ऐसे लोगों की कमी नहीं है, जिन्हें ऑफिस में बैठे हुए भी उबासी आती रहती है। अक्सर लोग इस परेशानी को दूर करने के लिए कॉफी के सिप लेते हैं, लेकिन यह परमानंट सल्यूशन नहीं है। यहां कॉफी की चुस्कियां खत्म हुई नहीं कि उधर दोबारा उबासी आनी शुरू हो जाती है। खास बात यह है कि अब पहले से ज्यादा नींद आने लगती है। साथ ही बार-बार कॉफी पीने से बॉडी के डिहाइड्रेशन सिस्टम पर भी इफेक्ट पड़ता है। थोड़ी-बहुत देर की बात अलग है, लेकिन कॉफी के सहारे आप पूरे दिन नींद से छुटकारा नहीं पा सकते।
अवॉइड स्वीट अगर आप नींद की झपकी से बचना चाहते हैं, तो किसी भी तरह की मिठाइयों से दूर रहें। सिंपल कार्बोहाइड्रेट वाले शुगर जैसे फूड हमारी बॉडी बड़ी तेजी से एब्जॉर्व किए जाते हैं। बॉडी में अचानक शुगर जाने से एनर्जी लेवल में भी बढ़ोतरी महसूस होती है, लेकिन शुगर से डील करने के लिए इंसुलिन रिलीस करनी पड़ती है। इसी वजह से हम थकान महसूस करते हैं। भले ही शुगर से एनर्जी लेवल बढ़ जाता है, लेकिन रिसर्च में सामने आया है कि नींद की परेशानी दूर करने के लिए यह बेहतर तरीका नहीं है। साथ ही ज्यादा शुगर वाले 'हेल्थ' ड्रिंक भी अवॉइड करने चाहिए।
बनिए वॉटर बेबी अगर दिन के वक्त नींद आ रही है, तो इसकी वजह बॉडी का डिहाइड्रेट होना होती है। इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीएं, ताकि बॉडी को हाइड्रेट रखा जा सके।
कुछ खाइए अगर आपको भूख लगी है, तो उस वक्त फ्रूट प्लेट आपके बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है। फलों में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिस वजह से शुगर के मुकाबले इन्हें खाने के बाद आपको ज्यादा देर तक भूख नहीं लगेगी। साथ ही बॉडी में कम कैलोरी जाएगी। अगर आप चाहें, तो मुट्ठी भर ड्राईफ्रूट भी खा सकते हैं, जिनसे बॉडी को काफी प्रोटीन मिलता है। काजू, बादाम और अखरोट का मिक्सचर आइडियल है।
लेकिन कम खाइये अगर आप हैवी फूड लेते हैं, तो आपको नींद की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हैवी मील के बाद उसे पचाने के लिए आपके पेट को ब्लड फ्लो बढ़ाना पड़ता है। इस वजह से दिमाग तक कम ब्लड पहुंच पाता है और नींद आने लगती है। इसलिए एक बार में ज्यादा खाने की बजाय अपने खाने का छोटे-छोटे चार या पांच हिस्सों में बांटिए। हालांकि इसके लिए अपनी डाइट में चेंज करने की जरूरत नहीं है। कोशिश कीजिए कि ज्यादा प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेट लें। जैसे कि अगर आप लंच में तीन रोटी खाते हैं, तो एक कम करके उसकी बजाय ज्यादा सब्जी खाएं। अगर आप चावल खाते हैं, तो उसमें ज्यादा दाल मिलाएं। मेन परपज आपके हैवी मील को तोड़कर स्मॉल मील बनाना है। ध्यान रखें कि अगर रात को आप अच्छी तरह नहीं सो पाएं हैं, तो भी दिन में एसिडिटी और नींद आने की परेशानी हो सकती है। इसलिए खाने-पीने का ध्यान रखें।
अवॉइड स्वीट अगर आप नींद की झपकी से बचना चाहते हैं, तो किसी भी तरह की मिठाइयों से दूर रहें। सिंपल कार्बोहाइड्रेट वाले शुगर जैसे फूड हमारी बॉडी बड़ी तेजी से एब्जॉर्व किए जाते हैं। बॉडी में अचानक शुगर जाने से एनर्जी लेवल में भी बढ़ोतरी महसूस होती है, लेकिन शुगर से डील करने के लिए इंसुलिन रिलीस करनी पड़ती है। इसी वजह से हम थकान महसूस करते हैं। भले ही शुगर से एनर्जी लेवल बढ़ जाता है, लेकिन रिसर्च में सामने आया है कि नींद की परेशानी दूर करने के लिए यह बेहतर तरीका नहीं है। साथ ही ज्यादा शुगर वाले 'हेल्थ' ड्रिंक भी अवॉइड करने चाहिए।
बनिए वॉटर बेबी अगर दिन के वक्त नींद आ रही है, तो इसकी वजह बॉडी का डिहाइड्रेट होना होती है। इसलिए हमेशा ध्यान रखें कि रोजाना कम से कम आठ गिलास पानी जरूर पीएं, ताकि बॉडी को हाइड्रेट रखा जा सके।
कुछ खाइए अगर आपको भूख लगी है, तो उस वक्त फ्रूट प्लेट आपके बेहतरीन ऑप्शन हो सकती है। फलों में कार्बोहाइड्रेट होता है, जिस वजह से शुगर के मुकाबले इन्हें खाने के बाद आपको ज्यादा देर तक भूख नहीं लगेगी। साथ ही बॉडी में कम कैलोरी जाएगी। अगर आप चाहें, तो मुट्ठी भर ड्राईफ्रूट भी खा सकते हैं, जिनसे बॉडी को काफी प्रोटीन मिलता है। काजू, बादाम और अखरोट का मिक्सचर आइडियल है।
