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;हवा बारिश सब चलते रहे.. हम भी बढ़ते गये....&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;कभी थक गए तो आसमा की आगोश में सुसता लिए..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;पड़ाव पड़ते गए..हम बढ़ते गए...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;और ये सफर चलता रहा...अब थकान जरूर होने लगी है...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;लेकिन मजिल अभी दूर है..और अभी बहुत चलना है...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;पड़ाव पड़ते गए हम बढ़ते गए..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-581056354949965682?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/581056354949965682/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=581056354949965682' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/581056354949965682'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/581056354949965682'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post_12.html' title='सफर'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/StMCTWNZ7tI/AAAAAAAAALw/g5KaPywQKOw/s72-c/Hero%2527s%2520Journey3.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-6212817307204831988</id><published>2009-10-06T02:02:00.000-07:00</published><updated>2009-10-06T02:23:41.719-07:00</updated><title type='text'>थोड़ा जी कर देखो..</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssIzCmEA9I/AAAAAAAAALA/VSmCriNUmQc/s1600-h/pic255471.jpg"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5389411052041798610" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssIzCmEA9I/AAAAAAAAALA/VSmCriNUmQc/s320/pic255471.jpg" border="0" /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;जी लो जी भर के &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;शीशे के अन्दर से बाहर झांक कर देखो&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;थोड़ी मिठ्ठी की खुशबू लेकर देखो&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;जब तक है जिन्दगी थोड़ा जी कर देखो&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;कभी शीशे के बाहर की बौछार में भीगकर देखो...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;एसी टीवी ये ऐशोआराम से बाहर झांक कर देखो...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;जब तक है जिन्दगी थोड़ा जी कर देखो&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;मुट्ठी भर पैसों के आगे कभी सोचकर देखो&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;कभी मजलूम मजबूर के चेहरे पर खुशी लाकर देखो&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;कभी नम पड़ी आखों को हंसा कर देखो...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;छोटी सी है &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;"&gt;जिन्दगी..इसे जी कर देखो..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/p&gt;&lt;p align="center"&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="font-size:100%;color:#cc0000;"&gt;शालिनी राय ६ अक्टूबर &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/p&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-6212817307204831988?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/6212817307204831988/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=6212817307204831988' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6212817307204831988'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6212817307204831988'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post_4295.html' title='थोड़ा जी कर देखो..'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssIzCmEA9I/AAAAAAAAALA/VSmCriNUmQc/s72-c/pic255471.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-4748444135875452851</id><published>2009-10-06T01:15:00.000-07:00</published><updated>2009-10-06T01:28:10.029-07:00</updated><title type='text'>जी लो जी भरके....</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Ssr_P-vLYRI/AAAAAAAAAK4/LKlYQG1QDw4/s1600-h/llife.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5389400554106216722" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 118px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Ssr_P-vLYRI/AAAAAAAAAK4/LKlYQG1QDw4/s320/llife.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कहते हैं जिंदगी एक बार मिलती है, इसलिए उसे जी भरकर जीना चाहिए। लेकिन यह बात कहने-सुनने में जितनी आसान लगती है, फॉलो करने में उतनी ही मुश्किल। ख्वाहिशों की उड़ान और हकीकत के बोझ के बीच इंसान पिसकर रह जाता है। ऐसे में हर शख्स को कभी-न-कभी हताशा, निराशा, नाकामी और अकेलेपन की तकलीफ के बीच जिंदगी के बोझ बनने का अहसास घेर लेता है। घर-परिवार, यार-दोस्त, नौकरी-चाकरी से लेकर पर्सनल जरूरतों और चाहतों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर कैसे जीएं जिंदगी को फुलटुस्स, बता रही हैं प्रियंका सिंह :&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;हम सभी के पास दो तरह की जिंदगी होती है। एक वह जिंदगी, जो हम जीते हैं और दूसरी वह, जो सभी के अंदर होती है लेकिन हम उसे जी नहीं पाते। जाहिर है, जरूरत इसी जिंदगी को जानने-समझने और जीने की है। इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि कामयाब जिंदगी क्या है? हालांकि हर शख्स के लिए इसकी अलग परिभाषा हो सकती है लेकिन मोटे तौर पर निम्न चीजें मिलकर एक कामयाब जिंदगी बनाती हैं :&lt;br /&gt;- एक सुरक्षित और आनंददायक जगह पर रहना। - ऐसे लोगों का साथ, जो आपसे प्यार करते हों और आपकी इज्जत करते हों। - ऐसी चीजें करना, जिसने संतोष मिले और जिनका कोई रिवॉर्ड भी हो। - अपनी जरूरतें अच्छी तरह पूरी करने लायक चीजें और पैसा होना। - ऐसे समाज में रहना, जो सभी की स्वतंत्रता की हिफाजत करता हो।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;सेल्फ मैनेजमेंट 1. अपने मन में साफ रखें कि हम जिंदगी में क्या पाना चाहते हैं। रोज इसके बारे में सोचें और विजुएलाइज करें। कल्पना करें कि हमने उसे पा लिया है। उस स्टेज में खुद को देखें। इससे हम उलझन से बच सकते हैं। 2. खुद से प्यार करें। हम जैसे हैं, उसी रूप में खुद को स्वीकार करें। किसी भी तरह की हीनभावना खुद पर हावी न होने दें। 3. दूसरों के लिए कुछ करना अच्छा है लेकिन दूसरों के लिए खुद को बिल्कुल भुलाना नहीं चाहिए। अपने शौक और इच्छाओं के लिए भी वक्त निकालना चाहिए। 4. हमें गुस्सा, नाराजगी, निराशा और नकारात्मक सोच जैसे नेगेटिव इमोशंस को हैंडल करना और उनसे बाहर निकलना सीखना चाहिए। अगर किसी बात या चीज से दुखी हों तो उसके बारे में सचेत हो जाएं। दुखी होते रहने के बजाय उस घटना से सबक लेकर या खुद को व्यस्त रखकर आगे बढ़ें। 5. दूसरों के पैसे, ओहदे, शोहरत से तुलना बेशक करें, लेकिन ईर्ष्या न करें। हम उनसे सीखें और खुद में कोई कमी है तो उसे दूर करें। लेकिन साथ ही अपने को भी देखें और अपने मौजूदा स्तर से आगे बढ़ें तो वही असली तरक्की है।&lt;br /&gt;रिश्ते 1. दूसरे लोग हमें समझें, इससे पहले हम उन्हें समझने की कोशिश करें। उनके हालात में खुद को रखने की कोशिश करें। 2. कम्यूनिकेशन जरूरी है। बड़े-से-बड़े मतभेद होने पर भी बातचीत जारी रखें। आपसी मतभेद को मनभेद न बनने दें। 3. जितना हो सके सुनें। इससे हम ज्यादा-से-ज्यादा सीखेंगे और कम-से-कम चीजें मिस करेंगे। साथ ही, आपस में तकरार होने के चांस भी कम होंगे। 4. जब सामनेवाले का पारा हाई तो चुप रह जाना ही बेहतर है, चाहे सामनेवाला गलत ही क्यों न हो। बाद में जरूर अपनी बात को कायदे से सही शब्दों में सामने रखें। मन में बातों को दबाकर रखना भी सही नहीं है। 5. दूसरों पर अपनी पसंद-नापसंद न थोपें। जब खुद हम हमेशा दूसरों के मुताबिक नहीं चल सकते तो दूसरों से यह उम्मीद भी बेकार है। अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को बदलने की कोशिश से रिश्तों में खटास के सिवा कुछ नहीं मिलेगा।&lt;br /&gt;सेहत 1. हम पैसे कमाने की खातिर अपनी सेहत को नजरअंदाज करते जाते हैं और बाद में सेहत ठीक करने की कोशिश में बेतहाशा पैसे खर्च करते हैं। पर अक्सर इसमें नाकाम रहते हैं। सेहत को अपनी प्राथमिकताओं में रखें। 2. रोजाना आधे घंटे की सैर या एक्सरसाइज जरूर करें। योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन कर पाएं तो तन-मन दोनों दुरुस्त रहेंगे। 3. कुछ लोग खाने के लिए जीते हैं तो कुछ जीने के लिए खाते हैं। हमें इन दोनों के बीच का रास्ता निकालना चाहिए। खाने में मन न मारें। कुछ भी खा सकते हैं लेकिन लिमिट में। खाना सेहतमंद हो, यह जरूर ध्यान रखना चाहिए। 4. आराम करें। हफ्ते में कम-से-कम कुछ घंटे ऐसे हों, जब हम दिल-दिमाग से तनावरहित होकर सिर्फ और सिर्फ आराम करें। ये चंद घंटे हमारी जिंदगी में रौनक और जोश लौटा देंगे। जिन लोगों से प्यार करते हैं, जिनका साथ पसंद करते हैं, उनके साथ वक्त बिताएं। 5. शराब, तंबाकू, गुटके जैसी चीजों से दूर रखें। अगर कुछ बुरी आदतें हैं तो उन्हें छोड़ने की कोशिश करें। बुरी आदतों को छुड़ाना मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं।&lt;br /&gt;करियर 1. भेड़चाल में न चलें, न ही दूसरों को मोटी कमाई करते देख उसी दिशा में बढ़ने लगें। हमें कामयाबी उसी फील्ड में मिलती है, जिसमें महारत हासिल है और जिसे हम एंजॉय करते हैं। 2. अपने सबसे बड़े शौक को प्रफेशन के रूप में चुनें। कोई काम न करें, जिसमें दिलचस्पी न हो। मनपसंद काम चुनने से हम उसे एंजॉय करेंगे। इससे काम से होनेवाला स्ट्रेस आपसे दूर रहेगा। 3. अगर हम अपने काम में सौ फीसदी देते हैं तो हमारी कामयाबी तय है क्योंकि माकेर्ट में ऐसे लोग बहुत कम हैं। छोटे-से-छोटे काम में भी अपना दिल, दिमाग और ताकत लगा दें। 4. जो भी काम करें, उसमें अपनी छाप छोड़ें। काम सभी लोग करते हैं, लेकिन कुछ लोग उसके लिए जाने जाते हैं। लीक से हटकर काम करें। लीक पर चलेंगे तो वहीं पहुंचेंगे, जहां दूसरे लोग उस रास्ते पर चलकर पहुंचे हैं। 5. जिंदगी के आखिरी लम्हे तक सीखते रहें। जानकारी ही हमारी असली ताकत है। अपने फील्ड के बारे में खुद को अपडेट करते रहें। चाहे इंटरनेट से करें या प्रफेशन से जुड़ी नई किताबें पढ़ें।&lt;br /&gt;मनी मंत्रा 1. पैसे से खुशियां नहीं खरीदी जा सकतीं लेकिन इससे जिंदगी आसान हो जाती है और बहुत-सी तकलीफें दूर हो सकती हैं। इसलिए फाइनैंशल सिक्युरिटी जरूरी है। 2. जितनी चादर हो, उतने पैर पसारने चाहिए, अब यह फंडा बदल गया है। अब पैर सिकोड़ने के बजाय चादर बढ़ाने पर जोर देना चाहिए, लेकिन इतना जोर न लगाएं कि चादर फट जाए। 3. इनकम बढ़ाने के लिए एक ही सोर्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। कम-से-कम दो सोर्स होने चाहिए। अगर एक में दिक्कत हो तो दूसरा चलता रहे। लेकिन नया सोर्स बनने पर ही पुराने को छोड़ने की सोचें। 4. बचत को लेकर संतुलित नजरिया अपनाएं। बचत इतनी ज्यादा न करें कि आनेवाले कल को संवारने के चक्कर में अपने आज में तकलीफें उठाएं। न ही इतना ज्यादा खर्च करें कि आज की मौज-मस्ती के चक्कर में आनेवाले कल का ध्यान ही न रखें। 5. पैसे को मैनेज करें न कि पैसा आपको मैनेज करे। यानी अंधाधुंध पैसे कमाने के चक्कर में जिंदगी की बुनियादी खुशियों से दूर न हो जाएं। साथ ही, फटाफट पैसे कमाने के चक्कर में न पड़ें। ऐसे में अक्सर आदमी धोखा खाता है।&lt;br /&gt;टाइम मैनेजमेंट 1. प्राथमिकता तय करें। ऐसा करते हुए हमेशा ध्यान रखें कि महत्वपूर्ण काम क्या है। कई बार हम लोग अर्जेन्ट और अहम काम के बीच फर्क नहीं कर पाते। अजेर्ंट काम (चाहे कम जरूरी ही क्यों न हो) अक्सर इस लिस्ट में ऊपर आ जाता है, जबकि अहम काम पीछे छूट जाता है। मसलन, अगर दांत का इलाज करना है तो हम अक्सर उसे टालते रहते हैं, जबकि वह बेहद जरूरी है पर अक्सर अजेंर्ट नहीं होता। 2. सही वक्त पर फैसले करना बेहद जरूरी है। किसी फैसले को लंबे वक्त तक टालने से बेहतर है, आर-पार करना। इससे स्थिति साफ हो जाती है। किसी फैसले को टालना कई बार उस फैसले को लेने से कहीं ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। 3. रोजाना सुबह उठकर उस दिन के कामों की लिस्ट बना लें। वक्त कम होने पर इनमें से गैरजरूरी को हटा दें, कम जरूरी को टाल दें और हो सके तो कामों को दूसरों को बांट दें, लेकिन उन पर थोपें नहीं। 4. लंबे वक्त से अटके पड़े काम के लिए रोजाना 10 मिनट का वक्त तय करें। इसी तरह ज्यादा वक्त खाने वाले कामों को भी छोटे-छोटे हिस्से में बांट लें और रोजाना थोड़ा-थोड़ा वक्त उसमें लगाएं। इससे देर से ही सही, काम पूरा हो जाएगा। 5. गौर करें कि हम अपना वक्त कैसे बिताते हैं। इसके लिए एक डायरी रखें और उसमें तीन दिन तक अपना रुटीन लिखें। इससे आप आसानी से पता लगा सकेंगे कि किस काम में आपका वक्त जाया हो रहा है।&lt;br /&gt;लाइफ के टिप्स - कभी खुशी और सुकून के पलों को कैनवस पर उतारने की सोची है। सबसे पहले मन में पेड़ के नीचे आराम से बैठकर नेचर को निहारते शख्स की इमेज मन में आती है। जाहिर है, जिंदगी की भागदौड़ के बीच कुछ वक्त अपने लिए निकालना बेहद जरूरी है। - अपनी जिंदगी को एक विस्तृत तस्वीर के रूप में देखें। सोचें कि हमारी जिंदगी के अलग-अलग क्षेत्र आपस में किस तरह जुड़ें हैं और पहचानें कि अगर एक में बदलाव होगा, तो दूसरों पर उसका क्या असर दिखेगा। - आज में जीएं। वर्तमान क्षण और आसपास की खूबसूरती को जीएं। अगर यह स्वीकार कर लें कि बदलाव शाश्वत है तो वर्तमान में जीने में मदद मिलती है। - अहम होना अच्छा है लेकिन अच्छा होना ज्यादा अहम है। - सफलता का कोई मंत्र नहीं है। यह कड़ी मेहनत, सही मौकों पर सही फैसले और तकदीर के मेलजोल से मिलती है। - कुछ लोग उन चीजों को देखते हैं, जो हैं और पूछे हैं क्यों, जबकि कुछ लोग ऐसी चीजों का सपना देखते हैं, जो कभी नहीं थीं और पूछते हैं - क्यों नहीं? - नया हमें लुभाता है लेकिन हम बदलाव से बचते हैं। नयापन लाने के लिए हमेशा बदलाव को तैयार रहना होगा।&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-4748444135875452851?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/4748444135875452851/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=4748444135875452851' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4748444135875452851'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4748444135875452851'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post_06.html' title='जी लो जी भरके....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Ssr_P-vLYRI/AAAAAAAAAK4/LKlYQG1QDw4/s72-c/llife.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-757373920604357392</id><published>2009-10-05T02:37:00.000-07:00</published><updated>2009-10-05T02:54:30.419-07:00</updated><title type='text'>प्यार</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsnCSWrrBiI/AAAAAAAAAKw/6Lcp0wUVGas/s1600-h/untitled+2.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5389052049707697698" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 240px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsnCSWrrBiI/AAAAAAAAAKw/6Lcp0wUVGas/s320/untitled+2.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;प्यार से प्यारा होता है प्यार&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;कभी रेशम तो कभी सख्त होता है प्यार&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;कभी शरारती तो कभी मां की छाया होता है..प्यार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;प्यार से प्यारा होता है...प्यार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;कभी डॉट तो कभी ममता का पिटारा होता है..प्यार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;अलग अलग रंग से रंगा होता है..प्यार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;कई रिश्तों की छाप होता है....प्यार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;प्यार से प्यारा होता है...प्यार&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-757373920604357392?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/757373920604357392/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=757373920604357392' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/757373920604357392'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/757373920604357392'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post_9556.html' title='प्यार'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsnCSWrrBiI/AAAAAAAAAKw/6Lcp0wUVGas/s72-c/untitled+2.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7142364576446413109</id><published>2009-10-05T01:58:00.000-07:00</published><updated>2009-10-05T02:14:25.792-07:00</updated><title type='text'>अब चेक के बदले भी एटीएम मशीन करेगी नोटों बारिश ....</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Ssm42wV0GDI/AAAAAAAAAKo/ziugRE08kgM/s1600-h/atm-machine-small.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5389041679954352178" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 312px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Ssm42wV0GDI/AAAAAAAAAKo/ziugRE08kgM/s400/atm-machine-small.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या आपको तुरंत नकदी की जरूरत है और एकाउंट खाली है। क्लाइंट से चेक तो मिला है, लेकिन रात के वक्त जरूरत पड़ने पर उसका कोई फायदा नहीं? या फिर डेबिट कार्ड खोने के बाद आपको अपने बच्चे के जन्मदिन समारोह के लिए आयोजक को तुरंत पैसा देना है? जेब खाली और चिंताएं इतनी। लेकिन जल्द ही ये दिक्कतें दूर होने वाली हैं।&lt;br /&gt;भारत में कुछ बैंक ऐसी टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रहे हैं, जिससे एटीएम में चेक डालकर तुरंत नकदी हासिल की जा सकेगी...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;एटीएम बनेगा सीटीएम..सीटीएम क्या है?उत्तरी अमेरिका और यूरोप में चेक ट्रंकेटिंग मशीन (सीटीएम) का काफी इस्तेमाल होता है, जो विशेष एटीएम मशीन के अंदर रहती है। सीटीएम, एक ऐसा यंत्र है, जो तुरंत चेक वेरिफिकेशन और क्लियरेंस करती है। अमेरिका की एनसीआर कॉर्प. और डाईबॉल्ड इंक जैसी एटीएम बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की नजरें अब भारत के कुछ बैंकों पर टिक गई हैं।&lt;br /&gt;भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईडीबीआई और आईएनजी वैश्य जैसे कुछ बैंकों ने ऐसे एटीएम में दिलचस्पी जताई है। बैंकिंग नियामक रिजर्व बैंक ने भी इस कदम का स्वागत किया है। आरबीआई का कहना है कि यह ग्राहकों के लिए काफी बढि़या रहेगा।तो नकदी ऐसे भी ग्रहण करेगी एटीएम एनसीआर इंडिया के एमडी प्रदीप सेन ने कहा कि कंपनी बीते महीने से भारत में बैंकों को सीटीएम-एटीएम दिखा रही है। उन्होंने कहा, 'हम नई एटीएम मशीन भी लॉन्च करेंगे, जिसमें आप नोटों का बंडल इंसर्ट कर सकेंगे, वह भी किसी भी क्रम में।&lt;br /&gt;एटीएम आपके नोट का अध्ययन करेगी और एकाउंट में रकम तुरंत क्रेडिट कर दी जाएगी।' फिलहाल एटीएम में रकम डिपॉजिट करने के लिए नकदी को एक लिफाफे में डालना पड़ता है। यह 24 घंटे में जाकर खाते में क्रेडिट होती है। देश में 48,000 से ज्यादा एटीएम सेंटर हैं, जो तीन शीर्ष एटीएम निर्माता कंपनियों (एनसीआर, डाईबॉल्ड और जर्मनी की विनकॉर निक्सडॉर्फ) के हैं। कैसे काम करेगी सीटीएम -एटीएमसीटीएम-एटीएम इंसर्ट किए जाने वाले चेक को स्कैन करती है और उसकी डिजिटल इमेज बनाती है। यह डिजिटल चेक इमेज क्लियरेंस के लिए इलेक्ट्रॉनिक आधार पर इसे जारी करने वाले बैंक के आईटी नेटवर्क पर भेजी जाती है।कुछ पलों में आपके खाते में रकम क्रेडिट कर दी जाती है, जिसे डेबिट कार्ड के जरिए तुरंत निकाला जा सकता है। या अगर आप अपना डेबिट कार्ड कहीं खो बैठते हैं या रखकर भूल जाते हैं, तो दोस्त को चेक जारी कर नकदी का संकट खत्म किया जा सकता है। आरबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि बैंकों को इंटर और इंटरा बैंक उद्देश्यों के लिए सीटीएम (चेक ट्रंकेटिंग मशीन) के इस्तेमाल की इजाजत पहले से दी गई है।&lt;br /&gt;साभार हरसिमरन सिंह/ अमन ढल &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7142364576446413109?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7142364576446413109/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7142364576446413109' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7142364576446413109'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7142364576446413109'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post_05.html' title='अब चेक के बदले भी एटीएम मशीन करेगी नोटों बारिश ....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Ssm42wV0GDI/AAAAAAAAAKo/ziugRE08kgM/s72-c/atm-machine-small.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7795254073331111490</id><published>2009-10-01T00:38:00.000-07:00</published><updated>2009-10-01T00:55:57.621-07:00</updated><title type='text'>जब बीपी हो जाए हाई...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsRgZbNOldI/AAAAAAAAAKg/i9hcwbwtvNg/s1600-h/high-blood-pressure-anxiety.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387537044158191058" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 285px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsRgZbNOldI/AAAAAAAAAKg/i9hcwbwtvNg/s400/high-blood-pressure-anxiety.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;गलत खानपान , स्ट्रेस और गड़बड़ लाइफस्टाइल के चलते आजकल बड़ी तादाद में लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान हैं। अगर वक्त रहते कंट्रोल न किया जाए तो हाई बीपी कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। हाई बीपी एक ' साइलंट डिज़ीज ' है यानी ज्यादातर लोगों में इसका कोई लक्षण दिखाई नहीं देता। ऐसे में जब तक बीपी की जांच न हो , तब तक उन्हें पता ही नहीं लग पाता।&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कब समझें कि हाई बीपी के शिकार हो गए हैं&lt;/span&gt; - जब भी बीपी छह महीने तक लगातार 85 से ज्यादा रहे। कभी - कभी स्ट्रेस या किसी और वजह से बीपी 85 से ऊपर हो सकता है , लेकिन फिक्र की बात तब है जब लगातार छह महीने तक ऐसा हो। 