हालांकि ज्यादातर लोग केले को देखकर नाक चिढ़ाते हैं, लेकिन इस फल के फायदे बहुत हैं। एनर्जी का अच्छा सोर्स होने के साथ इसमें विटामिंस व मिनरल्स की भी अच्छी मात्रा होती है। ऐसे बहुत कम लोग ही होंगे, जो केले को अपने फेवरिट फ्रूट की लिस्ट में रखते हैं। लेकिन इस फल के फायदे बहुत होते हैं। खाने में आसान होने के साथ इसमें काफी न्यूट्रिशंस भी होते हैं। बच्चों की ग्रोथ के लिए ज्यादातर पैरंट्स अपने बच्चों को केला देते हैं, ताकि उनकी अच्छी ग्रोथ हो सके। कई कॉन्वेट स्कूलों में सुबह के नाश्ते में केला दिया जाता है। यह नेचरल फूड है। इसमें सोलन एनर्जी बहुत ज्यादा होती है, इसलिए आप अपनी डाइट में केला जरूर शामिल करें। अगर आपको लगता है कि आपके ब्रेकफास्ट में पौष्टिक चीजें शामिल नहीं हैं, तो आप ब्रेकफास्ट में केला लें। इससे विटामिन व मिनरल्स की कमी पूरी करेगा।
वैसे क्या आप जानते हैं कि दो छोटे केलों में फाइबर की मात्रा एक ब्रेड के बराबर होती है? यही नहीं, यह ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है? दरअसल केला लो ब्लड कॉलेस्ट्रोल में फायदेमंद है। दरअसल केले में विटामिन सी, विटामिन ए, पौटेशियम और विटामिन बी6 होता है। हाल में हुई एक रिसर्च से यह प्रूफ हो चुका है कि पोटैशियम ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और यह किडनी से अवांछनीय पदार्थ भी बाहर निकालता है। चूंकि केला मैग्नेशियम का अच्छा स्त्रोत है, इसलिए यह बहुत जल्दी पच जाता है और आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ माइनसोटा में हुई रिसर्च से यह प्रूफ हो चुका है कि दो छोटे केलों में एक बेड की तुलना में ज्यादा फाइबर होता है। चूंकि फाइबर लोअर ब्लड कॉलेस्ट्रोल को कंट्रोल करने में कारगर है। इससे आप समझ सकते हैं कि केला कितना गुणकारी है।
केला है स्वादिष्ट अगर केले के स्वाद की बात जाए, तो इसका टेस्ट हर किसी का फेवरिट है। आप केले को कई तरीके से ले सकते हैं जैसे आप इसे खाने के वक्त सलाद के तौर पर लिया जा सकता है। वहीं कुछ लोग केले को मूंगफली के साथ क्रंची स्टाइल में लेना पसंद करते हैं। इसके अलावा केला एक हेल्दी ड्रिंक भी है। आप केले को शेक के तौर पर ले सकते हैं। आप ऑरैंज जूस में केले के स्लाइस डालकर ले सकते हैं। आप ऑरैंज जूस में थोड़ा-सा जायफल व दालचीनी डाल दें। इससे इसका टेस्ट डिफरेंट लगेगा। वहीं आप केले को नाश्ते में बेक करके भी ले सकते हैं।
खिलाड़ियों के लिए बेस्ट अगर आप खेल के फील्ड से जुड़े हुए हैं, तो ऐसे आप केला अपनी डाइट में जरूर शामिल करें। अकसर वर्कआउट करने के बाद आपकी बॉडी में एनर्जी की कमी हो जाती है। ऐसी स्थिति में केला ही ऐसा फल है, जो आपकी बॉडी एनर्जी देता रहता है। आपको एनर्जी के स्टेमिना भी बढ़ता है।
प्रेग्नेंसी में है जरूरी प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को सबसे ज्यादा विटामिन व मिनरल्स की आवश्यकता होती है। ऐसे में आप अपनी डाइट में केला अवश्य शामिल करें। चूंकि यह बॉडी को धीरे-धीरे एनजीर् देता है और आसानी से डाइजेस्ट भी हो जाता है। आप केले को स्नैक्स के तौर पर ले सकते हैं। अगर आपको ऊबकाई आती है, तो आप रोजाना केला खाएं।
बुढ़ापे का फूड आपको बता दें कि केला बुजुर्ग लोगों के लिए भी सबसे बेस्ट फल है। इसे आसानी से छिलकर खाया जा सकता है। यही नहीं, इसमें विटामिन सी, बी6 और फाइबर होता है, जो बुढ़ापे में जरूरी है। चूंकि बुढ़ापे में कब्ज की शिकायत ज्यादा होती है। ऐसे में आप रोजाना केला खाएं।