लेकिन कम खाइये अगर आप हैवी फूड लेते हैं, तो आपको नींद की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि हैवी मील के बाद उसे पचाने के लिए आपके पेट को ब्लड फ्लो बढ़ाना पड़ता है। इस वजह से दिमाग तक कम ब्लड पहुंच पाता है और नींद आने लगती है। इसलिए एक बार में ज्यादा खाने की बजाय अपने खाने का छोटे-छोटे चार या पांच हिस्सों में बांटिए। हालांकि इसके लिए अपनी डाइट में चेंज करने की जरूरत नहीं है। कोशिश कीजिए कि ज्यादा प्रोटीन और कम कार्बोहाइड्रेट लें। जैसे कि अगर आप लंच में तीन रोटी खाते हैं, तो एक कम करके उसकी बजाय ज्यादा सब्जी खाएं। अगर आप चावल खाते हैं, तो उसमें ज्यादा दाल मिलाएं। मेन परपज आपके हैवी मील को तोड़कर स्मॉल मील बनाना है। ध्यान रखें कि अगर रात को आप अच्छी तरह नहीं सो पाएं हैं, तो भी दिन में एसिडिटी और नींद आने की परेशानी हो सकती है। इसलिए खाने-पीने का ध्यान रखें।
कर चुकाने से बचा नहीं जा सकता है और इसका भुगतान करना हमारी सामाजिक जिम्मेदारी है। पर आप मेहनत की गाढ़ी कमाई बचा सकते हैं और अतिरिक्त कर का भुगतान करने से बच सकते हैं। हर व्यक्ति कर छूट क्लेम करना चाहता है और इसमें कोई संदेह नहीं है कि कर चुकाते वक्त पैसा बचाना सभी की वित्तीय प्राथमिकताओं की सूची में शीर्ष पर होता है। लेकिन आय कर कानून की जटिलताओं पर गौर करने के बाद कितने ऐसे लोग होंगे जो इन छूट के बारे में वास्तव में जानकारी रखते हों या उनका पूरा फायदा उठाते हों। निश्चित रूप से आप इनमें से कुछ को नजरअंदाज कर बैठे हों। आइए, कर छूट का फायदा देने वाले ऐसे कुछ बिंदुओं पर गौर करें जिन्हें आम तौर पर नजरअंदाज किया जाता है-
होम स्वीट होम आपका मकान केवल सिर ढकने के लिए छत ही नहीं देता बल्कि कर से बचने का रास्ता भी मुहैया कराता है। अगर आप किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं और वेतनभोगी हैं तो हाउस रेंट एलाउंस क्लेम कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो आप कुल आमदनी के 10 फीसदी से ज्यादा बतौर किराए चुकाने पर कर छूट क्लेम कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में कुछ शर्तें होती हैं।
अगर आप अपने मकान में रहते हैं तो किसी भी वित्तीय संस्थान से मिलने वाले लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट ले सकते हैं। कई लोग इस रकम को केवल 150000 रुपये तक सीमित मान लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसा प्रॉपर्टी के निजी इस्तेमाल के मामले में होता है और जहां मामला प्रॉपर्टी किराए पर देने की बात होती है, उसमें ऐसा नहीं होता।
परोपकार का फायदा दान पर भी कर छूट मिलती है। अगर हम उन्हें चेक के माध्यम ये भुगतान करते हैं तो ज्यादा लंबे वक्त तक याद रखते हैं लेकिन अगर नकद दान देते हैं तो कुछ ही वक्त में भुला बैठते हैं। यह जरूरी है कि धर्मार्थ दान देते वक्त अपनी भी मदद की जाए। कहा भी जाता है कि चैरिटी सबसे पहले घर से शुरू होती है। हमें सिर्फ इतना करना है कि कर छूट के तहत आने वाले दान में दिए गए पैसे की रसीद भर चाहिए। और हमें वह जगह नहीं भूलनी चाहिए जहां ऐसी रसीद रखी जाती हैं।
शिक्षा आज कर शिक्षा का खर्च आसमान छू रहा है जिससे वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। इस सिलसिले में आप अपने पुत्र या पत्नी की उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं और ऐसे लोन पर दिया जाने वाला ब्याज का भुगतान आपको कर छूट उपलब्ध कराएगा।
सेहत ही धन है मेडिकल इंश्योरेंस पर भी कर छूट मिलती है। हालांकि यह 15000 रुपये जैसी छोटी रकम पर मिलती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। मां-बाप के लिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। इसके अलावा अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति के मेडिकल खर्च का बोझ उठाया है, जो आप पर निर्भर है तो आपको 40000 से लेकर 75000 रुपये तक की रकम पर छूट मिल सकती है।
दूसरे बिंदू जीवन बीमा प्रीमियम, डेफर्ड एन्युटी, प्रॉविडेंट फंड में जमा पैसे, ट्यूशन फीस, हाउस लोन कर छूट के एक लाख रुपये के दायरे में आते हैं।
होम स्वीट होम आपका मकान केवल सिर ढकने के लिए छत ही नहीं देता बल्कि कर से बचने का रास्ता भी मुहैया कराता है। अगर आप किराए के अपार्टमेंट में रहते हैं और वेतनभोगी हैं तो हाउस रेंट एलाउंस क्लेम कर सकते हैं। अगर ऐसा नहीं है तो आप कुल आमदनी के 10 फीसदी से ज्यादा बतौर किराए चुकाने पर कर छूट क्लेम कर सकते हैं। हालांकि इस मामले में कुछ शर्तें होती हैं।
