रूठने मनाने का सिलसिला पुराना है..
यही शायद रिश्तो में मिठास भरता है...
प्यार और लड़ाई का रिश्ता पुराना है..
यही तो सबको करीब लाता है...
रिश्तो में कड़वाहट आम बात है..
लेकिन उनमें मिठास भरीए तो बात है...
रूठने मनाने का सिलसिला पुराना है..
क्या कहूं जिदंगी भी क्या चीज़ होती है...
पल में खूबसुरत तो पल में बदरंग होती है..
क्या कहूं जिदंगी भी क्या चीज़ होती है..
कभी मासुम तो कभी होश उड़ा देती है..
क्या कहूं कि जिदंगी भी क्या चीज़ होती है..
कभी बहुत कुछ दे देती है...तो कभी सब कुछ ले लेती है...
क्या कहूं जिदगी भी क्या चीज़ होती है..
दुनिया में हर 10 सेकंड में एक मौत होती है डायबीटीज से। जी हां , नाम बेशक शुगर है लेकिन यह बीमारी धीमे जहर की तरह शरीर को खोखला करती है। गौर करनेवाली बात यह है कि दुनिया का हर 5 वां डायबीटीज मरीज भारतीय है। यही वजह है कि भारत डायबीटिक कैपिटल कहलाता है। लेकिन लाइफस्टाइल में सुधारकर इस बीमारी को खुद से दूर रखा जा सकता है। डायबीटीज से कैसे बचा जा सकता है , एक्सपर्ट्स से बात करके बता रही हैं प्रियंका सिंह :
डायबीटीज क्या है ?
डायबीटीज क्या है ?
डायबीटीज या शुगर लाइफस्टाइल संबंधी या वंशानुगत बीमारी है। जब पैंक्रियाज नामक ग्लैंड शरीर में इंसुलिन बनाना कम कर देता है या बंद कर देता है , तो यह बीमारी हो जाती है। इंसुलिन ब्लड में ग्लूकोज को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसकी मदद के बिना सेल्स शुगर ( ग्लूकोज ) को एनर्जी के लिए इस्तेमाल नहीं कर पाते और यह बढ़ा हुआ शुगर लेवल डायबीटीज के रूप में सामने आता है। आमतौर पर इस बीमारी के लक्षण प्रकट होने में 10-15 साल लग जाते हैं। वैसे , 45-50 फीसदी मरीज वे होते हैं , जिनके परिवार में पहले से किसी को डायबीटीज रही हो।
डायबीटीज कितनी तरह की होती है ?
डायबीटीज को मुख्यत : दो वर्गों में बांटा जा सकता है : टाइप 1 या इंसुलिन आधारित डायबीटीज : इसमें इंसुलिन हॉर्मोन बनना पूरी तरह से बंद हो जाता है। ऐसा किसी एंटीबॉडीज की वजह से बीटा सेल्स के पूरी तरह काम करना बंद करने से होता है। ऐसे में शरीर में ग्लूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। ऐसा न करने पर मरीज बेहोश हो सकता है और कभी - कभी कोमा में भी चला जाता है। यह 3 से 25 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा होती है। इसके मरीज काफी कम होते हैं।
टाइप टू या बिना इंसुलिन आधारित डायबीटीज : इसमें इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पैंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है। इस तरह की डायबीटीज आमतौर पर व्यस्कों में ही पाई जाती है और इंसुलिन आधारित डायबीटीज की तुलना में कम गंभीर होती है। डायबीटीज के 90 फीसदी मरीज इसी कैटिगरी में आते हैं। एक्सरसाइज , बैलेंस्ड डाइट और दवाइयों से इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। डायबीटीज है तो किस MS">डॉक्टर के पास जाना चाहिए ? डायबीटीज का इलाज एंडोक्रिनॉलजिस्ट करते हैं। वैसे किसी भी ट्रेंड एमडी से डायबीटीज का इलाज कराया जा सकता है। अगर वह अपने नाम के आगे डायबीटॉजलिस्ट लिखता है तो और अच्छा है।
क्या वायरस के इन्फेक्शन से भी डायबीटीज की आशंका होती है ?
डायबीटीज कितनी तरह की होती है ?