50 साल से ज्यादा उम्र वालों का बीपी कुछ ज्यादा होना नॉर्मल है पर अपर बीपी 139 और लोअर बीपी 89 से ज्यादा न हो। वैसे 55 साल के बाद अक्सर यह देखने में आता है कि नीचे का बीपी तो तकरीबन नॉर्मल आता है , पर ऊपर का बीपी ज्यादा आता है। यानी ज़रूरी नहीं कि अपर बीपी और लोअर बीपी की माप एक ही कैटिगरी में आए। ऐसे में आप खुद को ज्यादा गंभीर कैटिगरी में मानें। मसलन , अगर किसी का अपर बीपी 160 है और लोअर बीपी 80 तो वह हाइपरटेंशन स्टेज -2 कैटिगरी में है। अगर किसी का अपर बीपी 120 है और लोअर 95 तो वह हाइपरटेंशन स्टेज -1 कैटिगरी में है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;&lt;strong&gt;जब बीपी हो जाए हाई ...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;1. &lt;span style="color:#009900;"&gt;स्टेस करें कंट्रोल&lt;/span&gt; : स्ट्रेस कंट्रोल करने के लिए चिंता , तनाव और गुस्से से बचें। हर वक्त जल्दबाजी में न रहें। शांत और खुश रहें।&lt;br /&gt;आराम : दिन भर काम के दौरान बीच - बीच में थोड़ी देर के लिए रिलैक्स जरूर हो लें।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;नींद&lt;/span&gt; : हाई बीपी की शिकायत जिन लोगों को है उन्हें कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। रात को सोते समय सिर उत्तर दिशा में न रखें। सिरहाना बहुत मोटा और सख्त न हो।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;म्यूज़िक&lt;/span&gt; : सॉफ्ट या क्लासिकल म्यूज़िक ( शास्त्रीय संगीत ) सुनें। रोज करीब आधे घंटे तक क्लासिकल म्यूज़िक सुनने से हाई बीपी घटता है। ऐसा चार हफ्ते तक लगातार करने पर आपको बीपी में कमी मिलेगी।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;मेडिटेशन&lt;/span&gt; : हमारा मन हर वक्त कुछ न कुछ सोचता रहता है। ध्यान यानी मेडिटेशन के समय मन को किसी एक विषय पर फोकस किया जाता है। जैसे - सांस के आने - जाने पर , किसी आवाज पर या फिर किसी मंत्र पर। किसी से मेडिटेशन सीख लें। रोज दिन में दो बार 20 मिनट तक मेडिटेशन करने से हाई बीपी कंट्रोल होता है।&lt;br /&gt;2. &lt;span style="color:#009900;"&gt;बढ़ाएं शारीरिक मेहनत &lt;/span&gt;: ब्लड प्रेशर नॉर्मल रखने का सबसे आसान तरीका है रेग्युलर एक्सरसाइज। रोज आधे घंटे की एक्सरसाइज से शरीर के अंदर नाइट्रिक ऑक्साइड एक्टिवेट होता है , जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। सैर करना , लिफ्ट की जगह सीढि़यों का इस्तेमाल और घर के काम खुद करना काफी फायदेमंद है।&lt;br /&gt;3. &lt;span style="color:#009900;"&gt;घटाएं वजन&lt;/span&gt; : मोटापा हाई बीपी की खास वजह होता है , उसे घटाएं।&lt;br /&gt;4. &lt;span style="color:#009900;"&gt;छोड़ें स्मोकिंग व ड्रिंकिंग &lt;/span&gt;: सिगरेट , शराब और गुटखा बिल्कुल छोड़ दें तो अच्छा है , नहीं तो कम ज़रूर कर दें।&lt;br /&gt;5. &lt;span style="color:#009900;"&gt;ठीक करें खानपान&lt;/span&gt; : पोटैशियम वाली चीजें ज़रूर लें। पोटैशियम दूध और फल - सब्जियों में पाया जाता है। छाछ , दही , केला , किशमिश , खजूर , आलू , बींस , गाजर , पालक , शकरकंद और टमाटर ले सकते हैं। लंबी लौकी का जूस , संतरे का जूस , गाजर और पालक का मिक्स्ड जूस , खीरा , पुदीने की चटनी खासतौर पर फायदेमंद है। सुबह पपीता लें। तरबूज खाते वक्त हल्का नमक व काली मिर्च डालकर खाएं। हां , जो लोग हाई बीपी के साथ - साथ किडनी की बीमारी से भी परेशान हैं , वे ज्यादा पोटैशियम वाली चीजें कम खाएं , मसलन - केला , संतरा , किशमिश , खजूर , खूबानी , गाजर जूस , बींस , सोयाबीन , मसूर की दाल , पालक , आलू।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;कैल्शियम वाली चीजें&lt;/span&gt; : लो फैट दूध व दूध से बनी चीजें , दही , छाछ।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;मैग्नीशियम वाली चीजें&lt;/span&gt; : सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां , साबुत अनाज , फल , गहरे हरे पत्तों वाली सब्जियां , घीया और पिस्ता , अखरोट , बादाम , काजू जैसे ड्राई फ्रूट्स , बींस , मटर , सोयाबीन का आटा , चॉकलेट व कोको पाउडर में मैग्नीशियम होता है। ब्राउन ब्रेड में सफेद रिफाइंड या प्रॉसेस्ड आटे के ब्रेड के मुकाबले ज्यादा मैग्नीशियम होता है। धनिया , सूखी सरसों , सौंफ , जीरा आदि कुछ मसालों में भी यह पाया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;मूत्रवर्धक चीजें&lt;/span&gt; : बीपी बढ़ने पर मूत्र की मात्रा बढ़ाएं तो अच्छा होता है। इसके लिए ठंडी व पेशाब लाने वाली चीजें जैसे खीरा , छाछ , नारियल पानी , गाजर का रस , सेब , पपीता , अनार , तरबूज , खरबूजा और हरी सब्जियां या इनका जूस लें। जो सब्जियां बेलों पर उगती हैं , वे मूत्र लाने में सहायक होती है , उनका इस्तेमाल करें। नारियल पानी भी फायदेमंद है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;साबुत अनाज&lt;/span&gt; : गेहूं पिसवाएं तो चोकर रहने दें। चना कम लें। जौ व जई का इस्तेमाल करें। अंकुरित अनाज भी बेहतर रहता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;ड्राई फ्रूट्स&lt;/span&gt; : दो अखरोट की गिरियां और बादाम की छह गिरियां रात को भिगोकर सुबह खाएं। गमिर्यों में भी भीगे बादाम खाने में हर्ज नहीं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;कम लें नमक&lt;/span&gt; : दिन भर में ढाई ग्राम सोडियम यानी 6 ग्राम या एक चम्मच से ज्यादा नमक न लें। यहां तक कि सेंधा नमक भी कम लें। सिर्फ नमक की मात्रा घटाने से ही हाई बीपी कम हो जाता है। ब्रेड में भी नमक होता है। सोडियम भी कम लें। इन चीजों में सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है , इनसे बचें। जैसे - मट्ठी , नमकीन , भुजिया , दालमोठ , पराठा , पूरी , चाट - पकौड़ी और फ्रेंच फ्राइज , पॉपकॉर्न , नमकीन काजू , आलू चिप्स , नमकीन मक्खन , प्रोसेस्ड फूड , डिब्बाबंद अचार - मुरब्बे , टमेटो व सोया सॉस , बिस्कुट , केक , पेस्ट्री , वड़ा , डोसा , उत्तपम , आइसक्रीम।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;फैट&lt;/span&gt; : खाने में एक महीने में घी - तेल - मक्खन तीनों को मिलाकर सिर्फ आधा किलो से ज्यादा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए , यानी एक दिन में 15 ग्राम से ज्यादा नहीं। छोले - भठूरे , समोसे , पकौड़े आदि तली - भुनी चीजें खाने से बीपी बढ़ता है। खाना बनाने में सरसों , मूंगफली व सूरजमुखी का तेल और कॉर्न ऑयल का इस्तेमाल अच्छा रहता है। ऑलिव ऑयल यानी जैतून के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;इनके अलावा वे चीजें भी कम लें जो पेशाब कम लाती हैं जैसे तीखे मिर्च - मसाले वाली चीजें। चीनी , चाय , कॉफी , कोला , नॉनवेज खाना और पेनकिलर दवाएं भी कम लें।&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;span style="color:#666666;"&gt;साभार नरेश तनेजा और नीतू सिंह&lt;/span&gt; &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7795254073331111490?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7795254073331111490/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7795254073331111490' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7795254073331111490'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7795254073331111490'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/10/blog-post.html' title='जब बीपी हो जाए हाई...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsRgZbNOldI/AAAAAAAAAKg/i9hcwbwtvNg/s72-c/high-blood-pressure-anxiety.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-3960348066851009041</id><published>2009-09-30T23:27:00.000-07:00</published><updated>2009-09-30T23:30:03.677-07:00</updated><title type='text'>रिश्ता पुराना है..</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsRMUCfj4FI/AAAAAAAAAKY/3T_1sblFr04/s1600-h/Picture+001.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387514961392296018" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 395px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsRMUCfj4FI/AAAAAAAAAKY/3T_1sblFr04/s400/Picture+001.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रूठने मनाने का सिलसिला पुराना है..&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;यही शायद रिश्तो में मिठास भरता है... &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;प्यार और लड़ाई का रिश्ता पुराना है..&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;यही तो सबको करीब लाता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रिश्तो में कड़वाहट आम बात है..&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;लेकिन उनमें मिठास भरीए तो बात है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रूठने मनाने का सिलसिला पुराना है..&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-3960348066851009041?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/3960348066851009041/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=3960348066851009041' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/3960348066851009041'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/3960348066851009041'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_4144.html' title='रिश्ता पुराना है..'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsRMUCfj4FI/AAAAAAAAAKY/3T_1sblFr04/s72-c/Picture+001.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7409909513141734328</id><published>2009-09-30T04:34:00.000-07:00</published><updated>2009-09-30T04:57:30.018-07:00</updated><title type='text'>जिदंगी</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsNHjiVBm2I/AAAAAAAAAKQ/PaU6sJgWjDc/s1600-h/zindagi.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387228255101229922" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 308px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsNHjiVBm2I/AAAAAAAAAKQ/PaU6sJgWjDc/s400/zindagi.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या कहूं जिदंगी भी क्या चीज़ होती है...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;पल में खूबसुरत तो पल में बदरंग होती है..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या कहूं जिदंगी भी क्या चीज़ होती है..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कभी मासुम तो कभी होश उड़ा देती है..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या कहूं कि जिदंगी भी क्या चीज़ होती है..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कभी बहुत कुछ दे देती है...तो कभी सब कुछ ले लेती है...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या कहूं जिदगी भी क्या चीज़ होती है..&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7409909513141734328?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7409909513141734328/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7409909513141734328' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7409909513141734328'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7409909513141734328'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_6071.html' title='जिदंगी'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsNHjiVBm2I/AAAAAAAAAKQ/PaU6sJgWjDc/s72-c/zindagi.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-4669148587544358453</id><published>2009-09-30T00:56:00.000-07:00</published><updated>2009-09-30T01:07:00.356-07:00</updated><title type='text'>'मीठी' बीमारी से कैसे बचें</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsMRg6XPQaI/AAAAAAAAAKI/MqOmcKF27S8/s1600-h/diabetes-symptoms2.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5387168836385456546" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 322px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsMRg6XPQaI/AAAAAAAAAKI/MqOmcKF27S8/s400/diabetes-symptoms2.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दुनिया में हर 10 सेकंड में एक मौत होती है डायबीटीज से। जी हां , नाम बेशक शुगर है लेकिन यह बीमारी धीमे जहर की तरह शरीर को खोखला करती है। गौर करनेवाली बात यह है कि दुनिया का हर 5 वां डायबीटीज मरीज भारतीय है। यही वजह है कि भारत डायबीटिक कैपिटल कहलाता है। लेकिन लाइफस्टाइल में सुधारकर इस बीमारी को खुद से दूर रखा जा सकता है।&lt;/span&gt; &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;डायबीटीज से कैसे बचा जा सकता है , एक्सपर्ट्स से बात करके बता रही हैं प्रियंका सिंह :&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;डायबीटीज क्या है ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;डायबीटीज या शुगर लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब पैंक्रियाज नामक ग्लैंड शरीर में इंसुलिन बनाना कम कर देता है या बंद कर देता है , तो यह बीमारी हो जाती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसकी मदद के बिना सेल्स शुगर ( ग्लूकोज ) को एनर्जी के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाते और यह बढ़ा हुआ शुगर लेवल डायबीटीज के रूप में सामने आता है। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण प्रकट होने में 10-15 साल लग जाते हैं। वैसे , 45-50 फीसदी मरीज वे होते हैं , जिनके परिवार में पहले से किसी को डायबीटीज रही हो।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;&lt;strong&gt;डायबीटीज कितनी तरह की होती है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;डायबीटीज को मुख्यत : दो वर्गों में बांटा जा सकता है : टाइप 1 या इंसुलिन आधारित डायबीटीज : इसमें इंसुलिन हॉर्मोन बनना पूरी तरह से बंद हो जाता है। ऐसा किसी एंटीबॉडीज की वजह से बीटा सेल्स के पूरी तरह काम करना बंद करने से होता है। ऐसे में शरीर में ग्लूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। ऐसा न करने पर मरीज बेहोश हो सकता है और कभी - कभी कोमा में भी चला जाता है। यह 3 से 25 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा होती है। इसके मरीज काफी कम होते हैं।&lt;br /&gt;टाइप टू या बिना इंसुलिन आधारित डायबीटीज : इसमें इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पैंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है। इस तरह की डायबीटीज आमतौर पर व्यस्कों में ही पाई जाती है और इंसुलिन आधारित डायबीटीज की तुलना में कम गंभीर होती है। डायबीटीज के 90 फीसदी मरीज इसी कैटिगरी में आते हैं। एक्सरसाइज , बैलेंस्ड डाइट और दवाइयों से इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। डायबीटीज है तो किस MS"&gt;डॉक्टर के पास जाना चाहिए ? डायबीटीज का इलाज एंडोक्रिनॉलजिस्ट करते हैं। वैसे किसी भी ट्रेंड एमडी से डायबीटीज का इलाज कराया जा सकता है। अगर वह अपने नाम के आगे डायबीटॉजलिस्ट लिखता है तो और अच्छा है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;&lt;strong&gt;क्या वायरस के इन्फेक्शन से भी डायबीटीज की आशंका होती है ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;कुछ परिस्थितियों में वायरस का इन्फेक्शन भी डायबीटीज की वजह होता है। राइनो वायरस का इन्फेक्शन होने पर ये पैंक्रियाज ग्लैंड में मौजूद बीटा सेल्स को नष्ट कर देते हैं। वायरस से लड़ने के लिए शरीर में पैदा हुए एंटीबॉडीज भी पैंक्रियाज पर अटैक करके बीटा सेल्स पर बुरा असर डालते हैं। नतीजतन , इंसुलिन बनना बंद हो जाता है या कम हो जाता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;डायबीटीज से कौन - कौन सी दिक्कतें आती हैं ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;कमजोरी , हाथ - पैरों का कांपना , सुनने में दिक्कत , कंधे में दर्द या जाम हो जाना। इसके अलावा मसूड़ों में सूजन , आंखों से कम दिखने लगना , याददाश्त कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;&lt;strong&gt;क्या कुछ दवाएं भी बुरा असर डालती हैं ?&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;मूत्रवर्धक , हाई बीपी स्टेरॉयड , कार्टीजोन , स्किन की बीमारियों की दवाएं और गर्भ - निरोधक दवाएं लगातार 6 महीने से ज्यादा वक्त तक लेते रहने से पैंक्रियाज के काम करने पर बुरा असर पड़ता है। इससे इंसुलिन बनना कम हो जाता है और डायबीटीज की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा , दिल की बीमारी होने या पैंक्रियाज ग्लैंड में सूजन होने पर डायबीटीज होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्यों हो जाती है शुगर की बीमारी&lt;/span&gt; ? &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;खानदानी बीमारी : अगर परिवार में किसी को डायबीटीज रही हो तो आशंका बढ़ जाती है। उम्र : कभी भी हो सकती है , पर 80 फीसदी मामलों में 50 साल के बाद होती है। गलत खानपान : कम प्रोटीन , कम फाइबर वाली और तली - भुनी चीजें और जंक फूड खाना। मोटापा : बीएमआई 25 से ज्यादा हो , कमर का घेरा महिलाओं में 35 इंच और पुरुषों में 40 इंच से ज्यादा हो। सेडेंटरी लाइफस्टाइल : लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना और एक्सरसाइज न करना। स्ट्रेस : ज्यादा तनाव में रहना और पूरा आराम न करना। बीपी : कम उम्र में हाई बीपी , हार्ट प्रॉब्लम या खून में कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा होना। दवाएं : हाई बीपी , जोड़ों के दर्द आदि में दिए जानेवाले स्टेरॉयड , कार्टीजोन , स्किन की बीमारियों की दवाएं और गर्भ - निरोधक दवाएं प्रेग्नेंसी : महिला को प्रेग्नेंसी के वक्त शुगर रही हो या बच्चा बेहद मोटा पैदा हुआ हो। शुगर की जांच के लिए &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कौन - कौन से टेस्ट कराने चाहिए ?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;25 साल की उम्र में साल में एक बार ब्लड शुगर टेस्ट करा लें। शुगर लेवल थोड़ा भी ज्यादा आता है या फैमिली हिस्ट्री है तो ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट जरूर कराएं। जिनकी फैमिली हिस्ट्री है , वे तीन महीने में जांच कराएं। प्रेग्नेंसी के दौरान डायबीटीज होने पर बच्चे को इस बीमारी की कितनी आशंका होती है ? ऐसे में बच्चे को यह बीमारी होने के 27 फीसदी चांस होते हैं। ऐसी 40 फीसदी मांओं को ऐहतियात न बरतने पर चार साल के अंदर डायबीटीज हो जाती है। बच्चों को इस बीमारी से दूर रखने के लिए मोटापे से बचाएं।&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-4669148587544358453?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/4669148587544358453/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=4669148587544358453' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4669148587544358453'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4669148587544358453'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_30.html' title='&apos;मीठी&apos; बीमारी से कैसे बचें'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsMRg6XPQaI/AAAAAAAAAKI/MqOmcKF27S8/s72-c/diabetes-symptoms2.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8786231096751143627</id><published>2009-09-29T01:43:00.000-07:00</published><updated>2009-09-29T01:56:39.475-07:00</updated><title type='text'>कयामत का कोचीन!</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsHLeWYtLaI/AAAAAAAAAKA/yK-_apL7PbQ/s1600-h/cochin.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5386810351577542050" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 150px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsHLeWYtLaI/AAAAAAAAAKA/yK-_apL7PbQ/s400/cochin.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;देश के दक्षिण-पश्चिमी तट पर बसा कोचीन अपनी लोकेशन की वजह से देश के इतिहास में एक अलग ही जगह रखता है। केरल के इ स खूबसूरत शहर पर अरब, ब्रिटिश, चाइनीज, डच, पुर्तगाली वगैरह सभ्यताओं की छाप साफ नजर आती है। भू मध्य रेखा के पास होने के अलावा, समुद व पहाड़ियों के भी इसके करीब होने से यहां खूबसूरत नजारों के साथ अच्छे मौसम को भी एंजॉय किया जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या देखें&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;चाइनीज फिशिंग नेट्स ये खासतौर पर कोचीन में ही यूज होती हैं। माना जाता है कि चीन के शासक कुबलई खान के दौर के व्यापारी इन्हें यहां लाए थे। दिलचस्प बात यह है कि ये नेट्स बस कोचीन में ही मिलती हैं और चीन में नहीं। फोर्ट कोचीन और वायपीन के आसपास के पूरे क्षेत्र में इनका जाल देखा जा सकता है।&lt;br /&gt;फोर्ट कोचीन बीच सूर्यास्त के समय इन बीचों पर टहलना और दूर से जहाजों को देखना एक यादगार अनुभव रहेगा। बीच के किनारे कई यूरोपियन स्टाइल के बंगले भी देखे जा सकते हैं। साथ ही, यहां ताजी मछली से बनी कई डिशेज का स्वाद भी चखा जा सकता है।&lt;br /&gt;वास्को हाउस रोस स्ट्रीट पर बना वास्को हाउस देश के सबसे पुराने पुर्तगाली हाउसेज में से एक है और माना जाता है कि वास्को डि गामा यहां रहे थे।&lt;br /&gt;डच पैलेस इसे डचों ने बनवाया था और 17वीं शताब्दी में उन्होंने इसमें कुछ बदलाव कर इसे कोचीन के राजा को दे दिया था। यहां रामायण और महाभारत से जुड़ीं तमाम पेंटिंग्स देखी जा सकती हैं।&lt;br /&gt;बोलगट्टी पैलेस मेनलैंड से थोड़ी देर की बोट राइड पर बोलगट्टी आइलैंड पर स्थित है यह पैलेस, जिसे फिलहाल केरल टूरिज्म के होटल में बदल दिया गया है। गोल्फ कोर्स और बेहतरीन नजारों वाला यह पैलेस एक पॉप्युलर पिकनिक स्पॉट है।&lt;br /&gt;हिल पैलेस 19वीं सदी के कोचीन के राजा द्वारा बनवाए गए इस महल को फिलहाल एक म्यूजियम में बदल दिया गया है, जहां शाही परिवार की तमाम चीजों को रखा गया है।&lt;br /&gt;पल्लिपुरम यह बेहद पुराने यूरोपियन फोर्ट्स में से एक है, जिन्हें पुर्तगालों ने 1503 में बनवाया था।&lt;br /&gt;मंगलवन बर्ड सेंचुरी शहर के मध्य में बनी इस सेंचुरी में पक्षियों की कई प्रजातियों को देखा जा सकता है।&lt;br /&gt;केरल म्यूजियम केरल के कल्चर, इतिहास, पेंटिंग्स, मशहूर हस्तियों के बारे में जानने के लिए यह म्यूजियम बेस्ट जगह है।&lt;br /&gt;चेरई बीच तैराकी का मजा देने वाला यह बीच मेनलैंड से हटकर व्यपीन नाम के छोटे आइलैंड के पास है।&lt;br /&gt;मरीन ड्राइव बैकवॉटर की वजह से बना यह कोस्टल पाथवे दोपहर और शाम का वक्त बिताने के लिए बेस्ट है। यहां नावों, टैंकर्स, पैसिंजर बोट्स फिशिंग बोट्स के नजारे खूब देखे जा सकते हैं।