लोन कई तरह के होते है..हम पहले ही इस बारे में बात कर चुके है....आज हम पर्सनल लोन के बारे में बात कर रहे है....पसर्नल लोन क्या है...इसे लेने के टाइम किस बात का ध्यान रखना चाहिए...इससे और लोन से छुटकारा पाने के बारे में यहां हम आपको जानकारी दे रहे हैं।
संपत्तियों का इस्तेमाल करें- पर्सनल लोन कई तरह के होते हैं और इनकी शर्तें और स्त्रोत भी अलग-अलग होते हैं। अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन या सिग्नेचर लोन के लिए आमतौर पर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है क्योंकि इनमें देनदार के लिए जोखिम अधिक होता है। अगर आपने पर्सनल लोन लिया है और आपके पास घर, कार, जीवन बीमा पॉलिसी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), आरबीआई बॉन्ड, सोने के जेवर, बैंक एफडी, डिबेंचर और म्यूचुअल जैसी संपत्तियां मौजूद हैं तो आप इनका इस्तेमाल पर्सनल लोन से निजात पाने के लिए कर सकते हैं। अगर आप इन संपत्तियों के बदले बैंक से कर्ज लेते हैं तो ब्याज की दर कम होगी। इसके अलावा आपके पास कर्ज को एक साथ मिलाने का विकल्प भी मौजूद है। डेलॉइट इंडिया के डायरेक्टर (कंसल्टिंग), मोनीष शाह ने बताया, 'इसमें आपके सभी कर्ज एक लेनदार के पास मिला दिए जाते हैं और आपको केवल एक मासिक किस्त देनी होती है जो लंबी अवधि में आमतौर पर सस्ती पड़ती है।' इसके अलावा आप कर्ज कम करने के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आप क्रेडिट की अवधि का चतुराई से इस्तेमाल कर जिंदगी कुछ आसान बना सकते हैं। अगर आप वेतनभोगी हैं तो अपनी कंपनी से एडवांस लेकर भी कर्ज का बोझ कम किया जा सकता है, लेकिन ये दोनों विकल्प हमेशा काम नहीं आते। अगर आप होम लोन का भुगतान कर रहे हैं तो सस्ता कर्ज लेने का एक और जरिया मौजूदा कर्ज पर टॉप अप लोन लेने का है।
डिफॉल्ट से बचें- अगर आपने पर्सनल लोन की किस्त चुकाने में डिफॉल्ट किया है और यह आपकी पहली चूक है तो आपके लिए पहला कदम बैंक से बातचीत कर समाधान निकालने का होगा। प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के एसोसिएट डायरेक्टर रॉबिन रॉय का कहना है, 'अगर डिफॉल्ट के पीछे नौकरी का जाना या स्वास्थ्य से जुड़े कारण हैं तो बैंक आमतौर पर केवल लंबित रकम पर पेनल्टी लगाता है जो लगभग दो फीसदी की होती है।' इसके अलावा आपके पास लोन को सिक्योर्ड लोन (घर और कार जैसी संपत्तियों के बदले) में तब्दील कराने का विकल्प भी है। आप बैंक से बात कर सिक्योर्ड लोन ले सकते हैं और इसकी मासिक किस्त कम रखी जा सकती है। सिक्योर्ड लोन लेते समय इसकी अवधि और ब्याज दर पर जरूर ध्यान दें। फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि पर्सनल लोन को किसी अन्य कर्ज में तब्दील कराते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर आप इस कर्ज को लेकर डिफॉल्ट करते हैं तो आपकी संपत्ति बैंक जब्त कर सकता है और इसके बाद आपकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। रॉय का कहना है, 'आपको किसी आपात स्थिति या एकमुश्त रकम की जरूरत पड़ने पर परेशानी हो सकती है क्योंकि आपके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति नहीं बचेगी।' इसे देखते हुए सिक्योर्ड लोन लेना तभी समझदारी होगी जब आप अपनी मासिक आमदनी से इसकी किस्त का भुगतान करने की क्षमता रखते हों।
अंतिम रास्ता-
-पर्सनल फाइनेंस के जानकारों का कहना है कि पर्सनल लोन का विकल्प तभी इस्तेमाल करना चाहिए जब आपके पास संपत्तियां मौजूद न हों और आपके पास किस्त के भुगतान की क्षमता हो। बंगलुरु की श्री सिडविन फाइनेंशियल सर्विसेस एंड इनवेस्टमेंट के डायरेक्टर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी), बी श्रीनिवासन के अनुसार, 'पर्सनल लोन का जरिया आपात जरूरत के समय लघु अवधि के उपाय के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए।' पर्सनल लोन लेने वाले ज्यादातर लोग नौकरीपेशा होते हैं और उन्हें कर्ज की जरूरत के लिए सबसे पहले उस बैंक से संपर्क करना चाहिए जहां उनका वेतन क्रेडिट होता है। श्रीनिवासन ने कहा, 'बैंक के पास आपका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद होता है और वह आपको कर्ज देने में कुछ उदारता बरत सकता है।' फाइनेंशियल प्लानर्स मानते हैं कि पर्सनल लोन के मुकाबले क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने में ज्यादा जोखिम होता है। क्रेडिट कार्ड पर बहुत सा खर्च बिना जरूरत के भी किया जाता है और इससे आप पर कर्ज और ब्याज का बोझ काफी बढ़ सकता है। वेल्थकेयर सिक्योरिटीज के निदेशक मुकेश गुप्ता की सलाह है, 'क्रेडिट कार्ड पर उधार लेने के मुकाबले पर्सनल लोन सस्ता होता है। अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि काफी बढ़ गई है और इस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है तो आप इसे चुकाने के लिए पर्सनल लोन ले सकते हैं।'
ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल का इस्तेमाल करें - पर्सनल लोन की बेहतर डील के लिए आप अपनालोन और बैंकबाजार जैसे ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल पर जा सकते हैं। रॉय ने कहा, 'आपको ईएमआई और अन्य शुल्कों के आधार पर उस रकम की तुलना करनी चाहिए जो आप लोन की पूरी अवधि में चुकाएंगे। इसके अलावा आप ब्याज दर को लेकर बैंक से मोलभाव भी कर सकते हैं।' फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि पर्सनल लोन लेते समय फ्लैट ब्याज दरों के झांसे में नहीं आना चाहिए। बहुत से मामलों में यह सस्ती दर लग सकती है लेकिन बाद में यह काफी महंगी साबित होती है।