सफर


कुछ सोच... कुछ इरादे... लिए निकल पड़े..

पड़ाव आते गये ... हम बढ़ते गये..

सफर में रोज़ कुछ नया सीखते गये...

पड़ाव पड़ते गये हम बड़ते गये...

हवा बारिश सब चलते रहे.. हम भी बढ़ते गये....

कभी थक गए तो आसमा की आगोश में सुसता लिए..

पड़ाव पड़ते गए..हम बढ़ते गए...

और ये सफर चलता रहा...अब थकान जरूर होने लगी है...

लेकिन मजिल अभी दूर है..और अभी बहुत चलना है...

पड़ाव पड़ते गए हम बढ़ते गए..


जी लो जी भर के

शीशे के अन्दर से बाहर झांक कर देखो

थोड़ी मिठ्ठी की खुशबू लेकर देखो

जब तक है जिन्दगी थोड़ा जी कर देखो

कभी शीशे के बाहर की बौछार में भीगकर देखो...

एसी टीवी ये ऐशोआराम से बाहर झांक कर देखो...

जब तक है जिन्दगी थोड़ा जी कर देखो

मुट्ठी भर पैसों के आगे कभी सोचकर देखो

कभी मजलूम मजबूर के चेहरे पर खुशी लाकर देखो

कभी नम पड़ी आखों को हंसा कर देखो...

छोटी सी है

जिन्दगी..इसे जी कर देखो..

शालिनी राय ६ अक्टूबर


कहते हैं जिंदगी एक बार मिलती है, इसलिए उसे जी भरकर जीना चाहिए। लेकिन यह बात कहने-सुनने में जितनी आसान लगती है, फॉलो करने में उतनी ही मुश्किल। ख्वाहिशों की उड़ान और हकीकत के बोझ के बीच इंसान पिसकर रह जाता है। ऐसे में हर शख्स को कभी-न-कभी हताशा, निराशा, नाकामी और अकेलेपन की तकलीफ के बीच जिंदगी के बोझ बनने का अहसास घेर लेता है। घर-परिवार, यार-दोस्त, नौकरी-चाकरी से लेकर पर्सनल जरूरतों और चाहतों के बीच बेहतर तालमेल बनाकर कैसे जीएं जिंदगी को फुलटुस्स, बता रही हैं प्रियंका सिंह :
हम सभी के पास दो तरह की जिंदगी होती है। एक वह जिंदगी, जो हम जीते हैं और दूसरी वह, जो सभी के अंदर होती है लेकिन हम उसे जी नहीं पाते। जाहिर है, जरूरत इसी जिंदगी को जानने-समझने और जीने की है। इसके साथ ही यह जानना भी जरूरी है कि कामयाब जिंदगी क्या है? हालांकि हर शख्स के लिए इसकी अलग परिभाषा हो सकती है लेकिन मोटे तौर पर निम्न चीजें मिलकर एक कामयाब जिंदगी बनाती हैं :
- एक सुरक्षित और आनंददायक जगह पर रहना। - ऐसे लोगों का साथ, जो आपसे प्यार करते हों और आपकी इज्जत करते हों। - ऐसी चीजें करना, जिसने संतोष मिले और जिनका कोई रिवॉर्ड भी हो। - अपनी जरूरतें अच्छी तरह पूरी करने लायक चीजें और पैसा होना। - ऐसे समाज में रहना, जो सभी की स्वतंत्रता की हिफाजत करता हो।