अगर आप अपने मकान में रहते हैं तो किसी भी वित्तीय संस्थान से मिलने वाले लोन पर चुकाए गए ब्याज पर कर छूट ले सकते हैं। कई लोग इस रकम को केवल 150000 रुपये तक सीमित मान लेते हैं। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐसा प्रॉपर्टी के निजी इस्तेमाल के मामले में होता है और जहां मामला प्रॉपर्टी किराए पर देने की बात होती है, उसमें ऐसा नहीं होता।
परोपकार का फायदा दान पर भी कर छूट मिलती है। अगर हम उन्हें चेक के माध्यम ये भुगतान करते हैं तो ज्यादा लंबे वक्त तक याद रखते हैं लेकिन अगर नकद दान देते हैं तो कुछ ही वक्त में भुला बैठते हैं। यह जरूरी है कि धर्मार्थ दान देते वक्त अपनी भी मदद की जाए। कहा भी जाता है कि चैरिटी सबसे पहले घर से शुरू होती है। हमें सिर्फ इतना करना है कि कर छूट के तहत आने वाले दान में दिए गए पैसे की रसीद भर चाहिए। और हमें वह जगह नहीं भूलनी चाहिए जहां ऐसी रसीद रखी जाती हैं।
शिक्षा आज कर शिक्षा का खर्च आसमान छू रहा है जिससे वित्तीय बोझ भी बढ़ रहा है। इस सिलसिले में आप अपने पुत्र या पत्नी की उच्च शिक्षा के लिए लोन ले सकते हैं और ऐसे लोन पर दिया जाने वाला ब्याज का भुगतान आपको कर छूट उपलब्ध कराएगा।
सेहत ही धन है मेडिकल इंश्योरेंस पर भी कर छूट मिलती है। हालांकि यह 15000 रुपये जैसी छोटी रकम पर मिलती है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना सही नहीं है। मां-बाप के लिए मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम पर 15000 रुपये की अतिरिक्त छूट मिलती है। इसके अलावा अगर आपने किसी ऐसे व्यक्ति के मेडिकल खर्च का बोझ उठाया है, जो आप पर निर्भर है तो आपको 40000 से लेकर 75000 रुपये तक की रकम पर छूट मिल सकती है।
दूसरे बिंदू जीवन बीमा प्रीमियम, डेफर्ड एन्युटी, प्रॉविडेंट फंड में जमा पैसे, ट्यूशन फीस, हाउस लोन कर छूट के एक लाख रुपये के दायरे में आते हैं।
टाटा टेलिसर्विसेज ने मोबाइल सेवा क्षेत्र में 1 सितंबर 2009 यानी मंगलवार को ऐसी घंटी बजा दी , जिसे 'क्रांतिकारी' और 'खेल की तस्वीर बदलने' वाला करार दिया जा रहा है। कंपनी ने टेलिफोन कॉल के लिए शुल्क वसूलने के पारंपरिक तरीके, पल्स सिस्टम को छोड़ने का फैसला किया है। इसके बजाय वह अपने ग्राहकों से प्रति कॉल आधार पर फीस वसूलेगी। वैसे यहां आपको यह बता दें कि ऐसा दुनिया में संभवत: पहली बार किया जा रहा है। इसका मतलब यह हुआ कि टाटा टेलीसर्विसेज की कॉल पर प्रति मिनट आधार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा। केवल टाटा टेलीसर्विसेज के सीडीएमए ग्राहकों के लिए उपलब्ध इन अवधि मुक्त कॉल के मामले में स्थानीय कॉल के लिए 1 रुपये और हर एसटीडी कॉल के लिए 3 रुपये का भुगतान करना होगा।
आसान शब्दों में कहें, तो स्थानीय कॉल के लिए सिर्फ 1 रुपया चुकाना होगा, भले ग्राहक दो घंटे तक क्यों न बात करे। ठीक इसी तरह, किसी भी नेटवर्क पर की जाने वाली एसटीडी कॉल के लिए 3 रुपए देने होंगे, भले कॉल की मियाद कितनी भी क्यों न हो। कंपनी के एमडी अनिल सरदाना ने कहा, 'इसमें कुछ भी फांसने जैसा या कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं है। हम कभी अपने वादे से नहीं पलटे हैं और हमारे कारोबारी मॉडल में ग्राहकों का सम्मान और भरोसा जीतना शामिल है। टाटा समूह ऐसे ही काम करता है। भारतीय दूरसंचार ग्राहकों के लिए यह ऐतिहासिक किफायती कदम है।'
उन्होंने कहा, 'यह पेशकश स्थानीय और एसटीडी, दोनों तरह की कॉल के लिए है और यही बात इसे खास बनाती है। यही वजह है कि यह भारतीय दूरसंचार प्राइसिंग मॉडल को पूरी तरह बदलने का माद्दा रखता है।' किसी भी मोबाइल ऑपरेटर के पल्स और प्रति मिनट बिलिंग सिस्टम से अलग होने का भी यह पहला मामला है और टाटा के कार्यकारी अधिकारियों का कहना है कि यह अवधारणा दुनिया में अपनी तरह की पहली कोशिश है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में दूसरे ऑपरेटर भले खास घंटों (रात दस बजे के बाद या सप्ताहांत में) या फिर चुनिंदा फोन नम्बरों के बीच फ्री टॉक टाइम की सुविधा मुहैया कराते हैं, लेकिन किसी भी ऑपरेटर के पूरी तरह 'प्रति कॉल आधारित बिलिंग सिस्टम' अपनाने का यह पहला मामला है।