&lt;br /&gt;एलिफेंट सेंचुरी दुनिया में अपनी तरह की अनूठी से सेंचुरी में आप हाथियों को करीब से देखने व जानने का मौका आपको मिलेगा। यह गुरुवयूर मंदिर के पास स्थित है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;धामिर्क स्थल&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;सेंट फ्रांसेस चर्च यूरोपियंस द्वारा बनवाया गया यह देश का सबसे पुराना चर्च है। अपनी तीसरी विजिट के दौरान बीमार होने से वास्को डि गामा का मृत्यु केरल में हुई थी और तब उन्हें इसी चर्च में दफनाया गया था।&lt;br /&gt;गुरुवयूर यहां के इस मशहूर श्री कृष्णा टेंपल में हर साल 10 मिलियन से भी ज्यादा तीर्थ यात्री आती हैं। कहा जाता है कि जातिवाद से हटकर सभी के लिए अपनी द्वार खोलने वाला यह पहला मंदिर है।&lt;br /&gt;ज्यू सायनागॉज डच पैलेस के पास 1568 में बनी यह बिल्डिंग चाइनीज और बेल्जियन चीजों से सजी है, जहां कोचीन के पुराने समय को सहज ही महसूस किया जा सकता है।&lt;br /&gt;त्रिचूर केरल की कल्चरल कैपिटल कहलाने वाले त्रिचूर में भगवान शिव को समर्पित एक शानदार मंदिर है।&lt;br /&gt;सैंटा क्रूज बेसिलिका फोर्ट कोचीन में बनी इस चर्च को पहले 1505 में पुर्तगालों ने बनवाया था और 1558 में इसे केथेड्रेल का नाम दिया गया। ब्रिटिश शासकों ने इसे 1795 में नष्ट कर दिया था। मौजूदा स्वरूप 1905 का बना है, जिसे बेसिलिका का स्टेटस पाप जॉन पॉल 2 ने 1984 में दिया था।&lt;br /&gt;चेरामन मस्जिद लगभग 629 एडी में बनी इस मस्जिद को देश में बनी पहली मस्जिद माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें हिंदू आर्ट और आकिर्टेक्चर का प्रभाव नजर आता है।&lt;br /&gt;जैन मंदिर यहां का धर्मनाथ जैन मंदिर 100 से भी पुराना है और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।&lt;br /&gt;त्रिक्ककारा मंदिर कोचीन से 10 किलोमीटर दूर बने इस मंदिर की शान ओणम के त्योहार के दौरान देखते ही बनती है। यहां भगवान विष्णु को वामन के रूप में पूजा जाता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;क्या करें&lt;/span&gt; बोट राइड इर्नाकुलम को फोर्ट कोचीन और मेट्टनचेरी से अलग करने वाली बैकवॉटर लाइन पर आपको तमाम छोटे व मध्यम साइज के आइलैंड मिलेंगे। यह राइड आपको एक अलग तरह का यादगार अनुभव देगी।&lt;br /&gt;बीच वॉक सुबह और शाम को यहां की सुकून भरी बीच वॉक का एक अलग ही मजा है।&lt;br /&gt;आयुर्वेद मसाज छुट्टियों में यहां की आयुर्वेद मसाज करवा कर आप निश्चित रूप से तरोताजा हो जाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;जाने का बेहतरीन समय :&lt;/span&gt; अक्टूबर से मार्च &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कहां रुकें:&lt;/span&gt; ठहरने के लिए यहां आपको तमाम बड़े और बजट होटल मिल जाएंगे। फिर यहां ट्रीहाउस और हाउस बोट में ठहरने की व्यवस्था भी है, जो आपको एक अलग रोमांच देगी।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कैसे घूमें:&lt;/span&gt; कोचीन का लोकल बस नेटवर्क अच्छा है और आराम से उस पर घूम सकते हैं। इसके अलावा, थोड़ी दूरी को ऑटोरिक्शा के जरिए पूरा किया जा सकता है, तो लंबी दूर के लिए टैक्सी लेना ठीक रहेगा।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कैसे पहुंचे:&lt;/span&gt; कोचीन हवाई, रेल और सड़क मार्ग से तमाम शहरों से जुड़ा है, इसलिए यहां पहुंचने में आपको खास परेशानी नहीं होगी।&lt;br /&gt;साभार : मेधा चावला बतरा &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8786231096751143627?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8786231096751143627/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8786231096751143627' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8786231096751143627'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8786231096751143627'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_29.html' title='कयामत का कोचीन!'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SsHLeWYtLaI/AAAAAAAAAKA/yK-_apL7PbQ/s72-c/cochin.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-5891357305372278360</id><published>2009-09-26T02:19:00.000-07:00</published><updated>2009-09-26T02:40:23.963-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कविता'/><title type='text'>त्योहार</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sr3fo5b661I/AAAAAAAAAJ4/RMVHNLOQ-eA/s1600-h/3012192932649ix1bu8.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5385706623110671186" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sr3fo5b661I/AAAAAAAAAJ4/RMVHNLOQ-eA/s400/3012192932649ix1bu8.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;त्योहार &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;जिंदगी के रास्तों पर सजी दुकानों से हो गए हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;समान से लेकर दुकान तक &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;सबकुछ बिकाऊ है यहां।&lt;br /&gt;बेमानी सी लगती हैं त्योहारों की ये दुकानें। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;खुशियों से लेकर परम्पराओं तक &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;सबकुछ सेल में सजा है। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;पैसों से चंद मिनटों में सबकुछ खरीद लेने की &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;कुछ जिदों के आगे &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;फिलहाल मेरे एहसासों की जेबें खाली है । &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="left"&gt;&lt;span style="color:#660000;"&gt;शालिनी राय तारीख २६ सितम्बर 2009&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-5891357305372278360?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/5891357305372278360/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=5891357305372278360' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5891357305372278360'/><link rel='self' 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दीवाली दें चांदी के नोट का गिफ्ट</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sr3Vwx7eluI/AAAAAAAAAJw/wpKB06PNvB0/s1600-h/Diwali-Messages.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5385695763418224354" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sr3Vwx7eluI/AAAAAAAAAJw/wpKB06PNvB0/s400/Diwali-Messages.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;त्योहारी सीजन में हमारे यहां चांदी के सिक्के देने का काफी प्रचलन है। मगर इस बार आपको गिफ्ट के तौर पर अगर 'चांदी के नोट' मिलें, तो हैरान न हों। गिफ्ट बाजार में बदलाव लाने के प्रयास में सोना-चांदी का कारोबार करने वाली कंपनियों ने इस बार चांदी के सिक्कों के साथ चांदी के नोट बाजार में पेश करने का फैसला किया है। इसका आगाज सरकारी कंपनी एमएमटीसी ने किया है।&lt;br /&gt;चांदी के नोट 20, 50 और 100 रुपये के शेप के बनाए गए हैं। इसमें असली नोटों की तुलना में बस अंतर यह है कि इसमें आराध्य देवी-देवताओं की तस्वीर बनी हुई हैं। फिलहाल चांदी के नोटों को 20 से लेकर 100 ग्राम की रेंज में बनाया गया है। इनकी कीमत 700 से 3800 रुपये रखी गई है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;एमएमटीसी के अधिकारियों का कहना है कि इस बार सोने-चांदी के जितने गिफ्ट आइटम बाजार में पेश किए गए हैं, उनमें सबसे अधिक डिमांड चांदी के नोटों की है। लोग काफी दिलचस्पी के साथ इसकी खरीदारी कर रहे हैं। बेशक प्राइस रेंज में यह चांदी की सिक्कों की तुलना में कुछ ज्यादा है, मगर लुक और साइज के लिहाज से यह सिक्कों से ज्यादा बड़ी है। यही कारण है कि इसकी लागत बढ़ जाती है।&lt;br /&gt;चांदी के नोटों में लोगों की रुचि को देखते हुए जूलर्स ने इसको कम प्राइस रेंज में बाजार में उतारने का मन बनाया है। अगले कुछ दिनों में 5 से 10 ग्राम के चांदी के नोट भी बाजार में उतारने की योजना बनाई गई है। कमोडिटी बाजार की सर्वे एजंसी विनायक इंक के प्रमुख विजय सिंह का कहना है कि भारतीय ग्राहक भी अब हर चीज में बदलाव चाहते हैं। एक लंबे समय से सिक्कों का प्रचलन त्योहारी सीजन में रहा है। चांदी या सोने की खरीदारी की त्योहारी सीजन में परंपरा रही है। सिक्कों की जगह अगर चांदी के नोट बाजार में आ रहे हैं, तो बदलाव के तौर पर इसका स्वागत होना तय है।&lt;br /&gt;कारोबारियों का कहना है कि चांदी के नोटों की कीमतों में और कमी आ सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसमें चांदी की कितनी शुद्धता होती है। आम तौर पर चांदी-999 के रेंज को पूर्ण शुद्ध माना जाता है। इसमें चांदी की शुद्धता 91 पर्सेंट की होती है। लोगों में चांदी के नोटों के प्रति दिलचस्पी को देखते हुए आम आदमी तक चांदी के नोट पहुंचाने के लिए इसकी शुद्धता को थोड़ा कम करके इसकी कीमत को भी कम किया जा सकता है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7160699885030765354?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7160699885030765354/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7160699885030765354' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7160699885030765354'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7160699885030765354'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_26.html' title='इस दीवाली दें चांदी के नोट का गिफ्ट'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sr3Vwx7eluI/AAAAAAAAAJw/wpKB06PNvB0/s72-c/Diwali-Messages.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-1287408361453576931</id><published>2009-09-24T02:48:00.000-07:00</published><updated>2009-09-24T03:01:23.181-07:00</updated><title type='text'>वजन घटाना चाहते हैं?</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrtDSCyDo5I/AAAAAAAAAJo/ujblvzE1BFs/s1600-h/fat-friend.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5384971756715090834" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 399px; CURSOR: hand; HEIGHT: 396px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrtDSCyDo5I/AAAAAAAAAJo/ujblvzE1BFs/s400/fat-friend.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;क्या आप भी अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके काम की है। एक नई ग्रीन कॉफी बनाने वालों रिसर्चरों ने दावा किया है कि इसको ब्रेकफास्ट से पहले पीने पर डाइट चार्ट में बिना कोई बदलाव किए ही एक महीने में 2 किलोग्राम तक वजन कम किया जा सकता है।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;रिसर्चरों का दावा है कि रोज हरी कॉफी पीने से अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा पाया जा सकता है। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि हरी कॉफी का क्लोरोजेनिक एसिड आहार नली में शुगर के अवशोषण को घटाता है और फैट के खत्म होने की प्रक्रिया को तेज करता है। वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में पाया कि जिन्होंने रोज़ एक कप हरी कॉफी पी, उनका दो सप्ताह में वजन करीब डेढ़ किलो और एक महीने में दो किलो कम हो गया।&lt;br /&gt;ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने वैज्ञिनक लॉरेंट फ्रेसनेल के हवाले से कहा, 'कॉफी हरी चाय के समान है। इसके कच्चे और बिना भुने स्वरूप में मौजूद तत्व पाचन बढ़ाते हैं और वजन कम करने में मदद करते हैं। दुर्भाग्य से यह तत्व भूनने के दौरान नष्ट हो जाते हैं इसलिए नियमित तौर पर पी जाने वाली कॉफी में नहीं मिलते।' शोध के परिणाम जरनल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में छपे हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-1287408361453576931?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/1287408361453576931/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=1287408361453576931' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1287408361453576931'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1287408361453576931'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_24.html' title='वजन घटाना चाहते हैं?'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrtDSCyDo5I/AAAAAAAAAJo/ujblvzE1BFs/s72-c/fat-friend.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-2308427805496310813</id><published>2009-09-22T02:13:00.000-07:00</published><updated>2009-09-22T03:24:19.190-07:00</updated><category scheme='http://www.blogger.com/atom/ns#' term='कविता'/><title type='text'>घर एक सपना</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SriXXku3QII/AAAAAAAAAJg/8d4w7ea4MKk/s1600-h/midnight_dreams.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5384219785774448770" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 314px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SriXXku3QII/AAAAAAAAAJg/8d4w7ea4MKk/s400/midnight_dreams.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;घर एक सपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बन जाये तो अपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बन के टूट जाए तो बेगाना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;घर एक सपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;घर अपनो के बीच का आगंन होता है..&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बच्चो की किलकारियों से गूजता सपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;घर एक सपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;पापा मम्मी चाचा चाची से अपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रिश्तों के मजबूत  धागों  का गवाह होता है... &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;घर एक सपना होता है...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;शालिनी राय &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-2308427805496310813?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/2308427805496310813/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=2308427805496310813' title='6 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2308427805496310813'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2308427805496310813'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_235.html' title='घर एक सपना'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SriXXku3QII/AAAAAAAAAJg/8d4w7ea4MKk/s72-c/midnight_dreams.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>6</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7398798561914938895</id><published>2009-09-22T01:20:00.000-07:00</published><updated>2009-09-22T02:00:10.803-07:00</updated><title type='text'>एनसीआर में अपना घर पाने का अच्छा मौका...</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SriRuW_4BvI/AAAAAAAAAJY/MgCKV0RyPcI/s1600-h/House_with_Keys.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5384213580154930930" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 266px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SriRuW_4BvI/AAAAAAAAAJY/MgCKV0RyPcI/s400/House_with_Keys.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;अगर आप एनसीआर में अपने घर का सपना साकार करना चाहते हैं तो आपके पास एक बढ़िया मौका है। नैशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (एनबीसीसी) साउथ दिल्ली के घिटोरनी में अफोर्डेबल हाउसिंग का एक प्रोजेक्ट अगले साल जनवरी में ला रहा है। इसमें पहले चरण में दो से तीन हजार मकान बनाए जाएंगे।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;घिटोरनी प्रोजेक्ट सभी के लिए ओपन रहेगा। मकान का अलॉटमेंट लॉटरी सिस्टम से होगा।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; जमीन को लेकर पैदा हुए गतिरोध के बाद हाई कोर्ट ने इस प्रोजेक्ट पर ओके सिग्नल दे दिया है। दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी सहमति जता दी है। &lt;span style="color:#009900;"&gt;उम्मीद है कि सभी प्रशासनिक अनिवार्यताएं एक-दो महीने में पूरी हो जाएंगी।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;एनबीसीसी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अरूप रॉय चौधरी ने एनबीटी को बताया कि गुड़गांव में हीरो होंडा चौक के पास सेक्टर-37 में भी पांच हजार मकान बनाए जाएंगे। &lt;span style="color:#3333ff;"&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;यह प्रोजेक्ट इसी साल दीपावली के आसपास अक्टूबर में लॉन्च किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट को सरकारी कर्मचारियों और पब्लिक सेक्टर कर्मियों की जरूरत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। दो बेडरूम का मकान 20 से 25 लाख रुपये और तीन बेडरूम का घर 30 से 35 लाख रुपये के बीच होगा। लोन की सुविधा भी उपलब्ध होगी।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;इसके अलावा, दिल्ली बॉर्डर के पास यूपी में लोनी-बागपत हाइवे पर खेकड़ा क्षेत्र में विभिन्न कैटिगरी के घर बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। &lt;span style="color:#009900;"&gt;ये मकान सात लाख 25 हजार रुपये से लेकर 17 लाख 35 हजार रुपये के होंगे। इन मकानों का सुपर बिल्टअप एरिया 493 वर्ग फुट से लेकर 1100 वर्ग फुट तक होगा। एक बेडरूम, ड्रॉइंग-डाइनिंग, किचन और टॉयलेट वाले घर की कीमत सात लाख 25 हजार रुपये होगी। दो बेडरूम वाला मकान 10 लाख 35 हजार रुपये और तीन बेडरूम वाला घर 17 लाख 80 हजार रुपये में मिल सकेगा। रिटायर्ड केन्द्रीय कर्मचारियों, सरकारी व पब्लिक सेक्टर कर्मचारियों को पांच प्रतिशत की छूट मिलेगी। मकान डेढ़-दो साल में बनकर तैयार हो जाएंगे।&lt;/span&gt; इनके लिए अप्लाई करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।&lt;br /&gt;एनबीसीसी एनसीआर के अलावा देश के अन्य हिस्सों में भी अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्टों के प्लान तैयार कर रहा है। कोलकाता में ऐसा प्रोजेक्ट फाइनल स्टेज पर है। पटना और कोच्चि में जल्द प्रोजेक्ट शुरू होंगे। इसके लिए राज्य सरकारों से जमीन मांगी गई है। प्राइवेट स्तर पर जमीन खरीदने की भी योजना है। एनबीसीसी के ये मकान क्वॉलिटी और कीमत के मामले में खरे उतरेंगे।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;घिटोरनी, साउथ दिल्ली&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;मकान : फर्स्ट फेज में 2000-3000 लॉन्चिंग : जनवरी में कोई भी कर सकेगा अप्लाई&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;गुड़गांव, सेक्टर-37&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;मकान : 5000 लॉन्चिंग : अक्टूबर में टू बेडरूम : 20-25 लाख रु. थ्री बेडरूम : 30-35 लाख रु.&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;खेकड़ा, लोनी-बागपत हाइवे&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;वन बेडरूम : 7 लाख 25 हजार रु. टू बेडरूम : 10 लाख 35 हजार रु. थ्री बेडरूम : 17 लाख 80 हजार रु. रिटायर्ड कर्मियों को 5 पर्सेंट छूट डेढ़-दो साल में तैयार होंगे &lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;अप्लाई करने की प्रक्रिया शुरू&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;साभार विभावसु तिवारी&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7398798561914938895?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7398798561914938895/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7398798561914938895' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7398798561914938895'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7398798561914938895'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_22.html' title='एनसीआर में अपना घर पाने का अच्छा मौका...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SriRuW_4BvI/AAAAAAAAAJY/MgCKV0RyPcI/s72-c/House_with_Keys.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-4433603034963750951</id><published>2009-09-18T07:16:00.000-07:00</published><updated>2009-09-18T07:47:02.922-07:00</updated><title type='text'>मेरी प्यारी मां...</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrOXvY4v5TI/AAAAAAAAAJQ/E_4DkKGzwBQ/s1600-h/baby-name.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5382812820027991346" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 266px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrOXvY4v5TI/AAAAAAAAAJQ/E_4DkKGzwBQ/s400/baby-name.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आइये आपको एक कहानी सुनाते है....एक बच्चा जब  दुनिया में कदम रखने को तैयार था ..बच्चे ने भगवान से कहा कि कल आप हमें नीचे धरती पर भेजने वाले है...वहां मैं कैसे रहूंगा..तो भगवान ने कहा सब परीयों में से मैने एक परी तुम्हारे लिए पसंद करके नीचे भेज दी है...और वो तुम्हारा नीचे इंतज़ार कर रही है....वो तुम्हारा वहां क्याल रखेगी..तब बच्चे ने पूछा कि मैं तो यहां बस गाने सुनता हूं .. खेलता हूं...और खुश रहता हूं...वहां कैसे सुनुंगा। तो भगवान ने कहा कि वहां जो परी है..वो तुम्हें गाने सुनायेगी...और खुश भी रखेगी...फिर बच्चे ने सवाल किया कि लेकिन मैं वहां उनकी भाषा कैसे समझूंगा...तो भगवान ने कहा कि वहां जो परी है..वो तुम्हें सब सिखा देगी...तब बच्चे ने कहा लेकिन मैं तब क्या करूंगा..जब आपसे बात करनी होगी..तो भगवान ने कहा कि वो तुम्हारे हाथ जोड़ कर मुझसे बात करना भी सिखा देगी..तब बच्चे ने कहा मैने सुना है..वहां बहुत बुरे लोग भी है....उनसे मुझे कौन बचाएंगा..तो भगवान ने कहाकि परी तुम्हें सबसे बचाके रखेगी...तुम्हारा बहुत ध्यान रखेगी...तब बच्चे ने कहा लेकिन मैं तभी भी बहुत दुखी रहूंगा..क्योकि आपको नहीं देख पाऊंगा..तो भगवान ने कहा कि परी तुम्हें फिर से वापस मेरे पास और नजदीक रहने के भी तरीके बतांएगी....फिर जब बच्चे के एकदम जाने का वक्त हो गया...बच्चे ने भगवान से पूछा कि अच्छा मुझे उसका नाम तो बता दिजिए..तो भगवान ने कहा नाम तो नहीं बता सकता लेकिन तुम उसे मां कहोगे...तो ये वो परी जो भगवान ने हमारे लिए धरती पर भेजी है....और हमें उसकी हमेशा इज्जत और प्यार करना चाहिए...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-4433603034963750951?