सेल्फ मैनेजमेंट 1. अपने मन में साफ रखें कि हम जिंदगी में क्या पाना चाहते हैं। रोज इसके बारे में सोचें और विजुएलाइज करें। कल्पना करें कि हमने उसे पा लिया है। उस स्टेज में खुद को देखें। इससे हम उलझन से बच सकते हैं। 2. खुद से प्यार करें। हम जैसे हैं, उसी रूप में खुद को स्वीकार करें। किसी भी तरह की हीनभावना खुद पर हावी न होने दें। 3. दूसरों के लिए कुछ करना अच्छा है लेकिन दूसरों के लिए खुद को बिल्कुल भुलाना नहीं चाहिए। अपने शौक और इच्छाओं के लिए भी वक्त निकालना चाहिए। 4. हमें गुस्सा, नाराजगी, निराशा और नकारात्मक सोच जैसे नेगेटिव इमोशंस को हैंडल करना और उनसे बाहर निकलना सीखना चाहिए। अगर किसी बात या चीज से दुखी हों तो उसके बारे में सचेत हो जाएं। दुखी होते रहने के बजाय उस घटना से सबक लेकर या खुद को व्यस्त रखकर आगे बढ़ें। 5. दूसरों के पैसे, ओहदे, शोहरत से तुलना बेशक करें, लेकिन ईर्ष्या न करें। हम उनसे सीखें और खुद में कोई कमी है तो उसे दूर करें। लेकिन साथ ही अपने को भी देखें और अपने मौजूदा स्तर से आगे बढ़ें तो वही असली तरक्की है।
रिश्ते 1. दूसरे लोग हमें समझें, इससे पहले हम उन्हें समझने की कोशिश करें। उनके हालात में खुद को रखने की कोशिश करें। 2. कम्यूनिकेशन जरूरी है। बड़े-से-बड़े मतभेद होने पर भी बातचीत जारी रखें। आपसी मतभेद को मनभेद न बनने दें। 3. जितना हो सके सुनें। इससे हम ज्यादा-से-ज्यादा सीखेंगे और कम-से-कम चीजें मिस करेंगे। साथ ही, आपस में तकरार होने के चांस भी कम होंगे। 4. जब सामनेवाले का पारा हाई तो चुप रह जाना ही बेहतर है, चाहे सामनेवाला गलत ही क्यों न हो। बाद में जरूर अपनी बात को कायदे से सही शब्दों में सामने रखें। मन में बातों को दबाकर रखना भी सही नहीं है। 5. दूसरों पर अपनी पसंद-नापसंद न थोपें। जब खुद हम हमेशा दूसरों के मुताबिक नहीं चल सकते तो दूसरों से यह उम्मीद भी बेकार है। अपने दोस्तों, रिश्तेदारों को बदलने की कोशिश से रिश्तों में खटास के सिवा कुछ नहीं मिलेगा।
सेहत 1. हम पैसे कमाने की खातिर अपनी सेहत को नजरअंदाज करते जाते हैं और बाद में सेहत ठीक करने की कोशिश में बेतहाशा पैसे खर्च करते हैं। पर अक्सर इसमें नाकाम रहते हैं। सेहत को अपनी प्राथमिकताओं में रखें। 2. रोजाना आधे घंटे की सैर या एक्सरसाइज जरूर करें। योगासन, प्राणायाम और मेडिटेशन कर पाएं तो तन-मन दोनों दुरुस्त रहेंगे। 3. कुछ लोग खाने के लिए जीते हैं तो कुछ जीने के लिए खाते हैं। हमें इन दोनों के बीच का रास्ता निकालना चाहिए। खाने में मन न मारें। कुछ भी खा सकते हैं लेकिन लिमिट में। खाना सेहतमंद हो, यह जरूर ध्यान रखना चाहिए। 