डायबीटीज को मुख्यत : दो वर्गों में बांटा जा सकता है : टाइप 1 या इंसुलिन आधारित डायबीटीज : इसमें इंसुलिन हॉर्मोन बनना पूरी तरह से बंद हो जाता है। ऐसा किसी एंटीबॉडीज की वजह से बीटा सेल्स के पूरी तरह काम करना बंद करने से होता है। ऐसे में शरीर में ग्लूकोज की बढ़ी हुई मात्रा को कंट्रोल करने के लिए इंसुलिन के इंजेक्शन की जरूरत होती है। ऐसा न करने पर मरीज बेहोश हो सकता है और कभी - कभी कोमा में भी चला जाता है। यह 3 से 25 साल की उम्र के लोगों में ज्यादा होती है। इसके मरीज काफी कम होते हैं।
टाइप टू या बिना इंसुलिन आधारित डायबीटीज : इसमें इंसुलिन कम मात्रा में बनता है या पैंक्रियाज सही से काम नहीं कर रहा होता है। इस तरह की डायबीटीज आमतौर पर व्यस्कों में ही पाई जाती है और इंसुलिन आधारित डायबीटीज की तुलना में कम गंभीर होती है। डायबीटीज के 90 फीसदी मरीज इसी कैटिगरी में आते हैं। एक्सरसाइज , बैलेंस्ड डाइट और दवाइयों से इसे कंट्रोल में रखा जा सकता है। डायबीटीज है तो किस MS">डॉक्टर के पास जाना चाहिए ? डायबीटीज का इलाज एंडोक्रिनॉलजिस्ट करते हैं। वैसे किसी भी ट्रेंड एमडी से डायबीटीज का इलाज कराया जा सकता है। अगर वह अपने नाम के आगे डायबीटॉजलिस्ट लिखता है तो और अच्छा है।
क्या वायरस के इन्फेक्शन से भी डायबीटीज की आशंका होती है ?
कुछ परिस्थितियों में वायरस का इन्फेक्शन भी डायबीटीज की वजह होता है। राइनो वायरस का इन्फेक्शन होने पर ये पैंक्रियाज ग्लैंड में मौजूद बीटा सेल्स को नष्ट कर देते हैं। वायरस से लड़ने के लिए शरीर में पैदा हुए एंटीबॉडीज भी पैंक्रियाज पर अटैक करके बीटा सेल्स पर बुरा असर डालते हैं। नतीजतन , इंसुलिन बनना बंद हो जाता है या कम हो जाता है।
डायबीटीज से कौन - कौन सी दिक्कतें आती हैं ?
डायबीटीज से कौन - कौन सी दिक्कतें आती हैं ?
कमजोरी , हाथ - पैरों का कांपना , सुनने में दिक्कत , कंधे में दर्द या जाम हो जाना। इसके अलावा मसूड़ों में सूजन , आंखों से कम दिखने लगना , याददाश्त कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
क्या कुछ दवाएं भी बुरा असर डालती हैं ?
क्या कुछ दवाएं भी बुरा असर डालती हैं ?
मूत्रवर्धक , हाई बीपी स्टेरॉयड , कार्टीजोन , स्किन की बीमारियों की दवाएं और गर्भ - निरोधक दवाएं लगातार 6 महीने से ज्यादा वक्त तक लेते रहने से पैंक्रियाज के काम करने पर बुरा असर पड़ता है। इससे इंसुलिन बनना कम हो जाता है और डायबीटीज की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा , दिल की बीमारी होने या पैंक्रियाज ग्लैंड में सूजन होने पर डायबीटीज होने की आशंका काफी बढ़ जाती है।
क्यों हो जाती है शुगर की बीमारी ?
क्यों हो जाती है शुगर की बीमारी ?
खानदानी बीमारी : अगर परिवार में किसी को डायबीटीज रही हो तो आशंका बढ़ जाती है। उम्र : कभी भी हो सकती है , पर 80 फीसदी मामलों में 50 साल के बाद होती है। गलत खानपान : कम प्रोटीन , कम फाइबर वाली और तली - भुनी चीजें और जंक फूड खाना। मोटापा : बीएमआई 25 से ज्यादा हो , कमर का घेरा महिलाओं में 35 इंच और पुरुषों में 40 इंच से ज्यादा हो। सेडेंटरी लाइफस्टाइल : लगातार एक ही जगह बैठकर काम करना और एक्सरसाइज न करना। स्ट्रेस : ज्यादा तनाव में रहना और पूरा आराम न करना। बीपी : कम उम्र में हाई बीपी , हार्ट प्रॉब्लम या खून में कॉलेस्ट्रॉल ज्यादा होना। दवाएं : हाई बीपी , जोड़ों के दर्द आदि में दिए जानेवाले स्टेरॉयड , कार्टीजोन , स्किन की बीमारियों की दवाएं और गर्भ - निरोधक दवाएं प्रेग्नेंसी : महिला को प्रेग्नेंसी के वक्त शुगर रही हो या बच्चा बेहद मोटा पैदा हुआ हो। शुगर की जांच के लिए कौन - कौन से टेस्ट कराने चाहिए ?