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/4433603034963750951/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=4433603034963750951' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4433603034963750951'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4433603034963750951'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_8731.html' title='मेरी प्यारी मां...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrOXvY4v5TI/AAAAAAAAAJQ/E_4DkKGzwBQ/s72-c/baby-name.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-6498008347280597163</id><published>2009-09-18T01:43:00.000-07:00</published><updated>2009-09-18T02:29:32.783-07:00</updated><title type='text'>प्यार</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrNSzTDyqsI/AAAAAAAAAJI/YGkpEZEyK3s/s1600-h/untitled.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5382737020880857794" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 257px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrNSzTDyqsI/AAAAAAAAAJI/YGkpEZEyK3s/s400/untitled.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;प्यार को समझने की कोशिश में लगी रही...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;लेकिन वो हमेशा एक पहेली बन कर मिलती रही..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;जब लगता कि एक छोर तो पूरा हुआ,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;तभी फिर नए छोर के साथ मिलती रही..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;और ये सिलसिला लंबा होता गया...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;जब भी लगा कि बूझ&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt; लिया &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;तो फिर से एक नये रंग में खड़ी मिली..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;आखिर कब होगा ये सिलसिला पूरा &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;पूछा .तो कहने लगी कि यही तो प्यार है..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;जो तुम्हें हमेशा मिलती रही...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;em&gt;शालिनी राय १९ सितंबर&lt;/em&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-6498008347280597163?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/6498008347280597163/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=6498008347280597163' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6498008347280597163'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/6498008347280597163'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_7099.html' title='प्यार'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrNSzTDyqsI/AAAAAAAAAJI/YGkpEZEyK3s/s72-c/untitled.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-2342453932244876474</id><published>2009-09-18T00:45:00.000-07:00</published><updated>2009-09-18T02:15:18.157-07:00</updated><title type='text'>जिन्दगी</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrNAhxcv4pI/AAAAAAAAAI4/qAoqop3oaq4/s1600-h/1211368328.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5382716928591651474" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 272px; CURSOR: hand; HEIGHT: 365px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrNAhxcv4pI/AAAAAAAAAI4/qAoqop3oaq4/s400/1211368328.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;मैंने निखारने की कोशिश की&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;वो बिखरती चली गई..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;मैंने रंग भरने की कोशिश की&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;वो बदरंग हो गई...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;मैंने जब उसे संभाला...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;उसे सहारा दिया..&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;वो बेसहारा हो गई...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;मैंने बहुत कोशिश की,&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;फिर थक गई &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;तो उसने अपने आगोश में बैठा लिया...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#cc0000;"&gt;&lt;strong&gt;और जिन्दगी बन गई...&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div align="center"&gt;&lt;span style="color:#000000;"&gt;&lt;em&gt;शालिनी राय १९ सितंबर&lt;/em&gt; &lt;/span&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-2342453932244876474?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/2342453932244876474/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=2342453932244876474' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2342453932244876474'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2342453932244876474'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_18.html' title='जिन्दगी'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrNAhxcv4pI/AAAAAAAAAI4/qAoqop3oaq4/s72-c/1211368328.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-2768056406630009310</id><published>2009-09-17T02:11:00.000-07:00</published><updated>2009-09-17T02:29:08.830-07:00</updated><title type='text'>इतिहास के नजारों से भरा वारंगल</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrIBNgTotsI/AAAAAAAAAIw/VNNPIHUK47I/s1600-h/thousand-pillar-temple-warangal.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5382365836183385794" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 350px; CURSOR: hand; HEIGHT: 250px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrIBNgTotsI/AAAAAAAAAIw/VNNPIHUK47I/s400/thousand-pillar-temple-warangal.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;अगर आप इतिहास में झांकने और खूबसूरत नजारों को देखने की हसरत रखते हैं, तो आंध्र प्रदेश का वारंगल आपके लिए एक आइडल स्पॉट हो सकता है। जानते हैं इसके बारे में : इतिहास में दिलचस्पी रखने वालों के लिए देश में देखने लायक जगहों की कमी नहीं है। आंध्र प्रदेश का चौथा बड़ा शहर वारंगल भी इन्हीं में से एक है, जहां आप ऐतिहासिक मंदिरों व किलों में जाकर बीते समय को करीब से महसूस कर सकते हैं। इनमें से कई जगहें तो तीसरी शताब्दी में बनी हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;&lt;strong&gt;क्या देखें :&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;वारंगल फोर्ट&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; 13वीं शताब्दी का यह किला हनमकोन्डा से 12 किलोमीटर दूरी पर है और यहां देखने लायक सबसे दिलचस्प जगह है। इसके अवशेष बीते समय की तमाम कहानियां सुनाने को बेताब नजर आते हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;हजार खंभों का टेंपल&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; यह मंदिर कैकत्य आर्किटेक्चर व स्कल्प्चर का बेहतरीन उदाहरण है। इसके अंदर बनी रुदा देवी को 1163 में बनाया गया बताया जाता है। यह चौलकयन आर्किटेक्चर में बनी सितारे के आकार बनी श्राइन है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;भद्र काली मंदिर&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; हनमकोन्डा और वारंगल के बीच स्थित एक पहाड़ी की चोटी पर बना यह मंदिर काली मां की पत्थर की मूर्ति के लिए मशहूर है। इसी के पास बने प्लैनेटोरियम और म्यूजिकल गार्डन भी लोगों के आकर्षण का केन्द हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;जैन मंदिर&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; दो हजार साल पुराने इस मंदिर में लोगों की गहरी आस्था है। मंदिर में तीर्थंकारों की खूबसूरत मूर्तियां लगी हैं, तो इस पर हुआ काम भी देखने लायक है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कोलनुपाक कोलनुपाक&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; वारांगल व हैदराबाद के बीच स्थित है। यह जगह 11वीं शताब्दी में कल्याणी चौलक्यास की दूसरी राजधानी हुआ करती थी। उस दौरान यह गांव जैन धर्म के लोगों में काफी मशहूर था और इसकी अहमियत आज भी बरकरार है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;श्री वीरनारायण मंदिर&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; चौलक्यन अंदाज में यह मंदिर 1104 में बनाया गया था।&lt;br /&gt;पाखल लेक वारंगल से 50 किलोमीटर दूर बनी यह लेक 30 स्क्वेयर किलोमीटर के क्षेत्र में फैली है। इस लेक को कैकत्य राजा, गणपतिदेव ने 1213 में कृष्णा नदी के हिस्से से बनवाया था।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;रामप्पा मंदिर&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; इसे रामलिंगेश्वर मंदिर भी कहा जाता है और यह वारंगल से 70 किलोमीटर दूर पलमपत गांव में स्थित है। 1213 में बना यह खूबसूरत मंदिर कैकत्य राजधानी के भव्य इतिहास की गवाही देता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कोलनुपका म्यूजियम&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; कोलनुपका तब चर्चा में आया था, जब कल्याणी चौल्कयों ने 11वीं शताब्दी में इसे अपनी दूसरी राजधानी बनाया था। उस समय की तमाम चीजें एक म्यूजियम में सहेज कर रखी गई हैं, जो वाकई देखने लायक हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कब जाएं :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; अक्टूबर से मार्च का समय वारंगल जाने के लिए बेहतरीन है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#33cc00;"&gt;कैसे जाएं :&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; हैदराबाद से वारंगल की दूरी 140 किलोमीटर है और यह निकटतम एयरपोर्ट है। वारंगल सभी मुख्य शहरों से रेल व सड़क मार्ग से जुड़ा है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-2768056406630009310?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/2768056406630009310/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=2768056406630009310' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2768056406630009310'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2768056406630009310'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_17.html' title='इतिहास के नजारों से भरा वारंगल'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SrIBNgTotsI/AAAAAAAAAIw/VNNPIHUK47I/s72-c/thousand-pillar-temple-warangal.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-9215872437625314563</id><published>2009-09-15T02:10:00.000-07:00</published><updated>2009-09-15T02:36:22.994-07:00</updated><title type='text'>...तो फिट रहेंगे आप</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9faAQ-O_I/AAAAAAAAAIo/GvJ69EmG7Lc/s1600-h/how-to-detox-your-body.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5381624980083457010" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 323px; CURSOR: hand; HEIGHT: 335px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9faAQ-O_I/AAAAAAAAAIo/GvJ69EmG7Lc/s400/how-to-detox-your-body.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9eJCptsOI/AAAAAAAAAIg/wmJa8g2hNac/s1600-h/exerciseGirls.gif"&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#6633ff;"&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;आप खुद को फिट रखने के लिए हजारों रुपये फिटनेस क्लब की मेंबरशिप या फिर पर्सनल ट्रेनर रखने में बर्बाद कर देते हैं। आप चाहें तो घर में ही सिंपल वर्क आउट करके खुद को फिट रख सकते हैं। घर में आप प्राइवेसी और अपनी सुविधा के मुताबिक वर्क आउट कर सकते हैं। अगर आपका मन अकेले एक्सरसाइज करने का है, तो भी घर में वर्क आउट करना बेस्ट ऑप्शन है। यही नहीं, जब आपका मन हो तो आप अपने दोस्त को भी एक्सरसाइज के लिए बुला सकते हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;आप घर में एक्सरसाइज प्रोग्राम शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। यहां हम आपको कुछ सिंपल वर्क आउट बता रहे हैं, जिन्हें आप घर में फॉलो कर सकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;सीढ़ी चढ़ना&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; आपके घर में सीढ़ियां तो होंगी ही। ऐसे में आप सीढि़यों पर चढ़ने व उतरने जैसा वर्क आउट कर सकते हैं। यह बहुत अच्छी फिजिकल एक्टिविटी है। आप अपना एक्सरसाइज पहली सीढ़ी से शुरू करें। पहली सीढ़ी पर चढ़ेंगे फिर वापस उतर जाएं। ऐसे करीब 10 बार करें। उसके बाद दो सीढ़ी ऊपर चढ़े और फिर वापस उतर जाएं। इस स्टेप को भी 10 बार करें। अगर आप रोजाना ये स्टेप करते हैं, तो आपकी फैट जरूर कम होगी। अगर सीढ़ी चढ़ते समय आपका सांस फूलने या हांफने लगा है, तो यह एक्सरसाइज धीरे-धीरे शुरू करें। मसलन आप शुरुआत तीन सीढ़ी से करें और हफ्ते व महीने के साथ इसे बढ़ाते जाएं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;लाउंड्री लिफ्ट्स&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; अगर आप रोजाना कपड़ों से भरा टब या बाल्टी उठाते हैं, तो यह आपके लिए बहुत ही फायदेमंद है। यह वर्कआउट आपकी बाजू की अच्छी एक्सरसाइज करता है। आप कपड़ों से भरे टब को अपने सिर पर रखें, फिर उसे नीचे उतारें। यह स्टेप तीन बार करें। इससे आपके शोल्डर, अपर आर्म्स और बैक मसल्स की एक्सरसाइज होगी। वहीं आप अपनी बैक की फैट कम करने के लिए भी लाउंड्री लिफ्ट्स कर सकते हैं। इसके लिए आप टब को चेस्ट तक ऊपर उठाएं और फिर इसे नीचे रख दें। ऐसा आप तीन से चार बार करें।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कमर्शल ब्रेक एक्सरसाइज&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; अगर आप अपना खाली वक्त टीवी देखकर बिताते हैं, तो आप कमर्शल ब्रेक एक्सरसाइज कर सकते हैं। आपके सीरियल के बीच जैसे ही ऐड आए, आप तुरंत खड़े हो जाएं और एक्सरसाइज करने लगें। आप एक्सरसाइज में जंपिंग, पुश-अप्स, उछलना-कूदना कुछ भी कर सकते हैं, ताकि आपकी हार्ट बीट्स बढ़े। फिर जैसे ही आपका शो शुरू हो जाए, आप आराम से बैठ जाएं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;रोलिंग चेयर एक्सरसाइज&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; क्या आप अपना ज्यादातर वक्त ऑफिस में गुजारते हैं और आपकी चेयर में रोलिंग व्हील लगे हैं, तो आप ऑफिस में ही आर्म्स एक्सरसाइज कर सकते हैं। आप बेहतर बाइसेप्स के लिए यह एक्सरसाइज कर सकते हैं। आप दोनों हाथों से टेबल को पकड़ लें और फिर अपनी चेयर को आगे व पीछे करें।&lt;br /&gt;मल्टीटास्किंग एंजॉय करें सबकी लाइफ बहुत बिजी है, ऐसे में वर्क आउट के लिए खासतौर पर समय निकाल पाना मुश्किल है। तो बेहतर है कि आप फिट रहने के लिए मल्टी टास्क का फंडा फॉलो करें। अगर सिंक में बहुत सारे बर्तन पड़े हैं, तो में तमाम काम करते हुए उन्हें उनकी जगह पर रखें। इससे आपका काम और वर्क आउट दोनों हो जाएगा। इसी तरह आप ऑफिस में मल्टी भी एक साथ कई तरह के काम कर सकते हैं। बहरहाल, अगर आप इन सिंपल स्टेप्स को फॉलो करेंगे, तो हमेशा फिट रहेंगे। बस एक बार इन्हें शुरू करके देखें।&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-9215872437625314563?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/9215872437625314563/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=9215872437625314563' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/9215872437625314563'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/9215872437625314563'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_7613.html' title='...तो फिट रहेंगे आप'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9faAQ-O_I/AAAAAAAAAIo/GvJ69EmG7Lc/s72-c/how-to-detox-your-body.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-1778773266179051195</id><published>2009-09-15T01:40:00.000-07:00</published><updated>2009-09-15T01:56:59.217-07:00</updated><title type='text'>टेस्ट जिनमें दिल को मिलते हैं ग्रेड</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9WsJw9sRI/AAAAAAAAAIY/d5Ysf54PSMs/s1600-h/j0433218.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5381615396266553618" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9WsJw9sRI/AAAAAAAAAIY/d5Ysf54PSMs/s400/j0433218.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दिल को हमेशा जवां रखने का बस थोड़ा अलर्ट रहने की जरूरत है। सिर्फ कुछ रुटीन टेस्ट आपके दिल का ताजा हाल को बयां कर देंगे। इनमें कुछ वॉर्निंग साइन दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं और सेकंड लाइन टेस्ट और इलाज के लिए बात करें।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;दिल्ली हार्ट ऐंड लंग इंस्टिट्यूट के चेयरमैन डॉ. के. के. सेठी कहते हैं कि दिल का हाल जानने का सबसे आसान तरीका है रिस्क प्रोफाइलिंग, जिसमें कुछ सामान्य से ब्लड टेस्ट कराने होते हैं। मसलन ब्लड शुगर लेवल (खाली पेट और खाने के दो घंटे बाद) और कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए लिपिड प्रोफाइल। इसके अलावा कमर की चौड़ाई व ब्लड प्रेशर की रीडिंग कराएं। इनका स्तर अगर सामान्य से ऊपर जा चुका है तो समझिए कि दिल के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। ये प्राइमरी टेस्ट रूटीन जांच का हिस्सा होते हैं, जिन्हें 21 की उम्र के बाद हर तीन साल और 30 के बाद हर साल जरूर कराना चाहिए। जिनका डायबीटीज, हाई बीपी या दिल की बीमारी की फैमिली हिस्ट्री है उन्हें हर छह महीने में ये टेस्ट कराने चाहिए।&lt;br /&gt;डॉ. सेठी का कहना है कि प्राइमरी टेस्ट में कोई दिक्कत आती है तो आमतौर पर लाइफस्टाइल और डाइट मैनेजमेंट से उसे कंट्रोल कर लिया जाता है। अगर मामला इससे ऊपर का है तो डॉक्टर हाई सेंसेटिव सीआरपी इन्फ्लेमेशन (आर्टरी में सूजन का पता लगाने के लिए) करते हैं, जिसके कारण भविष्य में हार्ट अटैक आ सकता है। इसके अलावा सीटी स्कैन करते हैं, जिसमें हार्ट की इमेज लेने की जरूरत नहीं होती, सिर्फ हार्ट में कैल्शियम की स्कोरिंग करते हैं। इसकी स्कोरिंग जीरो हो तो बहुत अच्छा है और 50 से ऊपर होने का मतलब है दिल की गंभीर समस्या।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;आईएमटी (इंडिमा मीडिया थिकनेस), जिसमें ब्रेन को ब्लड सप्लाई करने वाली गर्दन की नस का अल्ट्रासाउंड करते हैं इसमें आर्टरी लाइन की थिकनेस बढ़ने का मतलब है नस में कोलेस्ट्रॉल का जमा होना।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; रॉकलैंड हॉस्पिटल के सीनियर काडिर्योलॉजिस्ट डॉ. ए. के. सूद का कहना है कि इस स्थिति में इलाज से दिल को सुरक्षित रखा जा सकता है। लाइफ स्टाइल में बदलाव के चलते दिक्कतें तेजी से बढ़ रही हैं, ऐसे में हर उम्र के लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;हेल्थ टिप&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;80 का फॉर्म्युला (डॉ. के. के. अग्रवाल)&lt;br /&gt;- अगर दिल को 80 साल की उम्र से ज्यादा समय तक जवां रखना है तो फास्टिंग शुगर, पेट की चौड़ाई, ब्लड शुगर लेवल, बैड कोलेस्ट्रॉल और दिल की धड़कन का लेवल 80 से नीचे रखें।&lt;br /&gt;ब्लड प्रेशर टेस्ट&lt;br /&gt;- कैटिगरी उम्र अपर बीपी लोअर बीपी&lt;br /&gt;- नॉर्मल एडल्ट 130 से नीचे 85 से नीचे&lt;br /&gt;कोलेस्ट्रॉल टेस्ट - इसमें दो टेस्ट अहम हैं।&lt;br /&gt;1. &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;लिपिड प्रोफाइल&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;एलडीएल (बैड) कोलेस्ट्रॉल एचडीएल (गुड कोलेस्ट्रॉल)&lt;br /&gt;- फैमिली हिस्ट्री हो तो पुरुषों में 45 और महिलाओं में&lt;br /&gt;- 70 से नीचे वरना 100 से 55 से ज्यादा होना चाहिए।&lt;br /&gt;नीचे रखें&lt;br /&gt;2. &lt;span style="color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;फास्टिंग ट्राई ग्लिसराइड कोलेस्ट्रॉल &lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;125 नॉर्मल&lt;br /&gt;कमर की चौड़ाई&lt;br /&gt;पुरुषों में महिलाओं में&lt;br /&gt;36 इंच से कम 32 इंच से कम&lt;br /&gt;ब्लड शुगर लेवल&lt;br /&gt;90 से ऊपर पर शुरू हो जाती है हार्ट प्रॉब्लम&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-1778773266179051195?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/1778773266179051195/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=1778773266179051195' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1778773266179051195'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1778773266179051195'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_15.html' title='टेस्ट जिनमें दिल को मिलते हैं ग्रेड'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sq9WsJw9sRI/AAAAAAAAAIY/d5Ysf54PSMs/s72-c/j0433218.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-5284895636453335744</id><published>2009-09-10T02:34:00.000-07:00</published><updated>2009-09-10T02:52:35.280-07:00</updated><title type='text'>कैसे कमाएं म्युचुअल फंड से मुनाफा?</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqjLFFKlwGI/AAAAAAAAAIQ/LbJiI27T1o4/s1600-h/image_7641.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379773043040436322" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqjLFFKlwGI/AAAAAAAAAIQ/LbJiI27T1o4/s400/image_7641.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;क्या चुनें...डेट या इक्विटी?बाजार में स्थिरता के साथ सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, ऐसे में निवेशकों को अब यह भ्रम सता रहा है कि वह किस तरह के फंड में निवेश करें। क्या उन्हें बढ़िया रिटर्न के लिए डायवर्सिफाई इक्विटी फंड चुनना चाहिए या फिर सुरक्षित दांव के लिए डेट फंड के विकल्प तलाशने चाहिए। यह बात जगजाहिर है कि तेजी के बाजार में इक्विटी निवेश, निवेशकों को सबसे ज्यादा मुनाफा देता है। डेट फंड ब्याज दरों में गिरावट के हालात में बढि़या रिटर्न देते हैं।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;मुद्रास्फीति दर वापसी का खौफ दिखा रही है, ऐसे में ब्याज दरों में आगे गिरावट नहीं आएगी।