4. आराम करें। हफ्ते में कम-से-कम कुछ घंटे ऐसे हों, जब हम दिल-दिमाग से तनावरहित होकर सिर्फ और सिर्फ आराम करें। ये चंद घंटे हमारी जिंदगी में रौनक और जोश लौटा देंगे। जिन लोगों से प्यार करते हैं, जिनका साथ पसंद करते हैं, उनके साथ वक्त बिताएं। 5. शराब, तंबाकू, गुटके जैसी चीजों से दूर रखें। अगर कुछ बुरी आदतें हैं तो उन्हें छोड़ने की कोशिश करें। बुरी आदतों को छुड़ाना मुश्किल हो सकता है लेकिन नामुमकिन नहीं।
करियर 1. भेड़चाल में न चलें, न ही दूसरों को मोटी कमाई करते देख उसी दिशा में बढ़ने लगें। हमें कामयाबी उसी फील्ड में मिलती है, जिसमें महारत हासिल है और जिसे हम एंजॉय करते हैं। 2. अपने सबसे बड़े शौक को प्रफेशन के रूप में चुनें। कोई काम न करें, जिसमें दिलचस्पी न हो। मनपसंद काम चुनने से हम उसे एंजॉय करेंगे। इससे काम से होनेवाला स्ट्रेस आपसे दूर रहेगा। 3. अगर हम अपने काम में सौ फीसदी देते हैं तो हमारी कामयाबी तय है क्योंकि माकेर्ट में ऐसे लोग बहुत कम हैं। छोटे-से-छोटे काम में भी अपना दिल, दिमाग और ताकत लगा दें। 4. जो भी काम करें, उसमें अपनी छाप छोड़ें। काम सभी लोग करते हैं, लेकिन कुछ लोग उसके लिए जाने जाते हैं। लीक से हटकर काम करें। लीक पर चलेंगे तो वहीं पहुंचेंगे, जहां दूसरे लोग उस रास्ते पर चलकर पहुंचे हैं। 5. जिंदगी के आखिरी लम्हे तक सीखते रहें। जानकारी ही हमारी असली ताकत है। अपने फील्ड के बारे में खुद को अपडेट करते रहें। चाहे इंटरनेट से करें या प्रफेशन से जुड़ी नई किताबें पढ़ें।
मनी मंत्रा 1. पैसे से खुशियां नहीं खरीदी जा सकतीं लेकिन इससे जिंदगी आसान हो जाती है और बहुत-सी तकलीफें दूर हो सकती हैं। इसलिए फाइनैंशल सिक्युरिटी जरूरी है। 2. जितनी चादर हो, उतने पैर पसारने चाहिए, अब यह फंडा बदल गया है। अब पैर सिकोड़ने के बजाय चादर बढ़ाने पर जोर देना चाहिए, लेकिन इतना जोर न लगाएं कि चादर फट जाए। 3. इनकम बढ़ाने के लिए एक ही सोर्स पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। कम-से-कम दो सोर्स होने चाहिए। अगर एक में दिक्कत हो तो दूसरा चलता रहे। लेकिन नया सोर्स बनने पर ही पुराने को छोड़ने की सोचें। 4. बचत को लेकर संतुलित नजरिया अपनाएं। बचत इतनी ज्यादा न करें कि आनेवाले कल को संवारने के चक्कर में अपने आज में तकलीफें उठाएं। न ही इतना ज्यादा खर्च करें कि आज की मौज-मस्ती के चक्कर में आनेवाले कल का ध्यान ही न रखें। 5. पैसे को मैनेज करें न कि पैसा आपको मैनेज करे। यानी अंधाधुंध पैसे कमाने के चक्कर में जिंदगी की बुनियादी खुशियों से दूर न हो जाएं। साथ ही, फटाफट पैसे कमाने के चक्कर में न पड़ें। ऐसे में अक्सर आदमी धोखा खाता है।