25 साल की उम्र में साल में एक बार ब्लड शुगर टेस्ट करा लें। शुगर लेवल थोड़ा भी ज्यादा आता है या फैमिली हिस्ट्री है तो ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट जरूर कराएं। जिनकी फैमिली हिस्ट्री है , वे तीन महीने में जांच कराएं। प्रेग्नेंसी के दौरान डायबीटीज होने पर बच्चे को इस बीमारी की कितनी आशंका होती है ? ऐसे में बच्चे को यह बीमारी होने के 27 फीसदी चांस होते हैं। ऐसी 40 फीसदी मांओं को ऐहतियात न बरतने पर चार साल के अंदर डायबीटीज हो जाती है। बच्चों को इस बीमारी से दूर रखने के लिए मोटापे से बचाएं।
25 साल की उम्र में साल में एक बार ब्लड शुगर टेस्ट करा लें। शुगर लेवल थोड़ा भी ज्यादा आता है या फैमिली हिस्ट्री है तो ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट जरूर कराएं। जिनकी फैमिली हिस्ट्री है , वे तीन महीने में जांच कराएं। प्रेग्नेंसी के दौरान डायबीटीज होने पर बच्चे को इस बीमारी की कितनी आशंका होती है ? ऐसे में बच्चे को यह बीमारी होने के 27 फीसदी चांस होते हैं। ऐसी 40 फीसदी मांओं को ऐहतियात न बरतने पर चार साल के अंदर डायबीटीज हो जाती है। बच्चों को इस बीमारी से दूर रखने के लिए मोटापे से बचाएं।
देश के दक्षिण-पश्चिमी तट पर बसा कोचीन अपनी लोकेशन की वजह से देश के इतिहास में एक अलग ही जगह रखता है। केरल के इ स खूबसूरत शहर पर अरब, ब्रिटिश, चाइनीज, डच, पुर्तगाली वगैरह सभ्यताओं की छाप साफ नजर आती है। भू मध्य रेखा के पास होने के अलावा, समुद व पहाड़ियों के भी इसके करीब होने से यहां खूबसूरत नजारों के साथ अच्छे मौसम को भी एंजॉय किया जा सकता है।
क्या देखें
चाइनीज फिशिंग नेट्स ये खासतौर पर कोचीन में ही यूज होती हैं। माना जाता है कि चीन के शासक कुबलई खान के दौर के व्यापारी इन्हें यहां लाए थे। दिलचस्प बात यह है कि ये नेट्स बस कोचीन में ही मिलती हैं और चीन में नहीं। फोर्ट कोचीन और वायपीन के आसपास के पूरे क्षेत्र में इनका जाल देखा जा सकता है।
फोर्ट कोचीन बीच सूर्यास्त के समय इन बीचों पर टहलना और दूर से जहाजों को देखना एक यादगार अनुभव रहेगा। बीच के किनारे कई यूरोपियन स्टाइल के बंगले भी देखे जा सकते हैं। साथ ही, यहां ताजी मछली से बनी कई डिशेज का स्वाद भी चखा जा सकता है।
वास्को हाउस रोस स्ट्रीट पर बना वास्को हाउस देश के सबसे पुराने पुर्तगाली हाउसेज में से एक है और माना जाता है कि वास्को डि गामा यहां रहे थे।
डच पैलेस इसे डचों ने बनवाया था और 17वीं शताब्दी में उन्होंने इसमें कुछ बदलाव कर इसे कोचीन के राजा को दे दिया था। यहां रामायण और महाभारत से जुड़ीं तमाम पेंटिंग्स देखी जा सकती हैं।
बोलगट्टी पैलेस मेनलैंड से थोड़ी देर की बोट राइड पर बोलगट्टी आइलैंड पर स्थित है यह पैलेस, जिसे फिलहाल केरल टूरिज्म के होटल में बदल दिया गया है। गोल्फ कोर्स और बेहतरीन नजारों वाला यह पैलेस एक पॉप्युलर पिकनिक स्पॉट है।
हिल पैलेस 19वीं सदी के कोचीन के राजा द्वारा बनवाए गए इस महल को फिलहाल एक म्यूजियम में बदल दिया गया है, जहां शाही परिवार की तमाम चीजों को रखा गया है।