ग्राहकों की संख्या के आधार पर देश की छठी सबसे बड़ी सेल्युलर कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज सीडीएमए प्लेटफॉर्म में 3.8 लाख यूजर रखती है, जिनमें से 92 फीसदी प्री-पेड सेवा इस्तेमाल करते हैं। मौजूदा ग्राहक 96 रुपए का वन टाइम रिचार्ज वाउचर खरीदकर नई टैरिफ स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। जो ग्राहक इस नए टैरिफ ढांचे का विकल्प चुनेंगे, उनसे 1 रुपये प्रतिदिन का फ्लैट रेंटल वसूला जाएगा।
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वह जल्द ही अपने पोस्ट-पेड ग्राहकों के लिए भी इसी तरह की योजना शुरू करेंगे। प्रति कॉल के हिसाब से भुगतान करने की स्कीम कंपनी के जीएसएम ग्राहकों के लिए नहीं है। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल (जीएसएम) टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड पर कंपनी के करीब 50 लाख ग्राहक हैं।
आसान शब्दों में कहें, तो स्थानीय कॉल के लिए सिर्फ 1 रुपया चुकाना होगा, भले ग्राहक दो घंटे तक क्यों न बात करे। ठीक इसी तरह, किसी भी नेटवर्क पर की जाने वाली एसटीडी कॉल के लिए 3 रुपए देने होंगे, भले कॉल की मियाद कितनी भी क्यों न हो। कंपनी के एमडी अनिल सरदाना ने कहा, 'इसमें कुछ भी फांसने जैसा या कोई छिपा हुआ शुल्क नहीं है। हम कभी अपने वादे से नहीं पलटे हैं और हमारे कारोबारी मॉडल में ग्राहकों का सम्मान और भरोसा जीतना शामिल है। टाटा समूह ऐसे ही काम करता है। भारतीय दूरसंचार ग्राहकों के लिए यह ऐतिहासिक किफायती कदम है।'
उन्होंने कहा, 'यह पेशकश स्थानीय और एसटीडी, दोनों तरह की कॉल के लिए है और यही बात इसे खास बनाती है। यही वजह है कि यह भारतीय दूरसंचार प्राइसिंग मॉडल को पूरी तरह बदलने का माद्दा रखता है।' किसी भी मोबाइल ऑपरेटर के पल्स और प्रति मिनट बिलिंग सिस्टम से अलग होने का भी यह पहला मामला है और टाटा के कार्यकारी अधिकारियों का कहना है कि यह अवधारणा दुनिया में अपनी तरह की पहली कोशिश है। उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में दूसरे ऑपरेटर भले खास घंटों (रात दस बजे के बाद या सप्ताहांत में) या फिर चुनिंदा फोन नम्बरों के बीच फ्री टॉक टाइम की सुविधा मुहैया कराते हैं, लेकिन किसी भी ऑपरेटर के पूरी तरह 'प्रति कॉल आधारित बिलिंग सिस्टम' अपनाने का यह पहला मामला है।
ग्राहकों की संख्या के आधार पर देश की छठी सबसे बड़ी सेल्युलर कंपनी टाटा टेलीसर्विसेज सीडीएमए प्लेटफॉर्म में 3.8 लाख यूजर रखती है, जिनमें से 92 फीसदी प्री-पेड सेवा इस्तेमाल करते हैं। मौजूदा ग्राहक 96 रुपए का वन टाइम रिचार्ज वाउचर खरीदकर नई टैरिफ स्कीम का फायदा उठा सकते हैं। जो ग्राहक इस नए टैरिफ ढांचे का विकल्प चुनेंगे, उनसे 1 रुपये प्रतिदिन का फ्लैट रेंटल वसूला जाएगा।
कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि वह जल्द ही अपने पोस्ट-पेड ग्राहकों के लिए भी इसी तरह की योजना शुरू करेंगे। प्रति कॉल के हिसाब से भुगतान करने की स्कीम कंपनी के जीएसएम ग्राहकों के लिए नहीं है। ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल (जीएसएम) टेक्नोलॉजी स्टैंडर्ड पर कंपनी के करीब 50 लाख ग्राहक हैं।
शॉपिंग का चस्का तो सभी को होता है, लेकिन बिजी शेड्यूल के चलते बहुत से लोगों को मार्किट जाने का वक्त नहीं मिल पाता। इसी वजह से तमाम लोग ऑनलाइन शॉपिंग करने लगे हैं। बाजार तो फिर भी हफ्ते में एक दिन बंद रहता है, लेकिन नेट पर शॉपिंग सातों दिनों के 24 घंटों में किसी भी टाइम की जा सकती है। माउस के एक क्लिक से आप ट्रेन या एयरलाइंस के टिकट और किसी अनजान शहर में होटल बुक करवा सकते हैं, दोस्तों को बुके भेज सकते हैं या फैशनेबल आइटम खरीद सकते हैं। वैसे, शॉपिंग आप किसी भी चीज की करें, लेकिन इस मामले में सावधानी जरूर बरतें।
ऑनलाइन डीलर आजकल कोई भी किसी के नाम से ऑनलाइन शॉप सेटअप कर सकता है, इसीलिए नेट पर शॉपिंग से पहले ऑनलाइन डीलर का पता व फोन नंबर कंफर्म कर लें, ताकि बाद में आपको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। अगर किसी ई-मेल या पॉपअप मेसेज में आप से किसी तरह की फाइनैंशल इंफर्मेशन मांगी जाती है, तो इसे इग्नोर कर दें। कोई भी सामान खरीदने से पहले डीलर का ट्रैक रेकॉर्ड जरूर चेक करें। आपने जिन कंपनियों का नाम नहीं सुना है, उनसे सामान बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए।