टाइम मैनेजमेंट 1. प्राथमिकता तय करें। ऐसा करते हुए हमेशा ध्यान रखें कि महत्वपूर्ण काम क्या है। कई बार हम लोग अर्जेन्ट और अहम काम के बीच फर्क नहीं कर पाते। अजेर्ंट काम (चाहे कम जरूरी ही क्यों न हो) अक्सर इस लिस्ट में ऊपर आ जाता है, जबकि अहम काम पीछे छूट जाता है। मसलन, अगर दांत का इलाज करना है तो हम अक्सर उसे टालते रहते हैं, जबकि वह बेहद जरूरी है पर अक्सर अजेंर्ट नहीं होता। 2. सही वक्त पर फैसले करना बेहद जरूरी है। किसी फैसले को लंबे वक्त तक टालने से बेहतर है, आर-पार करना। इससे स्थिति साफ हो जाती है। किसी फैसले को टालना कई बार उस फैसले को लेने से कहीं ज्यादा नुकसानदेह हो सकता है। 3. रोजाना सुबह उठकर उस दिन के कामों की लिस्ट बना लें। वक्त कम होने पर इनमें से गैरजरूरी को हटा दें, कम जरूरी को टाल दें और हो सके तो कामों को दूसरों को बांट दें, लेकिन उन पर थोपें नहीं। 4. लंबे वक्त से अटके पड़े काम के लिए रोजाना 10 मिनट का वक्त तय करें। इसी तरह ज्यादा वक्त खाने वाले कामों को भी छोटे-छोटे हिस्से में बांट लें और रोजाना थोड़ा-थोड़ा वक्त उसमें लगाएं। इससे देर से ही सही, काम पूरा हो जाएगा। 5. गौर करें कि हम अपना वक्त कैसे बिताते हैं। इसके लिए एक डायरी रखें और उसमें तीन दिन तक अपना रुटीन लिखें। इससे आप आसानी से पता लगा सकेंगे कि किस काम में आपका वक्त जाया हो रहा है।
लाइफ के टिप्स - कभी खुशी और सुकून के पलों को कैनवस पर उतारने की सोची है। सबसे पहले मन में पेड़ के नीचे आराम से बैठकर नेचर को निहारते शख्स की इमेज मन में आती है। जाहिर है, जिंदगी की भागदौड़ के बीच कुछ वक्त अपने लिए निकालना बेहद जरूरी है। - अपनी जिंदगी को एक विस्तृत तस्वीर के रूप में देखें। सोचें कि हमारी जिंदगी के अलग-अलग क्षेत्र आपस में किस तरह जुड़ें हैं और पहचानें कि अगर एक में बदलाव होगा, तो दूसरों पर उसका क्या असर दिखेगा। - आज में जीएं। वर्तमान क्षण और आसपास की खूबसूरती को जीएं। अगर यह स्वीकार कर लें कि बदलाव शाश्वत है तो वर्तमान में जीने में मदद मिलती है। - अहम होना अच्छा है लेकिन अच्छा होना ज्यादा अहम है। - सफलता का कोई मंत्र नहीं है। यह कड़ी मेहनत, सही मौकों पर सही फैसले और तकदीर के मेलजोल से मिलती है। - कुछ लोग उन चीजों को देखते हैं, जो हैं और पूछे हैं क्यों, जबकि कुछ लोग ऐसी चीजों का सपना देखते हैं, जो कभी नहीं थीं और पूछते हैं - क्यों नहीं? - नया हमें लुभाता है लेकिन हम बदलाव से बचते हैं। नयापन लाने के लिए हमेशा बदलाव को तैयार रहना होगा।