संपत्तियों का इस्तेमाल करें- पर्सनल लोन कई तरह के होते हैं और इनकी शर्तें और स्त्रोत भी अलग-अलग होते हैं। अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन या सिग्नेचर लोन के लिए आमतौर पर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है क्योंकि इनमें देनदार के लिए जोखिम अधिक होता है। अगर आपने पर्सनल लोन लिया है और आपके पास घर, कार, जीवन बीमा पॉलिसी, राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), आरबीआई बॉन्ड, सोने के जेवर, बैंक एफडी, डिबेंचर और म्यूचुअल जैसी संपत्तियां मौजूद हैं तो आप इनका इस्तेमाल पर्सनल लोन से निजात पाने के लिए कर सकते हैं। अगर आप इन संपत्तियों के बदले बैंक से कर्ज लेते हैं तो ब्याज की दर कम होगी। इसके अलावा आपके पास कर्ज को एक साथ मिलाने का विकल्प भी मौजूद है। डेलॉइट इंडिया के डायरेक्टर (कंसल्टिंग), मोनीष शाह ने बताया, 'इसमें आपके सभी कर्ज एक लेनदार के पास मिला दिए जाते हैं और आपको केवल एक मासिक किस्त देनी होती है जो लंबी अवधि में आमतौर पर सस्ती पड़ती है।' इसके अलावा आप कर्ज कम करने के लिए क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। आप क्रेडिट की अवधि का चतुराई से इस्तेमाल कर जिंदगी कुछ आसान बना सकते हैं। अगर आप वेतनभोगी हैं तो अपनी कंपनी से एडवांस लेकर भी कर्ज का बोझ कम किया जा सकता है, लेकिन ये दोनों विकल्प हमेशा काम नहीं आते। अगर आप होम लोन का भुगतान कर रहे हैं तो सस्ता कर्ज लेने का एक और जरिया मौजूदा कर्ज पर टॉप अप लोन लेने का है।
डिफॉल्ट से बचें- अगर आपने पर्सनल लोन की किस्त चुकाने में डिफॉल्ट किया है और यह आपकी पहली चूक है तो आपके लिए पहला कदम बैंक से बातचीत कर समाधान निकालने का होगा। प्राइसवॉटरहाउस कूपर्स (पीडब्ल्यूसी) के एसोसिएट डायरेक्टर रॉबिन रॉय का कहना है, 'अगर डिफॉल्ट के पीछे नौकरी का जाना या स्वास्थ्य से जुड़े कारण हैं तो बैंक आमतौर पर केवल लंबित रकम पर पेनल्टी लगाता है जो लगभग दो फीसदी की होती है।' इसके अलावा आपके पास लोन को सिक्योर्ड लोन (घर और कार जैसी संपत्तियों के बदले) में तब्दील कराने का विकल्प भी है। आप बैंक से बात कर सिक्योर्ड लोन ले सकते हैं और इसकी मासिक किस्त कम रखी जा सकती है। सिक्योर्ड लोन लेते समय इसकी अवधि और ब्याज दर पर जरूर ध्यान दें। फाइनेंशियल प्लानर्स का कहना है कि पर्सनल लोन को किसी अन्य कर्ज में तब्दील कराते समय यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि अगर आप इस कर्ज को लेकर डिफॉल्ट करते हैं तो आपकी संपत्ति बैंक जब्त कर सकता है और इसके बाद आपकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। रॉय का कहना है, 'आपको किसी आपात स्थिति या एकमुश्त रकम की जरूरत पड़ने पर परेशानी हो सकती है क्योंकि आपके पास गिरवी रखने के लिए संपत्ति नहीं बचेगी।' इसे देखते हुए सिक्योर्ड लोन लेना तभी समझदारी होगी जब आप अपनी मासिक आमदनी से इसकी किस्त का भुगतान करने की क्षमता रखते हों।
अंतिम रास्ता-
-पर्सनल फाइनेंस के जानकारों का कहना है कि पर्सनल लोन का विकल्प तभी इस्तेमाल करना चाहिए जब आपके पास संपत्तियां मौजूद न हों और आपके पास किस्त के भुगतान की क्षमता हो। बंगलुरु की श्री सिडविन फाइनेंशियल सर्विसेस एंड इनवेस्टमेंट के डायरेक्टर और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (सीएफपी), बी श्रीनिवासन के अनुसार, 'पर्सनल लोन का जरिया आपात जरूरत के समय लघु अवधि के उपाय के तौर पर इस्तेमाल करना चाहिए।' पर्सनल लोन लेने वाले ज्यादातर लोग नौकरीपेशा होते हैं और उन्हें कर्ज की जरूरत के लिए सबसे पहले उस बैंक से संपर्क करना चाहिए जहां उनका वेतन क्रेडिट होता है। श्रीनिवासन ने कहा, 'बैंक के पास आपका पिछला ट्रैक रिकॉर्ड मौजूद होता है और वह आपको कर्ज देने में कुछ उदारता बरत सकता है।' फाइनेंशियल प्लानर्स मानते हैं कि पर्सनल लोन के मुकाबले क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने में ज्यादा जोखिम होता है। क्रेडिट कार्ड पर बहुत सा खर्च बिना जरूरत के भी किया जाता है और इससे आप पर कर्ज और ब्याज का बोझ काफी बढ़ सकता है। वेल्थकेयर सिक्योरिटीज के निदेशक मुकेश गुप्ता की सलाह है, 'क्रेडिट कार्ड पर उधार लेने के मुकाबले पर्सनल लोन सस्ता होता है। अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर बकाया राशि काफी बढ़ गई है और इस पर ब्याज का बोझ भी बढ़ता जा रहा है तो आप इसे चुकाने के लिए पर्सनल लोन ले सकते हैं।'
ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल का इस्तेमाल करें - पर्सनल लोन की बेहतर डील के लिए आप अपनालोन और बैंकबाजार जैसे ऑनलाइन शॉपिंग पोर्टल पर जा सकते हैं। रॉय ने कहा, 'आपको ईएमआई और अन्य शुल्कों के आधार पर उस रकम की तुलना करनी चाहिए जो आप लोन की पूरी अवधि में चुकाएंगे। इसके अलावा आप ब्याज दर को लेकर बैंक से मोलभाव भी कर सकते हैं।' फाइनेंशियल एडवाइजर्स का कहना है कि पर्सनल लोन लेते समय फ्लैट ब्याज दरों के झांसे में नहीं आना चाहिए। बहुत से मामलों में यह सस्ती दर लग सकती है लेकिन बाद में यह काफी महंगी साबित होती है।