पल्लिपुरम यह बेहद पुराने यूरोपियन फोर्ट्स में से एक है, जिन्हें पुर्तगालों ने 1503 में बनवाया था।
मंगलवन बर्ड सेंचुरी शहर के मध्य में बनी इस सेंचुरी में पक्षियों की कई प्रजातियों को देखा जा सकता है।
केरल म्यूजियम केरल के कल्चर, इतिहास, पेंटिंग्स, मशहूर हस्तियों के बारे में जानने के लिए यह म्यूजियम बेस्ट जगह है।
चेरई बीच तैराकी का मजा देने वाला यह बीच मेनलैंड से हटकर व्यपीन नाम के छोटे आइलैंड के पास है।
मरीन ड्राइव बैकवॉटर की वजह से बना यह कोस्टल पाथवे दोपहर और शाम का वक्त बिताने के लिए बेस्ट है। यहां नावों, टैंकर्स, पैसिंजर बोट्स फिशिंग बोट्स के नजारे खूब देखे जा सकते हैं।
एलिफेंट सेंचुरी दुनिया में अपनी तरह की अनूठी से सेंचुरी में आप हाथियों को करीब से देखने व जानने का मौका आपको मिलेगा। यह गुरुवयूर मंदिर के पास स्थित है।
धामिर्क स्थल
सेंट फ्रांसेस चर्च यूरोपियंस द्वारा बनवाया गया यह देश का सबसे पुराना चर्च है। अपनी तीसरी विजिट के दौरान बीमार होने से वास्को डि गामा का मृत्यु केरल में हुई थी और तब उन्हें इसी चर्च में दफनाया गया था।
गुरुवयूर यहां के इस मशहूर श्री कृष्णा टेंपल में हर साल 10 मिलियन से भी ज्यादा तीर्थ यात्री आती हैं। कहा जाता है कि जातिवाद से हटकर सभी के लिए अपनी द्वार खोलने वाला यह पहला मंदिर है।
ज्यू सायनागॉज डच पैलेस के पास 1568 में बनी यह बिल्डिंग चाइनीज और बेल्जियन चीजों से सजी है, जहां कोचीन के पुराने समय को सहज ही महसूस किया जा सकता है।
त्रिचूर केरल की कल्चरल कैपिटल कहलाने वाले त्रिचूर में भगवान शिव को समर्पित एक शानदार मंदिर है।
सैंटा क्रूज बेसिलिका फोर्ट कोचीन में बनी इस चर्च को पहले 1505 में पुर्तगालों ने बनवाया था और 1558 में इसे केथेड्रेल का नाम दिया गया। ब्रिटिश शासकों ने इसे 1795 में नष्ट कर दिया था। मौजूदा स्वरूप 1905 का बना है, जिसे बेसिलिका का स्टेटस पाप जॉन पॉल 2 ने 1984 में दिया था।
चेरामन मस्जिद लगभग 629 एडी में बनी इस मस्जिद को देश में बनी पहली मस्जिद माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें हिंदू आर्ट और आकिर्टेक्चर का प्रभाव नजर आता है।
जैन मंदिर यहां का धर्मनाथ जैन मंदिर 100 से भी पुराना है और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।
त्रिक्ककारा मंदिर कोचीन से 10 किलोमीटर दूर बने इस मंदिर की शान ओणम के त्योहार के दौरान देखते ही बनती है। यहां भगवान विष्णु को वामन के रूप में पूजा जाता है।
क्या करें बोट राइड इर्नाकुलम को फोर्ट कोचीन और मेट्टनचेरी से अलग करने वाली बैकवॉटर लाइन पर आपको तमाम छोटे व मध्यम साइज के आइलैंड मिलेंगे। यह राइड आपको एक अलग तरह का यादगार अनुभव देगी।
बीच वॉक सुबह और शाम को यहां की सुकून भरी बीच वॉक का एक अलग ही मजा है।
आयुर्वेद मसाज छुट्टियों में यहां की आयुर्वेद मसाज करवा कर आप निश्चित रूप से तरोताजा हो जाएंगे।
जाने का बेहतरीन समय : अक्टूबर से मार्च
क्या देखें
चाइनीज फिशिंग नेट्स ये खासतौर पर कोचीन में ही यूज होती हैं। माना जाता है कि चीन के शासक कुबलई खान के दौर के व्यापारी इन्हें यहां लाए थे। दिलचस्प बात यह है कि ये नेट्स बस कोचीन में ही मिलती हैं और चीन में नहीं। फोर्ट कोचीन और वायपीन के आसपास के पूरे क्षेत्र में इनका जाल देखा जा सकता है।