क्वॉलिटी और कॉस्ट किसी भी सामान को ऑनलाइन खरीदने से पहले तमाम साइट्स चेक करें और इसके बाद ही डील फाइनल करें। बजट को ध्यान में रखते हुए सामान की कीमत के साथ डिलिवरी चार्ज भी जोड़ लें। कहीं ऐसा न हो कि सस्ते के चक्कर में आप महंगे के फेर में पड़ जाएं। और हां, किसी भी हालात में कैश बिल्कुल न भेजें।
क्रेडिट कार्ड से पेमंट अगर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान पेमंट आप क्रेडिट कार्ड से करते हैं, तो आपका ट्रांजेक्शन फेयर क्रेडिट बिलिंग एक्ट के तहत आ जाता है। इससे विवादित मामले निपटाने में काफी मदद मिलती है। कंस्यूमर प्रॉटेक्शन के लिहाज से भी यह निहायत जरूरी है।
पर्सनल इंफर्मेशन नहीं अगर आप किसी कंपनी की वेबसाइट पर विजिट करते हैं, तो हो सकता है कि आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर पॉपअप मेसेज आ जाए। इसमें खरीदार की पर्सनल इंफर्मेशन लेने के लिए बॉक्स बने होते हैं। मशहूर कंपनियां पॉपअप स्क्रीन से कोई जानकारी लेने में दिलचस्पी नहीं रखतीं। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए आप अपने कंप्यूटर पर पॉपअप ब्लॉकिंग सॉफ्टवेयर लोड कर सकते हैं।
डॉक्युमेंटेशन जरूरी ऑनलाइन ऑर्डर प्रॉसेस पूरा होने के बाद आपको या तो फाइनल कन्फर्मेशन पेज मिलता है या फिर ई-मेल के जरिए सूचना मिलती है। इसे प्रिंट करके संभाल कर रखना बहुत जरूरी है। किसी भी तरह की दिक्कत होने पर यह आपकी काफी मदद करेगी। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड स्टेटमंट को भी ध्यान से देखना बहुत जरूरी है, ताकि ऑनलाइन खरीदारी के बहाने आपकी स्टेटमंट में अनाप-शनाप चार्ज न जोड़ दिए जाएं।
टर्म्स ऑफ द डील अगर नेट से शॉपिंग के बाद आप किसी आइटम से संतुष्ट नहीं हैं, तो उसे रिटर्न करने के बाद आपको कितना रिफंड मिलेगा, यह जानना भी बहुत जरूरी है। यह पता लगाना भी आपकी समझदारी मानी जाएगी कि अगर आप कोई आइटम कंपनी को रिटर्न करते हैं, तो उसका शिपिंग चार्ज या री-स्टॉकिंग फीस का खर्च किसे भुगतना होगा। अगर सामान की डिलिवरी की कोई डेट फाइनल नहीं है, तो फेडरल ट्रेड कमिशन (एफटीसी) के नियम के अनुसार सामान की डिलिवरी ऑर्डर डेट के 30 दिन के अंतर तक हो जानी चाहिए।
ऑनलाइन डीलर आजकल कोई भी किसी के नाम से ऑनलाइन शॉप सेटअप कर सकता है, इसीलिए नेट पर शॉपिंग से पहले ऑनलाइन डीलर का पता व फोन नंबर कंफर्म कर लें, ताकि बाद में आपको किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। अगर किसी ई-मेल या पॉपअप मेसेज में आप से किसी तरह की फाइनैंशल इंफर्मेशन मांगी जाती है, तो इसे इग्नोर कर दें। कोई भी सामान खरीदने से पहले डीलर का ट्रैक रेकॉर्ड जरूर चेक करें। आपने जिन कंपनियों का नाम नहीं सुना है, उनसे सामान बिल्कुल नहीं खरीदना चाहिए।
क्वॉलिटी और कॉस्ट किसी भी सामान को ऑनलाइन खरीदने से पहले तमाम साइट्स चेक करें और इसके बाद ही डील फाइनल करें। बजट को ध्यान में रखते हुए सामान की कीमत के साथ डिलिवरी चार्ज भी जोड़ लें। कहीं ऐसा न हो कि सस्ते के चक्कर में आप महंगे के फेर में पड़ जाएं। और हां, किसी भी हालात में कैश बिल्कुल न भेजें।
क्रेडिट कार्ड से पेमंट अगर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान पेमंट आप क्रेडिट कार्ड से करते हैं, तो आपका ट्रांजेक्शन फेयर क्रेडिट बिलिंग एक्ट के तहत आ जाता है। इससे विवादित मामले निपटाने में काफी मदद मिलती है। कंस्यूमर प्रॉटेक्शन के लिहाज से भी यह निहायत जरूरी है।
पर्सनल इंफर्मेशन नहीं अगर आप किसी कंपनी की वेबसाइट पर विजिट करते हैं, तो हो सकता है कि आपकी कंप्यूटर स्क्रीन पर पॉपअप मेसेज आ जाए। इसमें खरीदार की पर्सनल इंफर्मेशन लेने के लिए बॉक्स बने होते हैं। मशहूर कंपनियां पॉपअप स्क्रीन से कोई जानकारी लेने में दिलचस्पी नहीं रखतीं। इस तरह की धोखाधड़ी से बचने के लिए आप अपने कंप्यूटर पर पॉपअप ब्लॉकिंग सॉफ्टवेयर लोड कर सकते हैं।