प्यार


प्यार से प्यारा होता है प्यार

कभी रेशम तो कभी सख्त होता है प्यार

कभी शरारती तो कभी मां की छाया होता है..प्यार

प्यार से प्यारा होता है...प्यार

कभी डॉट तो कभी ममता का पिटारा होता है..प्यार

अलग अलग रंग से रंगा होता है..प्यार

कई रिश्तों की छाप होता है....प्यार

प्यार से प्यारा होता है...प्यार


क्या आपको तुरंत नकदी की जरूरत है और एकाउंट खाली है। क्लाइंट से चेक तो मिला है, लेकिन रात के वक्त जरूरत पड़ने पर उसका कोई फायदा नहीं? या फिर डेबिट कार्ड खोने के बाद आपको अपने बच्चे के जन्मदिन समारोह के लिए आयोजक को तुरंत पैसा देना है? जेब खाली और चिंताएं इतनी। लेकिन जल्द ही ये दिक्कतें दूर होने वाली हैं।
भारत में कुछ बैंक ऐसी टेक्नोलॉजी का परीक्षण कर रहे हैं, जिससे एटीएम में चेक डालकर तुरंत नकदी हासिल की जा सकेगी...

एटीएम बनेगा सीटीएम..सीटीएम क्या है?उत्तरी अमेरिका और यूरोप में चेक ट्रंकेटिंग मशीन (सीटीएम) का काफी इस्तेमाल होता है, जो विशेष एटीएम मशीन के अंदर रहती है। सीटीएम, एक ऐसा यंत्र है, जो तुरंत चेक वेरिफिकेशन और क्लियरेंस करती है। अमेरिका की एनसीआर कॉर्प. और डाईबॉल्ड इंक जैसी एटीएम बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों की नजरें अब भारत के कुछ बैंकों पर टिक गई हैं।
भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईडीबीआई और आईएनजी वैश्य जैसे कुछ बैंकों ने ऐसे एटीएम में दिलचस्पी जताई है। बैंकिंग नियामक रिजर्व बैंक ने भी इस कदम का स्वागत किया है। आरबीआई का कहना है कि यह ग्राहकों के लिए काफी बढि़या रहेगा।तो नकदी ऐसे भी ग्रहण करेगी एटीएम एनसीआर इंडिया के एमडी प्रदीप सेन ने कहा कि कंपनी बीते महीने से भारत में बैंकों को सीटीएम-एटीएम दिखा रही है। उन्होंने कहा, 'हम नई एटीएम मशीन भी लॉन्च करेंगे, जिसमें आप नोटों का बंडल इंसर्ट कर सकेंगे, वह भी किसी भी क्रम में।
एटीएम आपके नोट का अध्ययन करेगी और एकाउंट में रकम तुरंत क्रेडिट कर दी जाएगी।' फिलहाल एटीएम में रकम डिपॉजिट करने के लिए नकदी को एक लिफाफे में डालना पड़ता है। यह 24 घंटे में जाकर खाते में क्रेडिट होती है। देश में 48,000 से ज्यादा एटीएम सेंटर हैं, जो तीन शीर्ष एटीएम निर्माता कंपनियों (एनसीआर, डाईबॉल्ड और जर्मनी की विनकॉर निक्सडॉर्फ) के हैं। कैसे काम करेगी सीटीएम -एटीएमसीटीएम-एटीएम इंसर्ट किए जाने वाले चेक को स्कैन करती है और उसकी डिजिटल इमेज बनाती है। यह डिजिटल चेक इमेज क्लियरेंस के लिए इलेक्ट्रॉनिक आधार पर इसे जारी करने वाले बैंक के आईटी नेटवर्क पर भेजी जाती है।कुछ पलों में आपके खाते में रकम क्रेडिट कर दी जाती है, जिसे डेबिट कार्ड के जरिए तुरंत निकाला जा सकता है। या अगर आप अपना डेबिट कार्ड कहीं खो बैठते हैं या रखकर भूल जाते हैं, तो दोस्त को चेक जारी कर नकदी का संकट खत्म किया जा सकता है। आरबीआई के एक प्रवक्ता ने बताया कि बैंकों को इंटर और इंटरा बैंक उद्देश्यों के लिए सीटीएम (चेक ट्रंकेटिंग मशीन) के इस्तेमाल की इजाजत पहले से दी गई है।
साभार हरसिमरन सिंह/ अमन ढल


गलत खानपान , स्ट्रेस और गड़बड़ लाइफस्टाइल के चलते आजकल बड़ी तादाद में लोग हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से परेशान हैं। अगर वक्त रहते कंट्रोल न किया जाए तो हाई बीपी कई गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। हाई बीपी एक ' साइलंट डिज़ीज ' है यानी ज्यादातर लोगों में इसका कोई लक्षण दिखाई नहीं देता। ऐसे में जब तक बीपी की जांच न हो , तब तक उन्हें पता ही नहीं लग पाता।