फोर्ट कोचीन बीच सूर्यास्त के समय इन बीचों पर टहलना और दूर से जहाजों को देखना एक यादगार अनुभव रहेगा। बीच के किनारे कई यूरोपियन स्टाइल के बंगले भी देखे जा सकते हैं। साथ ही, यहां ताजी मछली से बनी कई डिशेज का स्वाद भी चखा जा सकता है।
वास्को हाउस रोस स्ट्रीट पर बना वास्को हाउस देश के सबसे पुराने पुर्तगाली हाउसेज में से एक है और माना जाता है कि वास्को डि गामा यहां रहे थे।
डच पैलेस इसे डचों ने बनवाया था और 17वीं शताब्दी में उन्होंने इसमें कुछ बदलाव कर इसे कोचीन के राजा को दे दिया था। यहां रामायण और महाभारत से जुड़ीं तमाम पेंटिंग्स देखी जा सकती हैं।
बोलगट्टी पैलेस मेनलैंड से थोड़ी देर की बोट राइड पर बोलगट्टी आइलैंड पर स्थित है यह पैलेस, जिसे फिलहाल केरल टूरिज्म के होटल में बदल दिया गया है। गोल्फ कोर्स और बेहतरीन नजारों वाला यह पैलेस एक पॉप्युलर पिकनिक स्पॉट है।
हिल पैलेस 19वीं सदी के कोचीन के राजा द्वारा बनवाए गए इस महल को फिलहाल एक म्यूजियम में बदल दिया गया है, जहां शाही परिवार की तमाम चीजों को रखा गया है।
पल्लिपुरम यह बेहद पुराने यूरोपियन फोर्ट्स में से एक है, जिन्हें पुर्तगालों ने 1503 में बनवाया था।
मंगलवन बर्ड सेंचुरी शहर के मध्य में बनी इस सेंचुरी में पक्षियों की कई प्रजातियों को देखा जा सकता है।
केरल म्यूजियम केरल के कल्चर, इतिहास, पेंटिंग्स, मशहूर हस्तियों के बारे में जानने के लिए यह म्यूजियम बेस्ट जगह है।
चेरई बीच तैराकी का मजा देने वाला यह बीच मेनलैंड से हटकर व्यपीन नाम के छोटे आइलैंड के पास है।
मरीन ड्राइव बैकवॉटर की वजह से बना यह कोस्टल पाथवे दोपहर और शाम का वक्त बिताने के लिए बेस्ट है। यहां नावों, टैंकर्स, पैसिंजर बोट्स फिशिंग बोट्स के नजारे खूब देखे जा सकते हैं।
एलिफेंट सेंचुरी दुनिया में अपनी तरह की अनूठी से सेंचुरी में आप हाथियों को करीब से देखने व जानने का मौका आपको मिलेगा। यह गुरुवयूर मंदिर के पास स्थित है।
धामिर्क स्थल
सेंट फ्रांसेस चर्च यूरोपियंस द्वारा बनवाया गया यह देश का सबसे पुराना चर्च है। अपनी तीसरी विजिट के दौरान बीमार होने से वास्को डि गामा का मृत्यु केरल में हुई थी और तब उन्हें इसी चर्च में दफनाया गया था।
गुरुवयूर यहां के इस मशहूर श्री कृष्णा टेंपल में हर साल 10 मिलियन से भी ज्यादा तीर्थ यात्री आती हैं। कहा जाता है कि जातिवाद से हटकर सभी के लिए अपनी द्वार खोलने वाला यह पहला मंदिर है।
ज्यू सायनागॉज डच पैलेस के पास 1568 में बनी यह बिल्डिंग चाइनीज और बेल्जियन चीजों से सजी है, जहां कोचीन के पुराने समय को सहज ही महसूस किया जा सकता है।
त्रिचूर केरल की कल्चरल कैपिटल कहलाने वाले त्रिचूर में भगवान शिव को समर्पित एक शानदार मंदिर है।
सैंटा क्रूज बेसिलिका फोर्ट कोचीन में बनी इस चर्च को पहले 1505 में पुर्तगालों ने बनवाया था और 1558 में इसे केथेड्रेल का नाम दिया गया। ब्रिटिश शासकों ने इसे 1795 में नष्ट कर दिया था। मौजूदा स्वरूप 1905 का बना है, जिसे बेसिलिका का स्टेटस पाप जॉन पॉल 2 ने 1984 में दिया था।