डॉक्युमेंटेशन जरूरी ऑनलाइन ऑर्डर प्रॉसेस पूरा होने के बाद आपको या तो फाइनल कन्फर्मेशन पेज मिलता है या फिर ई-मेल के जरिए सूचना मिलती है। इसे प्रिंट करके संभाल कर रखना बहुत जरूरी है। किसी भी तरह की दिक्कत होने पर यह आपकी काफी मदद करेगी। इसके साथ ही क्रेडिट कार्ड स्टेटमंट को भी ध्यान से देखना बहुत जरूरी है, ताकि ऑनलाइन खरीदारी के बहाने आपकी स्टेटमंट में अनाप-शनाप चार्ज न जोड़ दिए जाएं।
टर्म्स ऑफ द डील अगर नेट से शॉपिंग के बाद आप किसी आइटम से संतुष्ट नहीं हैं, तो उसे रिटर्न करने के बाद आपको कितना रिफंड मिलेगा, यह जानना भी बहुत जरूरी है। यह पता लगाना भी आपकी समझदारी मानी जाएगी कि अगर आप कोई आइटम कंपनी को रिटर्न करते हैं, तो उसका शिपिंग चार्ज या री-स्टॉकिंग फीस का खर्च किसे भुगतना होगा। अगर सामान की डिलिवरी की कोई डेट फाइनल नहीं है, तो फेडरल ट्रेड कमिशन (एफटीसी) के नियम के अनुसार सामान की डिलिवरी ऑर्डर डेट के 30 दिन के अंतर तक हो जानी चाहिए।
जो देखने में बहुत ही करीब लगता है उसी के बारे में सोचो तो फासला निकले....ये कही हुई लाइनें अपने आपमें अपने ही वजूद को हिलाने वाली है... ऐसा क्यों होता है....कि आप जिसको अपने सबसे करीब मानते है..वो ही आपसे सबसे दूरी पर होता है....आप जिससे दुनिया से बचाते हो वो ही आपको दुनिया के बीच लाकर खड़ा कर देता है....क्यो ऐसा होता है...जो भी हो ये बहुत दर्द देने वाला होता है...क्यों वो रिश्तें जिन्हें हम जितनी मजबूती से बाधंते है....वो उतनी ही आसानी से टोटने वाले होते है..क्यो रिश्तों के बीच दुनियादारी हमेशा भारी पड़ती है....कुछ काम कुछ सवाल हमेशा क्यो अधुरे से मन में रह जाते है...क्या वाकई रिश्ते इतने कमजोर और अनसुलझे से होते है...ये चन्द सवाल क्यों हमेशा दिलों दिमाग को झकझोर देने वाले होते है...
भारत में त्योहारों की इतनी समृद्घ परंपरा है कि एक धर्म के त्योहार को दूसरे धर्म के लोग भी खुशी-खुशी मनाते हैं, लेकिन दीवाली जैन और सिख धर्म में और भी कुछ परंपराओ के चलते बहुत उत्साह के साथ मनाया जाता है। आइये जानते हैं इससे जुड़े कुछ अहम तथ्य...
जैन धर्म में दीवाली - जैन धर्म में दीवाली को बड़ा महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी को 527 बीसी में दीवाली के दिन ही मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसके अलावा महावीर स्वामी के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी को भी इसी दिन कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जैन ग्रंथों के मुताबिक महावीर स्वामी ने दीवाली से पहली रात को आधी रात के वक्त आखिरी बार उपदेश दिया था। भगवान द्वारा दिए गए इस आखिरी उपदेश को 'उत्तराध्यान सूत्र' के नाम से जाना जाता है। उस वक्त वहां मौजूद लोगों ने भगवान को मोक्ष होने की खुशी में रोशनी की और खुशियां मनाई। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने निर्णय लिया कि महावीर स्वामी के ज्ञान को यहां जल रहे दीपकों के प्रकाश की तरह लोगों में फैलाया जाएगा। बस तभी से इस पर्व का नाम दीपावली या दीवाली पड़ गया। दीवाली को जैन धर्म में पर्यूषण पर्व के बाद सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। जैन धर्म में दीवाली को विशेष रूप से त्याग और तपस्या के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म के अनुयायी इस त्योहार को तीन दिनों तक एंजॉय किया जाता है। इन दिनों लोग भगवान महावीर के त्याग-तपस्या को याद करके उनके जैसा बनने की कामना करते हैं और उनके आखिरी उपदेश 'उत्तराध्यायन सूत्र' का पाठ करते हैं। खास दीवाली वाले दिन सुबह-सुबह सभी जैन मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भगवान के मोक्ष जाने की खुशी में सभी लोग अपने घरों और दुकानों को विभिन्न तरह लाइटों से सजाते हैं।