सुदूर उत्तर पूर्व राज्य मिजोरम के एक छोटे से समुदाय ने एक मिसाल कायम कर यह सिद्ध कर दिया है कि मानव एकता, संकल्प और अथक प्रयास से क्या कुछ नहीं किया जा सकता। भले ही यह मामला केवल एक मुट्ठीभर चावल से खाद्य बैंक बनाने का ही क्यों न हो। इस पहल की शुरुआत वैसे तो ब्रिटिश शासनकाल में शुरू की गई थी, लेकिन अपने सकारात्मक प्रभाव और लोकप्रियता के कारण आज मिजोरम में इसे सामुदायिक खाद्य बैंक के अभियान का नाम दिया गया है।
संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय के इस अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसके इतिहास की जानकारी देते हुए बताया बात वर्ष 1914 की है, जब राज्य में महिलाओं के एक समूह ने चर्च की सामाजिक सेवा में चंदा देने की अपनी असमर्थता को दूर करने के लिए एक अनूठी सूझबूझ दिखाई और अपने समूह के सभी सदस्यों से एक-एक मुट्ठी चावल एकत्र करना शुरू कर दिया।
इस प्रकार से जो चावल एकत्र हुआ, उसे स्थानीय बाजार में बेच दिया गया और जो कमाई हुई उसे चर्च में दान कर दिया। वर्ष 1914 में इस प्रकार से एकत्र किए गए चावलों को बेचकर केवल 80 रुपए इकट्ठा हुए थे और उसके 89 साल के बाद वर्ष 2003 के दौरान इसी प्रकार से एकत्र किए गए चावलों को बेचने पर चार लाख रुपए मिले।
अधिकारी ने बताया इस अभियान की लोकप्रियता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि आज मिजोरम के सभी परिवारों में से करीबन 86 प्रतिशत लोग इस अभियान में भाग ले रहे हैं और इसे कामयाब और यादगार बनाने में लगे हुए हैं। आज हर परिवार के पास एक दान पात्र है, जिसमें एक-एक मुट्ठी चावल एकत्र किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय ने इस अभियान में सामुदायिक भागीदारी से प्रभावित होकर सप्ताह में एक बार मुट्ठी भर चावल एकत्र करने की योजना बनाई और इस चावल की बिक्री से जमा की गई धनराशि से नशीली दवाओं के सेवन की आदी महिलाओं की सहायता की जाएगी।
यह कार्यक्रम मिजोरम के अजवाल, कोलासिन और चंफाई जिलों में संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय की क्षमता निर्माण और चेतना की समन्वित एचआईवी एड्स अनुक्रिया की परियोजना है, जो आज शहरी और देहाती दोनों इलाकों में चलाई जा रही है।
इस योजना के विस्तार कार्यक्रम के तहत अब तक 279 युवा महिलाओं को इस तरह से प्रशिक्षित किया गया है कि वे आगे चलकर लोगों को प्रशिक्षित कर सकें और सामुदायिक खाद्य बैंक के बारे में चेतना का प्रसार कर सकें। इसके परिणामस्वरूप 70 गाँवों से 147 क्विंटल चावल एकत्र किया गया और इसे बेचकर सभी कार्यकर्ताओं से मिलाकर कुल दो लाख रुपए की राशि जमा की गई। यह पूरी धनराशि अकाल के दौरान राहत का कार्य चलाने के लिए मिजोरम सरकार को भेंट की गई।
संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय के इस अभियान से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसके इतिहास की जानकारी देते हुए बताया बात वर्ष 1914 की है, जब राज्य में महिलाओं के एक समूह ने चर्च की सामाजिक सेवा में चंदा देने की अपनी असमर्थता को दूर करने के लिए एक अनूठी सूझबूझ दिखाई और अपने समूह के सभी सदस्यों से एक-एक मुट्ठी चावल एकत्र करना शुरू कर दिया।
इस प्रकार से जो चावल एकत्र हुआ, उसे स्थानीय बाजार में बेच दिया गया और जो कमाई हुई उसे चर्च में दान कर दिया। वर्ष 1914 में इस प्रकार से एकत्र किए गए चावलों को बेचकर केवल 80 रुपए इकट्ठा हुए थे और उसके 89 साल के बाद वर्ष 2003 के दौरान इसी प्रकार से एकत्र किए गए चावलों को बेचने पर चार लाख रुपए मिले।
अधिकारी ने बताया इस अभियान की लोकप्रियता का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि आज मिजोरम के सभी परिवारों में से करीबन 86 प्रतिशत लोग इस अभियान में भाग ले रहे हैं और इसे कामयाब और यादगार बनाने में लगे हुए हैं। आज हर परिवार के पास एक दान पात्र है, जिसमें एक-एक मुट्ठी चावल एकत्र किया जाता है।
संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय ने इस अभियान में सामुदायिक भागीदारी से प्रभावित होकर सप्ताह में एक बार मुट्ठी भर चावल एकत्र करने की योजना बनाई और इस चावल की बिक्री से जमा की गई धनराशि से नशीली दवाओं के सेवन की आदी महिलाओं की सहायता की जाएगी।
यह कार्यक्रम मिजोरम के अजवाल, कोलासिन और चंफाई जिलों में संयुक्त राष्ट्र नशा और अपराध कार्यालय की क्षमता निर्माण और चेतना की समन्वित एचआईवी एड्स अनुक्रिया की परियोजना है, जो आज शहरी और देहाती दोनों इलाकों में चलाई जा रही है।
इस योजना के विस्तार कार्यक्रम के तहत अब तक 279 युवा महिलाओं को इस तरह से प्रशिक्षित किया गया है कि वे आगे चलकर लोगों को प्रशिक्षित कर सकें और सामुदायिक खाद्य बैंक के बारे में चेतना का प्रसार कर सकें। इसके परिणामस्वरूप 70 गाँवों से 147 क्विंटल चावल एकत्र किया गया और इसे बेचकर सभी कार्यकर्ताओं से मिलाकर कुल दो लाख रुपए की राशि जमा की गई। यह पूरी धनराशि अकाल के दौरान राहत का कार्य चलाने के लिए मिजोरम सरकार को भेंट की गई।
तमाम डाइट बुक्स को देखकर डाइट के मामले में अच्छा-खासा कंफ्यूजन हो जाता है। एक किताब कहती है कि कार्बोहाइड्रेट्स लो, तो दूसरी कहती है कि इन्हें नहीं खाना चाहिए। जानते हैं, डाइट से जुड़े कुछ ऐसे ही सच-झूठ...