चेरामन मस्जिद लगभग 629 एडी में बनी इस मस्जिद को देश में बनी पहली मस्जिद माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि इसमें हिंदू आर्ट और आकिर्टेक्चर का प्रभाव नजर आता है।
जैन मंदिर यहां का धर्मनाथ जैन मंदिर 100 से भी पुराना है और जैन धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल है।
त्रिक्ककारा मंदिर कोचीन से 10 किलोमीटर दूर बने इस मंदिर की शान ओणम के त्योहार के दौरान देखते ही बनती है। यहां भगवान विष्णु को वामन के रूप में पूजा जाता है।
क्या करें बोट राइड इर्नाकुलम को फोर्ट कोचीन और मेट्टनचेरी से अलग करने वाली बैकवॉटर लाइन पर आपको तमाम छोटे व मध्यम साइज के आइलैंड मिलेंगे। यह राइड आपको एक अलग तरह का यादगार अनुभव देगी।
बीच वॉक सुबह और शाम को यहां की सुकून भरी बीच वॉक का एक अलग ही मजा है।
आयुर्वेद मसाज छुट्टियों में यहां की आयुर्वेद मसाज करवा कर आप निश्चित रूप से तरोताजा हो जाएंगे।
जाने का बेहतरीन समय : अक्टूबर से मार्च
कहां रुकें: ठहरने के लिए यहां आपको तमाम बड़े और बजट होटल मिल जाएंगे। फिर यहां ट्रीहाउस और हाउस बोट में ठहरने की व्यवस्था भी है, जो आपको एक अलग रोमांच देगी।
कैसे घूमें: कोचीन का लोकल बस नेटवर्क अच्छा है और आराम से उस पर घूम सकते हैं। इसके अलावा, थोड़ी दूरी को ऑटोरिक्शा के जरिए पूरा किया जा सकता है, तो लंबी दूर के लिए टैक्सी लेना ठीक रहेगा।
कैसे पहुंचे: कोचीन हवाई, रेल और सड़क मार्ग से तमाम शहरों से जुड़ा है, इसलिए यहां पहुंचने में आपको खास परेशानी नहीं होगी।
साभार : मेधा चावला बतरा
कैसे घूमें: कोचीन का लोकल बस नेटवर्क अच्छा है और आराम से उस पर घूम सकते हैं। इसके अलावा, थोड़ी दूरी को ऑटोरिक्शा के जरिए पूरा किया जा सकता है, तो लंबी दूर के लिए टैक्सी लेना ठीक रहेगा।
कैसे पहुंचे: कोचीन हवाई, रेल और सड़क मार्ग से तमाम शहरों से जुड़ा है, इसलिए यहां पहुंचने में आपको खास परेशानी नहीं होगी।
साभार : मेधा चावला बतरा
त्योहार
जिंदगी के रास्तों पर सजी दुकानों से हो गए हैं।
समान से लेकर दुकान तक
सबकुछ बिकाऊ है यहां।
बेमानी सी लगती हैं त्योहारों की ये दुकानें।
बेमानी सी लगती हैं त्योहारों की ये दुकानें।
खुशियों से लेकर परम्पराओं तक
सबकुछ सेल में सजा है।
पैसों से चंद मिनटों में सबकुछ खरीद लेने की
कुछ जिदों के आगे
फिलहाल मेरे एहसासों की जेबें खाली है ।
शालिनी राय तारीख २६ सितम्बर 2009
Labels: कविता
त्योहारी सीजन में हमारे यहां चांदी के सिक्के देने का काफी प्रचलन है। मगर इस बार आपको गिफ्ट के तौर पर अगर 'चांदी के नोट' मिलें, तो हैरान न हों। गिफ्ट बाजार में बदलाव लाने के प्रयास में सोना-चांदी का कारोबार करने वाली कंपनियों ने इस बार चांदी के सिक्कों के साथ चांदी के नोट बाजार में पेश करने का फैसला किया है। इसका आगाज सरकारी कंपनी एमएमटीसी ने किया है।
चांदी के नोट 20, 50 और 100 रुपये के शेप के बनाए गए हैं। इसमें असली नोटों की तुलना में बस अंतर यह है कि इसमें आराध्य देवी-देवताओं की तस्वीर बनी हुई हैं। फिलहाल चांदी के नोटों को 20 से लेकर 100 ग्राम की रेंज में बनाया गया है। इनकी कीमत 700 से 3800 रुपये रखी गई है।