कब समझें कि हाई बीपी के शिकार हो गए हैं - जब भी बीपी छह महीने तक लगातार 85 से ज्यादा रहे। कभी - कभी स्ट्रेस या किसी और वजह से बीपी 85 से ऊपर हो सकता है , लेकिन फिक्र की बात तब है जब लगातार छह महीने तक ऐसा हो। 50 साल से ज्यादा उम्र वालों का बीपी कुछ ज्यादा होना नॉर्मल है पर अपर बीपी 139 और लोअर बीपी 89 से ज्यादा न हो। वैसे 55 साल के बाद अक्सर यह देखने में आता है कि नीचे का बीपी तो तकरीबन नॉर्मल आता है , पर ऊपर का बीपी ज्यादा आता है। यानी ज़रूरी नहीं कि अपर बीपी और लोअर बीपी की माप एक ही कैटिगरी में आए। ऐसे में आप खुद को ज्यादा गंभीर कैटिगरी में मानें। मसलन , अगर किसी का अपर बीपी 160 है और लोअर बीपी 80 तो वह हाइपरटेंशन स्टेज -2 कैटिगरी में है। अगर किसी का अपर बीपी 120 है और लोअर 95 तो वह हाइपरटेंशन स्टेज -1 कैटिगरी में है।

जब बीपी हो जाए हाई ...
1. स्टेस करें कंट्रोल : स्ट्रेस कंट्रोल करने के लिए चिंता , तनाव और गुस्से से बचें। हर वक्त जल्दबाजी में न रहें। शांत और खुश रहें।
आराम : दिन भर काम के दौरान बीच - बीच में थोड़ी देर के लिए रिलैक्स जरूर हो लें।
नींद : हाई बीपी की शिकायत जिन लोगों को है उन्हें कम से कम 8 घंटे की नींद जरूर लेनी चाहिए। रात को सोते समय सिर उत्तर दिशा में न रखें। सिरहाना बहुत मोटा और सख्त न हो।
म्यूज़िक : सॉफ्ट या क्लासिकल म्यूज़िक ( शास्त्रीय संगीत ) सुनें। रोज करीब आधे घंटे तक क्लासिकल म्यूज़िक सुनने से हाई बीपी घटता है। ऐसा चार हफ्ते तक लगातार करने पर आपको बीपी में कमी मिलेगी।
मेडिटेशन : हमारा मन हर वक्त कुछ न कुछ सोचता रहता है। ध्यान यानी मेडिटेशन के समय मन को किसी एक विषय पर फोकस किया जाता है। जैसे - सांस के आने - जाने पर , किसी आवाज पर या फिर किसी मंत्र पर। किसी से मेडिटेशन सीख लें। रोज दिन में दो बार 20 मिनट तक मेडिटेशन करने से हाई बीपी कंट्रोल होता है।
2. बढ़ाएं शारीरिक मेहनत : ब्लड प्रेशर नॉर्मल रखने का सबसे आसान तरीका है रेग्युलर एक्सरसाइज। रोज आधे घंटे की एक्सरसाइज से शरीर के अंदर नाइट्रिक ऑक्साइड एक्टिवेट होता है , जिससे ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है। सैर करना , लिफ्ट की जगह सीढि़यों का इस्तेमाल और घर के काम खुद करना काफी फायदेमंद है।
3. घटाएं वजन : मोटापा हाई बीपी की खास वजह होता है , उसे घटाएं।
4. छोड़ें स्मोकिंग व ड्रिंकिंग : सिगरेट , शराब और गुटखा बिल्कुल छोड़ दें तो अच्छा है , नहीं तो कम ज़रूर कर दें।
5. ठीक करें खानपान : पोटैशियम वाली चीजें ज़रूर लें। पोटैशियम दूध और फल - सब्जियों में पाया जाता है। छाछ , दही , केला , किशमिश , खजूर , आलू , बींस , गाजर , पालक , शकरकंद और टमाटर ले सकते हैं। लंबी लौकी का जूस , संतरे का जूस , गाजर और पालक का मिक्स्ड जूस , खीरा , पुदीने की चटनी खासतौर पर फायदेमंद है। सुबह पपीता लें। तरबूज खाते वक्त हल्का नमक व काली मिर्च डालकर खाएं। हां , जो लोग हाई बीपी के साथ - साथ किडनी की बीमारी से भी परेशान हैं , वे ज्यादा पोटैशियम वाली चीजें कम खाएं , मसलन - केला , संतरा , किशमिश , खजूर , खूबानी , गाजर जूस , बींस , सोयाबीन , मसूर की दाल , पालक , आलू।