ये हैं झूठ फैट वाली कैलरीज आपको मोटा कर देती हैं, जबकि प्रोटीन के साथ ली गईं कैलरीज से वजन कम होता है। ऐसा कतई नहीं है और कैलरी लेने का मतलब कैलरी गेन करना ही होता है। हालांकि फैट के साथ ली गईं कैलरीज ज्यादा नुकसान करती हैं। दरअसल, एक ग्राम फैट लेने का अर्थ है नौ कैलरीज गेन करना। इस वजह से फैट वाली चीजें खाने से प्रोटीन वाली चीजों से वजन ज्यादा बढ़ता है।
कम लें डेरी प्रडक्ट्स - कम फैट वाले डेरी प्रडक्ट्स न सिर्फ आपकी जेब पर सस्ते पड़ेंगे, बल्कि आपको बेहतर न्यूट्रिशन भी देंगे। अगर लेक्टोस को लेकर आप संवेदनशील नहीं हैं, तो कम फैट वाले डेयरी प्रडक्ट्स आपके लिए बेस्ट हैं। स्टडीज बताती हैं कि जो महिलाएं डेरी फूड से ही कैल्शियम लेती हैं, बिना एक्सर्साइज किए दो साल में वे बॉडी वेट व फैट कम कर सकती हैं। वैसे, लो-फैट स्नैक्स के जरिए भी वजन कम किया जा सता है। हालांकि कई लो-फैट फूड में फ्लवेर पूरा न होने से उनमें एक्स्ट्रा शुगर मिला दी जाती है। यही वजह है लो-फैट और नॉर्मल फैट स्नैक्स में कैलरीज का अंतर बेहद कम मिलता है।
सलाद का फंडा अक्सर हमें लगता है कि सलाद खाने से हम एक्स्ट्रा कैलरीज लेने से बच जाएंगे। डाइटिंग के दौरान यह भले ही स्मार्ट ऑप्शन लगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। अमूमन डाइटिंग करने वाले को लगता है कि पत्तागोभी के बेस पर तैयार जो भी सलाद वह खा रहा है, उससे कैलरीज कम होंगी। लेकिन इस दौरान लोग यह भूल जाते हैं कि इस पर की गई ऑइली ड्रेसिंग से भी तो कैलरीज मिल रही हैं। फिर यह भी देखने वाली बात है कि सलाद में हरी सब्जियां वगैरह किस कॉम्बिनेशन व अमाउंट में रखी गई हैं। पत्ता गोभी खाने से कैलरीज बर्न होती हैं और ग्रेपफ्रूट व सेलरी के साथ भी ऐसा ही है। अगर सलाद में ये तीनों चीजें ही खाई जाएं, तो वजन पक्के तौर पर कम होगा। हालांकि ऐसा करना हमें बीमार भी कर सकता है, क्योंकि तब डाइट से प्रोटीन व फैट्स नदारद रहेंगे।
शुगर काउंट्स मोटापा ज्यादा चीनी लेने की वजह से होता है। वैसे, चीनी और फैट्स दोनों ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। मोटे होने की कॉमन वजहें ज्यादा खाना और एक्सर्साइज न करना है। ऐसे में कहा जाता है कि केला, अंगूर, गाजर व चुकंदर खाने से बचना चाहिए। जबकि सच यह है कि केले में 18 ग्राम शुगर व 70 कैलरीज, आधे कप अंगूर में 7 ग्राम शुगर व 110 कैलरीज, आधे कप गाजर में 5 ग्राम शुगर व 25 कैलरीज और इतने ही चुकंदर में 4.5 ग्राम शुगर व 35 कैलरीज होती हैं। इसके अलावा, इनमें फाइबर, कैरोटिनॉएड्स, पोटैशियम और फोलेट की भी खासी अमाउंट होती है।
ये हैं झूठ फैट वाली कैलरीज आपको मोटा कर देती हैं, जबकि प्रोटीन के साथ ली गईं कैलरीज से वजन कम होता है। ऐसा कतई नहीं है और कैलरी लेने का मतलब कैलरी गेन करना ही होता है। हालांकि फैट के साथ ली गईं कैलरीज ज्यादा नुकसान करती हैं। दरअसल, एक ग्राम फैट लेने का अर्थ है नौ कैलरीज गेन करना। इस वजह से फैट वाली चीजें खाने से प्रोटीन वाली चीजों से वजन ज्यादा बढ़ता है।
कम लें डेरी प्रडक्ट्स - कम फैट वाले डेरी प्रडक्ट्स न सिर्फ आपकी जेब पर सस्ते पड़ेंगे, बल्कि आपको बेहतर न्यूट्रिशन भी देंगे। अगर लेक्टोस को लेकर आप संवेदनशील नहीं हैं, तो कम फैट वाले डेयरी प्रडक्ट्स आपके लिए बेस्ट हैं। स्टडीज बताती हैं कि जो महिलाएं डेरी फूड से ही कैल्शियम लेती हैं, बिना एक्सर्साइज किए दो साल में वे बॉडी वेट व फैट कम कर सकती हैं। वैसे, लो-फैट स्नैक्स के जरिए भी वजन कम किया जा सता है। हालांकि कई लो-फैट फूड में फ्लवेर पूरा न होने से उनमें एक्स्ट्रा शुगर मिला दी जाती है। यही वजह है लो-फैट और नॉर्मल फैट स्नैक्स में कैलरीज का अंतर बेहद कम मिलता है।
सलाद का फंडा अक्सर हमें लगता है कि सलाद खाने से हम एक्स्ट्रा कैलरीज लेने से बच जाएंगे। डाइटिंग के दौरान यह भले ही स्मार्ट ऑप्शन लगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है। अमूमन डाइटिंग करने वाले को लगता है कि पत्तागोभी के बेस पर तैयार जो भी सलाद वह खा रहा है, उससे कैलरीज कम होंगी। लेकिन इस दौरान लोग यह भूल जाते हैं कि इस पर की गई ऑइली ड्रेसिंग से भी तो कैलरीज मिल रही हैं। फिर यह भी देखने वाली बात है कि सलाद में हरी सब्जियां वगैरह किस कॉम्बिनेशन व अमाउंट में रखी गई हैं। पत्ता गोभी खाने से कैलरीज बर्न होती हैं और ग्रेपफ्रूट व सेलरी के साथ भी ऐसा ही है। अगर सलाद में ये तीनों चीजें ही खाई जाएं, तो वजन पक्के तौर पर कम होगा। हालांकि ऐसा करना हमें बीमार भी कर सकता है, क्योंकि तब डाइट से प्रोटीन व फैट्स नदारद रहेंगे।