मौजूदा मैक्रोइकनॉमिक हालात में डेट फंड ने ऐतिहासिक रिटर्न से कमतर प्रदर्शन दिखा सकते हैं। डेट फंड में निवेश केवल तभी फायदेमंद है, जब निवेशक आर्थिक रिकवरी को लेकर कोई खास उम्मीदें नहीं रखता। आर्थिक रिकवरी के मामले में विश्लेषकों के बीच भारी मतभेद हैं। इस मुद्दे पर स्पष्टता होना काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे ही एसेट एलोकेशन तय होती है। आखिरकार, हर निवेशक जोखिम के खास स्तर पर पोर्टफोलियो से बेहतर रिटर्न की तलाश में रहता है। अगर इक्विटी बाजार वास्तव में बढि़या रिटर्न देने की तैयारी कर रहे हैं, तो वे निश्चित रूप से इसमें हिस्सा लेना चाहेंगे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;क्या हो रणनीति...&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;मिडकैप और स्मॉलकैपएक बात जो निवेशकों को समझनी होगी, वह यह कि रिटर्न, जोखिम के साथ आता है। ऐसा जोखिम जो लंबी अवधि और चरणबद्ध निवेश रणनीति अपनाकर खत्म किया जा सकता है। लार्जकैप फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर होते हैं, जिन्हें लंबी अवधि का निवेश करना होता है और जो खरीदकर उसे बनाए रखने की रणनीति पर चलते हैं।जिन निवेशकों की जोखिम सहने की क्षमता ज्यादा होती है और जो स्टाइल फंड में निवेश को लेकर दिलचस्पी रखते हैं, उन्हें इक्विटी म्यूचुअल फंड को लेकन दो सूत्री रणनीति अपनानी चाहिए। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;पोर्टफोलियो का मुख्य अंश बढि़या डायवर्सिफिकेशन और अनुमान लगाने लायक म्यूचुअल फंड में निवेश किया जाना चाहिए, जो आगे चलकर बेहतर बाजार रिटर्न देते हैं। ऐसे रिटर्न के लिए पोर्टफोलियो का एक अंश सेक्टर केंद्रित फंड में लगाया जाना चाहिए। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;लचीलापन रखने वाले या स्मॉलकैप फंड पर भी गौर किया जा सकता है। आम तौर पर छोटी और मझोली कंपनियां बढि़या रिटर्न पैदा करने की क्षमता रखते हैं।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;अत्यधिक रिटर्न पाने के लिए क्या करें?&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;ज्यादा से ज्यादा रिटर्न बटोरने के लिए निवेशकों को लार्जकैप, मिडकैप और स्मॉलकैप के बीच संतुलन कायम करते हुए म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो तैयार करने की जरूरत होती है। ऐसा पोर्टफोलियो लार्जकैप इक्विटी की ओर जरूरत से ज्यादा झुका नहीं होना चाहिए और न ही ऐसे सेक्टर फंड पर केंदित होना चाहिए, जो मुनाफा तो काफी देते हैं, लेकिन साथ ही उनमें उथल-पुथल भी खूब होती है। उन्हें निश्चित रूप से मिडकैप और स्मॉल फंड में पैसा लगाना चाहिए। हालांकि, निवेश का अनुपात क्या और किस तरह होगा, यह निवेशक की जोखिम सहने की क्षमता पर निर्भर करता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;यह याद रखना जरूरी है कि कई अन्य पहलू हैं, जिन पर विचार किया जाना जरूरी है, इनमें यह देखना भी शामिल है कि क्या फंड ग्रोथ में विशेषज्ञता रखता है या वैल्यू में। बाजार के अलग-अलग कैप फंड के बारे में जानना बढ़िया कदम है, जो आपको यह बता देगा कि कौन सा फंड आपके पोर्टफोलियो और निवेश के स्टाइल से मेल खाता है।साभार शुभा गणेश जी &lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-5284895636453335744?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/5284895636453335744/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=5284895636453335744' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5284895636453335744'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5284895636453335744'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_9246.html' title='कैसे कमाएं म्युचुअल फंड से मुनाफा?'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqjLFFKlwGI/AAAAAAAAAIQ/LbJiI27T1o4/s72-c/image_7641.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7811323383582551904</id><published>2009-09-10T01:53:00.000-07:00</published><updated>2009-09-10T02:20:12.958-07:00</updated><title type='text'>सांसदों के ऐशोआराम</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqjEE9gWvMI/AAAAAAAAAII/KP0pH1fcOnE/s1600-h/neta.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379765344402848962" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 302px; CURSOR: hand; HEIGHT: 320px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqjEE9gWvMI/AAAAAAAAAII/KP0pH1fcOnE/s400/neta.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;एक तरफ तो सरकार अपने खर्चे में कटौती की बात करती है, लाख दलीले पेश करती है.... सभी चीजों पर से धीरे धीरे सबसीडी भी हटा रही है...वहीं दूसरी तरफ खुद सरकार के मंत्रियों के खर्चे है कि कम होने का नाम ही नहीं ले रहे है...नेता तो ऐसे हमारे पैसे पर ऐश कर रहे है...कि कहना ही क्या...नए सांसदों का होटेल में ठहरने का ही बिल साढ़े तीन करोड़ से ऊपर है। दो मंत्रियों एस. एम. कृ ष्णा और उनके जूनियर शशि थरूर हाल ही में फाइव स्टार होटेल से हटे हैं। और नए सांसदों की तो जैसे लॉटरी निकल आयी है.... पिछले तीन महीने से सम्राट होटेल में उनके ठहरने का खर्चा 3 करोड़ 71 लाख रुपए बैठा है। और यह बिल सरकार के सिर गया है। इस बिल का भुगतान शहरी विकास मंत्रालय करेगी। सुभाष चन्द अग्रवाल द्वारा दाखिल की गई एक आरटीआई के जवाब में यह जानकारी दी गई है। 74 एमपी मई से जुलाई तक सम्राट होटेल में ठहरे थे। वैसे इस होटल में पर नाइट सुपर डीलक्स या डीलक्स सुइट का किराया 9000-8000 रुपए है। पर इन्हें 6000 रुपए की दर से दिया गया। लोक सभा हाउस कमेटी के अध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल ने बताया: चूंकि पुराने लोगों द्वारा फ्लैट आदि खाली करने में कुछ वक्त लग जाता है। फिर उस खाली फ्लैट की मरम्मत, चूना आदि कराने में कुछ टाइम लग जाता है। इसलिए नए सांसदों को होटेल में ठहराया गया। तो कुल मिलाकर इनके कहने का मतलब ये है..कि हम मेहनत से कमाएं और फिर अपनी गाढ़ी कमाई से अपने परिवार का पेट पालने के साथ इनके ऐशोआराम को भी झेले..आखिर हम कर भी क्या सकते है...आखिर ये हमारे नेता जी जो है...&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7811323383582551904?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7811323383582551904/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7811323383582551904' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7811323383582551904'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7811323383582551904'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_10.html' title='सांसदों के ऐशोआराम'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqjEE9gWvMI/AAAAAAAAAII/KP0pH1fcOnE/s72-c/neta.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7867178703704120161</id><published>2009-09-09T04:14:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T04:56:56.206-07:00</updated><title type='text'>खेती बनी मिसाल</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqeRfwJVOWI/AAAAAAAAAHw/TZqI40pD47s/s1600-h/bundelkhand_100.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379428254603360610" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 198px; CURSOR: hand; HEIGHT: 144px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqeRfwJVOWI/AAAAAAAAAHw/TZqI40pD47s/s400/bundelkhand_100.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt; &lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;बुंदेलखंड इन दिनों सूखे की चपेट में है। हर तरफ सूखे पड़े खेत, पेड़-पौधे, नदियां और तालाब मानों मेघ से बरसने की गुहार लगा रहे हों। इसी बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा के प्रेम सिंह ने खेती करते हुए एक मिसाल कायम की है। उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग की नौकरी छोड़कर खेती को अपनाया। 1989 से वे खेती के साथ तरह-तरह के प्रयोग कर रहे हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;श्री सिंह कहते हैं, ‘मैंने कुछ नया नहीं किया। यह सारा पारंपरिक ज्ञान का कमाल है। जिसे हम भूलते जा रहे हैं। जरूरत है इसे याद रखने की।’प्रेम सिंह ने खेती करना 1987 से प्रारंभ किया। उन्होंने रासायनिक खेती से शुरूआत की। दो साल के बाद ही उन्हें लगा कि इस तरह बात नहीं बनेगी। अगले साल ही उन्होंने जैविक खाद का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। उन्हें रासायनिक खेती किसी साजिश की तरह लगती है। वे कहते हैं, ‘ऐसा लगता है जैसे हमारी परंपरा से हमें अलग करने की कोई साजिश रची जा रही हो। हमें आत्मनिर्भर की जगह, किसी और पर निर्भर बनाया जा रहा हो। &lt;span style="color:#009900;"&gt;प्रेम सिंह ने आत्मनिर्भर होने के लिए ही अपने खेतों में रासायनिक खाद की जगह जैविक खाद का इस्तेमाल किया। बीजों के मामले में आत्मनिर्भर होने के लिए अपना बीज बैंक बनाया। जिसमें तकरीबन पचास किस्म के फल-सब्जी-अनाज के बीज उपलब्ध हैं। उन्होंने खेती में कम से कम पानी खर्च करने की पध्दति को भी अपनाया। 1989 में जब उन्होंने जैविक खाद के साथ खेती की शुरूआत की तो उस वक्त बुंदेलखंड में फूलों की खेती को कोई किसान आर्थिक लाभ की वस्तु नहीं मानता था। इसके बावजूद सिंह ने उस समय फूलों की खेती की। उस वक्त प्रयोग के तौर पर की गई इस खेती से उन्हें 18,000 हजार रुपए का फायदा हुआ।&lt;/span&gt; इस तरह उत्साह बढ़ा और उन्होंने फूल के साथ फल भी लगाए। सिंह कहते हैं, ‘फल से उन्हें अनाज की अपेक्षा बीस गुना अधिक आमदनी हुई।’&lt;br /&gt;पानी को कम मात्र में खर्च करके खेती करने के उनके हुनर की चर्चा करने पर वे कहते हैं, ‘पानी की जरूरत जड़ों को नहीं होती, पत्तों को होती है। और आमतौर पर हम पानी जड़ों में ही डालते हैं। जबकि पत्ते अपने लिए पानी वातावरण से बटोरते हैं।’ वे आगे कहते हैं, ‘यदि पौधों के साथ लगाई जाने वाली क्यारियों को जड़ों से जरा दूर रखें और क्यारियों में पानी दें तो जड़ें पानी लेने के लिए आगे बढ़ेंगी। जडें ज़ितने बड़े क्षेत्र में फैलेगा, पेड़ उतना ही बड़ा और घना होगा।’&lt;br /&gt;आज से दस साल पहले तक गेहूं की एक किस्म ‘कठिया’ को बुंदेलखंड के लोग खाना तो क्या देखना तक पसंद नहीं करते थे। उसकी खेती को प्रेम सिंह ने अपने यहां प्रोत्साहित किया। कठिया की एक खूबी यह है कि इसमें रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल करने पर इसकी फसल सूख जाएगी। इसे अधिक पानी की जरूरत भी नहीं होती। जबकि यह साधारण गेहूं से अधिक पौष्टिक होता है। &lt;span style="color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;बकौल प्रेम सिंह, ‘कठिया की खेती को प्रोत्साहित करने की वजह से मुझे ‘स्लो फूड’ नाम की एक संस्था ने अपनी बात दुनिया भर के किसानों के सामने रखने के लिए कनाडा और जर्मनी लेकर गई।&lt;/strong&gt; &lt;/span&gt;जहां आए तमाम विद्वान मेरी बात से सहमत हुए।’ वे ‘गांव’ ब्रांड नाम के साथ अचार, मुरब्बा, शर्बत, दलिया आदि बना रहे हैं। जिसे देश में ही नहीं, देश के बाहर भी पसंद किया जा रहा है..&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;सौजन्य आशीष कुमार&lt;/em&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7867178703704120161?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7867178703704120161/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7867178703704120161' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7867178703704120161'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7867178703704120161'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_3150.html' title='खेती बनी मिसाल'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqeRfwJVOWI/AAAAAAAAAHw/TZqI40pD47s/s72-c/bundelkhand_100.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8713680973667012925</id><published>2009-09-09T02:59:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T03:49:02.699-07:00</updated><title type='text'>कौन सा मोबाइल,डिजिटल  कैमरा खरीदूं?</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqeH0Zx4ZUI/AAAAAAAAAHg/XOMEKRjQg6U/s1600-h/files.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379417614260397378" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqeH0Zx4ZUI/AAAAAAAAAHg/XOMEKRjQg6U/s400/files.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;डिजिटल कैमरे हो या मोबाइल खरीदने के टाइम पर हमारे मन में कई तरह के ढेरों सवाल आते हैं। इन्ही सवालों को काफी हद तक महसुस कर हम बताना चाहेंगे इनसे जुड़े कुछ खास बातें...कि ब्रैंड अहम है लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि आप जो प्रॉडक्ट ले रहे हैं उसमें फीचर क्या हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;डिजिटल कैमरे में आपको देखना चाहिए कि मेगा पिक्सल कितना है, पिक्चर क्वॉलिटी अच्छी चाहिए, तो ऑप्टिक जूम जितना ज्यादा हो, उतना बढ़िया। निकिल के बजाय बैटरी लिथियम आयन होगी, तो दाम थोड़े ज्यादा होंगे। इसके अलावा आप अलग-अलग कैमरों के डिस्प्ले स्क्रीन के साइज की भी तुलना कीजिए। दरअसल, &lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;हर कैमरे में फीचर सभी होते हैं, लेकिन एक प्राइस रेंज पर आपको क्या-क्या और कितना मिलता है, यह जरूर चेक करना चाहिए। जहां तक ब्रैंड्स की बात है, तो सोनी की ब्रैंड वैल्यू ज्यादा है इसलिए हो सकता है कि ज्यादा दाम पर औरों से कम फीचर मिलें।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; इसी तरह कोडक वैल्यू फॉर मनी रेंज के लिए मशहूर है और आपको कम प्राइस में भी मैक्सिमम मिल सकता है। किसी भी ब्रैंड में यह जरूर पता लगाएं कि वॉरंटी कितने वक्त की है और उसका आफ्टर सेल सर्विस नेटवर्क कैसा है। क्योंकि कैमरा खरीदने के बाद ये बेहद काम आते हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;वहीं मोबाइल बाजार में बढ़ते कंपटीशन के साथ 5000 रुपये की प्राइस रेंज में ग्राहक ज्यादा से ज्यादा फीचर मांग रहा है। यही वजह है कि बढ़िया ब्रैंड के अलावा कई नई कंपनियां भी इस रेंज में अपने हैंडसेट ला रही हैं। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;इंटेक्स, सेजम और स्पाइस ने इस प्राइस रेंज में कई फीचर वाले हैंडसेटों की नई रेंज पेश की है। ब्रैंड वैल्यू के हिसाब से चलें तो नोकिया सुपरनोवा सीरीज का 7210 काफी पसंद किया जा रहा है, जिसमें दो मेगापिक्सल कैमरा, दो जीबी तक एक्सपेंडेबल मेमॉरी, ब्लूटूथ, एफएम और म्यूजिक प्लेयर जैसे बढ़िया फीचर हैं। &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;इसी तरह 5130 एक्सप्रेस म्यूजिक फोन भी हिट है, जिसमें ये सभी तमाम फीचर और ज्यादा बेहतर म्यूजिक प्लेयर है। थोड़ा ज्यादा प्राइस में रफ ऐंड टफ सैमसंग मरीन है, जिसमें मेमॉरी 8 जीबी तक बढ़ा सकते हैं, लेकिन कैमरा 1.3 मेगापिक्सल ही है। सैमसंग मेट्रो और एलजी जीएम200 अपने मल्टीपल फीचर की वजह से आपको लंबी विकल्प लिस्ट देते हैं। नोकिया 5800 बेहद कामयाब म्यूजिक फोन है, खासकर उनके लिए जो टचस्क्रीन के शौकीन हैं। फोन की म्यूजिक क्वॉलिटी और बैटरी बैकअप जबर्दस्त रहा है। यूजर फीडबैक में हमें अभी तक कोई बड़ी शिकायत नहीं मिली है। हां, टचस्क्रीन पर लोगों को एसएमएस टाइप करने में जरूर थोड़ी दिक्कत आई है। अगर आप एसएमएस जंकी नहीं है तो चलेगा क्योंकि टचस्क्रीन पर टाइप करने में थोड़े वक्त में प्रैक्टिस हो जाती है। कैमरा 3.15 मेगापिक्सल है, लेकिन कुछ लोगों को पिक्चर क्वॉलिटी उम्मीद के मुताबिक नहीं लगी हैं। इन मामूली शिकायतों को छोड़ दें तो लोगों को इसका एक्सपीरियंस गजब का लगा है, कई लोग तो इसे कम दाम में आई-फोन का विकल्प भी मानने लगे हैं। पिछले दिनों इसके दाम भी घटे हैं।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;सौजन्य राम गोपाल नवभारत टाइम्स &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8713680973667012925?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8713680973667012925/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8713680973667012925' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8713680973667012925'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8713680973667012925'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_6233.html' title='कौन सा मोबाइल,डिजिटल  कैमरा खरीदूं?'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqeH0Zx4ZUI/AAAAAAAAAHg/XOMEKRjQg6U/s72-c/files.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-5993688762145491064</id><published>2009-09-09T02:41:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T02:42:56.525-07:00</updated><title type='text'>होंडा सीअल लाई नई होंडा सिविक</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sqd4k4VMy7I/AAAAAAAAAHY/QwlR8cm-UP4/s1600-h/4986513.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379400854909275058" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 266px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sqd4k4VMy7I/AAAAAAAAAHY/QwlR8cm-UP4/s400/4986513.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;होंडा सीअल कार्स इंडिया लिमिटेड (HSCI) ने मंगलवार को नई दिल्ली में नई होंडा सिविक लॉन्च की। नई होंडा सिविक को नई एडवांस्ड टेक्नॉलॉजी के साथ लॉन्च किया गया है। यह तीन वेरिएंट में मिलेगी।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; &lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-5993688762145491064?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/5993688762145491064/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=5993688762145491064' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5993688762145491064'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5993688762145491064'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_1118.html' title='होंडा सीअल लाई नई होंडा सिविक'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sqd4k4VMy7I/AAAAAAAAAHY/QwlR8cm-UP4/s72-c/4986513.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-205805724702297892</id><published>2009-09-09T02:33:00.000-07:00</published><updated>2009-09-09T02:39:58.792-07:00</updated><title type='text'>कर्ज़ लेना है तो जल्दी करो...क्यों?</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sqd32XmnFoI/AAAAAAAAAHQ/bgUKYHS7ZQg/s1600-h/condo-loans-mortgage.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379400055849948802" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sqd32XmnFoI/AAAAAAAAAHQ/bgUKYHS7ZQg/s400/condo-loans-mortgage.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;वित्तीय सुस्ती के दौरान कर्ज की मांग बढ़ाने के लिए बैंक सितंबर के बाद से ब्याज दरों में लगातार कमी कर रहे थे, लेकिन अब अर्थव्यवस्था में सुधार के संकेतों को देखते हुए बैंक ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के संकेत दे रहे हैं। बैंकरों के मुताबिक चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में ब्याज दरें अपने निचले स्तर से उबर चुकी हैं। बैंकरों का कहना है कि अर्थव्यवस्था में सुधार के साथ आने वाले महीनों में ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;फिक्की-आईबीए की ओर से आयोजित एक सेमिनार के दौरान आईसीआईसीआई बैंक की मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ चंदा कोचर ने कहा, &lt;span style="color:#009900;"&gt;&lt;strong&gt;'मौजूदा वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में ब्याज दरें अपने निचले स्तर से ऊपर उठ गई हैं। इसके बाद धीरे-धीरे ब्याज दरें बढ़ेंगी।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; अब कर्ज लेने की रफ्तार बढ़ने के साथ ब्याज दरों में इजाफा होगा।'&lt;br /&gt;बिल्डरों द्वारा मकान के दामों में कमी करने से होम लोन बाजार में मांग फिर बढ़ी है। हालांकि, जिन क्षेत्रों में कीमतें कम नहीं हुई हैं, वहां मांग में अब भी कमी बरकरार है।&lt;br /&gt;आईडीबीआई बैंक के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश अग्रवाल ने भी कहा कि ब्याज दरें अपने निचले स्तर से निकल चुकी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;दिवाली के बाद ब्याज दरों में तेजी आ सकती है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;बस दिवाली तक की देर..फिर बढ़ेंगी ब्याज दरें 'ब्याज दरें बॉटम आउट हो चुकी हैं। ...दिवाली के बाद ब्याज दरों में तेजी आनी चाहिए।' उन्होंने कहा कि बाजार में मौजूद चुनौतियों के बावजूद दूसरी तिमाही में आईडीबीआई बैंक के नेट इंटरेस्ट मार्जिन(एनआईएम) पर कोई दबाव नहीं देखा गया है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर आदित्य पुरी का भी यही कहना है कि बैंक के एनआईएम पर किसी तरह का दबाव नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि बाजार की चुनौतीपूर्ण हालत के बाद भी दूसरी तिमाही में बैंक की ट्रेजरी आय पर किसी तरह का कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ने वाला है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-205805724702297892?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/205805724702297892/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=205805724702297892' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/205805724702297892'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/205805724702297892'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_09.html' title='कर्ज़ लेना है तो जल्दी करो...क्यों?'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sqd32XmnFoI/AAAAAAAAAHQ/bgUKYHS7ZQg/s72-c/condo-loans-mortgage.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-1940150954236180742</id><published>2009-09-08T01:58:00.000-07:00</published><updated>2009-09-08T02:15:34.653-07:00</updated><title type='text'>पर्सनल लोन का फंदा</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqYgK75ssEI/AAAAAAAAAHI/sjhHyV3zVHY/s1600-h/personal-loan-300x300.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5379022177191112770" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 300px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqYgK75ssEI/AAAAAAAAAHI/sjhHyV3zVHY/s400/personal-loan-300x300.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;लोन कई तरह के होते है..