सिख धर्म में दीवाली - दीवाली वाले दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से मुक्ति मिली थी। मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी की बढ़ती शक्ति से घबरा कर उन्हें और उनके 52 साथियों को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया हुआ था। देश भर के लोगों द्वारा हरगोविंद सिंह जी को छोड़ने की अपील पर जहांगीर ने सन् 1619 ईसवीं में गुरु को दीवाली वाले दिन मुक्त किया था। कैद से मुक्त होते ही गुरु अमृतसर पहुंचे और वहां विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया। गुरु की माता ने सभी लोगों उनके रिहा होने की खुशी में मिठाई बांटी और चारों ओर दीप जलाए गए। इसी वजह से सिख धर्म में दीवाली को 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा अमृतसर के प्रसिद्घ स्वर्ण मंदिर की नींव सन् 1577 में दीवाली के दिन ही रखी गई थी। सिख धर्म में दीवाली के त्योहार को तीन दिन तक एंजॉय किया जाता है। दीवाली के दिन में अमृतसर में विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। इस दिन लोग सुबह-सुबह पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते हैं और स्वर्ण मंदिर के दर्शन करते हैं।
जैन धर्म में दीवाली - जैन धर्म में दीवाली को बड़ा महत्वपूर्ण त्योहार माना जाता है। जैन धर्म के चौबीसवें तीर्थकर महावीर स्वामी को 527 बीसी में दीवाली के दिन ही मोक्ष प्राप्त हुआ था। इसके अलावा महावीर स्वामी के प्रमुख गणधर गौतम स्वामी को भी इसी दिन कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। जैन ग्रंथों के मुताबिक महावीर स्वामी ने दीवाली से पहली रात को आधी रात के वक्त आखिरी बार उपदेश दिया था। भगवान द्वारा दिए गए इस आखिरी उपदेश को 'उत्तराध्यान सूत्र' के नाम से जाना जाता है। उस वक्त वहां मौजूद लोगों ने भगवान को मोक्ष होने की खुशी में रोशनी की और खुशियां मनाई। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने निर्णय लिया कि महावीर स्वामी के ज्ञान को यहां जल रहे दीपकों के प्रकाश की तरह लोगों में फैलाया जाएगा। बस तभी से इस पर्व का नाम दीपावली या दीवाली पड़ गया। दीवाली को जैन धर्म में पर्यूषण पर्व के बाद सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। जैन धर्म में दीवाली को विशेष रूप से त्याग और तपस्या के पर्व के रूप में मनाया जाता है। जैन धर्म के अनुयायी इस त्योहार को तीन दिनों तक एंजॉय किया जाता है। इन दिनों लोग भगवान महावीर के त्याग-तपस्या को याद करके उनके जैसा बनने की कामना करते हैं और उनके आखिरी उपदेश 'उत्तराध्यायन सूत्र' का पाठ करते हैं। खास दीवाली वाले दिन सुबह-सुबह सभी जैन मंदिरों में भगवान महावीर की विशेष पूजा का आयोजन किया जाता है। भगवान के मोक्ष जाने की खुशी में सभी लोग अपने घरों और दुकानों को विभिन्न तरह लाइटों से सजाते हैं।
सिख धर्म में दीवाली - दीवाली वाले दिन सिखों के छठे गुरु हरगोविंद सिंह जी को मुगल बादशाह जहांगीर की कैद से मुक्ति मिली थी। मुगल बादशाह जहांगीर ने गुरु हरगोविंद सिंह जी की बढ़ती शक्ति से घबरा कर उन्हें और उनके 52 साथियों को ग्वालियर के किले में बंदी बनाया हुआ था। देश भर के लोगों द्वारा हरगोविंद सिंह जी को छोड़ने की अपील पर जहांगीर ने सन् 1619 ईसवीं में गुरु को दीवाली वाले दिन मुक्त किया था। कैद से मुक्त होते ही गुरु अमृतसर पहुंचे और वहां विशेष प्रार्थना का आयोजन किया गया। गुरु की माता ने सभी लोगों उनके रिहा होने की खुशी में मिठाई बांटी और चारों ओर दीप जलाए गए। इसी वजह से सिख धर्म में दीवाली को 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाया जाता है। इसके अलावा अमृतसर के प्रसिद्घ स्वर्ण मंदिर की नींव सन् 1577 में दीवाली के दिन ही रखी गई थी। सिख धर्म में दीवाली के त्योहार को तीन दिन तक एंजॉय किया जाता है। दीवाली के दिन में अमृतसर में विशेष समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से लोग आते हैं। इस दिन लोग सुबह-सुबह पवित्र सरोवर में डुबकी लगाते हैं और स्वर्ण मंदिर के दर्शन करते हैं।
इलाज के लिए कर्ज लेने, जायदाद गिरवी रखने या पैसों के अभाव में इलाज नहीं करा पाने जैसी बातें आए दिन सामने आती हैं, जबकि थोड़ी सी जागरूकता से यह परेशानी दूर हो सकती है। इलाज के क्षेत्र में न सिर्फ पूरी बल्कि पार्शियली मदद के लिए भी कई संस्थाएं काम कर रही हैं।
उदाहरण के तौर पर न सिर्फ जीबी पंत, सफदरजंग और राममनोहर लोहिया अस्पतालों में गरीब मरीजों के हर तरह के टेस्ट पर सब्सिडी और फ्री ऑपरेशन की व्यवस्था है बल्कि मैक्स व नैशनल हार्ट इंस्टिट्यूट जैसे संस्थान में बीपीएल कोटे के तहत फ्री प्रॉसीजर करा सकते हैं। इतना ही नहीं, इलाज के खर्च के लिए पीएमओ, चीफ मिनिस्टर ऑफिस, विभिन्न मंत्रालयों और लोक कल्याण समिति जैसी संस्थाओं से भी संपर्क कर सकते हैं। जहां से इलाज का पूरा खर्च सीधे हॉस्पिटल को भेज दिया जाता है। हार्ट केयर फाउंडेशन 6 सितंबर को मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में आयोजित दिल का दरबार में ऐसी सुविधाओं के बारे में भी लोगों को जानकारी देगा।
फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने बताया कि जो लोग बीपीएल कैटिगरी में नहीं आते हैं, लेकिन महंगे इलाज का पूरा खर्च भी अफोर्ड नहीं कर सकते हैं, उनकी मदद के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। मसलन, आचार्य सुशील मुनी आश्रम, सी 599 डिफेंस कॉलोनी में सुबह 8 से 10 और शाम को 6 से 8 बजे तक करीब 50 पर्सेन्ट सब्सिडी पर हर तरह के ब्लड टेस्ट करा सकते हैं। हार्ट में लगाए जाने वाले स्टेंट बनाने वाली कंपनियां फाउंडेशन को बेयर मेटल स्टेंट 16-17 हजार में देने को तैयार हैं, जो मार्केट में 50-70 हजार रुपये का मिलता है। ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट 35 हजार का मिल रहा है जो मार्केट में 70 हजार से सवा लाख रुपये में आता है। मार्केट में 70 हजार रुपये में मिलने वाला पेस मेकर एनजीओ को 45 हजार में मिल रहा है। शॉक के लिए शरीर में इंप्लांट किया जाने वाला इलेक्ट्रिक डिवाइस मार्केट में साढ़े 4 लाख का मिलता है, लेकिन फाउंडेशन इसे ढाई लाख रुपये में उपलब्ध कराएगा।
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि कई बार ऐसा होता है कि मरीज के पास दवा और डिवाइस के लिए पैसे होते हैं, मगर गवर्नमेंट हॉस्पिटल में लंबी लाइन होती है और प्राइवेट हॉस्पिटल में प्रॉसीजर का खर्च वहन नहीं कर पाते, जिसके कारण इलाज में देरी हो जाती है और केस बिगड़ जाता है। ऐसे मामलों में प्राइवेट अस्पतालों से बात करके प्रॉसीजर फ्री कराया जा सकता है। अगर किसी को सरकारी अस्पताल में वक्त पर सर्जरी की डेट मिल गई है और डिवाइस के लिए पूरा पैसा नहीं है तो उसे सस्ती दर पर डिवाइस दिलाई जा सकती है। इस तरह की मदद के लिए फाउंडेशन के हेल्पलाइन नंबर- 9958771177 पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
फाउंडेशन के अध्यक्ष डॉ. के. के. अग्रवाल ने बताया कि जो लोग बीपीएल कैटिगरी में नहीं आते हैं, लेकिन महंगे इलाज का पूरा खर्च भी अफोर्ड नहीं कर सकते हैं, उनकी मदद के लिए भी कई पहल की जा रही हैं। मसलन, आचार्य सुशील मुनी आश्रम, सी 599 डिफेंस कॉलोनी में सुबह 8 से 10 और शाम को 6 से 8 बजे तक करीब 50 पर्सेन्ट सब्सिडी पर हर तरह के ब्लड टेस्ट करा सकते हैं। हार्ट में लगाए जाने वाले स्टेंट बनाने वाली कंपनियां फाउंडेशन को बेयर मेटल स्टेंट 16-17 हजार में देने को तैयार हैं, जो मार्केट में 50-70 हजार रुपये का मिलता है। ड्रग इल्यूटिंग स्टेंट 35 हजार का मिल रहा है जो मार्केट में 70 हजार से सवा लाख रुपये में आता है। मार्केट में 70 हजार रुपये में मिलने वाला पेस मेकर एनजीओ को 45 हजार में मिल रहा है। शॉक के लिए शरीर में इंप्लांट किया जाने वाला इलेक्ट्रिक डिवाइस मार्केट में साढ़े 4 लाख का मिलता है, लेकिन फाउंडेशन इसे ढाई लाख रुपये में उपलब्ध कराएगा।
डॉ. अग्रवाल का कहना है कि कई बार ऐसा होता है कि मरीज के पास दवा और डिवाइस के लिए पैसे होते हैं, मगर गवर्नमेंट हॉस्पिटल में लंबी लाइन होती है और प्राइवेट हॉस्पिटल में प्रॉसीजर का खर्च वहन नहीं कर पाते, जिसके कारण इलाज में देरी हो जाती है और केस बिगड़ जाता है। ऐसे मामलों में प्राइवेट अस्पतालों से बात करके प्रॉसीजर फ्री कराया जा सकता है। अगर किसी को सरकारी अस्पताल में वक्त पर सर्जरी की डेट मिल गई है और डिवाइस के लिए पूरा पैसा नहीं है तो उसे सस्ती दर पर डिवाइस दिलाई जा सकती है। इस तरह की मदद के लिए फाउंडेशन के हेल्पलाइन नंबर- 9958771177 पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
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उन कतरनों को सहेजने की कोशिश, जो इतिहास बनाने की कूबत रखते हैं।
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Mohalla Live11 years ago
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जय श्रीराम12 years ago
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