शुगर काउंट्स मोटापा ज्यादा चीनी लेने की वजह से होता है। वैसे, चीनी और फैट्स दोनों ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। मोटे होने की कॉमन वजहें ज्यादा खाना और एक्सर्साइज न करना है। ऐसे में कहा जाता है कि केला, अंगूर, गाजर व चुकंदर खाने से बचना चाहिए। जबकि सच यह है कि केले में 18 ग्राम शुगर व 70 कैलरीज, आधे कप अंगूर में 7 ग्राम शुगर व 110 कैलरीज, आधे कप गाजर में 5 ग्राम शुगर व 25 कैलरीज और इतने ही चुकंदर में 4.5 ग्राम शुगर व 35 कैलरीज होती हैं। इसके अलावा, इनमें फाइबर, कैरोटिनॉएड्स, पोटैशियम और फोलेट की भी खासी अमाउंट होती है।
अगर आप अभी से अपने दांतों का ख्याल रखें, तो भविष्य में महंगे डेंटल ट्रीटमंट नहीं लेने पड़ेंगे। इसके लिए जहां रेग्युलर तौर पर डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है, वहीं दांतों की देखभाल भी बेहद जरूरी है। अगर घर पर ही छोटी-छोटी बातों का ख्याल रखा जाए, तो आपकी मुस्कान हमेशा बनी रहेगी। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ टिप्स...
खूब पानी पीजिए । यह एक नेचरल माउथवॉश है, जो कॉफी, सोडा और रेड वाइन पीने के बाद मुंह में रह गए उनके अवशेषों का साफ कर देता है।
अपने खाने में ढेर सारे फल और सब्जियां शामिल करें। सेब, गाजर, खीरा, ककड़ी और अजवाइन जैसी चीजें आपके मुंह को नेचरली साफ रखती हैं। इन्हें खाने के दौरान दांतों के बीच अटकी गंदगी अपने आप साफ हो जाती है।
डिनर के बाद चीज का एक टुकड़ा खाएं। इससे आपके मुंह को जरूरी नेचरल एसिड मिलेंगे।
शुगर फ्री च्यूइंग गम चबाएं। इससे लार बनने की प्रक्रिया में तेजी आती है और दांतों के बीच फंसी गंदगी भी निकल जाती है।
एसिडिक ड्रिंक लेने के बाद कभी भी ब्रश करना ना भूलें, लेकिन ओरेंज जूस पीने के बाद कम से कम 20 मिनट तक ब्रश ना करें। इससे दांतों पर इलेमल का कवर चढ़ने में मदद मिलती है।
ब्रश करने के बाद दांतों को हाइड्रोजन परऑक्साइड मिले पानी से धोने से जहां बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं, वहीं दांतों पर सफेदी भी आ जाती है। लेकिन इसे पीना कतई नहीं चाहिए। चाहे तो कभी कभार बेकिंग सोडा से ब्रश किया जा सकता है।
पानी के अलावा और कुछ भी पीते हुए स्ट्रॉ का इस्तेमाल कीजिए। भले ही आपको कॉफी या रेड वाइन पीते हुए स्ट्रा इस्तेमाल करना अजीब लगे, लेकिन इस तरह से आप अपने प्यारे से सफेद दांतों और इन हानिकारक ड्रिंक के बीच डायरेक्ट कनेक्शन का अवॉइड कर सकते हैं। हमेशा सॉफ्ट टूथब्रश इस्तेमाल करें। अगर आपका टूथब्रश कड़ा हो गया है, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में डाल लें।
जीभ को साफ करना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ सांस की बदबू दूर करने में मदद मिलती है, बल्कि जीभ पर गंदगी की वजह से पैदा होने वाले बैक्टीरिया से भी बचाव किया जा सकता है। ज्यादातर डेंटल प्रफेशनल्स का मानना है कि रोजाना ब्रश नहीं करना और दांतों को सही तरीके से नहीं धोने की वजह से दांतों की तमाम बीमारियां होती हैं।
ज्यादा शुगर का इस्तेमाल करने से बचें। इससे बैक्टीरिया को पनपने में मदद मिलती है, जो दांतों को कमजोर करता है। मुट्ठी भर बिस्किट या एक टॉफी दोनों ही चीजें बैक्टीरिया को बराबर ताकत देती हैं। इसलिए फ्रेश फ्रूट, नट और गाजर जैसी चीजें खाने पर ध्यान दें, जिससे आपके दांतों को नुकसान ना पहुंचे।
रोजाना ब्रश करें और नियमित तौर पर डेटिंस्ट के पास दांत चेक कराते रहें। भले ही एक बार को आपको ऐसा लगेगा कि मेरा काफी खर्च हो रहा है, लेकिन इससे आप भविष्य में दांतों पर होने वाले बड़े खर्च से बच जाएंगे।
खूब पानी पीजिए । यह एक नेचरल माउथवॉश है, जो कॉफी, सोडा और रेड वाइन पीने के बाद मुंह में रह गए उनके अवशेषों का साफ कर देता है।
अपने खाने में ढेर सारे फल और सब्जियां शामिल करें। सेब, गाजर, खीरा, ककड़ी और अजवाइन जैसी चीजें आपके मुंह को नेचरली साफ रखती हैं। इन्हें खाने के दौरान दांतों के बीच अटकी गंदगी अपने आप साफ हो जाती है।
डिनर के बाद चीज का एक टुकड़ा खाएं। इससे आपके मुंह को जरूरी नेचरल एसिड मिलेंगे।
शुगर फ्री च्यूइंग गम चबाएं। इससे लार बनने की प्रक्रिया में तेजी आती है और दांतों के बीच फंसी गंदगी भी निकल जाती है।
एसिडिक ड्रिंक लेने के बाद कभी भी ब्रश करना ना भूलें, लेकिन ओरेंज जूस पीने के बाद कम से कम 20 मिनट तक ब्रश ना करें। इससे दांतों पर इलेमल का कवर चढ़ने में मदद मिलती है।
ब्रश करने के बाद दांतों को हाइड्रोजन परऑक्साइड मिले पानी से धोने से जहां बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं, वहीं दांतों पर सफेदी भी आ जाती है। लेकिन इसे पीना कतई नहीं चाहिए। चाहे तो कभी कभार बेकिंग सोडा से ब्रश किया जा सकता है।