एमएमटीसी के अधिकारियों का कहना है कि इस बार सोने-चांदी के जितने गिफ्ट आइटम बाजार में पेश किए गए हैं, उनमें सबसे अधिक डिमांड चांदी के नोटों की है। लोग काफी दिलचस्पी के साथ इसकी खरीदारी कर रहे हैं। बेशक प्राइस रेंज में यह चांदी की सिक्कों की तुलना में कुछ ज्यादा है, मगर लुक और साइज के लिहाज से यह सिक्कों से ज्यादा बड़ी है। यही कारण है कि इसकी लागत बढ़ जाती है।
चांदी के नोटों में लोगों की रुचि को देखते हुए जूलर्स ने इसको कम प्राइस रेंज में बाजार में उतारने का मन बनाया है। अगले कुछ दिनों में 5 से 10 ग्राम के चांदी के नोट भी बाजार में उतारने की योजना बनाई गई है। कमोडिटी बाजार की सर्वे एजंसी विनायक इंक के प्रमुख विजय सिंह का कहना है कि भारतीय ग्राहक भी अब हर चीज में बदलाव चाहते हैं। एक लंबे समय से सिक्कों का प्रचलन त्योहारी सीजन में रहा है। चांदी या सोने की खरीदारी की त्योहारी सीजन में परंपरा रही है। सिक्कों की जगह अगर चांदी के नोट बाजार में आ रहे हैं, तो बदलाव के तौर पर इसका स्वागत होना तय है।
कारोबारियों का कहना है कि चांदी के नोटों की कीमतों में और कमी आ सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसमें चांदी की कितनी शुद्धता होती है। आम तौर पर चांदी-999 के रेंज को पूर्ण शुद्ध माना जाता है। इसमें चांदी की शुद्धता 91 पर्सेंट की होती है। लोगों में चांदी के नोटों के प्रति दिलचस्पी को देखते हुए आम आदमी तक चांदी के नोट पहुंचाने के लिए इसकी शुद्धता को थोड़ा कम करके इसकी कीमत को भी कम किया जा सकता है।
चांदी के नोट 20, 50 और 100 रुपये के शेप के बनाए गए हैं। इसमें असली नोटों की तुलना में बस अंतर यह है कि इसमें आराध्य देवी-देवताओं की तस्वीर बनी हुई हैं। फिलहाल चांदी के नोटों को 20 से लेकर 100 ग्राम की रेंज में बनाया गया है। इनकी कीमत 700 से 3800 रुपये रखी गई है।
एमएमटीसी के अधिकारियों का कहना है कि इस बार सोने-चांदी के जितने गिफ्ट आइटम बाजार में पेश किए गए हैं, उनमें सबसे अधिक डिमांड चांदी के नोटों की है। लोग काफी दिलचस्पी के साथ इसकी खरीदारी कर रहे हैं। बेशक प्राइस रेंज में यह चांदी की सिक्कों की तुलना में कुछ ज्यादा है, मगर लुक और साइज के लिहाज से यह सिक्कों से ज्यादा बड़ी है। यही कारण है कि इसकी लागत बढ़ जाती है।
चांदी के नोटों में लोगों की रुचि को देखते हुए जूलर्स ने इसको कम प्राइस रेंज में बाजार में उतारने का मन बनाया है। अगले कुछ दिनों में 5 से 10 ग्राम के चांदी के नोट भी बाजार में उतारने की योजना बनाई गई है। कमोडिटी बाजार की सर्वे एजंसी विनायक इंक के प्रमुख विजय सिंह का कहना है कि भारतीय ग्राहक भी अब हर चीज में बदलाव चाहते हैं। एक लंबे समय से सिक्कों का प्रचलन त्योहारी सीजन में रहा है। चांदी या सोने की खरीदारी की त्योहारी सीजन में परंपरा रही है। सिक्कों की जगह अगर चांदी के नोट बाजार में आ रहे हैं, तो बदलाव के तौर पर इसका स्वागत होना तय है।