हम पहले ही इस बारे में बात कर चुके है....आज हम पर्सनल लोन के बारे में बात कर रहे है....पसर्नल लोन क्या है...इसे लेने के टाइम किस बात का ध्यान रखना चाहिए...इससे और लोन से छुटकारा पाने के बारे में यहां हम आपको जानकारी दे रहे हैं।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;संपत्तियों का इस्तेमाल करें-&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; पर्सनल लोन कई तरह के होते हैं और इनकी शर्तें और स्त्रोत भी अलग-अलग होते हैं। अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन या सिग्नेचर लोन के लिए आमतौर पर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है क्योंकि इनमें देनदार के लिए जोखिम अधिक होता है। &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;अगर आपने पर्सनल लोन लिया है और आपके पास घर, कार, जीवन बीमा पॉलिसी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), आरबीआई बॉन्ड, सोने के जेवर, बैंक एफडी, डिबेंचर और म्यूचुअल जैसी संपत्तियां मौजूद हैं तो आप इनका इस्तेमाल पर्सनल लोन से निजात पाने के लिए कर सकते हैं। अगर आप इन संपत्तियों के बदले बैंक से कर्ज लेते हैं तो ब्याज की दर कम होगी।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; इसके अलावा आपके पास कर्ज को एक साथ मिलाने का विकल्प भी मौजूद है। डेलॉइट इंडिया के डायरेक्टर (कंसल्टिंग), मोनीष शाह ने बताया, 'इसमें आपके सभी कर्ज एक लेनदार के पास मिला दिए जाते हैं और आपको केवल एक मासिक किस्त देनी होती है जो लंबी अवधि में आमतौर पर सस्ती पड़ती है।' &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;इसके अलावा आप कर्ज कम करने के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आप क्रेडिट की अवधि का चतुराई से इस्तेमाल कर जिंदगी कुछ आसान बना सकते हैं। अगर आप वेतनभोगी हैं तो अपनी कंपनी से एडवांस लेकर भी कर्ज का बोझ कम किया जा सकता है&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;, लेकिन ये दोनों विकल्प हमेशा काम नहीं आते। अगर आप होम लोन का भुगतान कर रहे हैं तो सस्ता कर्ज लेने का एक और जरिया मौजूदा कर्ज पर टॉप अप लोन लेने का है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;डिफॉल्ट से बचें-&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; अगर आपने पर्सनल लोन की किस्त चुकाने में डिफॉल्ट किया है और यह आपकी पहली चूक है तो आपके लिए पहला कदम बैंक से बातचीत कर समाधान निकालने का होगा। प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के एसोसिएट डायरेक्टर रॉबिन रॉय का कहना है, &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;'अगर डिफॉल्ट के पीछे नौकरी का जाना या स्वास्थ्य से जुड़े कारण हैं तो बैंक आमतौर पर केवल लंबित रकम पर पेनल्टी लगाता है जो लगभग दो फीसदी की होती है।' इसके अलावा आपके पास लोन को सिक्योर्ड लोन (घर और कार जैसी संपत्तियों के बदले) में तब्दील कराने का विकल्प भी है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; आप बैंक से बात कर सिक्योर्ड लोन ले सकते हैं और इसकी मासिक किस्त कम रखी जा सकती है। सिक्योर्ड लोन लेते समय इसकी अवधि और ब्याज दर पर जरूर ध्यान दें। फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;पर्सनल लोन को किसी अन्य कर्ज में तब्दील कराते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर आप इस कर्ज को लेकर डिफॉल्ट करते हैं तो आपकी संपत्ति बैंक जब्त कर सकता है और इसके बाद आपकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; रॉय का कहना है, 'आपको किसी आपात स्थिति या एकमुश्त रकम की जरूरत पड़ने पर परेशानी हो सकती है क्योंकि आपके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति नहीं बचेगी।' इसे देखते हुए सिक्योर्ड लोन लेना तभी समझदारी होगी जब आप अपनी मासिक आमदनी से इसकी किस्त का भुगतान करने की क्षमता रखते हों।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;अंतिम रास्ता-&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;-पर्सनल फाइनेंस के जानकारों का कहना है कि पर्सनल लोन का विकल्प तभी इस्तेमाल करना चाहिए जब आपके पास संपत्तियां मौजूद न हों और आपके पास किस्त के भुगतान की क्षमता हो। बंगलुरु की श्री सिडविन फाइनेंशियल सर्विसेस एंड इनवेस्टमेंट के डायरेक्टर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी), बी श्रीनिवासन के अनुसार, '&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;पर्सनल लोन का जरिया आपात जरूरत के समय लघु अवधि के उपाय के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए।' पर्सनल लोन लेने वाले ज्यादातर लोग नौकरीपेशा होते हैं और उन्हें कर्ज की जरूरत के लिए सबसे पहले उस बैंक से संपर्क करना चाहिए जहां उनका वेतन क्रेडिट होता है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; श्रीनिवासन ने कहा, 'बैंक के पास आपका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद होता है और वह आपको कर्ज देने में कुछ उदारता बरत सकता है।' फाइनेंशियल प्लानर्स मानते हैं कि पर्सनल लोन के मुकाबले क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने में ज्यादा जोखिम होता है। क्रेडिट कार्ड पर बहुत सा खर्च बिना जरूरत के भी किया जाता है और इससे आप पर कर्ज और ब्याज का बोझ काफी बढ़ सकता है। वेल्थकेयर सिक्योरिटीज के निदेशक मुकेश गुप्ता की सलाह है, &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;'क्रेडिट कार्ड पर उधार लेने के मुकाबले पर्सनल लोन सस्ता होता है। अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि काफी बढ़ गई है और इस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है तो आप इसे चुकाने के लिए पर्सनल लोन ले सकते हैं।'&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल का इस्तेमाल करें -&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; पर्सनल लोन की बेहतर डील के लिए आप अपनालोन और बैंकबाजार जैसे ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल पर जा सकते हैं। रॉय ने कहा, 'आपको ईएमआई और अन्य शुल्कों के आधार पर उस रकम की तुलना करनी चाहिए जो आप लोन की पूरी अवधि में चुकाएंगे। इसके अलावा &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;आप ब्याज दर को लेकर बैंक से मोलभाव भी कर सकते हैं।' फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि पर्सनल लोन लेते समय फ्लैट ब्याज दरों के झांसे में नहीं आना चाहिए।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; बहुत से मामलों में यह सस्ती दर लग सकती है लेकिन बाद में यह काफी महंगी साबित होती है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-1940150954236180742?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/1940150954236180742/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=1940150954236180742' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1940150954236180742'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/1940150954236180742'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_08.html' title='पर्सनल लोन का फंदा'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqYgK75ssEI/AAAAAAAAAHI/sjhHyV3zVHY/s72-c/personal-loan-300x300.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-5732716401527097403</id><published>2009-09-07T03:52:00.000-07:00</published><updated>2009-09-07T04:09:00.678-07:00</updated><title type='text'>मुट्ठीभर चावल से पेश की मिसाल</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqTpFuEESqI/AAAAAAAAAHA/Y1ZwstNnsGg/s1600-h/inspiration_quotes_graphics_b7.gif"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378680139460922018" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 341px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqTpFuEESqI/AAAAAAAAAHA/Y1ZwstNnsGg/s400/inspiration_quotes_graphics_b7.gif" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;सुदूर उत्तर पूर्व राज्य मिजोरम के एक छोटे से समुदाय ने एक मिसाल कायम कर यह सिद्ध कर दिया है कि मानव एकता, संकल्प और अथक प्रयास से क्या कुछ नहीं किया जा सकता। भले ही यह मामला केवल एक मुट्ठीभर चावल से खाद्य बैंक बनाने का ही क्यों न हो। इस पहल की शुरुआत वैसे तो ब्रिटिश शासनकाल में शुरू की गई थी, लेकिन अपने सकारात्मक प्रभाव और लोकप्रियता के कारण आज मिजोरम में इसे सामुदायिक खाद्य बैंक के अभियान का नाम दिया गया है।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय के इस अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसके इतिहास की जानकारी देते हुए बताया बात वर्ष 1914 की है, जब राज्य में महिलाओं के एक समूह ने चर्च की सामाजिक सेवा में चंदा देने की अपनी असमर्थता को दूर करने के लिए एक अनूठी सूझबूझ दिखाई और अपने समूह के सभी सदस्यों से एक-एक मुट्ठी चावल एकत्र करना शुरू कर दिया।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;इस प्रकार से जो चावल एकत्र हुआ, उसे स्थानीय बाजार में बेच दिया गया और जो कमाई हुई उसे चर्च में दान कर दिया। वर्ष 1914 में इस प्रकार से एकत्र किए गए चावलों को बेचकर केवल 80 रुपए इकट्ठा हुए थे और उसके 89 साल के बाद वर्ष 2003 के दौरान इसी प्रकार से एकत्र किए गए चावलों को बेचने पर चार लाख रुपए मिले।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;अधिकारी ने बताया इस अभियान की लोकप्रियता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि आज मिजोरम के सभी परिवारों में से करीबन &lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;86 प्रतिशत&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; लोग इस अभियान में भाग ले रहे हैं और इसे कामयाब और यादगार बनाने में लगे हुए हैं। आज हर परिवार के पास एक दान पात्र है, जिसमें एक-एक मुट्ठी चावल एकत्र किया जाता है।&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय ने इस अभियान में सामुदायिक भागीदारी से प्रभावित होकर सप्ताह में एक बार मुट्ठी भर चावल एकत्र करने की योजना बनाई और &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;इस चावल की बिक्री से जमा की गई धनराशि से नशीली दवाओं के सेवन की आदी महिलाओं की सहायता की जाएगी।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;यह कार्यक्रम मिजोरम के अजवाल, कोलासिन और चंफाई जिलों में संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय की क्षमता निर्माण और चेतना की समन्वित एचआईवी एड्स अनुक्रिया की परियोजना है, जो आज शहरी और देहाती दोनों इलाकों में चलाई जा रही है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;इस योजना के विस्तार कार्यक्रम के तहत अब तक 279 युवा महिलाओं को इस तरह से प्रशिक्षित किया गया है कि वे आगे चलकर लोगों को प्रशिक्षित कर सकें और सामुदायिक खाद्य बैंक के बारे में चेतना का प्रसार कर सकें। इसके परिणामस्वरूप 70 गाँवों से 147 क्विंटल चावल एकत्र किया गया और इसे बेचकर सभी कार्यकर्ताओं से मिलाकर कुल दो लाख रुपए की राशि जमा की गई। यह पूरी धनराशि अकाल के दौरान राहत का कार्य चलाने के लिए मिजोरम सरकार को भेंट की गई।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;/em&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-5732716401527097403?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/5732716401527097403/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=5732716401527097403' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5732716401527097403'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/5732716401527097403'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_1289.html' title='मुट्ठीभर चावल से पेश की मिसाल'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqTpFuEESqI/AAAAAAAAAHA/Y1ZwstNnsGg/s72-c/inspiration_quotes_graphics_b7.gif' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-2024123165032060573</id><published>2009-09-07T02:49:00.000-07:00</published><updated>2009-09-07T03:34:17.012-07:00</updated><title type='text'>क्या है आपके खाने का सच!</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqTgOmkyeUI/AAAAAAAAAG4/uaj8T8a6P_Y/s1600-h/Be+Healthy+logo.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378670396464855362" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 382px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqTgOmkyeUI/AAAAAAAAAG4/uaj8T8a6P_Y/s400/Be+Healthy+logo.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;strong&gt;तमाम डाइट बुक्स को देखकर डाइट के मामले में अच्छा-खासा कंफ्यूजन हो जाता है। एक किताब कहती है कि कार्बोहाइड्रेट्स लो, तो दूसरी कहती है कि इन्हें नहीं खाना चाहिए। जानते हैं, डाइट से जुड़े कुछ ऐसे ही सच-झूठ...&lt;br /&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt;ये हैं झूठ फैट वाली कैलरीज आपको मोटा कर देती हैं, जबकि प्रोटीन के साथ ली गईं कैलरीज से वजन कम होता है। ऐसा कतई नहीं है और कैलरी लेने का मतलब कैलरी गेन करना ही होता है। हालांकि फैट के साथ ली गईं कैलरीज ज्यादा नुकसान करती हैं। दरअसल, एक ग्राम फैट लेने का अर्थ है नौ कैलरीज गेन करना। इस वजह से फैट वाली चीजें खाने से प्रोटीन वाली चीजों से वजन ज्यादा बढ़ता है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;कम लें डेरी प्रडक्ट्स&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; - &lt;/span&gt;कम फैट वाले डेरी प्रडक्ट्स न सिर्फ आपकी जेब पर सस्ते पड़ेंगे, बल्कि आपको बेहतर न्यूट्रिशन भी देंगे। अगर लेक्टोस को लेकर आप संवेदनशील नहीं हैं, तो कम फैट वाले डेयरी प्रडक्ट्स आपके लिए बेस्ट हैं। स्टडीज बताती हैं कि जो महिलाएं डेरी फूड से ही कैल्शियम लेती हैं, बिना एक्सर्साइज किए दो साल में वे बॉडी वेट व फैट कम कर सकती हैं। वैसे, लो-फैट स्नैक्स के जरिए भी वजन कम किया जा सता है। हालांकि कई लो-फैट फूड में फ्लवेर पूरा न होने से उनमें एक्स्ट्रा शुगर मिला दी जाती है। यही वजह है लो-फैट और नॉर्मल फैट स्नैक्स में कैलरीज का अंतर बेहद कम मिलता है। &lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;सलाद का फंडा&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; अक्सर हमें लगता है कि सलाद खाने से हम एक्स्ट्रा कैलरीज लेने से बच जाएंगे। डाइटिंग के दौरान यह भले ही स्मार्ट ऑप्शन लगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। अमूमन डाइटिंग करने वाले को लगता है कि पत्तागोभी के बेस पर तैयार जो भी सलाद वह खा रहा है, उससे कैलरीज कम होंगी। लेकिन इस दौरान लोग यह भूल जाते हैं कि इस पर की गई ऑइली ड्रेसिंग से भी तो कैलरीज मिल रही हैं। फिर यह भी देखने वाली बात है कि सलाद में हरी सब्जियां वगैरह किस कॉम्बिनेशन व अमाउंट में रखी गई हैं। पत्ता गोभी खाने से कैलरीज बर्न होती हैं और ग्रेपफ्रूट व सेलरी के साथ भी ऐसा ही है। अगर सलाद में ये तीनों चीजें ही खाई जाएं, तो वजन पक्के तौर पर कम होगा। हालांकि ऐसा करना हमें बीमार भी कर सकता है, क्योंकि तब डाइट से प्रोटीन व फैट्स नदारद रहेंगे।&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;शुगर काउंट्स&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; मोटापा ज्यादा चीनी लेने की वजह से होता है। वैसे, चीनी और फैट्स दोनों ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। मोटे होने की कॉमन वजहें ज्यादा खाना और एक्सर्साइज न करना है। ऐसे में कहा जाता है कि केला, अंगूर, गाजर व चुकंदर खाने से बचना चाहिए। जबकि सच यह है कि केले में 18 ग्राम शुगर व 70 कैलरीज, आधे कप अंगूर में 7 ग्राम शुगर व 110 कैलरीज, आधे कप गाजर में 5 ग्राम शुगर व 25 कैलरीज और इतने ही चुकंदर में 4.5 ग्राम शुगर व 35 कैलरीज होती हैं। इसके अलावा, इनमें फाइबर, कैरोटिनॉएड्स, पोटैशियम और फोलेट की भी खासी अमाउंट होती है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-2024123165032060573?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/2024123165032060573/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=2024123165032060573' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2024123165032060573'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/2024123165032060573'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_07.html' title='क्या है आपके खाने का सच!'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqTgOmkyeUI/AAAAAAAAAG4/uaj8T8a6P_Y/s72-c/Be+Healthy+logo.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-3024795121557476536</id><published>2009-09-05T21:21:00.000-07:00</published><updated>2009-09-05T21:35:37.489-07:00</updated><title type='text'>तो बनी रहेगी मुस्कान...</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqM8AswUkeI/AAAAAAAAAGY/SayhUDoHcNc/s1600-h/smile.bmp"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378208362722005474" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 291px; CURSOR: hand; HEIGHT: 350px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqM8AswUkeI/AAAAAAAAAGY/SayhUDoHcNc/s400/smile.bmp" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;अगर आप अभी से अपने दांतों का ख्याल रखें, तो भविष्य में महंगे डेंटल ट्रीटमंट नहीं लेने पड़ेंगे। इसके लिए जहां रेग्युलर तौर पर डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है, वहीं दांतों की देखभाल भी बेहद जरूरी है। अगर घर पर ही छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखा जाए, तो आपकी मुस्कान हमेशा बनी रहेगी। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;खूब पानी पीजिए&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; । यह एक नेचरल माउथवॉश है, जो कॉफी, सोडा और रेड वाइन पीने के बाद मुंह में रह गए उनके अवशेषों का साफ कर देता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;अपने खाने में ढेर सारे फल और सब्जियां शामिल करें।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; सेब, गाजर, खीरा, ककड़ी और अजवाइन जैसी चीजें आपके मुंह को नेचरली साफ रखती हैं। इन्हें खाने के दौरान दांतों के बीच अटकी गंदगी अपने आप साफ हो जाती है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;डिनर के बाद चीज का एक टुकड़ा खाएं।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; इससे आपके मुंह को जरूरी नेचरल एसिड मिलेंगे।&lt;br /&gt;शुगर फ्री च्यूइंग गम चबाएं। इससे लार बनने की प्रक्रिया में तेजी आती है और दांतों के बीच फंसी गंदगी भी निकल जाती है।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;एसिडिक ड्रिंक लेने के बाद कभी भी ब्रश करना ना भूलें,&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; लेकिन ओरेंज जूस पीने के बाद कम से कम 20 मिनट तक ब्रश ना करें। इससे दांतों पर इलेमल का कवर चढ़ने में मदद मिलती है।&lt;br /&gt;ब्रश करने के बाद दांतों को हाइड्रोजन परऑक्साइड मिले पानी से धोने से जहां बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं, वहीं दांतों पर सफेदी भी आ जाती है। लेकिन इसे पीना कतई नहीं चाहिए। चाहे तो कभी कभार बेकिंग सोडा से ब्रश किया जा सकता है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;पानी के अलावा और कुछ भी पीते हुए स्ट्रॉ का इस्तेमाल कीजिए।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; भले ही आपको कॉफी या रेड वाइन पीते हुए स्ट्रा इस्तेमाल करना अजीब लगे, लेकिन इस तरह से आप अपने प्यारे से सफेद दांतों और इन हानिकारक ड्रिंक के बीच डायरेक्ट कनेक्शन का अवॉइड कर सकते हैं। हमेशा सॉफ्ट टूथब्रश इस्तेमाल करें। अगर आपका टूथब्रश कड़ा हो गया है, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में डाल लें।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;जीभ को साफ करना बेहद जरूरी है।&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt; इससे न सिर्फ सांस की बदबू दूर करने में मदद मिलती है, बल्कि जीभ पर गंदगी की वजह से पैदा होने वाले बैक्टीरिया से भी बचाव किया जा सकता है। ज्यादातर डेंटल प्रफेशनल्स का मानना है कि रोजाना ब्रश नहीं करना और दांतों को सही तरीके से नहीं धोने की वजह से दांतों की तमाम बीमारियां होती हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;ज्यादा शुगर का इस्तेमाल करने से बचें।&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; इससे बैक्टीरिया को पनपने में मदद मिलती है, जो दांतों को कमजोर करता है। मुट्ठी भर बिस्किट या एक टॉफी दोनों ही चीजें बैक्टीरिया को बराबर ताकत देती हैं। इसलिए फ्रेश फ्रूट, नट और गाजर जैसी चीजें खाने पर ध्यान दें, जिससे आपके दांतों को नुकसान ना पहुंचे।&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;रोजाना ब्रश करें और नियमित तौर पर डेटिंस्ट के पास दांत चेक कराते रहें। भले ही एक बार को आपको ऐसा लगेगा कि मेरा काफी खर्च हो रहा है, लेकिन इससे आप भविष्य में दांतों पर होने वाले बड़े खर्च से बच जाएंगे।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-3024795121557476536?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/3024795121557476536/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=3024795121557476536' title='3 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/3024795121557476536'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/3024795121557476536'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_5235.html' title='तो बनी रहेगी मुस्कान...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqM8AswUkeI/AAAAAAAAAGY/SayhUDoHcNc/s72-c/smile.bmp' height='72' width='72'/><thr:total>3</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-91505823374890794</id><published>2009-09-05T21:06:00.000-07:00</published><updated>2009-09-05T21:16:40.301-07:00</updated><title type='text'>आप भी बन सकते हैं रसोई गैस डिस्ट्रीब्यूटर</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqM3iiDlANI/AAAAAAAAAGQ/8QU18TmSluQ/s1600-h/hpgasjihaan.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5378203446407397586" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 150px; CURSOR: hand; HEIGHT: 190px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqM3iiDlANI/AAAAAAAAAGQ/8QU18TmSluQ/s400/hpgasjihaan.