पानी के अलावा और कुछ भी पीते हुए स्ट्रॉ का इस्तेमाल कीजिए। भले ही आपको कॉफी या रेड वाइन पीते हुए स्ट्रा इस्तेमाल करना अजीब लगे, लेकिन इस तरह से आप अपने प्यारे से सफेद दांतों और इन हानिकारक ड्रिंक के बीच डायरेक्ट कनेक्शन का अवॉइड कर सकते हैं। हमेशा सॉफ्ट टूथब्रश इस्तेमाल करें। अगर आपका टूथब्रश कड़ा हो गया है, तो उसे इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में डाल लें।
जीभ को साफ करना बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ सांस की बदबू दूर करने में मदद मिलती है, बल्कि जीभ पर गंदगी की वजह से पैदा होने वाले बैक्टीरिया से भी बचाव किया जा सकता है। ज्यादातर डेंटल प्रफेशनल्स का मानना है कि रोजाना ब्रश नहीं करना और दांतों को सही तरीके से नहीं धोने की वजह से दांतों की तमाम बीमारियां होती हैं।
ज्यादा शुगर का इस्तेमाल करने से बचें। इससे बैक्टीरिया को पनपने में मदद मिलती है, जो दांतों को कमजोर करता है। मुट्ठी भर बिस्किट या एक टॉफी दोनों ही चीजें बैक्टीरिया को बराबर ताकत देती हैं। इसलिए फ्रेश फ्रूट, नट और गाजर जैसी चीजें खाने पर ध्यान दें, जिससे आपके दांतों को नुकसान ना पहुंचे।
रोजाना ब्रश करें और नियमित तौर पर डेटिंस्ट के पास दांत चेक कराते रहें। भले ही एक बार को आपको ऐसा लगेगा कि मेरा काफी खर्च हो रहा है, लेकिन इससे आप भविष्य में दांतों पर होने वाले बड़े खर्च से बच जाएंगे।
पेट्रोलियम मंत्रालय अगले 5 सालों में रसोई गैस के करीब 5 करोड़ नए कनेक्शन देने जा रहा है। इसके लिए बड़ी संख्या में नए रसोई गैस डिस्ट्रीब्यूटरशिप दिए जाएंगे। यह डिस्ट्रीब्यूटरशिप आम आदमी, यानी आपको भी मिल सकती है। खास बात यह है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने में युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। इस बारे में संबंधित नीति-नियमों में बदलाव कर उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार सरकार को नए एलजीपी डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की योजना का खुलासा अगस्त के अंतिम माह में किया जाना था। मगर यूपीए सरकार के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों के कई सीनियर नेताओं ने इसके प्रारूप पर सवाल उठाया। कई नेताओं ने पेट्रोलियम राज्यमंत्री जतिन प्रसाद, जो इस प्रोजेक्ट को देख रहे हैं, उनको पत्र लिखकर साफ तौर पर कहा कि रसोई गैस की कालाबाजारी को अगर रोकनी है, तो बेहतर होगा कि रसोई गैस के नए वितरक नौजवानों और स्थानीय लोगों को बनाया जाएगा। जिनके पास मौजूदा समय में डिस्ट्रीब्यूटरशिप है, उनको और उनके संबंधियों को इसे न दिया जाए। डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की प्रक्रिया को पारदशीर् बनाया जाए, ताकि लोगों को पता चल सके कि इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन बातों को मान लिया है। अब नए सिरे से इसके लिए नीति-नियम बनाए गए हैं। संभावना है कि नए डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदन मंगाने की घोषणा इस माह सितंबर में कर दी जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बार रसोई गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप का आकार छोटा रखा जाएगा। एक डिस्ट्रीब्यूटर पर 1000 से ज्यादा रसोई गैस सिलिंडरों की सप्लाई का भार नहीं डाला जाएगा। सप्लाई की संख्या कम होगी तो कम जगह और इनवेस्टमेंट की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में, आम आदमी के लिए डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदन देने में परेशानी नहीं होगी।
रसोई गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप शहरों के साथ-साथ गांवों में भी बढ़ाई जाएगी। तेल कंपनियों की एक्सपर्ट कमिटी इस बारे में सवेर् कर रही है कि किन-किन जगहों पर नए डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की जरूरत है। फिलहाल एक हजार स्थानों की पहचान कर ली गई है। आवेदन करने वालों की पहले मार्किंग की जाएगी और बाद में लॉटरी द्वारा लकी विजेताओं के नामों की घोषणा की जाएगी। लकी ड्रॉ लोगों के सामने निकाला जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा का कहना है कि हम चाहते हैं कि रसोई गैस ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास पहुंचे। हम शहरों के गरीब लोगों के लिए एक और घोषणा करने वाले हैं। जो लोग राशन की दुकानों में केरोसिन लेते हैं, अगर वे रसोई गैस का कनेक्शन लेंगे, तो उन्हें तेल कंपनियों की तरफ से चूल्हा मुफ्त में दिया जाएगा।