कारोबारियों का कहना है कि चांदी के नोटों की कीमतों में और कमी आ सकती है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि इसमें चांदी की कितनी शुद्धता होती है। आम तौर पर चांदी-999 के रेंज को पूर्ण शुद्ध माना जाता है। इसमें चांदी की शुद्धता 91 पर्सेंट की होती है। लोगों में चांदी के नोटों के प्रति दिलचस्पी को देखते हुए आम आदमी तक चांदी के नोट पहुंचाने के लिए इसकी शुद्धता को थोड़ा कम करके इसकी कीमत को भी कम किया जा सकता है।
क्या आप भी अपने बढ़ते वजन से परेशान हैं? अगर हां, तो यह खबर आपके काम की है। एक नई ग्रीन कॉफी बनाने वालों रिसर्चरों ने दावा किया है कि इसको ब्रेकफास्ट से पहले पीने पर डाइट चार्ट में बिना कोई बदलाव किए ही एक महीने में 2 किलोग्राम तक वजन कम किया जा सकता है।
रिसर्चरों का दावा है कि रोज हरी कॉफी पीने से अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा पाया जा सकता है। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि हरी कॉफी का क्लोरोजेनिक एसिड आहार नली में शुगर के अवशोषण को घटाता है और फैट के खत्म होने की प्रक्रिया को तेज करता है। वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में पाया कि जिन्होंने रोज़ एक कप हरी कॉफी पी, उनका दो सप्ताह में वजन करीब डेढ़ किलो और एक महीने में दो किलो कम हो गया।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने वैज्ञिनक लॉरेंट फ्रेसनेल के हवाले से कहा, 'कॉफी हरी चाय के समान है। इसके कच्चे और बिना भुने स्वरूप में मौजूद तत्व पाचन बढ़ाते हैं और वजन कम करने में मदद करते हैं। दुर्भाग्य से यह तत्व भूनने के दौरान नष्ट हो जाते हैं इसलिए नियमित तौर पर पी जाने वाली कॉफी में नहीं मिलते।' शोध के परिणाम जरनल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में छपे हैं।
रिसर्चरों का दावा है कि रोज हरी कॉफी पीने से अतिरिक्त चर्बी से छुटकारा पाया जा सकता है। रिसर्च में वैज्ञानिकों ने पाया है कि हरी कॉफी का क्लोरोजेनिक एसिड आहार नली में शुगर के अवशोषण को घटाता है और फैट के खत्म होने की प्रक्रिया को तेज करता है। वैज्ञानिकों ने अपनी स्टडी में पाया कि जिन्होंने रोज़ एक कप हरी कॉफी पी, उनका दो सप्ताह में वजन करीब डेढ़ किलो और एक महीने में दो किलो कम हो गया।
ब्रिटिश अखबार डेली मेल ने वैज्ञिनक लॉरेंट फ्रेसनेल के हवाले से कहा, 'कॉफी हरी चाय के समान है। इसके कच्चे और बिना भुने स्वरूप में मौजूद तत्व पाचन बढ़ाते हैं और वजन कम करने में मदद करते हैं। दुर्भाग्य से यह तत्व भूनने के दौरान नष्ट हो जाते हैं इसलिए नियमित तौर पर पी जाने वाली कॉफी में नहीं मिलते।' शोध के परिणाम जरनल ऑफ क्लिनिकल न्यूट्रिशन में छपे हैं।
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उन कतरनों को सहेजने की कोशिश, जो इतिहास बनाने की कूबत रखते हैं।
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Mohalla Live11 years ago
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जय श्रीराम12 years ago
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