कैल्शियम वाली चीजें : लो फैट दूध व दूध से बनी चीजें , दही , छाछ।
मैग्नीशियम वाली चीजें : सरसों जैसी हरी पत्तेदार सब्जियां , साबुत अनाज , फल , गहरे हरे पत्तों वाली सब्जियां , घीया और पिस्ता , अखरोट , बादाम , काजू जैसे ड्राई फ्रूट्स , बींस , मटर , सोयाबीन का आटा , चॉकलेट व कोको पाउडर में मैग्नीशियम होता है। ब्राउन ब्रेड में सफेद रिफाइंड या प्रॉसेस्ड आटे के ब्रेड के मुकाबले ज्यादा मैग्नीशियम होता है। धनिया , सूखी सरसों , सौंफ , जीरा आदि कुछ मसालों में भी यह पाया जाता है।
मूत्रवर्धक चीजें : बीपी बढ़ने पर मूत्र की मात्रा बढ़ाएं तो अच्छा होता है। इसके लिए ठंडी व पेशाब लाने वाली चीजें जैसे खीरा , छाछ , नारियल पानी , गाजर का रस , सेब , पपीता , अनार , तरबूज , खरबूजा और हरी सब्जियां या इनका जूस लें। जो सब्जियां बेलों पर उगती हैं , वे मूत्र लाने में सहायक होती है , उनका इस्तेमाल करें। नारियल पानी भी फायदेमंद है।
साबुत अनाज : गेहूं पिसवाएं तो चोकर रहने दें। चना कम लें। जौ व जई का इस्तेमाल करें। अंकुरित अनाज भी बेहतर रहता है।
ड्राई फ्रूट्स : दो अखरोट की गिरियां और बादाम की छह गिरियां रात को भिगोकर सुबह खाएं। गमिर्यों में भी भीगे बादाम खाने में हर्ज नहीं।
कम लें नमक : दिन भर में ढाई ग्राम सोडियम यानी 6 ग्राम या एक चम्मच से ज्यादा नमक न लें। यहां तक कि सेंधा नमक भी कम लें। सिर्फ नमक की मात्रा घटाने से ही हाई बीपी कम हो जाता है। ब्रेड में भी नमक होता है। सोडियम भी कम लें। इन चीजों में सोडियम की मात्रा ज्यादा होती है , इनसे बचें। जैसे - मट्ठी , नमकीन , भुजिया , दालमोठ , पराठा , पूरी , चाट - पकौड़ी और फ्रेंच फ्राइज , पॉपकॉर्न , नमकीन काजू , आलू चिप्स , नमकीन मक्खन , प्रोसेस्ड फूड , डिब्बाबंद अचार - मुरब्बे , टमेटो व सोया सॉस , बिस्कुट , केक , पेस्ट्री , वड़ा , डोसा , उत्तपम , आइसक्रीम।
फैट : खाने में एक महीने में घी - तेल - मक्खन तीनों को मिलाकर सिर्फ आधा किलो से ज्यादा का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए , यानी एक दिन में 15 ग्राम से ज्यादा नहीं। छोले - भठूरे , समोसे , पकौड़े आदि तली - भुनी चीजें खाने से बीपी बढ़ता है। खाना बनाने में सरसों , मूंगफली व सूरजमुखी का तेल और कॉर्न ऑयल का इस्तेमाल अच्छा रहता है। ऑलिव ऑयल यानी जैतून के तेल का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
इनके अलावा वे चीजें भी कम लें जो पेशाब कम लाती हैं जैसे तीखे मिर्च - मसाले वाली चीजें। चीनी , चाय , कॉफी , कोला , नॉनवेज खाना और पेनकिलर दवाएं भी कम लें।

साभार नरेश तनेजा और नीतू सिंह

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