इधर उत्तर प्रदेश के सांसद संजय सिंह चौहान का कहना है कि हमने जतिन प्रसाद को पत्र लिखकर कहा है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप लकी ड्रॉ के जरिए मत दें। आवेदन की जांच का जिम्मा एक्सपर्ट कमिटी को दे दें और उन्हीं को अंतिम फैसला करने दें। उम्मीद है कि उनकी यह बात भी मान ली जाएगी।
सूत्रों के अनुसार सरकार को नए एलजीपी डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की योजना का खुलासा अगस्त के अंतिम माह में किया जाना था। मगर यूपीए सरकार के साथ-साथ विपक्षी पार्टियों के कई सीनियर नेताओं ने इसके प्रारूप पर सवाल उठाया। कई नेताओं ने पेट्रोलियम राज्यमंत्री जतिन प्रसाद, जो इस प्रोजेक्ट को देख रहे हैं, उनको पत्र लिखकर साफ तौर पर कहा कि रसोई गैस की कालाबाजारी को अगर रोकनी है, तो बेहतर होगा कि रसोई गैस के नए वितरक नौजवानों और स्थानीय लोगों को बनाया जाएगा। जिनके पास मौजूदा समय में डिस्ट्रीब्यूटरशिप है, उनको और उनके संबंधियों को इसे न दिया जाए। डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की प्रक्रिया को पारदशीर् बनाया जाए, ताकि लोगों को पता चल सके कि इसमें किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं की गई है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने इन बातों को मान लिया है। अब नए सिरे से इसके लिए नीति-नियम बनाए गए हैं। संभावना है कि नए डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदन मंगाने की घोषणा इस माह सितंबर में कर दी जाएगी। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बार रसोई गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप का आकार छोटा रखा जाएगा। एक डिस्ट्रीब्यूटर पर 1000 से ज्यादा रसोई गैस सिलिंडरों की सप्लाई का भार नहीं डाला जाएगा। सप्लाई की संख्या कम होगी तो कम जगह और इनवेस्टमेंट की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में, आम आदमी के लिए डिस्ट्रीब्यूटरशिप के लिए आवेदन देने में परेशानी नहीं होगी।
रसोई गैस की डिस्ट्रीब्यूटरशिप शहरों के साथ-साथ गांवों में भी बढ़ाई जाएगी। तेल कंपनियों की एक्सपर्ट कमिटी इस बारे में सवेर् कर रही है कि किन-किन जगहों पर नए डिस्ट्रीब्यूटरशिप देने की जरूरत है। फिलहाल एक हजार स्थानों की पहचान कर ली गई है। आवेदन करने वालों की पहले मार्किंग की जाएगी और बाद में लॉटरी द्वारा लकी विजेताओं के नामों की घोषणा की जाएगी। लकी ड्रॉ लोगों के सामने निकाला जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्री मुरली देवड़ा का कहना है कि हम चाहते हैं कि रसोई गैस ज्यादा से ज्यादा लोगों के पास पहुंचे। हम शहरों के गरीब लोगों के लिए एक और घोषणा करने वाले हैं। जो लोग राशन की दुकानों में केरोसिन लेते हैं, अगर वे रसोई गैस का कनेक्शन लेंगे, तो उन्हें तेल कंपनियों की तरफ से चूल्हा मुफ्त में दिया जाएगा।
इधर उत्तर प्रदेश के सांसद संजय सिंह चौहान का कहना है कि हमने जतिन प्रसाद को पत्र लिखकर कहा है कि डिस्ट्रीब्यूटरशिप लकी ड्रॉ के जरिए मत दें। आवेदन की जांच का जिम्मा एक्सपर्ट कमिटी को दे दें और उन्हीं को अंतिम फैसला करने दें। उम्मीद है कि उनकी यह बात भी मान ली जाएगी।
आप रोजाना अपनी किचन में घंटों बिताती हैं। लेकिन क्या आप जानती हैं कि वहां कई ऐसी खुशबूदार चीजें हैं, जो आपके मूड को फ्रेश रखती हैं? परफ्यूमिस्ट किरण रंगा बता रही हैं आपकी किचन में मौजूद खुशबूदार चीजों के बारे में-
सेब राज सुबह एक सेब जरूर खाएं। यह आपकी सेहत के लिए फायदेमंद होने इसकी खुशबू भी आपके मूड को फ्रेश बनाती है। वैसे संतरे, अंगूर व नीबू की खट्टी स्मेल भी माइंड को रिफ्रेश करती है। सुबह एक गिलास पानी में इन फ्रूट्स की एक स्लाइस डालकर पीएं। भीनी-भीनी खुशबू वाला यह पानी आपको नई ताजगी से भर देगा।
अदरक अगर आप अच्छा फील नहीं कर रहे हैं या थके हैं या फिर तनाव में हैं और इससे बाहर आने के लिए आपको एनर्जी चाहिए, तो अदरक का एक टुकड़ा चूसें। ज्यादा गर्मी की वजह से उबकाई या जी मिचलने की समस्या होने पर भी अदरक फायदेमंद है। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा। डाइजेस्टिव प्रॉब्लम होने पर आप लेमन टी में अदरक डालकर पीएं।
तुलसी तनाव को दूर करने में तुलसी खासी मददगार है। इसके अलावा, यह ध्यान और याददाश्त भी तेज करती है। टमैटो सैंडविच में तुलसी के पत्ते डालने से आप फ्रेश महसूस करेंगे।
दालचीनी दालचीनी की तेज गंध सभी को बहुत अच्छी लगती है। चाय बनाते समय तुलसी के साथ दालचीनी डाल कर पीएं। इसकी तेज खुशबू से आपको एनर्जी मिलेगी।
कॉफी बीन्स इस बात से सभी वाकिफ हैं कि अरोमा आपको फ्रेश करने के साथ थकान भी दूर करता है। अगर आप कुछ डिफरेंट फ्रेगनेंस ट्राई करना चाहते हैं, तो कॉफी बीन्स बहुत अच्छा ऑप्शन है। इनकी खुशबू से आपको एनर्जी मिलेगी। इसके अलावा, प्याज की स्मेल से सिर में दर्द होने पर तुरंत कॉफी की खुशबू सूंघे। आपको अच्छा फील होगा।