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;पेट्रोलियम मंत्रालय अगले 5 सालों में रसोई गैस के करीब 5 करोड़ नए कनेक्शन देने जा रहा है। इसके लिए बड़ी संख्या में नए रसोई गैस डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिए जाएंगे। यह डिस्ट्रीब्यूटरशिप आम आदमी, यानी आपको भी मिल सकती है। खास बात यह है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बारे में संबंधित नीति-नियमों में बदलाव कर उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;सूत्रों के अनुसार सरकार को नए एलजीपी डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की योजना का खुलासा अगस्त के अंतिम माह में किया जाना था। मगर यूपीए सरकार के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों के कई सीनियर नेताओं ने इसके प्रारूप पर सवाल उठाया। कई नेताओं ने पेट्रोलियम राज्यमंत्री जतिन प्रसाद, जो इस प्रोजेक्ट को देख रहे हैं, उनको पत्र लिखकर साफ तौर पर कहा कि रसोई गैस की कालाबाजारी को अगर रोकनी है, तो बेहतर होगा कि रसोई गैस के नए वितरक नौजवानों और स्थानीय लोगों को बनाया जाएगा। जिनके पास मौजूदा समय में डिस्ट्रीब्यूटरशिप है, उनको और उनके संबंधियों को इसे न दिया जाए। डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की प्रक्रिया को पारदशीर् बनाया जाए, ताकि लोगों को पता चल सके कि इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है।&lt;br /&gt;पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन बातों को मान लिया है। अब नए सिरे से इसके लिए नीति-नियम बनाए गए हैं। संभावना है कि नए डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदन मंगाने की घोषणा इस माह सितंबर में कर दी जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बार रसोई गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप का आकार छोटा रखा जाएगा। एक डिस्ट्रीब्यूटर पर 1000 से ज्यादा रसोई गैस सिलिंडरों की सप्लाई का भार नहीं डाला जाएगा। सप्लाई की संख्या कम होगी तो कम जगह और इनवेस्टमेंट की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में, आम आदमी के लिए डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदन देने में परेशानी नहीं होगी।&lt;br /&gt;रसोई गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप शहरों के साथ-साथ गांवों में भी बढ़ाई जाएगी। तेल कंपनियों की एक्सपर्ट कमिटी इस बारे में सवेर् कर रही है कि किन-किन जगहों पर नए डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की जरूरत है। फिलहाल एक हजार स्थानों की पहचान कर ली गई है। आवेदन करने वालों की पहले मार्किंग की जाएगी और बाद में लॉटरी द्वारा लकी विजेताओं के नामों की घोषणा की जाएगी। लकी ड्रॉ लोगों के सामने निकाला जाएगा।&lt;br /&gt;पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा का कहना है कि हम चाहते हैं कि रसोई गैस ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास पहुंचे। हम शहरों के गरीब लोगों के लिए एक और घोषणा करने वाले हैं। जो लोग राशन की दुकानों में केरोसिन लेते हैं, अगर वे रसोई गैस का कनेक्शन लेंगे, तो उन्हें तेल कंपनियों की तरफ से चूल्हा मुफ्त में दिया जाएगा।&lt;br /&gt;इधर उत्तर प्रदेश के सांसद संजय सिंह चौहान का कहना है कि हमने जतिन प्रसाद को पत्र लिखकर कहा है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप लकी ड्रॉ के जरिए मत दें। आवेदन की जांच का जिम्मा एक्सपर्ट कमिटी को दे दें और उन्हीं को अंतिम फैसला करने दें। उम्मीद है कि उनकी यह बात भी मान ली जाएगी।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-91505823374890794?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/91505823374890794/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=91505823374890794' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/91505823374890794'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/91505823374890794'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_2408.html' title='आप भी बन सकते हैं रसोई गैस डिस्ट्रीब्यूटर'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqM3iiDlANI/AAAAAAAAAGQ/8QU18TmSluQ/s72-c/hpgasjihaan.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-4683837298612932608</id><published>2009-09-05T01:16:00.000-07:00</published><updated>2009-09-05T01:51:34.798-07:00</updated><title type='text'>आपके लिए आपके किचन में कुछ है....</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqIlq0UV0EI/AAAAAAAAAGI/g-jchtdaH4o/s1600-h/header.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5377902322562486338" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 144px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqIlq0UV0EI/AAAAAAAAAGI/g-jchtdaH4o/s400/header.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;आप रोजाना अपनी किचन में घंटों बिताती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि वहां कई ऐसी खुशबूदार चीजें हैं, जो आपके मूड को फ्रेश रखती हैं? परफ्यूमिस्ट किरण रंगा बता रही हैं आपकी किचन में मौजूद खुशबूदार चीजों के बारे में- &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;em&gt;&lt;strong&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;सेब &lt;/span&gt;&lt;/strong&gt;राज सुबह एक सेब जरूर खाएं। यह आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होने इसकी खुशबू भी आपके मूड को फ्रेश बनाती है। वैसे संतरे, अंगूर व नीबू की खट्टी स्मेल भी माइंड को रिफ्रेश करती है। सुबह एक गिलास पानी में इन फ्रूट्स की एक स्लाइस डालकर पीएं। भीनी-भीनी खुशबू वाला यह पानी आपको नई ताजगी से भर देगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;अदरक&lt;/span&gt; अगर आप अच्छा फील नहीं कर रहे हैं या थके हैं या फिर तनाव में हैं और इससे बाहर आने के लिए आपको एनर्जी चाहिए, तो अदरक का एक टुकड़ा चूसें। ज्यादा गर्मी की वजह से उबकाई या जी मिचलने की समस्या होने पर भी अदरक फायदेमंद है। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा। डाइजेस्टिव प्रॉब्लम होने पर आप लेमन टी में अदरक डालकर पीएं। &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;तुलसी&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; तनाव को दूर करने में तुलसी खासी मददगार है। इसके अलावा, यह ध्यान और याददाश्त भी तेज करती है। टमैटो सैंडविच में तुलसी के पत्ते डालने से आप फ्रेश महसूस करेंगे। &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;दालचीनी&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; दालचीनी की तेज गंध सभी को बहुत अच्छी लगती है। चाय बनाते समय तुलसी के साथ दालचीनी डाल कर पीएं। इसकी तेज खुशबू से आपको एनर्जी मिलेगी।&lt;br /&gt;कॉफी बीन्स इस बात से सभी वाकिफ हैं कि अरोमा आपको फ्रेश करने के साथ थकान भी दूर करता है। अगर आप कुछ डिफरेंट फ्रेगनेंस ट्राई करना चाहते हैं, तो कॉफी बीन्स बहुत अच्छा ऑप्शन है। इनकी खुशबू से आपको एनर्जी मिलेगी। इसके अलावा, प्याज की स्मेल से सिर में दर्द होने पर तुरंत कॉफी की खुशबू सूंघे। आपको अच्छा फील होगा।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;चाय&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; अगर आपका मूड ठीक नहीं है, तो आप एक कप चाय पीकर उसे ठीक कर सकते हैं। अक्सर लोग पार्टी वगैरह में ओवर ईटिंग कर लेते हैं। ऐसी सिचुएशन में आप एक कप ग्रीन टी पीना फायदेमंद रहेगा। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा और आप रिलैक्स फील करेंगे।&lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;&lt;strong&gt;छोटी इलायची&lt;/strong&gt;&lt;/span&gt; छोटी इलायची में मौजूद टरपाइनल एसिटेट और सिनेऑल जैसे तत्वों के कारण इसमें मीठापन व तीखी स्मैल आती है। ये स्मैल आपके माइंड को उत्तेजित करती है। वैसे भी, आपने देखा होगा कि आपकी नाक गर्म बिरयानी की खुशबू तुरंत भांप लेती है। दरअसल, छोटी इलायची की खुशबू आपके माइंड को अलर्ट करती है। &lt;/div&gt;&lt;div&gt;&lt;br /&gt;&lt;strong&gt;लौंग&lt;/strong&gt; लौंग में इयूजेनॉल और इयुजनाइल तत्व होते हैं, तो हमारे माइंड को उत्तेजित करने के साथ एनर्जी भी देते हैं। यही वजह है कि लौंग कोल्ड, फ्लू व थकान में बहुत फायदेमंद है। अगर आपकी नाक में खून जम गया है, तो आप थोड़ी मात्रा में लौंग खा लें। इससे आपको आराम मिलेगा। इसके अलावा, दांत दर्द में लौंग का तेल बेहद फायदेमंद होता है। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-4683837298612932608?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/4683837298612932608/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=4683837298612932608' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4683837298612932608'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4683837298612932608'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_05.html' title='आपके लिए आपके किचन में कुछ है....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqIlq0UV0EI/AAAAAAAAAGI/g-jchtdaH4o/s72-c/header.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-543589391379677254</id><published>2009-09-04T03:26:00.000-07:00</published><updated>2009-09-04T07:08:29.308-07:00</updated><title type='text'>पेट्स बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छे</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqEfJM1GSTI/AAAAAAAAAF4/3dCF5GSAJv0/s1600-h/pets.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5377613672980302130" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 400px; CURSOR: hand; HEIGHT: 251px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqEfJM1GSTI/AAAAAAAAAF4/3dCF5GSAJv0/s400/pets.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqDutXHlfpI/AAAAAAAAAFw/q0SQGRkUDyE/s1600-h/pets.jpg"&gt;&lt;/a&gt; &lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;अक्सर देखने में आता है कि लोग बच्चों की हेल्थ की वजह से पेट्स को पालने से इनकार कर देते हैं, लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी के मुताबिक पेट्स का साथ बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छा होता है।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;अभी तक घर में पेट्स पालने वाले इसी बात को लेकर परेशान रहते थे कि इससे उनके बच्चे की हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। लेकिन इस स्टडी ने उनके तमाम कंफ्यूजन दूर कर दिए हैं। इस स्टडी में घर में पेट्स होने से बच्चों की हेल्थ पर होने वाले तमाम इफेक्ट्स का अध्ययन किया गया है।&lt;br /&gt;पशु प्रेमियों के लिए इस स्टडी में अच्छी खबर यह है कि घर में पेट्स रखने से बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। अगर आप छह साल की उम्र तक के किसी डॉगी को अपने घर में रखते हैं, तो उसके कॉन्टैक्ट में आने वाले बच्चे को फीवर और अस्थमा होने की शिकायत कम होती है। इसी तरह कम उम्र के बिल्ली के कॉन्टैक्ट में रहने से बच्चों को ग्रास पोलन एलर्जी होने के चांस कम हो जाते हैं। रिसर्च में पालतू जानवरों को बच्चों के लिए फायदेमंद बताने के लिए गांवों में रहने वाले लोगों के बच्चों पर उनका इफेक्ट बताया गया है। सभी जानते हैं कि किसानों के बच्चे रोजाना अपने घरों में रहने वाले पालतू जानवरों के संपर्क में आते हैं। बचपन से जानवरों के संपर्क में आने से उन बच्चों का इम्यून सिस्टम इतना मजबूत हो जाता है कि उन्हें अस्थमा और फीवर जैसी बीमारियां नहीं होती। इससे साबित होता है कि जानवरों का साथ बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत करता है।&lt;br /&gt;तो उम्मीद है कि अगली बार जब आपको किसी पेट्स को घर लाने का मौका मिलेगा, तो आप सिर्फ बच्चों की हेल्थ की वजह से उन्हें इनकार नहीं करेंगे। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-543589391379677254?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/543589391379677254/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=543589391379677254' title='0 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/543589391379677254'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/543589391379677254'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_258.html' title='पेट्स बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छे'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqEfJM1GSTI/AAAAAAAAAF4/3dCF5GSAJv0/s72-c/pets.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>0</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8550533252084271637</id><published>2009-09-04T02:02:00.000-07:00</published><updated>2009-09-04T03:19:05.281-07:00</updated><title type='text'>क्या आपको आफिस में नींद आती है?</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqDonGkiThI/AAAAAAAAAFo/mxleItufckk/s1600-h/SleepingOnTheJobLogo.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5377553713556770322" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 358px; CURSOR: hand; HEIGHT: 371px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqDonGkiThI/AAAAAAAAAFo/mxleItufckk/s400/SleepingOnTheJobLogo.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिन्हें ऑफिस में बैठे हुए भी उबासी आती रहती है। अक्सर लोग इस परेशानी को दूर करने के लिए कॉफी के सिप लेते हैं, लेकिन यह परमानंट सल्यूशन नहीं है। यहां कॉफी की चुस्कियां खत्म हुई नहीं कि उधर दोबारा उबासी आनी शुरू हो जाती है। खास बात यह है कि अब पहले से ज्यादा नींद आने लगती है। साथ ही बार-बार कॉफी पीने से बॉडी के डिहाइड्रेशन सिस्टम पर भी इफेक्ट पड़ता है। थोड़ी-बहुत देर की बात अलग है, लेकिन कॉफी के सहारे आप पूरे दिन नींद से छुटकारा नहीं पा सकते।&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;br /&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;अवॉइड स्वीट&lt;/span&gt; अगर आप नींद की झपकी से बचना चाहते हैं, तो किसी भी तरह की मिठाइयों से दूर रहें। सिंपल कार्बोहाइड्रेट वाले शुगर जैसे फूड हमारी बॉडी बड़ी तेजी से एब्जॉर्व किए जाते हैं। बॉडी में अचानक शुगर जाने से एनर्जी लेवल में भी बढ़ोतरी महसूस होती है, लेकिन शुगर से डील करने के लिए इंसुलिन रिलीस करनी पड़ती है। इसी वजह से हम थकान महसूस करते हैं। भले ही शुगर से एनर्जी लेवल बढ़ जाता है, लेकिन रिसर्च में सामने आया है कि नींद की परेशानी दूर करने के लिए यह बेहतर तरीका नहीं है। साथ ही ज्यादा शुगर वाले 'हेल्थ' ड्रिंक भी अवॉइड करने चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;बनिए वॉटर बेबी&lt;/span&gt; अगर दिन के वक्त नींद आ रही है, तो इसकी वजह बॉडी का डिहाइड्रेट होना होती है। इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीएं, ताकि बॉडी को हाइड्रेट रखा जा सके।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;कुछ खाइए&lt;/span&gt; अगर आपको भूख लगी है, तो उस वक्त फ्रूट प्लेट आपके बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है। फलों में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिस वजह से शुगर के मुकाबले इन्हें खाने के बाद आपको ज्यादा देर तक भूख नहीं लगेगी। साथ ही बॉडी में कम कैलोरी जाएगी। अगर आप चाहें, तो मुट्ठी भर ड्राईफ्रूट भी खा सकते हैं, जिनसे बॉडी को काफी प्रोटीन मिलता है। काजू, बादाम और अखरोट का मिक्सचर आइडियल है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#009900;"&gt;लेकिन कम खाइये&lt;/span&gt; अगर आप हैवी फूड लेते हैं, तो आपको नींद की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हैवी मील के बाद उसे पचाने के लिए आपके पेट को ब्लड फ्लो बढ़ाना पड़ता है। इस वजह से दिमाग तक कम ब्लड पहुंच पाता है और नींद आने लगती है। इसलिए एक बार में ज्यादा खाने की बजाय अपने खाने का छोटे-छोटे चार या पांच हिस्सों में बांटिए। हालांकि इसके लिए अपनी डाइट में चेंज करने की जरूरत नहीं है। कोशिश कीजिए कि ज्यादा प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेट लें। जैसे कि अगर आप लंच में तीन रोटी खाते हैं, तो एक कम करके उसकी बजाय ज्यादा सब्जी खाएं। अगर आप चावल खाते हैं, तो उसमें ज्यादा दाल मिलाएं। मेन परपज आपके हैवी मील को तोड़कर स्मॉल मील बनाना है। ध्यान रखें कि अगर रात को आप अच्छी तरह नहीं सो पाएं हैं, तो भी दिन में एसिडिटी और नींद आने की परेशानी हो सकती है। इसलिए खाने-पीने का ध्यान रखें। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8550533252084271637?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8550533252084271637/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8550533252084271637' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8550533252084271637'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8550533252084271637'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_04.html' title='क्या आपको आफिस में नींद आती है?'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SqDonGkiThI/AAAAAAAAAFo/mxleItufckk/s72-c/SleepingOnTheJobLogo.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7201856385746689818</id><published>2009-09-03T00:41:00.000-07:00</published><updated>2009-09-03T01:14:27.793-07:00</updated><title type='text'>कुछ उपाय गाढ़ी कमाई बचाने के...</title><content type='html'>&lt;a href="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp96uP6VqiI/AAAAAAAAAFg/jhgYBJO5BAo/s1600-h/moneygrowth.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5377151415067453986" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 300px; CURSOR: hand; HEIGHT: 200px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp96uP6VqiI/AAAAAAAAAFg/jhgYBJO5BAo/s320/moneygrowth.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;कर चुकाने से बचा नहीं जा सकता है और इसका भुगतान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। पर आप मेहनत की गाढ़ी कमाई बचा सकते हैं और अतिरिक्त कर का भुगतान करने से बच सकते हैं। हर व्यक्ति कर छूट क्लेम करना चाहता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि कर चुकाते वक्त पैसा बचाना सभी की वित्तीय प्राथमिकताओं की सूची में शीर्ष पर होता है। लेकिन आय कर कानून की जटिलताओं पर गौर करने के बाद कितने ऐसे लोग होंगे जो इन छूट के बारे में वास्तव में जानकारी रखते हों या उनका पूरा फायदा उठाते हों। निश्चित रूप से आप इनमें से कुछ को नजरअंदाज कर बैठे हों। आइए, कर छूट का फायदा देने वाले ऐसे कुछ बिंदुओं पर गौर करें जिन्हें आम तौर पर नजरअंदाज किया जाता है-&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;होम स्वीट&lt;/span&gt; होम आपका मकान केवल सिर ढकने के लिए छत ही नहीं देता बल्कि कर से बचने का रास्ता भी मुहैया कराता है। अगर आप किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं और वेतनभोगी हैं तो हाउस रेंट एलाउंस क्लेम कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो आप कुल आमदनी के 10 फीसदी से ज्यादा बतौर किराए चुकाने पर कर छूट क्लेम कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में कुछ शर्तें होती हैं।&lt;br /&gt;अगर आप अपने मकान में रहते हैं तो किसी भी वित्तीय संस्थान से मिलने वाले लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट ले सकते हैं। कई लोग इस रकम को केवल 150000 रुपये तक सीमित मान लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसा प्रॉपर्टी के निजी इस्तेमाल के मामले में होता है और जहां मामला प्रॉपर्टी किराए पर देने की बात होती है, उसमें ऐसा नहीं होता।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;परोपकार का फायदा&lt;/span&gt; दान पर भी कर छूट मिलती है। अगर हम उन्हें चेक के माध्यम ये भुगतान करते हैं तो ज्यादा लंबे वक्त तक याद रखते हैं लेकिन अगर नकद दान देते हैं तो कुछ ही वक्त में भुला बैठते हैं। यह जरूरी है कि धर्मार्थ दान देते वक्त अपनी भी मदद की जाए। कहा भी जाता है कि चैरिटी सबसे पहले घर से शुरू होती है। हमें सिर्फ इतना करना है कि कर छूट के तहत आने वाले दान में दिए गए पैसे की रसीद भर चाहिए। और हमें वह जगह नहीं भूलनी चाहिए जहां ऐसी रसीद रखी जाती हैं।&lt;br /&gt;शिक्षा आज कर शिक्षा का खर्च आसमान छू रहा है जिससे वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। इस सिलसिले में आप अपने पुत्र या पत्नी की उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं और ऐसे लोन पर दिया जाने वाला ब्याज का भुगतान आपको कर छूट उपलब्ध कराएगा।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;सेहत ही धन है&lt;/span&gt; मेडिकल इंश्योरेंस पर भी कर छूट मिलती है। हालांकि यह 15000 रुपये जैसी छोटी रकम पर मिलती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। मां-बाप के लिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। इसके अलावा अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति के मेडिकल खर्च का बोझ उठाया है, जो आप पर निर्भर है तो आपको 40000 से लेकर 75000 रुपये तक की रकम पर छूट मिल सकती है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#000066;"&gt;दूसरे बिंदू जीवन बीमा प्रीमियम, डेफर्ड एन्युटी, प्रॉविडेंट फंड में जमा पैसे, ट्यूशन फीस, हाउस लोन कर छूट के एक लाख रुपये के दायरे में आते हैं।&lt;/span&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7201856385746689818?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7201856385746689818/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7201856385746689818' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7201856385746689818'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7201856385746689818'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_03.html' title='कुछ उपाय गाढ़ी कमाई बचाने के...'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp96uP6VqiI/AAAAAAAAAFg/jhgYBJO5BAo/s72-c/moneygrowth.