कह ले....


मन में कुछ मत रख यार..

चार दिन की जिंदगी है...कल का क्या भरोसा..

कह ले ...जो कहना है...बात कर दोस्त बना..

जो है साथ जी ले..हमेशा सब साथ नहीं होगे..

चार दिन की जिंदगी है...कल का क्या भरोसा...

खुल कर जिदंगी जी लो..कब दम गुट जाए..क्या भरोसा..

खुद पर भरोसा कर ..आगे चल जिंदगी चार दिन है...जी ले..

5 Comments:

  1. निर्मला कपिला said...
    जरूर जी अच्छी रचना है शुभकामनायें
    M VERMA said...
    यकीनन कह लेना चाहिये!
    सुन्दर
    दिगम्बर नासवा said...
    सच है चार दिन की ज़िंदगानी है ...... जी लेना चाहिए ........... अच्छा लिखा है ..........
    संजय भास्कर said...
    बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।
    संजय भास्कर said...
    बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
    ढेर सारी शुभकामनायें.

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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