चाय अगर आपका मूड ठीक नहीं है, तो आप एक कप चाय पीकर उसे ठीक कर सकते हैं। अक्सर लोग पार्टी वगैरह में ओवर ईटिंग कर लेते हैं। ऐसी सिचुएशन में आप एक कप ग्रीन टी पीना फायदेमंद रहेगा। इससे आपको तुरंत आराम मिलेगा और आप रिलैक्स फील करेंगे।
छोटी इलायची छोटी इलायची में मौजूद टरपाइनल एसिटेट और सिनेऑल जैसे तत्वों के कारण इसमें मीठापन व तीखी स्मैल आती है। ये स्मैल आपके माइंड को उत्तेजित करती है। वैसे भी, आपने देखा होगा कि आपकी नाक गर्म बिरयानी की खुशबू तुरंत भांप लेती है। दरअसल, छोटी इलायची की खुशबू आपके माइंड को अलर्ट करती है।
लौंग लौंग में इयूजेनॉल और इयुजनाइल तत्व होते हैं, तो हमारे माइंड को उत्तेजित करने के साथ एनर्जी भी देते हैं। यही वजह है कि लौंग कोल्ड, फ्लू व थकान में बहुत फायदेमंद है। अगर आपकी नाक में खून जम गया है, तो आप थोड़ी मात्रा में लौंग खा लें। इससे आपको आराम मिलेगा। इसके अलावा, दांत दर्द में लौंग का तेल बेहद फायदेमंद होता है।
अक्सर देखने में आता है कि लोग बच्चों की हेल्थ की वजह से पेट्स को पालने से इनकार कर देते हैं, लेकिन हाल ही में आई एक स्टडी के मुताबिक पेट्स का साथ बच्चों की हेल्थ के लिए अच्छा होता है।
अभी तक घर में पेट्स पालने वाले इसी बात को लेकर परेशान रहते थे कि इससे उनके बच्चे की हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। लेकिन इस स्टडी ने उनके तमाम कंफ्यूजन दूर कर दिए हैं। इस स्टडी में घर में पेट्स होने से बच्चों की हेल्थ पर होने वाले तमाम इफेक्ट्स का अध्ययन किया गया है।
पशु प्रेमियों के लिए इस स्टडी में अच्छी खबर यह है कि घर में पेट्स रखने से बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। अगर आप छह साल की उम्र तक के किसी डॉगी को अपने घर में रखते हैं, तो उसके कॉन्टैक्ट में आने वाले बच्चे को फीवर और अस्थमा होने की शिकायत कम होती है। इसी तरह कम उम्र के बिल्ली के कॉन्टैक्ट में रहने से बच्चों को ग्रास पोलन एलर्जी होने के चांस कम हो जाते हैं। रिसर्च में पालतू जानवरों को बच्चों के लिए फायदेमंद बताने के लिए गांवों में रहने वाले लोगों के बच्चों पर उनका इफेक्ट बताया गया है। सभी जानते हैं कि किसानों के बच्चे रोजाना अपने घरों में रहने वाले पालतू जानवरों के संपर्क में आते हैं। बचपन से जानवरों के संपर्क में आने से उन बच्चों का इम्यून सिस्टम इतना मजबूत हो जाता है कि उन्हें अस्थमा और फीवर जैसी बीमारियां नहीं होती। इससे साबित होता है कि जानवरों का साथ बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत करता है।
तो उम्मीद है कि अगली बार जब आपको किसी पेट्स को घर लाने का मौका मिलेगा, तो आप सिर्फ बच्चों की हेल्थ की वजह से उन्हें इनकार नहीं करेंगे।
अभी तक घर में पेट्स पालने वाले इसी बात को लेकर परेशान रहते थे कि इससे उनके बच्चे की हेल्थ पर खराब असर पड़ सकता है। लेकिन इस स्टडी ने उनके तमाम कंफ्यूजन दूर कर दिए हैं। इस स्टडी में घर में पेट्स होने से बच्चों की हेल्थ पर होने वाले तमाम इफेक्ट्स का अध्ययन किया गया है।
पशु प्रेमियों के लिए इस स्टडी में अच्छी खबर यह है कि घर में पेट्स रखने से बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। अगर आप छह साल की उम्र तक के किसी डॉगी को अपने घर में रखते हैं, तो उसके कॉन्टैक्ट में आने वाले बच्चे को फीवर और अस्थमा होने की शिकायत कम होती है। इसी तरह कम उम्र के बिल्ली के कॉन्टैक्ट में रहने से बच्चों को ग्रास पोलन एलर्जी होने के चांस कम हो जाते हैं। रिसर्च में पालतू जानवरों को बच्चों के लिए फायदेमंद बताने के लिए गांवों में रहने वाले लोगों के बच्चों पर उनका इफेक्ट बताया गया है। सभी जानते हैं कि किसानों के बच्चे रोजाना अपने घरों में रहने वाले पालतू जानवरों के संपर्क में आते हैं। बचपन से जानवरों के संपर्क में आने से उन बच्चों का इम्यून सिस्टम इतना मजबूत हो जाता है कि उन्हें अस्थमा और फीवर जैसी बीमारियां नहीं होती। इससे साबित होता है कि जानवरों का साथ बच्चों का इम्यून सिस्टम मजबूत करता है।
तो उम्मीद है कि अगली बार जब आपको किसी पेट्स को घर लाने का मौका मिलेगा, तो आप सिर्फ बच्चों की हेल्थ की वजह से उन्हें इनकार नहीं करेंगे।
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साथी
उन कतरनों को सहेजने की कोशिश, जो इतिहास बनाने की कूबत रखते हैं।
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Mohalla Live11 years ago
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जय श्रीराम12 years ago
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