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-7713086104920746219</id><published>2009-09-02T05:26:00.000-07:00</published><updated>2009-09-02T05:47:42.405-07:00</updated><title type='text'>मोबाइल का नैनो प्लान</title><content type='html'>&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp5oXozfQLI/AAAAAAAAAFY/Oz5D8gD5Grk/s1600-h/0511-0810-1901-5349_People_Using_Cell_Phones_clipart_image.png"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5376849760426606770" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 247px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp5oXozfQLI/AAAAAAAAAFY/Oz5D8gD5Grk/s320/0511-0810-1901-5349_People_Using_Cell_Phones_clipart_image.png" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;a href="http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp5n_qa3ZUI/AAAAAAAAAFQ/ZOSZAugkxGk/s1600-h/mobile1.jpg"&gt;&lt;/a&gt; &lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;टाटा टेलिसर्विसेज ने मोबाइल सेवा क्षेत्र में 1 सितंबर 2009 यानी मंगलवार को ऐसी घंटी बजा दी , जिसे 'क्रांतिकारी' और 'खेल की तस्वीर बदलने' वाला करार दिया जा रहा है। कंपनी ने टेलिफोन कॉल के लिए शुल्क वसूलने के पारंपरिक तरीके, पल्स सिस्टम को छोड़ने का फैसला किया है। इसके बजाय वह अपने ग्राहकों से प्रति कॉल आधार पर फीस वसूलेगी। वैसे यहां आपको यह बता दें कि ऐसा दुनिया में संभवत: पहली बार किया जा रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि टाटा टेलीसर्विसेज की कॉल पर प्रति मिनट आधार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा। केवल टाटा टेलीसर्विसेज के सीडीएमए ग्राहकों के लिए उपलब्ध इन अवधि मुक्त कॉल के मामले में स्थानीय कॉल के लिए 1 रुपये और हर एसटीडी कॉल के लिए 3 रुपये का भुगतान करना होगा।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;आसान शब्दों में कहें, तो स्थानीय कॉल के लिए सिर्फ 1 रुपया चुकाना होगा, भले ग्राहक दो घंटे तक क्यों न बात करे। ठीक इसी तरह, किसी भी नेटवर्क पर की जाने वाली एसटीडी कॉल के लिए 3 रुपए देने होंगे, भले कॉल की मियाद कितनी भी क्यों न हो। कंपनी के एमडी अनिल सरदाना ने कहा, 'इसमें कुछ भी फांसने जैसा या कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं है। हम कभी अपने वादे से नहीं पलटे हैं और हमारे कारोबारी मॉडल में ग्राहकों का सम्मान और भरोसा जीतना शामिल है। टाटा समूह ऐसे ही काम करता है। भारतीय दूरसंचार ग्राहकों के लिए यह ऐतिहासिक किफायती कदम है।'&lt;br /&gt;उन्होंने कहा, 'यह पेशकश स्थानीय और एसटीडी, दोनों तरह की कॉल के लिए है और यही बात इसे खास बनाती है। यही वजह है कि यह भारतीय दूरसंचार प्राइसिंग मॉडल को पूरी तरह बदलने का माद्दा रखता है।' किसी भी मोबाइल ऑपरेटर के पल्स और प्रति मिनट बिलिंग सिस्टम से अलग होने का भी यह पहला मामला है और टाटा के कार्यकारी अधिकारियों का कहना है कि यह अवधारणा दुनिया में अपनी तरह की पहली कोशिश है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में दूसरे ऑपरेटर भले खास घंटों (रात दस बजे के बाद या सप्ताहांत में) या फिर चुनिंदा फोन नम्बरों के बीच फ्री टॉक टाइम की सुविधा मुहैया कराते हैं, लेकिन किसी भी ऑपरेटर के पूरी तरह 'प्रति कॉल आधारित बिलिंग सिस्टम' अपनाने का यह पहला मामला है।&lt;br /&gt;ग्राहकों की संख्या के आधार पर देश की छठी सबसे बड़ी सेल्युलर कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज सीडीएमए प्लेटफॉर्म में 3.8 लाख यूजर रखती है, जिनमें से 92 फीसदी प्री-पेड सेवा इस्तेमाल करते हैं। मौजूदा ग्राहक 96 रुपए का वन टाइम रिचार्ज वाउचर खरीदकर नई टैरिफ स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। जो ग्राहक इस नए टैरिफ ढांचे का विकल्प चुनेंगे, उनसे 1 रुपये प्रतिदिन का फ्लैट रेंटल वसूला जाएगा।&lt;br /&gt;कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वह जल्द ही अपने पोस्ट-पेड ग्राहकों के लिए भी इसी तरह की योजना शुरू करेंगे। प्रति कॉल के हिसाब से भुगतान करने की स्कीम कंपनी के जीएसएम ग्राहकों के लिए नहीं है। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल (जीएसएम) टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड पर कंपनी के करीब 50 लाख ग्राहक हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-7713086104920746219?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/7713086104920746219/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=7713086104920746219' title='4 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7713086104920746219'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/7713086104920746219'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_5410.html' title='मोबाइल का नैनो प्लान'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://2.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp5oXozfQLI/AAAAAAAAAFY/Oz5D8gD5Grk/s72-c/0511-0810-1901-5349_People_Using_Cell_Phones_clipart_image.png' height='72' width='72'/><thr:total>4</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8229448397302178696</id><published>2009-09-02T02:06:00.000-07:00</published><updated>2009-09-02T02:19:10.311-07:00</updated><title type='text'>ऑनलाइन शॉपिंग ऑन रहें</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp44dFBPF5I/AAAAAAAAAFI/XrHXiHC0sSg/s1600-h/online-shopping.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5376797077341673362" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 290px; CURSOR: hand; HEIGHT: 277px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp44dFBPF5I/AAAAAAAAAFI/XrHXiHC0sSg/s400/online-shopping.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;शॉपिंग का चस्का तो सभी को होता है, लेकिन बिजी शेड्यूल के चलते बहुत से लोगों को मार्किट जाने का वक्त नहीं मिल पाता। इसी वजह से तमाम लोग ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे हैं। बाजार तो फिर भी हफ्ते में एक दिन बंद रहता है, लेकिन नेट पर शॉपिंग सातों दिनों के 24 घंटों में किसी भी टाइम की जा सकती है। माउस के एक क्लिक से आप ट्रेन या एयरलाइंस के टिकट और किसी अनजान शहर में होटल बुक करवा सकते हैं, दोस्तों को बुके भेज सकते हैं या फैशनेबल आइटम खरीद सकते हैं। वैसे, शॉपिंग आप किसी भी चीज की करें, लेकिन इस मामले में सावधानी जरूर बरतें।&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;ऑनलाइन डीलर&lt;/span&gt; आजकल कोई भी किसी के नाम से ऑनलाइन शॉप सेटअप कर सकता है, इसीलिए नेट पर शॉपिंग से पहले ऑनलाइन डीलर का पता व फोन नंबर कंफर्म कर लें, ताकि बाद में आपको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। अगर किसी ई-मेल या पॉपअप मेसेज में आप से किसी तरह की फाइनैंशल इंफर्मेशन मांगी जाती है, तो इसे इग्नोर कर दें। कोई भी सामान खरीदने से पहले डीलर का ट्रैक रेकॉर्ड जरूर चेक करें। आपने जिन कंपनियों का नाम नहीं सुना है, उनसे सामान बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;क्वॉलिटी और कॉस्ट&lt;/span&gt; किसी भी सामान को ऑनलाइन खरीदने से पहले तमाम साइट्स चेक करें और इसके बाद ही डील फाइनल करें। बजट को ध्यान में रखते हुए सामान की कीमत के साथ डिलिवरी चार्ज भी जोड़ लें। कहीं ऐसा न हो कि सस्ते के चक्कर में आप महंगे के फेर में पड़ जाएं। और हां, किसी भी हालात में कैश बिल्कुल न भेजें।&lt;br /&gt;क्रेडिट कार्ड से पेमंट अगर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान पेमंट आप क्रेडिट कार्ड से करते हैं, तो आपका ट्रांजेक्शन फेयर क्रेडिट बिलिंग एक्ट के तहत आ जाता है। इससे विवादित मामले निपटाने में काफी मदद मिलती है। कंस्यूमर प्रॉटेक्शन के लिहाज से भी यह निहायत जरूरी है।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;पर्सनल इंफर्मेशन&lt;/span&gt; नहीं अगर आप किसी कंपनी की वेबसाइट पर विजिट करते हैं, तो हो सकता है कि आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर पॉपअप मेसेज आ जाए। इसमें खरीदार की पर्सनल इंफर्मेशन लेने के लिए बॉक्स बने होते हैं। मशहूर कंपनियां पॉपअप स्क्रीन से कोई जानकारी लेने में दिलचस्पी नहीं रखतीं। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए आप अपने कंप्यूटर पर पॉपअप ब्लॉकिंग सॉफ्टवेयर लोड कर सकते हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;डॉक्युमेंटेशन जरूरी&lt;/span&gt; ऑनलाइन ऑर्डर प्रॉसेस पूरा होने के बाद आपको या तो फाइनल कन्फर्मेशन पेज मिलता है या फिर ई-मेल के जरिए सूचना मिलती है। इसे प्रिंट करके संभाल कर रखना बहुत जरूरी है। किसी भी तरह की दिक्कत होने पर यह आपकी काफी मदद करेगी। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड स्टेटमंट को भी ध्यान से देखना बहुत जरूरी है, ताकि ऑनलाइन खरीदारी के बहाने आपकी स्टेटमंट में अनाप-शनाप चार्ज न जोड़ दिए जाएं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#006600;"&gt;टर्म्स ऑफ द डील&lt;/span&gt; अगर नेट से शॉपिंग के बाद आप किसी आइटम से संतुष्ट नहीं हैं, तो उसे रिटर्न करने के बाद आपको कितना रिफंड मिलेगा, यह जानना भी बहुत जरूरी है। यह पता लगाना भी आपकी समझदारी मानी जाएगी कि अगर आप कोई आइटम कंपनी को रिटर्न करते हैं, तो उसका शिपिंग चार्ज या री-स्टॉकिंग फीस का खर्च किसे भुगतना होगा। अगर सामान की डिलिवरी की कोई डेट फाइनल नहीं है, तो फेडरल ट्रेड कमिशन (एफटीसी) के नियम के अनुसार सामान की डिलिवरी ऑर्डर डेट के 30 दिन के अंतर तक हो जानी चाहिए। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8229448397302178696?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8229448397302178696/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8229448397302178696' title='1 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8229448397302178696'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8229448397302178696'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_3623.html' title='ऑनलाइन शॉपिंग ऑन रहें'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp44dFBPF5I/AAAAAAAAAFI/XrHXiHC0sSg/s72-c/online-shopping.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>1</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8419631911590827252</id><published>2009-09-02T00:48:00.000-07:00</published><updated>2009-09-02T00:58:19.648-07:00</updated><title type='text'>करीब से सोचो तो फासला निकले....</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp4lhzsgQEI/AAAAAAAAAFA/cjdWLpbE_MQ/s1600-h/teri_baat_nahin_karta.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5376776267869732930" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 324px; CURSOR: hand; HEIGHT: 400px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp4lhzsgQEI/AAAAAAAAAFA/cjdWLpbE_MQ/s400/teri_baat_nahin_karta.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जो देखने में बहुत ही करीब लगता है उसी के बारे में सोचो तो फासला निकले....ये कही हुई लाइनें अपने आपमें अपने ही वजूद को हिलाने वाली है... ऐसा क्यों होता है....कि आप जिसको अपने सबसे करीब मानते है..वो ही आपसे सबसे दूरी पर होता है....आप जिससे दुनिया से बचाते हो वो ही आपको दुनिया के बीच लाकर खड़ा कर देता है....क्यो ऐसा होता है...जो भी हो ये बहुत दर्द देने वाला होता है...क्यों वो रिश्तें जिन्हें हम जितनी मजबूती से बाधंते है....वो उतनी ही आसानी से टोटने वाले होते है..क्यो रिश्तों के बीच दुनियादारी हमेशा भारी पड़ती है....कुछ काम कुछ सवाल हमेशा क्यो अधुरे से मन में रह जाते है...क्या वाकई रिश्ते इतने कमजोर और अनसुलझे से होते है...ये चन्द सवाल क्यों हमेशा दिलों दिमाग को झकझोर देने वाले होते है...&lt;/span&gt;&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8419631911590827252?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8419631911590827252/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8419631911590827252' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8419631911590827252'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8419631911590827252'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_02.html' title='करीब से सोचो तो फासला निकले....'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp4lhzsgQEI/AAAAAAAAAFA/cjdWLpbE_MQ/s72-c/teri_baat_nahin_karta.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>2</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-8323658690442332028</id><published>2009-09-01T05:38:00.000-07:00</published><updated>2009-09-01T05:48:35.097-07:00</updated><title type='text'>दीवाली इन अदर रिलिजन</title><content type='html'>&lt;a href="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp0YAG5IS3I/AAAAAAAAAE4/kylm2R5dZ0k/s1600-h/dewali.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5376479920279538546" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 275px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp0YAG5IS3I/AAAAAAAAAE4/kylm2R5dZ0k/s320/dewali.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;भारत में त्योहारों की इतनी समृद्घ परंपरा है कि एक धर्म के त्योहार को दूसरे धर्म के लोग भी खुशी-खुशी मनाते हैं, लेकिन दीवाली जैन और सिख धर्म में और भी कुछ परंपराओ के चलते बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइये जानते हैं इससे जुड़े कुछ अहम तथ्य...&lt;/span&gt;&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;जैन धर्म में &lt;/span&gt;&lt;span class=""&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;दीवाली&lt;/span&gt; -&lt;/span&gt; जैन धर्म में दीवाली को बड़ा महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी को 527 बीसी में दीवाली के दिन ही मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसके अलावा महावीर स्वामी के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी को भी इसी दिन कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जैन ग्रंथों के मुताबिक महावीर स्वामी ने दीवाली से पहली रात को आधी रात के वक्त आखिरी बार उपदेश दिया था। भगवान द्वारा दिए गए इस आखिरी उपदेश को 'उत्तराध्यान सूत्र' के नाम से जाना जाता है। उस वक्त वहां मौजूद लोगों ने भगवान को मोक्ष होने की खुशी में रोशनी की और खुशियां मनाई। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने निर्णय लिया कि महावीर स्वामी के ज्ञान को यहां जल रहे दीपकों के प्रकाश की तरह लोगों में फैलाया जाएगा। बस तभी से इस पर्व का नाम दीपावली या दीवाली पड़ गया। दीवाली को जैन धर्म में पर्यूषण पर्व के बाद सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। जैन धर्म में दीवाली को विशेष रूप से त्याग और तपस्या के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म के अनुयायी इस त्योहार को तीन दिनों तक एंजॉय किया जाता है। इन दिनों लोग भगवान महावीर के त्याग-तपस्या को याद करके उनके जैसा बनने की कामना करते हैं और उनके आखिरी उपदेश 'उत्तराध्यायन सूत्र' का पाठ करते हैं। खास दीवाली वाले दिन सुबह-सुबह सभी जैन मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भगवान के मोक्ष जाने की खुशी में सभी लोग अपने घरों और दुकानों को विभिन्न तरह लाइटों से सजाते हैं।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;सिख धर्म में &lt;span class=""&gt;दीवाली -&lt;/span&gt;&lt;/span&gt; दीवाली वाले दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से मुक्ति मिली थी। मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी की बढ़ती शक्ति से घबरा कर उन्हें और उनके 52 साथियों को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया हुआ था। देश भर के लोगों द्वारा हरगोविंद सिंह जी को छोड़ने की अपील पर जहांगीर ने सन् 1619 ईसवीं में गुरु को दीवाली वाले दिन मुक्त किया था। कैद से मुक्त होते ही गुरु अमृतसर पहुंचे और वहां विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया। गुरु की माता ने सभी लोगों उनके रिहा होने की खुशी में मिठाई बांटी और चारों ओर दीप जलाए गए। इसी वजह से सिख धर्म में दीवाली को 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा अमृतसर के प्रसिद्घ स्वर्ण मंदिर की नींव सन् 1577 में दीवाली के दिन ही रखी गई थी। सिख धर्म में दीवाली के त्योहार को तीन दिन तक एंजॉय किया जाता है। दीवाली के दिन में अमृतसर में विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। इस दिन लोग सुबह-सुबह पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते हैं और स्वर्ण मंदिर के दर्शन करते हैं। &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-8323658690442332028?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/8323658690442332028/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=8323658690442332028' title='5 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8323658690442332028'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/8323658690442332028'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/2009/09/blog-post_01.html' title='दीवाली इन अदर रिलिजन'/><author><name>shalini rai</name><uri>http://www.blogger.com/profile/16166249400882752000</uri><email>noreply@blogger.com</email><gd:image rel='http://schemas.google.com/g/2005#thumbnail' width='32' height='24' src='http://3.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SssPt_U2NeI/AAAAAAAAALQ/L0kmxj6x5yI/S220/Picture+085.jpg'/></author><media:thumbnail xmlns:media='http://search.yahoo.com/mrss/' url='http://4.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/Sp0YAG5IS3I/AAAAAAAAAE4/kylm2R5dZ0k/s72-c/dewali.jpg' height='72' width='72'/><thr:total>5</thr:total></entry><entry><id>tag:blogger.com,1999:blog-6899053808268059491.post-4392081984046872870</id><published>2009-09-01T01:26:00.000-07:00</published><updated>2009-09-01T02:09:04.212-07:00</updated><title type='text'>इलाज के लिए है परेशान</title><content type='html'>&lt;a href="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SpzkkhQ8IuI/AAAAAAAAAEw/-y-AIEUFzRs/s1600-h/emergency+care.jpg"&gt;&lt;img id="BLOGGER_PHOTO_ID_5376423371229373154" style="DISPLAY: block; MARGIN: 0px auto 10px; WIDTH: 320px; CURSOR: hand; HEIGHT: 243px; TEXT-ALIGN: center" alt="" src="http://1.bp.blogspot.com/_UOZFTXo_hOU/SpzkkhQ8IuI/AAAAAAAAAEw/-y-AIEUFzRs/s320/emergency+care.jpg" border="0" /&gt;&lt;/a&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;इलाज के लिए कर्ज लेने, जायदाद गिरवी रखने या पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पाने जैसी बातें आए दिन सामने आती हैं, जबकि थोड़ी सी जागरूकता से यह परेशानी दूर हो सकती है। इलाज के क्षेत्र में न सिर्फ पूरी बल्कि पार्शियली मदद के लिए भी कई संस्थाएं काम कर रही हैं।&lt;/span&gt; &lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;br /&gt;&lt;div&gt;&lt;em&gt;उदाहरण के तौर पर न सिर्फ जीबी पंत, सफदरजंग और राममनोहर लोहिया अस्पतालों में गरीब मरीजों के हर तरह के टेस्ट पर सब्सिडी और फ्री ऑपरेशन की व्यवस्था है बल्कि मैक्स व नैशनल हार्ट इंस्टिट्यूट जैसे संस्थान में बीपीएल कोटे के तहत फ्री प्रॉसीजर करा सकते हैं। इतना ही नहीं, इलाज के खर्च के लिए पीएमओ, चीफ मिनिस्टर ऑफिस, विभिन्न मंत्रालयों और लोक कल्याण समिति जैसी संस्थाओं से भी संपर्क कर सकते हैं। जहां से इलाज का पूरा खर्च सीधे हॉस्पिटल को भेज दिया जाता है। हार्ट केयर फाउंडेशन 6 सितंबर को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में आयोजित दिल का दरबार में ऐसी सुविधाओं के बारे में भी लोगों को जानकारी देगा।&lt;br /&gt;&lt;span style="color:#ff0000;"&gt;फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने बताया कि जो लोग बीपीएल कैटिगरी में नहीं आते हैं, लेकिन महंगे इलाज का पूरा खर्च भी अफोर्ड नहीं कर सकते हैं, उनकी मदद के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। मसलन, आचार्य सुशील मुनी आश्रम, सी 599 डिफेंस कॉलोनी में सुबह 8 से 10 और शाम को 6 से 8 बजे तक करीब 50 पर्सेन्ट सब्सिडी पर हर तरह के ब्लड टेस्ट करा सकते हैं। हार्ट में लगाए जाने वाले स्टेंट बनाने वाली कंपनियां फाउंडेशन को बेयर मेटल स्टेंट 16-17 हजार में देने को तैयार हैं, जो मार्केट में 50-70 हजार रुपये का मिलता है। ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट 35 हजार का मिल रहा है जो मार्केट में 70 हजार से सवा लाख रुपये में आता है। मार्केट में 70 हजार रुपये में मिलने वाला पेस मेकर एनजीओ को 45 हजार में मिल रहा है। शॉक के लिए शरीर में इंप्लांट किया जाने वाला इलेक्ट्रिक डिवाइस मार्केट में साढ़े 4 लाख का मिलता है, लेकिन फाउंडेशन इसे ढाई लाख रुपये में उपलब्ध कराएगा।&lt;br /&gt;&lt;/span&gt;डॉ. अग्रवाल का कहना है कि कई बार ऐसा होता है कि मरीज के पास दवा और डिवाइस के लिए पैसे होते हैं, मगर गवर्नमेंट हॉस्पिटल में लंबी लाइन होती है और प्राइवेट हॉस्पिटल में प्रॉसीजर का खर्च वहन नहीं कर पाते, जिसके कारण इलाज में देरी हो जाती है और केस बिगड़ जाता है। ऐसे मामलों में प्राइवेट अस्पतालों से बात करके प्रॉसीजर फ्री कराया जा सकता है। अगर किसी को सरकारी अस्पताल में वक्त पर सर्जरी की डेट मिल गई है और डिवाइस के लिए पूरा पैसा नहीं है तो उसे सस्ती दर पर डिवाइस दिलाई जा सकती है। इस तरह की &lt;span style="color:#ff0000;"&gt;मदद के लिए फाउंडेशन के हेल्पलाइन नंबर- 9958771177 पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे &lt;/span&gt;तक संपर्क कर सकते हैं।&lt;/em&gt;&lt;/div&gt;&lt;div class="blogger-post-footer"&gt;&lt;img width='1' height='1' src='https://blogger.googleusercontent.com/tracker/6899053808268059491-4392081984046872870?l=akhbarkikatran.blogspot.com' alt='' /&gt;&lt;/div&gt;</content><link rel='replies' type='application/atom+xml' href='http://akhbarkikatran.blogspot.com/feeds/4392081984046872870/comments/default' title='Post Comments'/><link rel='replies' type='text/html' href='http://www.blogger.com/comment.g?blogID=6899053808268059491&amp;postID=4392081984046872870' title='2 Comments'/><link rel='edit' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4392081984046872870'/><link rel='self' type='application/atom+xml' href='http://www.blogger.com/feeds/6899053808268059491/posts/default/4392081984046872870'/><link rel='alternate' type='text/html' href='http://akhbarkikatran.blogspot
